: शिद्दत से शिरोधार्य हुए रामानुजाचार्य स्वामी पुरूषाेत्तमाचार्य
Sat, Mar 5, 2022
पुरूषाेत्तमाचार्य जी ने राममन्दिर आन्दाेलन में अमिट छाप छोड़ी, जिसे कभी भुलाया नही जा सकता
अयोध्या। राम मंदिर आन्दोलन का मुख्य केंद्र रहा श्री सुग्रीव किला के संस्थापक आचार्य रामानुजाचार्य स्वामी पुरूषाेत्तमाचार्य जी महाराज का तीसरी पुण्यतिथि बड़े ही हावभाव के साथ मनाया गया। महोत्सव का समापन शनिवार को वृहद भंडारे के साथ संत धर्माचार्यों ने आचार्य श्री को श्रद्धांजलि अर्पित की।रामानुजाचार्य स्वामी पुरूषाेत्तमाचार्य जी महाराज का प्रभु श्रीराम से अगाध प्रेम था। यही कारण था कि वह राममन्दिर आन्दाेलन में शुरूवाती दाैर से ही जुड़ गए और उनका आश्रम आन्दाेलन का मुख्य केन्द्र विन्दु बना। जहां से समय-समय पर उसे गति दी गई। वह रामजन्मभूमि आन्दाेलन के अग्रणी याेद्धाओं में से एक थे। जिन्हाेंने भगवान राम और राममन्दिर के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्हाेंने मन्दिर आन्दाेलन में अमिट छाप छोड़ी। जिसे कभी भुलाया नही जा सकता है। उनका सपना था कि श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मन्दिर बने। हमारे रामलला टाट-पट्टी से निकलकर दिव्य भवन में विराजमान हाे। राममन्दिर का भव्य निर्माण कार्य जारी है।जिससे महाराजश्री का सपना जल्द साकार हाेने वाला है। पूज्य आचार्य के 3वीं पुण्यतिथि पर रामनगरी के संत धर्माचार्य का स्वागत परम्परागत तरीकें से आश्रम के वर्तमान पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य महाराज व मुख्य पुजारी स्वामी अनंत पद्मनाभाचार्य जी ने किया।जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य महाराज कहते है कि महाराज श्री काे देखकर ही हम बड़े हुए हैं। उनके आदर्शों व किए गए कार्याें काे कभी भुलाया नही जा सकता है। उन्हाेंने रामजन्मभूमि के लिए बहुत त्याग किया। अब राममन्दिर का निर्माण शुरु हो गया है। हमारे गुरू की भी आखिरी इच्छा थी कि भव्य मन्दिर का निर्माण हाे और हमारे रामलला टेण्ट से निकलकर दिव्य भवन में विराजमान हाें। जाे अब पूरी हाेने जा रही है। लेकिन मलाल यही रहेगा कि वह अपने जीते-जी अपनी आंखाें से राममन्दिर का निर्माण देख पाए।इस मौके पर महंत सुरेश दास, जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य, महंत रामकुमार दास, महंत रामभूषण दास कृपालु, महंत उद्धव शरण, महंत जनमेजय शरण,नागा रामलखन दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: हिंद केशरी बाबा हरिशंकर दास पहलवान को संतो ने किया नमन
Sat, Mar 5, 2022
रामनाम संकीर्तन, भव्य रामार्चान पूजन व वृहद भंडारा के साथ तीन दिवसीय कार्यक्रम का हुआ समापन
महंत बलराम दास महाराज व पातेपुर स्टेट युवराज महंत विश्वमोहन दास जी महाराज ने संतो का किया परम्परागत स्वागत
अयोध्या। मल्लविद्या के पुरोधा हिंद केसरी की उपाधि से विभूषित बड़े पहलवान बाबा हरिशंकर दास जी महाराज की 6वीं पुण्यतिथि के पावन स्मृति में हनुमानगढ़ी पर तीन दिवसीय भव्य कार्यक्रम का समापन आज वृहद भंडारे के साथ किया गया। कार्यक्रम में गुरुवार को रामनाम संकीर्तन व शुक्रवार को भव्य रामार्चान पूजन किया गया। जिसमें विशिष्ट संत धर्माचार्यों का महंत बलराम दास महाराज व नागापना महोत्सव पट्टी सागरिया के अध्यक्ष पातेपुर स्टेट युवराज महंत विश्वमोहन दास जी महाराज ने अभिन्नदन किया। मल्लविद्या के पुरोधा हिंद केसरी की उपाधि से विभूषित बड़े पहलवान बाबा हरिशंकर दास ने देश ही नही पूरे विश्व में कुश्ती को एक अलग पहचान दी है। देश के माने हुए पहलवानों में शुमार अयोध्या के मशहूर संत हिंद केसरी बाबा हरिशंकर दास पहलवान का नाम आता है। बाबा हरिशंकर दास बड़े पहलवान की 6वीं पुण्यतिथि पर तीन दिवसीय का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का समापन आज वृहद भंडारे के साथ किया गया। कार्यक्रम के आयोजक महंत बलराम दास जी महाराज ने बताया कि हर वर्ष वह आज के इस पुनीत दिन पर 101 गरीब कन्याओं का सामुहिक विवाह कराते थे। यह आयोजन वह अपने दुलहादेपुर दरियाबाद वाले