: सेवा दिवस के रुप में मनी स्व बालेश्वर राय की प्रथम पुण्यतिथि
Tue, Jul 22, 2025
सेवा दिवस के रुप में मनी स्व बालेश्वर राय की प्रथम पुण्यतिथिप्रसिद्ध पीठ श्री कंचन भवन में संतों ने दी श्रद्धांजलि, हुआ अखंड रामायण पाठ व विशाल भंडारापिता श्री ने सेवा को ही अपना धर्म माना और उसी को अंगीकार किया: महंत विजय दासअयोध्या समाचार अयोध्या । रामनगरी की ऐतिहासिक एवं प्राचीन पीठ कंचन भवन ऋणमोचन घाट परिक्रमा मार्ग में स्व. बालेश्वर राय की प्रथम पुण्यतिथि सेवा दिवस के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर अखंड रामायण के पाठ संग कई धार्मिक अनुष्ठान और सेवा प्रकल्प के कार्य संचालित हुए। पुण्यतिथि महोत्सव पर अयोध्या नगरी के विशिष्ट संत-महंतों समेत जिले के कई गणमान्य जन सम्मिलित हुए। जिन्होंने स्व. बालेश्वर राय के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। साथ ही उनके कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। इस अवसर पर कंचन भवन के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत विजय दास महाराज ने बताया कि मंदिर में पिता श्री स्व. बालेश्वर राय की प्रथम पुण्यतिथि निष्ठापूर्वक मनाई गई। संतों एवं विशिष्टजनों ने उन्हें श्रद्धा से याद किया। पुण्यतिथि महोत्सव को सेवा दिवस का नाम दिया गया था। जिस पर भंडारा समेत कई सेवा के कार्य किए गए। पिता श्री ने सेवा को ही अपना धर्म माना और उसी को अंगीकार किया। सेवा ही परमोधर्मा के मार्ग पर चलते रहे। उनका मानना था कि सेवा ही परमधर्म है। उससे बढ़कर और कोई दूसरा धर्म नही है। उनके दिशा-निर्देशन में कई सेवा के कार्य संचालित भी हुए। जिनमें बहुत से सेवा प्रकल्प के कार्य आज भी चल रहे हैं। वह आज हमारे बीच में नही हैं। लेकिन उनकी यश और कीर्ति सदैव हम सबके साथ रहेगी। भविष्य में उनके रिक्त स्थान की पूर्ति कभी नही की जा सकती है। पुण्यतिथि पर काफी संख्या में संत-महंत, विशिष्ट एवं भक्तजनों ने प्रसाद पाया। अंत में कंचन भवन पीठाधिपति महंत विजय दास महाराज ने पधारे हुए संत-महंत, धर्माचार्यों का अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत-सम्मान किया और भेट, विदाई दी। इस मौके गुरुनानक गोविंदधाम गुरुद्वारा नजरबाग के जत्थेदार बाबा महेंद्र दास, सेवादार नवनीत सिंह, मामा दास, नागा सूर्यभान दास, पुजारी उपेंद्र दास, पहलवान मनोज दास, प्रहलाद शरण, संतदास, भाजपा नेता अभिषेक मिश्रा, पूर्व जिपं अध्यक्ष करूणाकर पांडेय, पूर्व जिपं सदस्य डिप्पुल पांडेय, संजय सिंह, पवन धर दूबे, पार्षद अंकित त्रिपाठी, रामदेव पहलवान आदि समेत हजारों लोग मौजूद रहे।
: रामनगरी में शिवालय सजे, दिन भर हुआ अभिषेक-पूजन
Tue, Jul 22, 2025
रामनगरी में शिवालय सजे, दिन भर हुआ अभिषेक-पूजनसावन के दूसरे सोमवार पर घरों व मंदिरों में हुए अभिषेक-पूजन के आयोजनकरतलिया बाबा आश्रम में स्थापित प्राचीन भूनेश्वर नाथ में हुआ भव्य रुद्राभिषेकअयोध्या। सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की आराधना का क्रम जारी है। सावन के पहले दिन से शिव भक्त अपने इष्टदेव की प्रसन्नता के लिए व्रत-उपासना और अभिषेक-पूजन कर किये। सावन में सोमवार का भी विशेष महत्व होने के कारण दूसरे सोमवार पर घरों और मंदिरों में महादेव का विशेष अभिषेक-पूजन हुआ। शिवालयों में अलसुबह से शुरु हुआ रुद्राभिषेक का दौर रात तक चलता रहा। इस दौरान भगवान शंकर का जल, गंगाजल, दूध, दही, घृत, शर्करा, शहद, ईख रस आदि द्रव्यों से अभिषेक कर विविध पूजन सामग्री से पूजन किया जा रहा है। भस्म, आक, धतूरा, विभिन्न प्रकार के पुष्पों से महादेव का श्रृंगार किया गया। मंदिरों में भजन, कीर्तन, सत्संग और भक्ति संगीत के आयोजन हुए। पहले सोमवार को लेकर कई शिवालयों को रंग बिरंगी रोशनी से सजाए गए है।
रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ करतलिया बाबा आश्रम में पीठाधीश्वर महंत बालयोगी रामदास महाराज के सान्निध्य में श्रावण मास के दूसरे सोमवार में प्राचीन भूनेश्वर नाथ महादेव में पूरे विधि विधान के साथ देवाधिदेव महादेव का भव्य रुद्राभिषेक कर लोकमंगल एवं विश्व कल्याण की कामना की। महंत बालयोगी रामदास महाराज ने कहा कि महादेव एक लोटा शुद्ध जल से अभिषेक करने पर ही प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए शुद्ध जल से शिवलिंग पर अभिषेक करना सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि भरपूर जलावृष्टि से भगवान शिव बेहद प्रसन्न होते हैं। शुद्ध जल से शिवलिंग पर अभिषेक करने से व्यक्ति की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।बालयोगी महंत राम दास ने कहा कि सावन माह बहुत ही पवित्र माह होता है। भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करने से वे खुश होते है। उन्होंने कहा कि आज जिला पंचायत सदस्य पद नवाबगंज द्वितीय प्रत्याशी प्रदीप यादव मनकामेश्वर नाथ महादेव जी का भव्य रुद्राभिषेक किये। उन्होंने कहा कि पूरे सावन नित्य मंदिर में भगवान का अभिषेक किया जायेगा।
: हमारी श्वांस-प्रश्वांस आराध्य के साथ धड़कती है: महंत रामशरण दास
Mon, Jul 21, 2025
हमारी श्वांस-प्रश्वांस आराध्य के साथ धड़कती है: महंत रामशरण दासरंग महल में झूले पर विराजे अवधविहारी-विहारिणी को पुष्पों एवं पुष्पलड़ियों से इस कदर आच्छादित किया गया कि फूल-बंगला बन गयासावन की पूर्व संध्या से ही शुरू होता है भव्य झूलनोत्सवअयोध्या। रामनगरी अयोध्या में मधुर उपासना परंपरा की शीर्ष पीठ श्रीरंगमहल में देर शाम झूलनोत्सव का चरम परिभाषित हुआ। झूले पर विराजे अवधविहारी-विहारिणी को पुष्पों एवं पुष्पलड़ियों से इस कदर आच्छादित किया गया कि फूल-बंगला बन गया। भक्ति में पगे संतों के बीच फूल-बंगला में आराध्य को सजाने की परंपरा पुरानी है और रंगमहल में इस परंपरा पर अमल के साथ आराध्य के सम्मुख संगीत की महफिल सजाई गई। इस दौरान मंदिर के संस्थापक एवं रसिक संत पूज्य सरयूशरण महाराज सहित कुछ अन्य दिग्गज आचार्यों के पदों की प्रस्तुति से भक्ति, अध्यात्म एवं संस्कृति की प्रवाहित त्रिवेणी आकर्षण के केंद्र में रही और इस सलिला में डुबकी लगाने वालों में मणिरामदास जी की छावनी के उत्ताराधिकारी महंत कमलनयन दास आचार्य पीठ दशरथमहल बड़ास्थान पीठाधीश्वर बिदुगाद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य, बावन जी मंदिर के वैदेही बल्लभ शरण, नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, पूर्व सांसद लल्लू सिंह,महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी, भाजपा नेता अभिषेक मिश्रा, कमिश्नर गौरव दयाल, आईजी प्रवीण कुमार आदि सहित रामनगरी के संत शामिल रहे। उत्सव की अध्यक्षता रंगमहल के पीठाधीश्वर महंत रामशरणदास महाराज ने किया। उन्होंने संतों का स्वागत करने के साथ आभारपूर्वक विदाई दी। रात्रि आठ बजे से शुरू संगीत संध्या मध्यरात्रि शयन आरती के साथ समाप्त हुई।
रंगमहल में सावन माह की शुरुआत होते ही गुरु पूर्णिमा से ही आराध्य का झूला तन गया है। आराध्य के सम्मुख समर्पण के गीतों की महफिल भी सज रही है। मधुर उपासना का पर्याय झूलन महोत्सव रामनगरी के आम मंदिरों में सावन शुक्ल तृतीया से शुरू होता है, पर रंगमहल व सद्गुरु सदन में यह उत्सव प्रति वर्ष की तरह 19 दिन पूर्व ही शुरू हो गया और पूरे माह चलेगा। इसके पीछे भगवान राम के प्रति अनन्य अनुराग की परंपरा है। रंगमहल में इस विशिष्ट विरासत के सूत्रधार सिद्ध संत परमपूज्य स्वामी सरयूशरण थे। वे उस श्रेणी के साधक थे, जिनके लिए आराध्य विग्रह मृण्मय मूर्तियां न होकर चिन्मय-चैतन्य विग्रह थे और वे आराध्य को सतत सहचर के रूप में अनुभूत करते थे। सरयूशरण की यह भाव-भावना उस रंगमहल के रूप में मूर्तिमंत हुई, जिसे उन्होंने तीन सौ वर्ष पूर्व प्रतिष्ठित किया। यह विरासत आज भी पूरी शिद्दत से प्रवाहमान है। आराध्य के साथ धड़कती है श्वास-प्रश्वास संस्थापक आचार्य के अनुरूप रंगमहल की आध्यात्मिक परंपरा आगे बढ़ा रहे महंत रामशरणदास कहते हैं, हमारी श्वांस-प्रश्वांस आराध्य के साथ धड़कती है और हम यह महसूस करते हैं कि वे पूरी चैतन्यता से हमारे साथ हैं। इस भाव की तस्दीक प्रत्येक वर्ष सावन शुक्ल एकादशी के मौके पर यहां सजने वाली गलबहियां की झांकी है। मान्यता है कि सावन के आह्लाद से भरकर भगवान राम और भगवती सीता के विग्रह एक-दूसरे के कंधे में बांह डाल कर सावन की मनोहारी भावधारा में डुबकी लगाते हैं। इस मौके पर आये हुए अतिथियों का स्वागत मंदिर से जुडे संत राहुल जी, पुजारी साकेत जी व छोटू भैया ने किया।