: भगवान का भजन ही एक माध्यम है जीव के कल्याण का: महंत गणेश दास
Thu, Aug 18, 2022
काठिया मंदिर के ठाकुर जी के पाटोत्सव पर सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का हुआ शुभारंभ
अयोध्या। भव्य और दिव्य कलश यात्रा के साथ काठिया मंदिर के ठाकुर जी के पाटोत्सव के अवसर पर सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का हुआ शुभारंभ। 17 अगस्त से महंत गणेश दास जी महाराज द्वारा प्रातः 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक प्रथम सत्र की कथा प्रारंभ हुई और द्वितीय सत्र की कथा सायं 4 बजे से 7 बजे तक 24 अगस्त तक प्रतिदिन चलेगी।
प्रथम दिन के प्रथम सत्र की कथा में व्यासपीठ से महंत गणेश दास महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा महात्मा की कथा को विस्तार से सुनाया। उन्होंने गोकर्ण उपाख्यान के माध्यम से जिओ के वास्तविक स्वरूप का बोध कराया। संसार के प्रपंच में ना पढ़कर नित्य निरंतर भगवान का भजन करते रहना चाहिए जिससे लोगो का कल्याण होता है और भगवान का भजन ही एक माध्यम है जिससे जीव का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम संकीर्तन ही कलिकाल में जीव को सद् गति प्रदान करने वाला है। इस अवसर पर ब्रह्म पीठाधीश्वर राम रतन देवाचार्य महाराज, सीताराम दास सूरदास सहित अन्यान संत महंत एवं भक्तगण श्रीमद् भागवत कथा श्रवण के लिए पधारे।
: राम देश की एकता के प्रतीक हैं: राघवाचार्य
Thu, Aug 18, 2022
कहा, जीवन की धन्यता भौतिक पदार्थों के संग्रहण में नहीं अपितु सुविचारों एवं सद्गुणों के संचयन में निहित
अयोध्या। श्रीरामलला सदन देवस्थान ट्रस्ट रामकोट अयोध्या में चल रही श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा के पंचम दिवस जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज ने कहा कि राम तो प्रत्येक प्राणी में रमा हुआ है, राम चेतना और सजीवता का प्रमाण है। भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है। असीम ताकत अहंकार को जन्म देती है। लेकिन अपार शक्ति के बावजूद राम संयमित हैं।
वे सामाजिक हैं, लोकतांत्रिक हैं। वे मानवीय करुणा जानते हैं। वे मानते हैं पर हित सरिस धरम नहीं भाई। राम देश की एकता के प्रतीक हैं। जगद्गुरू जी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम समसामयिक है।भारतीय जनमानस के रोम-रोम में बसे श्रीराम की महिमा अपरंपार है। जीवन की धन्यता भौतिक पदार्थों के संग्रहण में नहीं अपितु सुविचारों एवं सद्गुणों के संचयन में निहित है। जिसके पास जितने श्रेष्ठ एवं पारमार्थिक विचार हैं वह उतना ही सम्पन्न प्राणी है। आज समाज में अशांति कोई पशु या जानवर नहीं फैला रहा, बल्कि अपने स्वरूप से अनभिज्ञ भौतिक पदार्थ की दौड़ में लगा मनुष्य ही फैला रहा है। दूसरों को शांत करने से पहले खुद शांत होना होगा। शांति व आनंद का स्रोत केवल ईश्वर है जो भक्ति द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
मनुष्य के अन्तःकरण में जो गुणों के बीज हैं, वे सत्संग और कुसंग के कारण अंकुरित होते हैं। अगर कुसंग के जल की वर्षा हो जाय तो अन्तःकरण में छिपे हुए दुर्गुण सामने आ जाते हैं। रामानुजाचार्य जी ने कहा कि व्यक्ति को कुसंग से बचना चाहिए, इसका तात्पर्य यह है कि अगर वर्षा ही नहीं होगी तो अंकुर भीतर से कैसे फूटेगा। अतएव यदि हम उन सहयोगियों के, जो हमारे दुर्गुणों को, हमारी दुर्बलताओं को बढ़ा दिया करते हैं, सन्निकट नहीं जावेंगे तो भले ही हमारे जीवन में दुर्गुणों के संस्कार विद्यमान हों, वे उभर नहीं पावेंगे। मानवीय जीवन के सद्गुणों के अंकुरित होने के लिए जिस जल की अपेक्षा है, वह है सत्संग का जल। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान ने किया।इस मौके पर विनोद कुमार मिश्र, मनोज कुमार तिवारी,राघवेंद्र मिश्र अप्पू, दया शंकर शुक्ल, रमेश मिश्र शिब्बू सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: नकारात्मकता नष्ट होगी तभी श्रद्धा बढ़ेगी: रामानुजाचार्य
Mon, Aug 15, 2022
रामलला सदन देवस्थान में जगद्गुरु रामानुजाचार्य डा राघवाचार्य महाराज के श्री मुखारविंद रामकथा अमृत वर्षा हो रही
अयोध्या। रामलला सदन देवस्थान में जगद्गुरु रामानुजाचार्य डा राघवाचार्य महाराज के श्री मुखारविंद से निसृत श्री राम कथा में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। डा राघवाचार्य ने कहा कि शाश्वत आत्मा में समाई हुई है, कुछ लोग उसे आत्मज्ञान कहते हैं। शरीर में व्याप्त आत्मा अमृत है अर्थात वह कभी मृत नहीं होती। तीर्थ में घूमने से पाप का भार कम होता है, शरीर में पाप अर्थात् ही नकारात्मकता नष्ट होगा तो सकारात्मकता अर्थात् ही श्रद्धा बढ़ने लगती है। उन्होंने कहा कि निरन्तर राम का नाम रटने से कोई पाप कर्म हमारे हाथों नहीं होगा। हमें राम जी को सर्वत्र समान समझना चाहिए, जहाँ कम समझ लिया वहां हम पाप में डूबते हैं। जगद्गुरु डा राघवाचार्य ने कहा कि काव्य की गणना को कांड कहते हैं। जीवन जीने के लिए गणित की नहीं अनुभव की आवश्यकता है। यदि आपका विश्वास गुरुदेव पर है तो गुरु की दी हुई गाली या अपशब्द भी आपके लिए वरदान बन जाता है। रामानुजाचार्य जी ने कहा कि बाहर का क्लेश कभी घर में नहीं लाना चाहिए, ऐसा हम शंकर भगवान से सीखना चाहिए। गाय का दूध पीए जो, दोनों समय अग्निहोत्र यज्ञ करने वाला, त्रिकाल संध्या करने वाला ब्राह्मण यदि हमारे लिए रामायण पाठ करता है तब हमारे वारे न्यारे हो जाते हैं।आगे सन्त जी बताते हैं कि प्रजापति दक्ष द्वारा आयोजित महायज्ञ में श्री रुद्र भगवान को अपमानित करने पर रूष्ट हुए रुद्र भगवान को शांत करने के लिए भगवान श्री नारायण ने शिवलीलामृत का पाठ किया था।कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन यजमान राम श्रृंगार पाण्डेय व उर्मिला पाण्डेय ने किया। कथा में राघवेंद्र मिश्रा अप्पू,मनोज जी, अवधेश शास्त्री सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।