: करतलिया बाबा भजनाश्रम में विराजमान प्राचीन भूनेश्वर महादेव का हुआ अभिषेक-पूजन
Fri, Jul 25, 2025
करतलिया बाबा भजनाश्रम में विराजमान प्राचीन भूनेश्वर महादेव का हुआ अभिषेक-पूजनसावन की पवित्र शिवरात्रि पर करतलिया पीठाधीश्वर ने पंचामृत, फलों का जूस, सुगंधित सर्व औषधियों आदि से भूनेश्वर महादेव का किया भव्य अभिषेकभोलेबाबा अपने भक्तों पर कृपा करते हैं,सच्चे मन से उनकी आराधना करनी चाहिए: महंत बालयोगी रामदासअयोध्या। मां सरयू के पावन तट पर सुशोभित प्रसिद्ध पीठ करतलिया बाबा भजनाश्रम में विराजमान प्राचीन भूनेश्वर महादेव का अभिषेक-पूजन किया गया। मौका पवित्र श्रावण मास के पावन शुभ अवसर का है। जहां मठ में नित्य अभिषेक पूजन, झांकी, आरती का कार्यक्रम चल रहा है। जिसका सिलसिला ब्रह्म मुहूर्त से शुरु होकर देरशाम तक चलता है। प्राचीन भूनेश्वर महादेव का दर्शन करने के लिए मंदिर में शिवभक्तों का तांता लगा हुआ है। शिवभक्त प्रतिदिन भोलेबाबा का अभिषेक, जलाभिषेक कर रहे हैं। आश्रम में भूनेश्वर महादेव के अभिषेक-पूजन का सिलसिला पूरे सावन मास भर चलेगा। भगवान के अभिषेक पूजन से पूरा मंदिर प्रांगण आहलादित और आप्लावित है। जिसमें शिवभक्त भक्तिभाव की डुबकी लगा रहे हैं। आश्रम हर हर महादेव के जयकारों से गूंज रहा है। चहुंओर आस्था व श्रद्धा का उल्लास छाया हुआ है। करतलिया बाबा भजनाश्रम के पीठाधीश्वर महंत रामदास बालयोगी महाराज ने पंचामृत, फलों का जूस, सुगंधित सर्व औषधियों आदि से भूनेश्वर महादेव का अभिषेक पूजन किया। भूनेश्वर महादेव के अभिषेक पूजन का कार्यक्रम आचार्य सुशील पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार संग संपन्न कराया। इस दरम्यान रामप्रसाद पांडेय नवाबगंज महंगूपुर गोंडा समेत कई अन्य शिवभक्त मौजूद रहे। जिन्होंने भूनेश्वर महादेव का पूजन-अर्चन कर अपना जीवन धन्य बनाया और पुण्य के भागीदार बने। करतलिया बाबा भजनाश्रम पीठाधीश्वर महंत रामदास बालयोगी महाराज ने कहा कि भोलेबाबा अपने भक्तों पर कृपा करते हैं। सच्चे मन से उनकी आराधना करनी चाहिए। वह भक्त पर आने वाली विपत्ति को दूर करते हैं। इस समय पवित्र सावन मास का महीना चल रहा है। जो हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और विशेष माना गया है। सावन मास में भोलेनाथ का अभिषेक, जलाभिषेक, पूजन-अर्चन, आरती अवश्य करें। इससे हमारे जीवन में सुख-समृद्धि एवं शांति आयेगी। हमारा जीवन कल्याणमय होगा।
: कुशवाहा मंदिर के महंत बने सनत कुमार दास
Thu, Jul 24, 2025
कुशवाहा मंदिर के महंत बने सनत कुमार दाससंतो के दिशा निर्देशन में और मंदिर परंपरा के अनुसार सेवा निरंतर करता रहूंगा: महंत सनत कुमार दासअयोध्या। ऋणमोचन घाट स्थित कुशवंशीय भक्त वत्सल भवन कुशवाहा मंदिर के महंत बने सनत कुमार दास अयोध्या के संतो महंतों होने वैष्णो सनातन परंपरा के अंतर्गत सनत कुमार दास को कंठी चद्दर तिलक देकर के कुशवाहा मंदिर का महंत बनाया। जिससे मंदिर में ठाकुर जी की सेवा सुचारू रूप से निरंतर चलती रहे और उत्सव सवैया समय-समय पर मंदिर की परंपरा के अनुसार मनाया जाता रहे। नवनियुक्त