: श्रीराम का चरित्र मानव जीवन का परम पाथेय है: महंत कमलनयनदास
Sun, May 22, 2022
भरत जी की तपस्थली ,नन्दीग्राम,भरतकुंड पर श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा का भव्य शुभारंभ
वाल्मीकीय रामायण सृष्टि का प्रथम महाकाव्य: रामानुजाचार्य
व्यासपीठ का पूजन करते श्रुति धर
व्यासपीठ से कथा श्रवण करा रहे आचार्य जी
अयोध्या। वाल्मीकीय रामायण सृष्टि का प्रथम महाकाव्य है। राम केवल व्यक्ति की संज्ञा नही अपितु एक जीवन-पद्धति की संज्ञा है।महर्षि वाल्मीकि ने राम के चरित्र को मानवीयता के धरातल पर चित्रित किया है।वाल्मीकीय रामायण का प्राण जानकी का चरित्र है। उक्त बातें जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने भरत जी की तपस्थली ,नन्दीग्राम,भरतकुंड पर श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा के प्रथम दिवस में कथा शुभारंभ के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि जानकी जी की वेदना को महर्षि वाल्मीकि ने अभिव्यक्ति दी है।वेदना के विना हम मानव कहलाने के अधिकारी नहीं हैं।श्रीजानकी का चरित्र करूणा का चरित्र है।श्रीजानकी चरित्र श्रवण का फल यह है कि हृदय में करूणा का अवतरण हो जाये। जगद्गुरू रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि तब तक रामायण की रचना नहीं कर पाये जब तक श्रीजानकी वाल्मीकि के आश्रम पर नहीं गयी।काव्य विना पीड़ा के प्रकट नहीं होता।महर्षि वाल्मीकि के हृदय में इतनी करुणा का उदय हुआ कि एक बहेलिये के बाण से मरे क्रौंच पक्षी को देखकर उनका हृदय रो उठा और सहसा एक शोक प्रकट हुआ जो श्लोक बन गया।दुनिया की पहली कविता वाल्मीकि की पीड़ा से प्रकट हुयी।पर इतनी पीड़ा करूणामयी जानकी के चरित्र को लिखने में समर्थ नहीं हो पायी।अत: श्रीराम ने जानकी को महर्षि वाल्मीकि के आश्रम पर भेजा।जब महर्षि वाल्मीकि ने श्रीसीता की पीड़ा देखी तो हृदय में इतनी करूणा आयी कि वो रामायण लिखने में समर्थ हो गये। रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी ने व्यास से श्रीमद्वावाल्मीकीय रामायण की कथा को समझाते हुए कहा कि श्रीरामायण श्रेष्ठ इतिहास है क्योंकि इसमे श्रीजानकी जी की करुणा का वर्णन है।श्रीजानकी जी स्वयं को बन्दिनी बनाकर रावण जैसे दुष्ट जीव का उद्धार करा देती है। संसार की विभिन्न भाषाओं में जो उच्चकोटि के महाकाव्य हैं उनमें महर्षि वाल्मीकि प्रणीत रामायण का स्थान सर्वोच्च है। वाल्मीकि रामायण में जिस आस्तिकता, धार्मिकता, प्रभुभक्ति, उदात्त एवं दिव्य भावनाओं और उच्च नैतिक आदर्शों का वर्णन मिलता है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। आचार्य रत्नेशप्रपन्नाचार्य ने कहा कि रामायण में गृहस्थ जीवन की सर्वश्रेष्ठता, उपादेयता, तथा महत्ता को प्रतिपादित किया गया है। आदर्श पिता, आदर्श माता, आदर्श भ्राता, आदर्श पति, आदर्श पत्नी, आदर्श राजा आदि सभी का यथार्थ चित्रण किया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि सर्वोत्कृष्ट आदर्श की स्थापना के लिए ही महर्षि वाल्मीकि ने इस काव्य की रचना की। यह भारतीयों का आचारग्रन्थ भी बन गया है। कथा का शुभारंभ मणिराम दास छावनी के उत्ताराधिकारी महंत कमलनयन दास, मधुकरिया संत मिथिला बिहारी दास,
संत परमात्मा दास व श्रुतिधर द्विवेदी ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलन कर किया। यह महोत्सव श्री सीताराम परिवार नन्दीग्राम महोत्सव मणिराम दास छावनी अयोध्या के तत्वावधान में आयोजित किया गया है। राम कथा महोत्सव 29 मई तक चलेगा। 30 को वृहद भंडारे के साथ महोत्सव का होगा समापन। कथा में भक्तों का भारी हुजूम रहा।
: फूलों से महका राम जन्म भूमि, कनक भवन व हनुमानगढ़ी
Tue, May 17, 2022
देशी विदेशी फूलों से भगवान का हुआ भव्य श्रृंगार, दिव्य फूल बंगला में सजे भगवान का दर्शन कर धन्य हुए संत साधक
मां सरयू का पावन तट हुआ रोशन, असंख्य दीप से घाट हुआ जगमग, फूलबंग्ला झांकी के साथ हुई महाआरती
