: संत ओमदास का हुआ उपनयन संस्कार बने पुजारी: संजय दास
Thu, May 5, 2022
लवकुश मंदिर में संकटमोचन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास ने अपने शिष्य ओमदास को बनाया मंदिर का पुजारी
अयोध्या। रामनगरी के रामकोट स्थित लवकुश आश्रम में आज संत ओमदास दास का उपनयन संस्कार पूरे विधि विधान से हुआ। यह कार्यक्रम संकटमोचन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास के अध्यक्षता में हुआ। महंत संजय दास ने अपने शिष्य संत ओमदास को लवकुश आश्रम का पुजारी नियुक्त किया। जिससे ठाकुर जी की पूजा राग भोग अच्छे से चलती रहें। कार्यक्रम का संयोजन मंदिर के महंत रामकेवल दास ने किया। कार्यक्रम का समापन भंडारे के साथ हुआ। जिसमें महंत माधव दास, महंत रामप्रसाद दास, महंत अजीत दास, महंत बलराम दास, महंत सत्यदेव दास, महंत रामदास, लल्लू महंत, पुजारी हेमंत दास, अभिषेक दास, अभय दास, रामायण अंकित दास, समाजसेवी शिवम श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।
: हनुमान बाग में बह रही वाल्मीकीय रामायण कथा की रसधार
Thu, May 5, 2022
रामनगरी में महाउत्सव की चर्चा चहुंओर, दक्षिण परम्परा के पूजा पद्धति से हो रहा अनुष्ठान
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में चतुर्विशाति कुण्डात्मक महा साम्राज्य पटृभिषेक नवाह्रिक महायज्ञ महोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। पूरा हनुमान बाग वाल्मीकीय रामायण पाठ के आनंद में गोता लगा रहा। महोत्सव के चतुर्थ दिवस प्रातःकाल 108 वैदिक पारायण पाठ कर रहे जिनमें उनके साथ दक्षिण भारत से आये हजारों भक्त भी पारायण पाठ कर रहे तो 51 आचार्य हवन कुंड में आहुतियां डाल रहे। प्रवचन सत्र में व्यास पीठ से कथा कहते प्रख्यात विद्धान गोपालकृष्णमाचार्य जी ने अहिल्या उद्धार जनकपुर दर्शन, धनुष भंग, और सीता राम विवाह का वर्णन किया। सीता राम विवाह को लेकर पूरे पंडाल को रंग-बिरंगे गुब्बारों और फूलों से सजाया गया था। उन्होंने कहा कि संत-महात्माओं का आगमन सदैव मंगलकारी होता है, संतों से कभी कार्य की हानि नहीं होती, अपितु उनसे कार्य की सिद्धि होती है। उन्होंने कहा कि संतों के चरणों में समस्त तीर्थों का निवास होता है, क्योंकि संत के चरण तीर्थों में घूमते-रहते हैं, वो सभी जगह जाते हैं, इसलिए जब कभी भी संत आएं तो उनके चरणों को धो लेना चाहिए, क्योंकि उनके चरणों में सारे तीर्थों का स्पर्श पहले से ही विद्यमान रहता है। इसीलिए संतों को तीर्थंकर कहा जाता है। गोपालकृष्णमाचार्य जी ने कहा कि तीर्थ तभी तीर्थ बनता है जब वहां संतों के चरण पड़ जाते हैं, अगर तीर्थों में संत ना जाएं, केवल सामान्य लोग ही जाएं तो वो तीर्थ, तीर्थ नहीं होता। भागवत में गंगाजी की महिमा का वर्णन है, जिसमें गंगाजी कहती हैं मेरे अंदर बडे़-बड़े संत महात्माओं के डुबकी लगाने से लाखों लोगों को पवित्र करने का सामर्थ्य पैदा हो जाता है। इसीलिए आज भी कुंभ में संत-महात्माओं पहले शाही स्नान इसलिए करते हैं, ताकि संतो के नहाने से उस गंगा में लाखों लोगों को पवित्र करने का सामर्थ्य पैदा हो जाए। ये भागवत शास्त्र में लिखा प्रमाण है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में वर्णित है कि जिसके घर के दरवाजे पर संतों के चरण नहीं धोये जाते हों और संतों के चरण के धोने से वहां की जमीन ना भीगती हो, द्वार पर संतों का चरण प्रक्षालन नहीं होता है वो घर शमशान के समान है। संत महात्मा और विद्वान पुरूषों का सबसे बड़ा सम्मान विनम्रतापूर्वक उनको प्रमाण करना ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। प्रमाण से बड़ा कोई सम्मान नहीं होता। लेकिन वो प्रणाम बनावटी नहीं यथार्थ हो। नमस्कार पद की न्याय शास्त्र में व्याख्या है कि जिसको हम प्रणाम कर रहे हैं उसके सामने मेरा अपकर्ष और जिसको प्रणाम कर रहे हैं उसका उत्कर्ष। हमारी गतिविधि, क्रिया के द्वारा परिलक्षित हो। उसका नाम नमस्कार है। ये नमस्कार प्रणाम ये अंजली मुद्रा इतनी अद्भुत मुद्रा है, जिसके लिए शास्त्रो में कहा गया है कि ये मुद्रा ऐसी विलक्षण मुद्रा है कि एक क्षण में देवता को प्रसन्न कर देती है, लेकिन वो सच्चे मन से हो।