: फूलबंग्ले में विराजेंगे रामलला व हनुमान जी
Sun, May 8, 2022
फूलों से महकेगा रामजन्म भूमि, कनक भवन व हनुमानगढ़ी मंदिर
दिव्य फूल बंगला झांकी का आयोजन वृन्दावन के जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज कर रहे
अयोध्या। वैष्णवनगरी के मंदिरों में ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी में भगवान को कूल-कूल रखने के लिए संतों ने फूलबंग्ले की झांकी के आयोजन की परंपरा शुरू की थी। उत्सव के रूप में आयोजित प्राचीन काल की यह परंपरा आधुनिक काल में भी कायम है। वह भी तब जब अधिकांश मंदिरों में पंखे व कूलर की व्यवस्था की जा चुकी है। इसी परंपरा को आज भी बड़ी शिद्दत से निभा रहें वृंदावन से उच्चकोटि के संत जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज महाराज के पावन सानिध्य में 17 मई मंगलवार को
ज्येष्ठ मास पर कनक रामजन्मभूमि में भगवान रामलला सरकार को कनकभवन में बिहारी सरकार व हनुमानगढ़ी में हनुमानजी की भव्य फूलबंग्ला झांकी सजायी जायेगी।
जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज महाराज बताते है कि मंदिरों में विराजमान भगवान के विग्रह संत-साधकों के लिए वस्तुत: अर्चावतार की भांति हैं। मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठित देव प्रतिमा को सजीव माना जाता है। यही कारण है कि साधक संतों ने उपासना के क्रम में विराजमान भगवान के अष्टयाम सेवा पद्घति अपनाई। इस सेवा पद्घित में भगवान की भी सेवा जीव स्वरूप में ही की जाती है। जिस प्रकार जीव जैसे सोता, जागता है उसी प्रकार भगवान के उत्थापन व दैनिक क्रिया कर्म के बाद उनका श्रृंगार पूजन, आरती भोग-राग का प्रबंध किया जाता है। इसी क्रम में भगवान को गर्मी से बचाने के लिए पुरातन काल में संतों ने फूलबंग्ला झांकी की परंपरा का भी शुभारंभ किया था, जिसका अनुपालन आज भी हम कर रहे है। जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज महाराज ने बताया कि धर्मनगरी वृंदावन व अयोध्या में प्रतिवर्ष दिव्य भव्य फूल बंग्ला झांकी का आयोजन होता है। इस बार यह दिव्य आयोजन 17 मई मंगलवार को होगा। उन्होंने बताया कि झांकी काेलकाता के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की जाती है, जिसमें उपयोग किए जाने वाले फूल बनारस, लखनऊ, वृन्दावन, कलकत्ता आदि जगहों से मंगवाए गए जाते है। इसके आलावा कुछ पुष्प विदेशाें से भी आयातित किए जाते है। यह आयोजन जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज वृंदावन और सभी भक्तो द्वारा किया जाता है।
: चतुर्विशाति कुण्डात्मक महा साम्राज्य पटृभिषेक नवाह्रिक महायज्ञ पड़ ही आहुतियां
Sun, May 8, 2022
51 वैदिक आचार्य मंत्रोच्चारण के साथ हवनकुंड में डाल रहे आहुतियां
भगवान श्रीराम का चरित्र दर्पण के समान है जिसमें अपने आपको देखकर सुधार करो :गोपालकृष्णमाचार्य
अयोध्या। रामनगरी के हनुमान बाग मंदिर में इन दिनों चतुर्विशाति कुण्डात्मक महा साम्राज्य पटृभिषेक नवाह्रिक महायज्ञ का उल्लास अपने चरम पर है। दक्षिण भारतीय परम्परा में हो रहे उत्सव का अपना एक अलग ही आनंद है। पूरे मंदिर परिसर मंत्रोच्चारण गुंजायमान है। 51 वैदिक आचार्य लगातार हवन कुंड में आहुतियां डाल रहे है। तो वही 108 आचार्य सस्वर वाल्मीकीय रामायण पाठ कर रहे है। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में व्यासपीठ से गोपालकृष्णमाचार्य जी महाराज वाल्मीकीय रामायण कथा पर प्रवचन कर रहें है।