: अपनी बेबाकी, सरलता व सहजता से राष्ट्रीय फलक पर हुए शिरोधार्य
Tue, Apr 29, 2025
अपनी बेबाकी, सरलता व सहजता से राष्ट्रीय फलक पर हुए शिरोधार्यफलाहारी बाबा को तर्कशील युवा महंतों ने उन्हें अपने गुरू के रूप में स्वीकार कर खुद को धन्य मानाअयोध्या। संतों की सराह कही जाने वाली रामनगरी अयोध्या में अनेक भजनानंदी संत हुए है जिन्होंने नगरी ही नही सम्पूर्ण भारत वर्ष में रामभक्ति धारा की अलक जगाईं। ऐसे ही एक संत हुए कौशल किशोर शरण जो फलाहारी बाबा के नाम से सुविख्यात हुए।अयोध्या के पड़ोसी जनपद बलरामपुर के ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने वाले फलाहारी बाबा ने स्वर्गद्वार के हनुमत सदन मंदिर में दशको हनुमान जी की कठिन साधना की। एक समय उनके दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहता। कालांतर में अयोध्या के महंतों ने उन्हें राजगोपाल मंदिर की सम्पत्ति की रक्षा के लिए इस प्रसिद्ध मंदिर का महंत बना दिया। फकीर स्वभाव वाले फलाहारी बाबा इसके लिए अपने लोगों को मना तो नहीं कर सके पर यह दायित्व उनकी आत्मा सहज स्वीकार न कर सकी।राम मंदिर के विवाद में उन्हें केंद्र सरकार द्वारा अयोध्या के कई महंतों के साथ अयोध्या बुलाया गया। उनकी बेबाकी, ब्रह्मज्ञान को सुनने वाले उन्हें चकित होकर देखते रह जाते। कड़ी साधना से उपजा उनका ज्ञान बड़े से बड़े विद्वानों को भी चकित करने वाला रहा। आडंबर से परे अत्यंत सात्विक एवं तपश्चर्या का जीवन जीते हुए महाराज जी ने अयोध्या धाम का प्रतिनिधित्व लंबे समय तक किया। अति सामान्य व्यक्ति से लेकर भारत के प्रधानमंत्री तक अपनी विशेष छाप फलाहारी महाराज जी की रही। उनकी इसी ज्ञान से प्रभावित होकर तर्कशील युवा महंतों ने उन्हें अपने गुरू के रूप में स्वीकार कर खुद को धन्य मानते थे। महंत कौशल किशोर शरण फलाहारी बाबा की द्धितीय पुण्यतिथि गुरुवार को समारोह पूर्वक मनाई जाएगी जिसमें रामनगरी ही नही बल्कि उनके चाहने वाले संत साधक हजारों की तादात में अपनी पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। जन्म जन्मांतर के पुण्य अर्जित होते है तो संत समाज का दर्शन और सानिध्य प्राप्त होता है। यह शुभ अवसर संतसेवी गौ सेवी ब्राह्मण व दरिद्र नारायण की सेवा करने वाले और सेवा को ही धर्म मानने वाले श्री राजगोपाल मंदिर के पूर्वाचार्य महंत कौशल किशोर शरण जी फलाहारी बाबा के द्धितीय पुण्यतिथि पर संत नमन करेंगे। उनकी द्धितीय पुण्यतिथि महोत्सव पर मंगलवार से राजगोपाल में उनके तीन दिवसीय दूसरे स्मृति पर्व का आरंभ हो गया। दूसरे पुण्यतिथि की इस बेला में राजगोपाल मंदिर प्रागंण में संगीतमय प्रस्तुति से जीवंत हुए रामकथा के प्रसंग। रामचरितमानस स्वयं में लयबद्ध है और संगीत का पुट समाहित होने पर इसका माधुर्य अवर्णनीय हो जाता है। यह सत्य रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ राजगोपाल मंदिर में प्रतिपादित हो रहा। इस पाठ का बुधवार को सायंकाल 7 बजे समापन होगा,इसके पश्चात गुरुवार 1 मई को रामनगरी के संत फलाहारी जी महाराज को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन करेंगे। विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया है।