आश्रम पर कराते थे। विगत दो वर्ष से कोरोना के कारण सामुहिक विवाह का कार्यक्रम नही हो पा रहा है। अगले वर्ष और भी बड़े पैमाने पर कार्यक्रम होगा। महंत बलराम दास ने कहा कि आज तीन दिवसीय महोत्सव का भव्य दिव्य समापन हो रहा है। इसमें पातेपुर स्टेट युवराज महंत विश्वमोहन दास जी महाराज व लक्ष्मी नारायण पाठक लल्लू पाठक के साथ सभी शिष्यों आश्रम से जुड़े भक्तों के सहयोग से होता है। पातेपुर स्टेट युवराज महंत विश्वमोहन दास जी महाराज ने कहा कि पूज्य महाराज जी के 6वें पुण्यतिथि पर हम सब शामिल हुए है। आज बड़ा ही पुनीत दिन है। आज भी बड़े महाराज जी की कृपा हम सभी पर बनी है। ऐसे ही लगातार लोगों की सेवा होती रहे भगवान की यही कृपा है। कार्यक्रम में हनुमानगढ़ी के गद्दी नशीन श्रीमहंत प्रेमदास महाराज, हनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज, जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, संकट मोचन सेना के अध्यक्ष महंत संजय दास, महंत माधव दास, महंत रामकुमार दास, महंत रामप्रसाद दास, महंत रामभूषण दास कृपालु, महंत बृजमोहन दास, महंत रामकिसुन दास, संकट मोचन हनुमान किला के महंत परशुराम दास,महंत सत्यदेव दास,महंत मलखान दास,महंत रामजीशरण, महंत विजयरामदास, महंत धर्मदास, महंत रामनरेश दास पुजारी हेमंत दास, पुजारी रमेश दास, पुजारी राजूदास, महामंडलेश्वर आशुतोष दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।
: श्रीराम के राज्याभिषेक के साथ समारोहपूर्वक रामकथा का समापन
Thu, Mar 3, 2022
अखिल भारतीय श्रीपंच तेरह भाई त्यागी खाक चौक में महंत अयोध्या दास के अध्यक्षता में हुआ विशाल भंडारा
अखिल भारतीय श्रीपंच तेरह भाई त्यागी खाक चौक में भक्तों के साथ बैठे महंत अयोध्या दास
अयोध्या। जो किसी का अहित न करे, जो किसी के अहित की न सोचे वही साधु हैं। रुप बनाने से साधु नहीं बन जाते। उक्त बातें प्रख्यात राम कथा वाचक महंत अयोध्या दास जी महाराज ने खाक चौक में श्री रामकथा के समापन दिवस पर श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि रामायण के सभी पात्र आदर्श प्रस्तुत करते हैं। कहा कि श्रेष्ठ वही है जो पूरे समाज को समेटकर चलता है। कहा कि हमने ये किया हमने वो किया ऐसा न कहें। कहा कि आजकल बिना कुछ किए श्रेय लेने की होड़ मची है। श्रेय लेने से बचना चाहिए। कहा कि भक्त वो है जो अपनी उपलब्धि को अपनों में बांटता है। उन्होंने कहा कि कोई कार्य प्रसन्न मन से शुरू करें तो सफलता में संदेह नहीं हो सकता। सूर्पनखा के पति की हत्या रावण ने की थी। इसलिए सूर्पनखा रावण का विनाश चाहती थी। भगवान राम से रावण की शत्रुता का कारण वह बनी ताकि रावण का विनाश हो। कहा कि जब खरदूषण के वध होने की बात सूर्पनखा ने रावण को सुनाई तो रावण समझ गया भगवान का अवतार हो गया। सोचा तामस देह से भक्ति नहीं होगी तो मुक्ति के लिए उसने भगवान राम से बैर की युक्ति सोची। महंत अयोध्या दास जी ने कहा कि रावण को विभीषण से प्रेम था। इसलिए उसे अपमानित कर सभा से निकाल दिया ताकि लंका से दूर चला जाए और युद्ध में मारा न जाए। वह जानता था कि लंका के सारे योद्धा मारे जाएंगे। लंका की सत्ता संभालने के लिए विभीषण को जिंदा रखना चाहता था रावण। कहा कि भगवान राम ने रावण के सारे योद्धाओं, परिजनों व दैत्य सेना को मारकर उद्धार कर दिया। विभीषण को राजतिलक देकर सीता और लक्ष्मण, हनुमान, सुग्रीव, जाम्बवान, अंगद आदि के साथ अयोध्या आए। अयोध्या में खुशियां मनाई गई। भगवान राम का राज्याभिषेक हुआ। कथा के समापन पर आज मंदिर में विशाल भंडारे का दिव्य आयोजन किया गया। जिसमें रामनगरी के संतों का महंत अयोध्या दास व श्रीराम कथा महोत्सव के यजमान ने परम्परागत तरीकें से स्वागत किया। इस अवसर पर खाक चौक के श्रीमहंत बृजमोहन दास, श्रीमहंत कृष्ण गोपाल दास, महंत श्री पुजारी रामचरण दास, महंत परशुराम दास, महंत धर्मदास, महंत अयोध्या दास, महंत बालयोगी रामदास, महंत कमलादास रामायणी, महंत विजयरामदास यजमान श्रीमती राजेश्वरी श्री परमेश्वर वैष्णव सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।