गोपालकृष्णमाचार्य जी ने कहा कि वास्तविक स्वरूप को लोग समझें, वैदिक विद्वान जब बैठकर वेदध्वनि व पुराण का पारायण करते हैं, भगवान का मंत्रों द्वारा हवन होता है, एक दिव्य संदेश पूरी दुनिया को सनातन का संदेश जाता है। पूरे विश्व में सनातन धर्म एक धर्म ऐसा है जो अपने लिए नहीं जीता, बल्कि सारे विश्व के प्राणी मात्र की कल्याण की कामना करता है। ऐसा विस्तृत व व्यापक धर्म दुनिया में कहीं नहीं है। हम जितनी भी क्रिया करते हैं वा जग के कल्याण के लिए करते हैं। कथा से पूर्व यजमान लक्ष्मी न्यायापति जी ने व्यासपीठ का पूजन किया। यह आयोजन श्री वेंकाटाचार्य वैदिक संस्थान के तत्वावधान में हो रहा है। कार्यक्रम हनुमान बाग सेवा संस्थान के सानिध्य में सम्पादित हो रहा है।इस महाउत्सव को हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। इस मौके पर मंदिर के व्यवस्थापक सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री सहित दक्षिण से हजारों भक्त इस महाउत्सव में शामिल हुए।
: संत परम्परा की अनमोल कड़ी थे पूज्य श्रीमहंत संतगोपाल दास: महंत बालयोगी श्रीधरदास
Thu, May 5, 2022
प्रथम पुण्यतिथि पर संतो ने किया नमन
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी अयोध्या जहां अनेक भजनानंदी संत हुए है जिनके त्याग तपस्या के बलबूते न सिर्फ अयोध्या बल्कि पूरे भारत में संत समाज की गरिमा वैभव को स्थापित किया है। ऐसा ही प्रसिद्ध मंदिर श्यामासदन है। जहां पर सच्ची साधना संतो की जगजाहिर है। श्यामासदन के प्रथम हुए महंत रामकिंकर महाराज द्धितीय लाल जी महाराज व तृतीय महंत संत गोपाल दास महाराज जिनकी त्याग तपस्या साधना की चर्चा आज भी अयोध्या ही नही आसपास के कई जिलों के लोग करते है। इन पूज्य आचार्यों के यशगाथा आज भी अयोध्या के संत समाज व आमजन करते है। इनकी त्याग तपस्या साधना की केंद्र बिंदु श्यामासदन मंदिर अपने विकास के ओर अग्रसर है। महंत संत गोपाल दास महाराज की प्रथम पुण्यतिथि मंगलवार को पूरी शिद्दत के साथ मनाई गई। मंदिर परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें रामनगरी के संत महंत आचार्य श्री को वाक्यमयी पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किये।
श्यामासदन मंदिर की बागडोर आज युवा हाथों में है। महंत संतगोपाल दास जी महाराज के सुयोग्य शिष्य बालयोगी महंत श्रीधर दास आज श्यामासदन के पीठाधीश्वर है। अपने गुरु के बतायें मार्गों का अनुसरण करते हुए बालयोगी महंत श्रीधर दास मंदिर के विकास, गौ सेवा, साधु सेवा के तनमयता से लीन होकर करते है। श्यामा सदन मंदिर में भगवान की अष्टयाम सेवा लगातार हो रही है। साधु सेवा, गौ सेवा बहुत ही बड़े पैमाने पर होता है। श्यामासदन पीठाधीश्वर महंत बालयोगी श्रीधर दास महाराज ने बताया कि आज जो भी कुछ हूँ पूज्य गुरुदेव जी की कृपा है। गुरुदेव भगवान की प्रथम पुण्यतिथि मनाई गई। जिसमें रामनगरी समेत पूरे भारत से मंदिर के शिष्य परिकर शामिल हुए। इस श्रद्धांजलि सभा में बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश दास, महंत कृपालु रामभूषण दास, महंत बृजमोहन दास, महंत विवेक आचारी, महंत छविराम दास, महंत गिरीश दास, महंत बालयोगी रामदास, नागा रामलखन दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।