महोत्सव की अध्यक्षता मंदिर के महंत सीताराम शरण कर रहें है।राजगोपाल मंदिर से जुड़े फलाहारी बाबा के कृपापात्र शिष्य डा सर्वेश्वर दास शरद जी ने बताया कि सनातन परंपरा का यह वैभव है कि हम प्रतिदिन गुरुदेव भगवान की पूजा करते हैं। उनकी पुण्यतिथि पर संतो के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त होगे हैं। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का भी आयोजन किया जायेगा। शरद जी ने कहा कि पुण्यतिथि महोत्सव राजगोपाल मंदिर के वर्तमान महंत सीताराम शरण के देखरेख में हो रहा है। आज पाठ में व्यास पीठ का पूजन कर आगरा से पधारे दादा के नाम से प्रसिद्ध योगेश शर्मा द्वारा किया गया। यजमान के रूप में ज्योति एवं अजय अग्रवाल रघुवंश दूबे, अनिल गर्ग, मनोज मिश्र, योगेश पाठक, अजय जी आगरा रहे।पाठ आरम्भ के समय मिथिला कुंज के महंत राम बिहारी शरण, हनुमत सदन के महंत अवध किशोर शरण, जानकी कुंज के महंत वीरेंद्र दास राम लखन शरण, परसराम दास आदि उपस्थित रहे।
: आदित्य भवन के गौशाला में हुआ पूजन, दिलाया गया संकल्प
Tue, Apr 29, 2025
आदित्य भवन के गौशाला में हुआ पूजन, दिलाया गया संकल्पअयोध्या के आदित्य भवन के महाराज जी के साथ रामनगरी अयोध्या के विशिष्ट संतों ने किया गौशाला पूजन,संतों का हुआ अभिनन्दनअयोध्या। रामनगरी के आदित्य भवन समाजसेवी में अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। आदित्य भवन ट्रस्ट की ओर से एक विशाल गौशाला का विधिवत पूजन किया गया। यह गौशाला करीब 8 एकड़ में बना है जो पूर्णता आधुनिक रुप से बना है,जहां पर सौकड़ों गौवंश की सेवा की जा रही है।आदित्य भवन के महाराज जी ने गौवंशों का पूजन अर्चन कर गौ सेवा और गौ रक्षा का संकल्प भी लिया। इस पूजन के कार्यक्रम में लगातार दो दिनों तक रामनगरी के विशिष्ट संतों का समागम हुआ। आदित्य भवन के ओर से आये हुए अतिथियों का स्वागत भी किया गया। आदित्य भवन से जुड़े हरिओम राय कहते है हमारे महाराज जी कहते है भगवान सभी जगह है जीवों में भी भगवान है। सभी की सेवा करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि इस पूजन कार्यक्रम में आये सभी संतों का विशेष सम्मान किया गया। इस मौके पर हनुमान बाग पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास, निर्वाणी अनि अखाड़ा के महासचिव महंत नंदराम दास, जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, मंगल भवन पीठाधीश्वर श्रीअर्जुनद्वाराचार्य स्वामी कृपालु रामभूषणदेवाचार्य, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, महंत अवधेश दास,महंत रामकुमार दास, महंत गिरीश दास, महंत हरिभजन दास, महंत जनार्दन दास, संत रामनंदन दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: राम मंदिर की पहली परिक्रमा करेंगे हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन: महंत डा महेश दास
Tue, Apr 29, 2025