महंत सनत कुमार दास ने महाराज ने बताया कि अयोध्या के प्रतिष्ठित संतों महंतों में मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल बड़ा स्थान के महंत बिंदुगद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य, निर्वाणी अनि अखाड़ा श्रीहनुमानगढ़ी के महासचिव महंत नंदराम दास, बावन मंदिर के महंत वैदेही वल्लभ शरण, जानकी घाट बड़ा स्थान के महान जन्मेजय शरण, बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश कुमार दास, वेद मंदिर के महंत रामनरेश दास, श्री राम वल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास, श्री राम आश्रम के महंत जय रामदास, परमहंस आश्रम के महंत गोविंद दास, तिवारी मंदिर के महंत महापौर गिरिशपति त्रिपाठी,श्री रामकृष्ण मंदिर के महंत गणेशानंद, महंत उद्धव शरण, महंत राम मिलन शरण, जयसवाल मंदिर के महंत श्यामसुंदर दास, बधाई भवन के महंत राजीव लोचन शरण, पार्षद अनुज दास, प्रियश दास, महंत मनमोहन दास सहित दर्जनों संतों महंतों ने कंठी चद्दर तिलक देकर के कुशवाहा मंदिर का महंत बनाया। संतो के दिशा निर्देशन में और मंदिर परंपरा के अनुसार मंदिर की सेवा निरंतर करता रहूंगा भोग राग उत्सव सवैया समय-समय पर होता रहेगा मंदिर से जड़े और अयोध्या में आने वाले भक्तों श्रद्धालुओं की सेवा सनातन परंपरा के अनुसार निरंतर करता रहूंगा मंदिर में गौ सेवा विद्यार्थी सेवा संत सेवा हमेशा चलती रहेगी।
: नया कलेवर ग्रहण कर रहा रामचंद्रदास परमहंस जी महाराज का आश्रम दिगंबर अखाड़ा
Wed, Jul 23, 2025
नया कलेवर ग्रहण कर रहा रामचंद्रदास परमहंस जी महाराज का आश्रम दिगंबर अखाड़ापरमहंस जी के फक्कड़पन, उनकी अपूर्व प्रतिभा, सरलता और प्राणि मात्र के प्रति अपनत्व आत्मीयता के कायल है अयोध्या वासीदिगंबर अखाड़ा के महंत रामचंद्रदास महाराज की 22वीं पुण्यतिथि समारोह अपने फलक पर है, मंदिर में पांच दिवसीय रामकथा की अमृत वर्षा प्रख्यात कथावाचक संत विजय कौशल जी के श्रीमुख से हो रही27 को दिगम्बर अखाड़ा में श्रद्धांजलि देगें सूबे के मुखिया गोरक्षपीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथअयोध्या। जीते जी अपनी चमक से संत परंपरा को गौरवान्वित करने वाले मंदिर आंदोलन के पर्याय एवं दिगंबर अखाड़ा के महंत रामचंद्रदास जी महाराज की 22वीं पुण्यतिथि समारोह अपने फलक पर है। मंदिर में पांच दिवसीय रामकथा का प्रख्यात कथावाचक संत विजय कौशल जी के श्रीमुख से रामकथा की अमृत वर्षा हो रही है।कार्यक्रम मुख्य उत्सव 27 जुलाई को होगा जिसमें सूबे के मुखिया गोरक्षपीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी सहित पूरे देश से परमहंस जी के शिष्य परिकर शामिल होगें। मंदिर आंदोलन के पर्याय रहे दिग्गज संत रामचंद्रदास परमहंस जी जैसे यशस्वी संत और 'हिंदुत्व' के क्षितिज पर सर्वाधिक प्रभावी भूमिका का निर्वहन करने वाले व्यक्तित्व की स्मृति सहेजने में दो दशक से अधिक की प्रतीक्षा स्वयं में आश्चर्यजनक रहा। यह भी ध्यान देने योग्य है कि पुण्यसलिला सरयू के तट पर उन्हें अंतिम प्रणाम करने वालों