: गुरूदेव अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे: विद्याभास्कर
Sat, Jul 30, 2022
काेशलेश सदन के संस्थापक आचार्य स्वामी रामनारायणाचार्य महाराज के 37 वीं पुण्यतिथि पर संतों ने किया नमन
अयाेध्या। काेशलेश सदन के संस्थापक आचार्य स्वामी रामनारायणाचार्य महाराज काे संताें ने श्रद्धापूर्वक याद किया। माैका था उनके 37 वें पुण्यतिथि महाेत्सव का। इस अवसर पर शनिवार को मंदिर प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा का आयाेजन किया गया जिसमें रामनगरी के विशिष्ट संत-महंत और धर्माचार्याें ने पूर्वाचार्य की प्रतिमा पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। संताें ने संस्थापक आचार्य के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। काेशलेश सदन के वर्तमान पीठाधीश्वर जगद्गुरू स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज ने कहा कि उनके गुरूदेव अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे। उनकी गणना सिद्ध संताें में हाेती रही है। उनका व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था। रामनगरी के सभी संत-महंत उनका आदरपूर्वक सम्मान करते थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने आश्रम का सर्वांगीण विकास किया। जीवन पर्यंत मठ के उत्तराेत्तर समृद्धि में लगे रहे। आज उन्हीं की देन है कि आश्रम अयाेघ्यानगरी के प्रमुखतम पीठाें में से एक है। जहां गाै, संत, विद्यार्थी व आगंतुक सेवा सुचार रूप से चल रही है।
इस माैके पर मणिरामदास छावनी उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, लक्ष्मणकिलाधीश महंत मैथिलीरमण शरण, उत्तर ताेताद्रिमठ जगद्गुरु स्वामी अनंताचार्य, जगद्गुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य, गाेपाल मंडपम महंत स्वामी कूरेशाचार्य, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, बड़ाभक्तमाल महंत अवधेश दास, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत राय व ट्रस्टी डा. अनिल मिश्रा, हनुमत निवास महंत डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण, मंगलभवन पीठाधीश्वर महंत रामभूषण दास कृपालु, वेद मंदिर महंत रामनरेश दास, श्रीरामाश्रम महंत जयराम दास, महंत राजूदास, महंत रामकुमार दास, महंत हरिसिद्धि शरण, महंत शशिकांत दास, महंत कमलादास रामायणी, महंत रामनरेश शरण, महंत संताेष दास, महंत तुलसीदास, पार्षद पुजारी रमेश दास, प्रियेश दास आदि संत-महंत व भक्तगण उपस्थित रहे।
: हमारी श्वांस-प्रश्वांस आराध्य के साथ धड़कती है: महंत रामशरण दास
Mon, Jul 25, 2022
रंग महल में झूले पर विराजे अवधविहारी-विहारिणी को पुष्पों एवं पुष्पलड़ियों से इस कदर आच्छादित किया गया कि फूल-बंगला बन गया
झूलन के लिए बनवाया गया साठ किलो चांदी का झूला
शुक्ल पक्ष की एकादशी को होगी गलबहियां की झांकी
बमबम यादव
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में मधुर उपासना परंपरा की शीर्ष पीठ श्रीरंगमहल में बीती शाम झूलनोत्सव का चरम परिभाषित हुआ। झूले पर विराजे अवधविहारी-विहारिणी को पुष्पों एवं पुष्पलड़ियों से इस कदर आच्छादित किया गया कि फूल-बंगला बन गया। भक्ति में पगे संतों के बीच फूल-बंगला में आराध्य को सजाने की परंपरा पुरानी है और रंगमहल में इस परंपरा पर अमल के साथ आराध्य के सम्मुख संगीत की महफिल सजाई गई। इस दौरान मंदिर के संस्थापक एवं रसिक संत पूज्य सरयूशरण महाराज सहित कुछ अन्य दिग्गज आचार्यों के पदों की प्रस्तुति से भक्ति, अध्यात्म एवं संस्कृति की प्रवाहित त्रिवेणी आकर्षण के केंद्र में रही और इस सलिला में डुबकी लगाने वालों में मणिरामदास जी की छावनी के उत्ताराधिकारी महंत कमलनयन दास आचार्य पीठ दशरथमहल बड़ास्थान पीठाधीश्वर बिदुगाद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, बावन जी मंदिर के वैदेही बल्लभ शरण, नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास आदि सहित रामनगरी के संत शामिल रहे। उत्सव की अध्यक्षता रंगमहल के महंत रामशरणदास ने किया। उन्होंने संतों का स्वागत करने के साथ आभारपूर्वक विदाई दी। रात्रि आठ बजे से शुरू संगीत संध्या मध्यरात्रि शयन आरती के साथ समाप्त हुई।
