: दिव्य द्रव्यों, फलों के रस व पवित्र नदियों के जल से भगवान रामलला का हुआ सहस्त्र घटाभिषेक
Thu, Jul 21, 2022
त्रि दिवसीय सहस्त्र घटाभिषेक महोत्सव का समारोह पूर्वक हुआ समापन, धूमधाम से मनाया गया भगवान का कल्याण महोत्सव
अयोध्या। श्री राम लला सदन देवस्थानम में चल रहें तीन दिवसीय निष्क्रमण संस्कार का भव्य दिव्य समापन भगवान का कल्याण महोत्सव विवाहोत्सव के हुआ। निष्क्रमण संस्कार का मुख्य उत्सव आज था। जिसमें एक हजार घड़ों में संरक्षित दिव्य द्रव्यों, फलों के रस एवं सरयू सहित अन्य पवित्र नदियों के जल से आराध्य विग्रह का महाभिषेक किया गया। दक्षिण के आचार्यों द्धारा पूरे वैदिक रीति रिवाज के पूजन अर्चन किया गया।
श्री राम जन्म भूमि के निकट श्री राम लला देवस्थानम में चल रहे निष्क्रमण संस्कार की भव्य छटा देखते ही बन रही थी। 21 विद्वानों द्वारा भगवान का सस्वर पाठ और हवन पूजन की सुगंध पूरी अयोध्या नगरी को मंत्रमुग्ध कर रही है। मंदिर परिसर में स्थापित भगवान श्री राम माता जानकी, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न और हनुमान जी महाराज का निष्क्रमण संस्कार महोत्सव दक्षिण भारत की सनातन परंपरा की अलौकिक छवि देखते ही बन रही थी।
श्री राम लला सदन देवस्थानम के पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी डॉ राघवाचार्य महाराज के सानिध्य में निष्क्रमण संस्कार 19 जुलाई को प्रारंभ हुआ यह संस्कार प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के 48 दिन बीत जाने पर किया जाता है। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि निष्क्रमण संस्कार के दिन भगवान को बाहर निकाला जाता है और उनका अभिषेक पूजन करके सूर्य और चंद्र का दर्शन कराया जाता है। निष्क्रमण संस्कार की सांध्यकालीन बेला में कल्याण महोत्सव का आयोजन किया गया।श्री राम लला देवस्थानम वही मंदिर है जहां भगवान श्री राम भरत लक्ष्मण और शत्रुघ्न का नामकरण संस्कार किया गया था। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में जिन शिशुओं का नामकरण संस्कार होता है वह निश्चित ही प्रखर बुद्धि के होते है और अपने माता पिता की आज्ञा मानते हुए समाज के लिए निरंतर कार्य करते रहते है। श्री रंगमन्दिर श्री वृंदावन धाम के पीठाधीश्वर महंत गोवर्धन रंगाचार्य के निर्देशन में निष्क्रमण संस्कार कार्यक्रम संपन्न हुआ। महोत्सव स्वामी सम्पत कुमार चेन्नई, राम प्रिये स्वामी के पावन सानिध्य में सम्पन्न हुआ। इस मौके पर गोविंद कुमार लोहिया हैदराबाद, सतीश चंद्र मालू सोलापुर,पुष्पराज गिरी सागर, राघवेंद्र मिश्र, शिवेंद्र गुप्ता लखनऊ, राघवेंद्र मिश्र अप्पू, मनोज कुमार ,विनोद कुमार सहित भारत के अनेक प्रान्तों से शिष्य परिकर शामिल हुए।
: रामलला देवस्थानम् में निष्क्रमण संस्कार महोत्सव का हुआ शुभारंभ
Wed, Jul 20, 2022
दाक्षिणात्य आचार्यों द्धारा कलश स्थापना, सुदर्शन महायज्ञ अवभृत्य स्न्नान का हुआ आयोजन
बच्चों के नामकरण संस्कार के लिए प्रसिद्ध है रामलला सदन:पीठाधीश्वर जगतगुरु राघवाचार्य