में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी, उप राष्ट्रपति भैरव सिंह शेखावत, उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, संघ प्रमुख केसी सुदर्शन, प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री सहित बड़ी संख्या में सत्ता एवं सियासत के प्रतिनिधियों सहित उनके हजारों प्रशंसक शामिल थे। इसके बावजूद उनकी प्रतिमा स्थापित किए जाने की संभावना उन लोगों के लिए अति सुखद है। दिग्गज संत रामचंद्रदास परमहंस जी की भव्य प्रतिमा पिछले वर्ष स्थापित हो गई है। मंदिर की साज सज्जा दिनप्रतिदिन अपने निखार की ओर अग्रसर है।
परमहंस जी के फक्कड़पन, उनकी अपूर्व प्रतिभा, सरलता और प्राणि मात्र के प्रति अपनत्व आत्मीयता के कायल थे।
नया कलेवर ग्रहण कर रहा रामचंद्रदास परमहंस का आश्रम दिगंबर अखाड़ा इसका श्रेय दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेशदास एवं उनके उत्तराधिकारी महंत रामलखनदास को जाता है। परमहंस के आदर्शों मूल्यों एवं उनके व्यक्तित्व के प्रशंसकों की दृष्टि से देखें तो वाकई यह प्रयास तृप्त करने वाला है। लंबे समय तक परमहंस जैसे दिग्गज आचार्य की साकेतवास के बाद अवहेलना हैरत में डालती रही। इसके पीछे तकनीकी अड़चन भी थी। सरयू के जिस तट पर 2003 में परमहंस का अंतिम संस्कार उनकी स्मृति अक्षुण्ण रखने की इच्छा अभिव्यक्त की गई थी, किंतु सरयू के जिस स्थल पर उनका अंतिम संस्कार किया गया था, वह सिंचाई विभाग की भूमि थी। इस पर परमहंस का स्मारक संजोना संभव नहीं था। यद्यपि परमहंस के एक अन्य शिष्य नारायण मिश्र ने उस स्थल को संरक्षित किया, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया था। सात वर्ष पूर्व प्रदेश में योगी सरकार बनने के साथ इस स्थल को संरक्षित करने का प्रयास किया गया, किंतु उनकी प्रतिमा स्थापित करने का प्रयास आगामी सात अगस्त को उनकी 21वीं पुण्यतिथि के अवसर पर फलीभूत हुई। दिगंबर अखाड़ा में प्रवेश करते ही दाहिनी तरफ छह फीट ऊंचा प्रतिष्ठान पर परमहंस जी की प्रतिमा स्थापित की गई है,जो अद्वितीय है। दिगंबर अखाड़ा को भी मिला नया कलेवर परमहंस की प्रतिमा स्थापित किए जाने के साथ संपूर्ण दिगंबर अखाड़ा को भी नया कलेवर प्रदान किया गया है। दिगंबर अखाड़ा में काम अभी भी चल रहा है जो परमहंस जी के 23वीं पुण्यतिथि तक पूर्ण होगा। दिगंबर अखाड़ा के कायाकल्प के लिए प्रदेश सरकार की ओर से अवमुक्त 1.90 करोड़ की राशि से निर्माण के साथ नवनियुक्त महंत रामलखनदास ने अपने स्तर से करोड़ों रुपये की व्यवस्था कर अखाड़ा को पाषाण की दृढ़ इमारत के रूप में विकसित किया है। विगत तीन वर्ष ही दिगंबर अखाड़ा के उत्तराधिकारी नियुक्त किए गए रामलखनदास जिम्मेदारी पाने के दो वर्ष के भीतर ही करीब 25 लाख की लागत से परमहंस की प्रतिमा और उनके मंडप का निर्माण करा प्रशंसा बटोर रहे हैं। उत्तराधिकारी महंत रामलखनदास जी के संयोजन में लगातार आश्रम का विकास हो रहा है। मंदिर में 22 जुलाई से परमहंस जी की 22वीं पुण्यतिथि समारोह मनाई जा रही है। जिसका संयोजन उत्तराधिकारी महंत रामलखनदास व देखरेख आशुतोष सिंह आशू कर रहें है।