: दशरथ राजमहल बड़ा स्थान में तुलसीदास नव्यन्यायाचार्य जी के श्रीमुख से हो रही रामकथा की अमृत वर्षा
Mon, Apr 4, 2022
रामनवमी मेला अपने शबाब पर,चहुंओर हो रहा नवाह्न पारायण, बधाईयाँ व रामकथा
अयोध्या। नौ दिवसीय रामनवमी मेले के तीसरे दिन रामनगरी के दर्जनों मंदिरों में चल रही रामकथाओं में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। मेले में शामिल होने आए श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन-पूजन व सांस्कृतिक-धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने के क्रम में कथाओं में पूरे मनोयोग से शामिल हो रहे हैं।चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल बड़ा स्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य जी महाराज के अध्यक्षता में रामजन्म महोत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है। जिसमें व्यासपीठ से रामकथा की अमृत वर्षा तुलसीदास नव्यन्यायाचार्य जी कर रहे है।इस पूरे आयोजन का दिव्य संयोजन मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी कर रहे है। बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य जी महाराज ने कहा कि श्रीराम धर्म के विग्रह हैं। वे जो करते हैं, कराते हैं अर्थात उनका पूरा जीवन व उसकी क्रियाएं साक्षात धर्म ही हैं। उन्होंने कहा कि धरा धाम से सबसे लंबा अवतार श्रीराम का रहा। उनके जीवन का एक-एक पल आदर्श व मर्यादा का अद्भुत समन्वय है।
: रामकथाओं के रस से सराबोर हो रही रामनगरी
Mon, Apr 4, 2022
रामनवमी मेला अपने शबाब पर,चहुंओर हो रहा नवाह्न पारायण, बधाईयाँ व रामकथा
श्रीरामबल्लभाकुंज में प्रेमभूषण जी के श्रीमुख से हो रही रामकथा की अमृत वर्षा
अयोध्या। नौ दिवसीय रामनवमी मेले के तीसरे दिन रामनगरी के दर्जनों मंदिरों में चल रही रामकथाओं में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। मेले में शामिल होने आए श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन-पूजन व सांस्कृतिक-धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने के क्रम में कथाओं में पूरे मनोयोग से शामिल हो रहे हैं। श्रीरामबल्लभाकुंज में प्रख्यात कथावाचक प्रेमभूषण जी महाराज के श्रीराम कथा की अमृत वर्षा हो रही है। यह उत्सव अधिकारी राजकुमार दास के सानिध्य में हो रहा है। कथाव्यास प्रेमभूषण जी ने अपनी रामकथा के तीसरे सत्र में कहा कि जब भक्त के पास धैर्य की धीरता व संयम का साहस हो तो सुख व आनंद स्वयं पास आ जाते हैं और परीक्षा की घड़ी समाप्त हो जाती है। विपत्ति में भी जो अपने धैर्य का त्याग न करे वह धीर पुरुष कहा जाता है। उन्होंने कहा कि धीरता आत्मा का गुण है। उन्होंने कहा कि शूरता शरीर का, धीरता आत्मा का व वीरता मन के बल हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम धीरशाली हैं और वे प्रजा के हित को ही अपना हित मानते हैं। बुद्धिमान, मतिमान एवं प्रतिभावान इन तीनों में श्री राघवेंद्र सरकार पारंगत हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम सर्वप्रिय हैं। उनके धैर्य, साहस, संयम, त्याग व प्रेम का हर किसी ने सम्मान किया।
: सत्संग व भगवत कथा श्रवण का सुअवसर भगवान की असीम कृपा से मिलता है: रामानुजाचार्य
Mon, Apr 4, 2022
श्रीरामजन्म महोत्सव में हो रहे राम कथा में जगद्गुरू जी ने भगवान के बाल स्वरूप एंव उनके अद्भुत बाल क्रीड़ाओं पर अद्भुत रस का किया वर्षण
अयोध्या। रामनगरी के सिद्धपीठ श्री हनुमान बाग में श्रीरामजन्म महोत्सव के अवसर पर भव्य श्रीराम कथा आज तृतीय दिवस की कथा में जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य महाराज श्री भगवान के बाल स्वरूप एंव उनके अद्भुत बाल क्रीड़ाओं पर अद्भुत रस का वर्षण किया। कथा को विस्तार करते हुए महाराज श्री ने कहा कि
सत्संग व भगवत कथा श्रवण का सुअवसर भगवान की असीम कृपा से प्राप्त होता है। मानव जीवन में ऐसा मौका तब आता है जब जन्म-जन्मांतर के पुण्य प्रकट होते हैं। इसके लिए मन की शुद्धि आवश्यक है और भगवान की कथा अंत:करण व मन को पवित्र कर देती है। सत्संग के बिन मन को पवित्र करने वाला दूसरा कोई साधन नहीं है। क्योंकि तन तो गंगा स्नान से शुद्ध हो जाते हैं। पंचगव्य पान से शरीर के रोम-रोम से लेकर हड्डी के अंदर तक की अशुद्धि दूर हो जाती है। लेकिन मन को केवल भगवत कथा सत्संग ही शुद्ध कर सकता है।
रामानुजाचार्य जी ने कथा के क्रम में कहा कि मन की पवित्रता के बिना सभी सत्कर्म निष्फल हो जाते हैं। मन ही मनुष्य के बंधन व मुक्ति दोनों का करण हैं। विषयों में आशक्त मन बंधन का कारण है, जबकि विषयों से विरक्त मन मुक्ति का हेतु है। भगवान के कथनों का उल्लेख करते हुए महाराज श्री ने कहा कि श्री हरि खुद कहते हैं कि मेरी इस गाथा को ज्यो-ज्यों सुना जाता है, त्यों-त्यों आत्मा का परिमार्जन व मन विशुद्ध होने लगता है। कथा को विस्तार देते हुए स्वामी जी महाराज ने कहा कि भगवान की कथा भक्तों का आहर है।कथा से पूर्व यजमान शुभ लक्ष्मी शर्मा, निशांत शर्मा रायपुर छत्तीसगढ़ ने व्यासपीठ का पूजन किया। कथा में सिद्धपीठ श्री हनुमान बाग के महंत जगदीश दास, मंदिर के व्यवस्थापक सुनील दास, रोहित शास्त्री, पूज्य राघवाचार्य जी के शिष्य परिकर मनोज जी सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।