अयोध्या। भगवान श्री रामलला की जन्मभूमि के निकट रामकोट क्षेत्र में दक्षिण भारतीय वास्तुशैली में निर्मित श्री रामलला सदन देवस्थानम मेंं तीन दिवसीय सहस्त्र घटाभिषेक महोत्सव निष्क्रमण संस्कार का समारोह पूर्वक शुभारंभ हुआ। जिसमें दाक्षिणात्य आचार्यों द्धारा आज कलश स्थापन, सुदर्शन महायज्ञ एवं अवभृत्य स्न्नान का कार्यक्रम हुआ। इस उत्सव के मुख्य अतिथि वृंदावन स्थित भगवान रंगनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी गोवर्धन रंगाचार्य महाराज रहें।
आज से 48 दिन पहले एक जून को मंदिर परिसर में स्थापित भगवान श्री राम भारत लक्ष्मण शत्रुघ्न माता सीता और हनुमान जी महाराज की की गई थी प्राण प्रतिष्ठा। निष्क्रमण संस्कार 16 संस्कारों में से एक संस्कार है जिसको जन्म सवा महीने के बाद किया जाता है। ऐसी शास्त्रीय मान्यता है कि जिस दिन भगवान की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है उसके सवा महीने बाद निष्क्रमण संस्कार मनाया जाता है। दक्षिण भारत से आए 21 वैदिक विद्वानों ने निष्क्रमण संस्कार के पहले दिन भगवान की पूजन अर्चन के साथ कलश स्थापन एंव सुदर्शन महायज्ञ अवभृत्य स्न्नान मृदा हरण और अंकुरापर्ण से हुआ प्रारंभ।
श्रीराम लला देवस्थानम के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ राघवाचार्य महाराज के संयोजन भगवान का तीन दिवसीय निष्क्रमण संस्कार मनाया जा रहा है जिसमें देश के विभिन्न कोने से आए हुए संत महंत व विद्वान सम्मिलित हो रहे हैं। यह वही मंदिर है जहां राजा दशरथ जी महाराज ने अपने चारों पुत्र राम भरत लक्ष्मण और शत्रुघ्न का नामकरण संस्कार किया था।रामलला सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा. राघवाचार्य महाराज ने बताया कि निष्क्रमण संस्कार का अभिप्राय है बाहर निकलना। इस संस्कार में भगवान को सूर्य तथा चन्द्रमा की ज्योति दिखाने का विधान है। भगवान् भास्कर के तेज तथा चन्द्रमा की शीतलता से शिशु रूपी भगवान को बाह्य जगत से परिचित कराना ही इसका उद्देश्य है।
: तोताद्रि मठ में इंद्र-वरुण देवता के लिए अनुष्ठान शुरू
Tue, Jul 19, 2022
अयोध्या। जलवृष्टि के लिए उत्तर तोताद्रि मठ, विभीषण कुंड में इंद्र व वरूण देवता की प्रसन्नता के लिए अनुष्ठान का शुभारंभ किया गया। अनुष्ठान को तोताद्रिमठ पीठाधीश्वर जगदगुरू रामानुजाचार्य स्वामी अनंताचार्य महाराज ने संयोजन प्रदान किया। सोमवार को वैदिक मंत्रोच्चार संग अनुष्ठान का श्रीगणेश हुआ।
इसके बाद स्वामी अनंताचार्य महाराज और उनके शिष्य बालदेशिक सोपान ट्रस्ट मैनेजर केशव नारायण दुबे (प्रपन्नाचार्य) ने इंद्रदेव, वरूण देव समेत अन्य देवताओं का पूजन-अर्चन कर आरती उतारी। तोताद्रिमठ पीठाधीश्वर स्वामी अनंताचार्य महाराज ने कहा कि अनुष्ठान के माध्यम से जन कल्याणार्थ इंद्र और वरूण देवता की प्रसन्नता के लिए भगवान से प्रार्थना की जा रही है ताकि वे बादल बनें व जल वृष्टि हो। हमारी धरा सस्य श्यामला बनने के योग्य हो सके। इस समय बिना जल के सब सूखे चले जा रहे हैं। किसान से लेकर आम जनमानस दुखी है। जो धान लगाए गए हैं वह भी जल के अभाव में सूख रहे हैं।