चतुर्विशाति कुण्डात्मक महा साम्राज्य पटृभिषेक नवाह्रिक महायज्ञ महोत्सव के अवसर पर रामायण महाकाव्य के माध्यम से भगवान श्रीराम के मंगलमयी चरित्र का वर्णन करते हुए कहा गोपालकृष्णमाचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवान अनंत हैं, उनका चरित्र अनंत है, उनकी लीला अनंत है। फिर भी भगवान के उन अनंत चरित्रों में जितना चरित्र चिंतन हम कर लें, उससे हमारे चरित्र का निर्माण होता है। भगवान के चरित्र का चिंतन करने का उद्देश्य यही है कि हमारा चरित्र सुधर जाए। भगवान का चरित्र वो दर्पण है, जिस दर्पण में हम अपना सुधार कर लें। दर्पण कभी झूठ नहीं बोलता। दर्पण के सामने खड़े होकर हम गड़बड़ को सुधार करते हैं, उसी प्रकार भगवान श्रीराम का चरित्र ऐसा निर्मल दर्पण है, जिस दर्पण में हम अपने चरित्र को देखें कि हमारी क्या गलतियां हैं, रामजी ने क्या किया वो हम करें, या उन्होंने क्या नहीं किया वो हम ना करें, यह देखकर रामचरित्र के दर्पण में हम अपने जीवन का सुधार कर लें, यही कथा सुनने का फल है। अपने आपको हम पवित्र कर लेंगे। गोपालकृष्णमाचार्य जी ने कहा कि संसार के लोग व्यवहार को देखते हैं, लेकिन भगवान भाव को देखते हैं। आपका भाव बहुत अच्छा हो, लेकिन व्यवहार में आप चूक गए तो संसार में आप सफल नहीं हो सकते और अगर भगवान के साथ व्यवहार में चूक गए तो कोई बात नहीं, यदि भाव आपका ठीक रहा तो काम चल जाएगा।कथा से पूर्व यजमान लक्ष्मी न्यायापति जी ने व्यासपीठ का पूजन किया।यह आयोजन श्री वेंकाटाचार्य वैदिक संस्थान के तत्वावधान में हो रहा है। कार्यक्रम हनुमान बाग सेवा संस्थान के सानिध्य में सम्पादित हो रहा है।इस महाउत्सव को हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। इस मौके पर मंदिर के व्यवस्थापक सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री सहित दक्षिण से हजारों भक्त इस महाउत्सव में शामिल हुए।
: बिना श्रद्धा के कोई राम कथा का आनंद नहीं ले सकता: रामदिनेशाचार्य
Sat, May 7, 2022
राम महल वैदेही मंदिर में भव्य श्रीराम कथा महोत्सव का हुआ शुभारंभ
अयोध्या। श्रद्धा का उदय बहुत ही बिरले लोगों के जीवन में होता है। जिनके जीवन में श्रद्धा नहीं है वह कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो राम कथा का आनंद रस ग्रहण नहीं कर सकता। उक्त बातें श्रीराम कथा महोत्सव में जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कही। जगद्गुरु रामानन्दाचार्य जी के श्रीमुख से राम महल वैदेही मंदिर में आज से भव्य श्रीराम कथा महोत्सव का समारोह पूर्वक शुभारंभ हुआ।व्यासपीठ से कथा का महात्म्य बताते हुए रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि सतीजी दक्ष पुत्री हैं। वे भगवान शिव से विवाह होने पर भी रामकथा का आनंद नहीं ले पाती हैं। उन्होंने सुना ही नहीं क्योंकि उनके हृदय में श्रद्धा वृत्ति की जगह संशय या भ्रम था। सती जब अगले जन्म में राजा हिमांचल के घर में जन्म लेती हैं तो दीर्घकाल की तपस्या के पश्चात भगवान शिव को पुन: पति के रूप में प्राप्त करती हैं। तब रामकथा की जो अद्भुत रसधारा संसार के समक्ष बहती है, उससे भगवती उमा स्वयं धन्य हुईं संसार के जीव आज भी धन्य हो रहे हैं।
स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि परमार्थ की प्राप्ति के लिए सनातन धर्म में अनगिनत मार्ग हैं पर प्रमुख रूप से मानस में ज्ञान भक्ति और कर्म की चर्चा की गई है। सभी मार्गों में श्रद्धा की आवश्यकता है। ज्ञान मार्ग की साधना उत्तर कांड में की गई है। उसमें गाय को श्रद्धा का प्रतीक बताया गया है। कथा व्यास का पूजन यजमान ने किया। महोत्सव का संचालन आचार्य रमेश दास शास्त्री व व्यवस्थापक में गौरव दास शास्त्री शिवेंद्र दास शास्त्री रहे।