राम मंदिर की पहली परिक्रमा करेंगे हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन: महंत डा महेश दास इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा यह ऐतिहासिक शाही यात्रा: मामा दासअयोध्या। श्रीहनुमानगढ़ी की सदियों पुरानी परंपरा में एक नया आयाम आज जुड़ने जा रहा है। आज अक्षय तृतीया के पुनीत पर्व पर श्रीहनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी हनुमान जी महाराज के प्रतिनिधि के रूप में रामलला के दर्शन करने जाएंगे। यह दर्शन सामान्य नहीं होगा। राजसी वैभव के साथ गद्दीनशीन करीब एक हजार साधु-संतों व भक्तों के साथ भव्य शोभायात्रा के माध्यम से रामलला के दरबार में पहुंचेगे। वे राम मंदिर की पहली परिक्रमा भी करेंगे। इसी दिन से मंदिर के परिक्रमा की शुरूआत होगी।श्रीहनुमानगढ़ी की परंपरा में 52 बीघा के बाहर कोई भी गद्दीनशीन महंत नहीं जा सकता। यह पहला अवसर होगा जब गद्दीनशीन शाही अंदाज में हनुमानगढ़ी परिसर से बाहर निकलेंगे। हनुमानगढ़ी में गद्दीनशीन महंत को बजरंग बली का प्रतिनिधि माना जाता है। चूंकि बजरंगबली अयोध्या के राजा के रूप में पूजित प्रतिष्ठित हैं। इसलिए गद्दीनशीन महंत जब रामलला के दर्शन को निकलेंगे तो व्यवस्था शाही अंदाज में होगी। आयोजन को लेकर हनुमानगढ़ी अखाड़ा के संतों ने सारी तैयारियां पूरी कर ली है।गद्दीनशीन श्री महंत प्रेमदास जी महाराज के प्रधान सेवक महंत डा महेश दास ने बताया कि गद्दीनशीन श्रीमहंत जी महाराज आज अक्षय तृतीया को सुबह सात बजे हजारों की संख्या में नागा साधुओं व भक्तों के साथ हनुमानगढ़ी से बाहर निकलकर रामलला के दर्शन करेंगे। हनुमानगढ़ी से एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो सरयू तट तट पहुंचेगी। शोभायात्रा में हाथी, घोड़े, ऊंट, बैंड-बाजा सहित हनुमानगढ़ी का शाही निशान शामिल होगा। सरयू तट पर पूजन-अर्चन के बाद शोभायात्रा रामपथ होते हुए क्षीरेश्वरनाथ मंदिर पहुंचेगी। यहां हनुमानगढ़ी के निशान की पूजा-अर्चना की जाएगी। 20 से 25 विशिष्ट महंत गेट नंबर तीन से राम मंदिर में प्रवेश करेंगे। बाकी नागा साधुओं को बिड़ला धर्मशाला के सामने से राम मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। सुरक्षा के लिहाज से केवल ध्वज पताका, छड़ी व निशान ही मंदिर में जाएगा, बाकी शस्त्र नहीं जाएंगे। हनुमानगढ़ी के संत समाजसेवी प्रभु दास उर्फ मामा दास महाराज ने बताया कि हनुमानगढ़ी ही नहीं अयोध्या के इतिहास में आज बुधवार यानि 30 अप्रैल अक्षय तृतीया का दिन स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज होने जा रहा है क्योंकि अभी तक हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीनजी जी शाही निशान के साथ भगवान रामलला का दर्शन करेंगे।श्री महाराज जी के दर्शन और स्वागत की तैयारी हनुमानगढ़ी के नागा संत ही नहीं बल्कि पूरी अयोध्या के लोगों ने किया है, क्योंकि यह अपने आप दर्शन की योजना नहीं है, हनुमान जी महाराज ने गद्दी नशीन महाराज जी को प्रेरित किया अब यह तैयारी चल रही हैं। उन्होंने बताया यह शोभायात्रा सभी मामलों में ऐतिहासिक होगी क्योंकि इसकी तैयारी स्वयं हनुमान जी महाराज करा रहे हैं। हनुमान जी महाराज से बड़ा राम जी का कोई सेवक नहीं है। हम नागा संत हनुमानजी की सेवा करते हैं, क्योंकि वह अयोध्या के राजा हैं तो राजा के सैनिक के रूप में हम सभी कार्य करते हैं और हमारे मुखिया गद्दी नशीन जी महाराज है। साथ ही अखाड़े के मुख्तार जयप्रकाश श्रीवास्तव भी मौजूद रहें।