रंगमहल में आचार्य परम्परा में परम्परागत रीति से ही उत्सव मनाया जाता है। यही नहीं आचार्यों की ओर से प्रयुक्त होने वाले उपकरणों का भी प्रयोग होता रहा है। इसी कड़ी में झूलन के लिए ढ़ाई सौ साल पुराने लकड़ी के झूले का प्रयोग हो रहा था। मंदिर महंत रामशरण दास ने बताया कि परमात्मा की इच्छा से उसी लकड़ी पर चांदी का वर्क चढ़ाकर इस साल भगवान को उसी झूले पर प्रतिष्ठित किया गया है। झूले के निर्माण में साठ किलो चांदी का इस्तेमाल हुआ है। यहां चल रहे झूलनोत्सव की कड़ी में सावन तीज यानि की 31 जुलाई को मणिपर्वत के झूलन उत्सव के लिए भी ठाकुरजी को शोभायात्रा के रुप में धूमधाम से ले जाया जाएगा।
रंगमहल की आचार्य परम्परा में सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी को गलबहियां की झांकी सजाए जाने की प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है। मंदिर के पीठाधीश्वर महंत रामशरण दास महाराज ने बताया कि वाह्य जगत के लिए यह एक सांस्कृतिक उत्सव है लेकिन साधकों की दृष्टि से यह उपासना परम्परा है जो तत् सुखी सुखित्व की भावना से प्रेरित है जिसमें साधक आराध्य के सुख में ही सुख और आऩद की अनुभूति कर निरन्तर उन्हीं के चिंतन-मनन में व्यस्त रहते है जैसे कि एक मां अपने नन्हें बच्चे की चिंता करते हुए अपने सभी क्रियाकलाप को उसी के लिए समर्पित कर देती है। कार्यक्रम की देखरेख पुजारी साकेत जी व राहुल जी कर रहे है।
: श्रीमदभागवत कथा श्रीकृष्ण का वांगमय है: पं दीनानाथ
Mon, Jul 25, 2022
हनुमान बाग मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ महंत जगदीश दास महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या के वासुदेव घाट स्थित प्रमुख मंदिर श्री हनुमान बाग में सावन मास के पवित्र अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का भव्य शुभारंभ दीप प्रज्वलित के साथ हुआ,कथा का शुभारंभ महंत जगदीश दास महाराज ने किया।व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा पंडित दीनानाथ पाण्डेय कर रहे। व्यासपीठ से कथा का महात्म्य बताते हुए कहते है कि भागवत कथा जीते जी ही नही मरने वालों को भी तार देती है।दीनानाथ जी ने कहा कि इन सबसे अधिक श्रीकृण की आराधना प्रभावशाली है, तभी तो गीता में श्रीकृष्ण ने खुद कहा है कि ”सर्व धमार्न परित्यज्य माम एकम शरणम व्रज” अथार्त सभी परंपराओं और युक्तियों को छोड़कर जो व्यक्ति केवल श्रीकृष्ण की आराधना करता है उसके लिए बाधाएं अवसर में और कांटे फूल में बदल जाते हैं। भगवताचार्य दीनानाथ जी ने बताया कि श्रीमदभागवत श्रीकृष्ण का वांगमय है। यही नही श्रीमदभागवत श्रीकृष्ण के मुख से निकली वाणी है और जब संकट में भगवत वाणी का श्रवण होता है तो संकट स्वत: टल जाता है। राजा परिक्षित से जब ऋषि शमीक का अपमान हो गया और ऋगी ऋषि के कारण सात दिन में सर्पदंश से मृत्यु का श्राप मिला तो सभी ऋषि मुनियो एवं महापुरूषों ने श्राप से मुक्ति के जो उपाय बताए वे प्रभावहीन रहे और जब शुकदेव महराज ने उन्हें भागवत का परायण कराया तो कथा का विश्राम होते होते परीक्षित का भय दूर हुआ और उन्हें सदगति प्राप्त हुई।
कथाव्यास दीनानाथ पाण्डेय का चंडीगढ़ के पंचकुला व वृंदावन धाम में मंदिर है। जहां पर हजारों वेदपाठी विद्या अध्ययन कर रहे हैं। महोत्सव की अध्यक्षता हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज कर रहें। व्यवस्था में सुनील दास, रोहित शास्त्री सहित पूरा हनुमान बाग परिवार है । कार्यक्रम की आयोजक श्रीमती आशा गोयल व कृष्णा गोयल है। श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का समापन 30 जुलाई को होगा। ये कथा दो सत्र में होगी। कथा का प्रथम सत्र सुबह 11 बजे से 1 बजे तक व शाम को 6 से 8 बजे तक होगा। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पंजाब हरियाणा समेत पूरे भारत से हजारों शिष्य परिकर आये है।