अयोध्या। रामनगरी में ज्येष्ठ अमावस्या के पर्व पर रामलला, कनक भवन व हनुमानगढ़ी सहित मां सरयू की भव्य फूल बंगला की झांकी सजी। इसमें देशी विदेशी फूलों से भगवान का भव्य श्रृंगार हुआ। इस झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु व संत आनंद में डूब गए। भीषण गर्मी में जहां एक ओर इंसान और पशु- पक्षी भी परेशान हैं वहीं धार्मिक नगरी अयोध्या के मंदिरों में मानव के रूप में की जाने वाली भगवान की सेवा व पूजा की कड़ी में उन्हें भीषण गर्मी से राहत दिलाने के भव्य फूल बगंला की झांकी सजाई गई। झांकी में आरकेट गेंदा नींबू कलर गेंदा मोंगरा बेला रजनीगंधा गुलाब सहित सैकड़ों प्रकार के फूलों का प्रयोग किया गया। वृंदावन के जगद्गुरू पीपाद्धाराचार्य श्रीमहंत बलराम दास जी महाराज व उनके शिष्यों द्वारा दो दशकों से फूल बगंला की झांकी सजाकर अपने आराध्य की सेवा की जा रही है।
रामलला हनुमानगढ़ी व कनक भवन में अपने आराध्य को फूलों के महल में दर्शन करने के लिए अयोध्या सहित आसपास के हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ रही। जगद्गुरू पीपाद्धाराचार्य श्रीमहंत बलराम दास ने बताया कि यह हमारा भाव है कि भगवान को भी गर्मी लगती है। हम संत भगवान के सुख में ही खुद को सुखी महसूस करते है। उन्होंने कहा कि अपने ठाकुर जी को फूलों के महल में देखकर परम आनद की प्राप्ति हुई। रामजन्मभूमि परिसर में विराजमान भगवान श्री राम के मंदिर में मंगलवार शाम फूलबंगला की झांकी सजाई गई। पूरे मंदिर परिसर को फूलों से सजाया गया। भगवान रामलला को शीतलता प्रदान करने के लिए फूल बंगला की झांकी का आयोजन हुआ। मां सरयू के पावन तट को सजाकर दीपदान किया गया। आरती घाट को फूलों से सजाकर सरयू मां को फूलों के महल बनाकर विराजमान कराया गया।इसके बाद सौकड़ों बत्ती की महाआरती की गई।
: कनक भवन व हनुमानगढ़ी में फूलबंग्ला मंगलवार को
Mon, May 16, 2022
फूलबंग्ले में विराजेंगे कनकबिहारी सरकार, रामलला व हनुमान जी
तपती गर्मी में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए होता है फूलबंग्ला झांकी: पीपाद्वाराचार्य
अयोध्या। वैष्णवनगरी के मंदिरों में ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी में भगवान को कूल-कूल रखने के लिए संतों ने फूलबंग्ले की झांकी के आयोजन की परंपरा शुरू की थी। उत्सव के रूप में आयोजित प्राचीन काल की यह परंपरा आधुनिक काल में भी कायम है। वह भी तब जब अधिकांश मंदिरों में पंखे व कूलर की व्यवस्था की जा चुकी है। इसी परंपरा को आज भी बड़ी शिद्दत से निभा रहें वृंदावन से उच्चकोटि के संत जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज। 17 मई मंगलवार को ज्येष्ठ मास पर रामजन्मभूमि में भगवान रामलला सरकार को कनकभवन में बिहारी सरकार व हनुमानगढ़ी में हनुमानजी की भव्य फूलबंग्ला झांकी सजायी जायेगी।
जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज बताते है कि मंदिरों में विराजमान भगवान के विग्रह संत-साधकों के लिए वस्तुत: अर्चावतार की भांति हैं। मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठित देव प्रतिमा को सजीव माना जाता है। यही कारण है कि साधक संतों ने उपासना के क्रम में विराजमान भगवान के अष्टयाम सेवा पद्घति अपनाई। इस सेवा पद्घित में भगवान की भी सेवा जीव स्वरूप में ही की जाती है। जिस प्रकार जीव जैसे सोता, जागता है उसी प्रकार भगवान के उत्थापन व दैनिक क्रिया कर्म के बाद उनका श्रृंगार पूजन, आरती भोग-राग का प्रबंध किया जाता है। इसी क्रम में भगवान को गर्मी से बचाने के लिए पुरातन काल में संतों ने फूलबंग्ला झांकी की परंपरा का भी शुभारंभ किया था, जिसका अनुपालन आज भी हम कर रहे है। पीपाद्वाराचार्य ने बताया कि धर्मनगरी वृंदावन व अयोध्या में प्रतिवर्ष दिव्य भव्य फूल बंग्ला झांकी का आयोजन होता है। इस बार यह दिव्य आयोजन 17 मई मंगलवार को हो रहा है। उन्होंने बताया कि झांकी काेलकाता के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार किया जा रहा है, जिसमें उपयोग किए जाने वाले फूल बनारस, लखनऊ, वृन्दावन, कलकत्ता आदि जगहों से मंगवाए है। इसके आलावा कुछ पुष्प विदेशाें से भी आयातित किए गये है। यह आयोजन जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज वृंदावन और सभी भक्तो द्वारा किया जाता है।