: हनुमानगढ़ी विवादित मामले में परमहंसाचार्य का साथ नही देगी
Wed, May 7, 2025
हनुमानगढ़ी विवादित मामले में परमहंसाचार्य का साथ नही देगीहनुमानगढ़ी सिद्ध और प्राचीन पीठ है। इसका गाैरवमयी इतिहास रहा है,इसका विवाद से कोई सरोकार नहीं: श्रीमहंत मुरली दासहनुमानगढ़ी की संपूर्ण विश्व में मर्यादा एवं गरिमा है, इसकाे विवादों में नही घसीटा जा सकता है: महंत संजय दासअयोध्या। बजरंगबली की शीर्ष पीठ श्री हनुमानगढ़ी की सागरिया पट्टी के श्रीमहंत धर्मसम्राट ज्ञानदास महाराज के उत्तराधिकारी व संकटमोचन सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास ने मंगलवार को अपने आश्रम पर मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि हनुमानगढ़ी की संपूर्ण विश्व में मर्यादा एवं गरिमा है। इसकाे विवादों में नही घसीटा जा सकता है। तपस्वी छावनी के महंत परमहंसाचार्य द्वारा कहा गया है कि पूरी हनुमानगढ़ी उनके साथ है। ताे यह बातें निराधार है। क्याेंकि हनुमानगढ़ी में पंचायती व्यवस्था है। इसे कभी अलग नही किया जा सकता है। हम सब एक हैं। हनुमानगढ़ी काे विवादों में न लाएं। उसे विवादित चीजों से दूर रखें। हनुमानगढ़ी विवादित मामले में परमहंसाचार्य का साथ नही देगी। हनुमानगढ़ी ने उनके गुरु सर्वेश्वर दास व उसके बाद परमहंसाचार्य काे एक बार तपस्वी छावनी आश्रम पर प्रतिष्ठित कर दिया था। अब परमहंसाचार्य अपने आश्रम की व्यवस्था व विवाद स्वयं देखें। क्याेंकि उनका पीठ विवादित है। हर बार हनुमानगढ़ी उनका साथ नही देगा। हर विवादित चीजाें में हनुमानगढ़ी दखल अंदाजी नही करेगा। पूरे हनुमानगढ़ी काे विवाद में लपेटना अच्छी बात नही है। वह किसी भी विवादित चीजों में नही शामिल हो सकता है। हनुमानगढ़ी न किसी विवादित चीजों में पड़ा और न पड़ेगा। निर्वाणी अनि अखाड़ा व हरिद्वारी पट्टी के श्रीमहंत मुरली दास महाराज ने कहा कि हनुमानगढ़ी सिद्ध और प्राचीन पीठ है। इसका गाैरवमयी इतिहास रहा है। इसकाे व्यक्तिगत विवाद में नही घसीट सकते हैं। व्यक्तिगत विवाद एवं झगड़े में हनुमानगढ़ी नही जा सकती है। इसे विवादित चीजों से दूर रखें। यहां पंचायती व्यवस्था है। हम सब पंचायती व्यवस्था के साथ हैं। हनुमानगढ़ी के बसंतिया पट्टी के श्रीमहंत रामचरण दास महाराज ने कहा कि हम हनुमानगढ़ी पंचायती व्यवस्था के साथ हैं। हनुमानगढ़ी में पंचायती व्यवस्था बनी रहे। इसे विवादित चीजों में नही लाना चाहिए। हरिद्वारी पट्टी के युवराज महंत राजेश दास पहलवान ने कहा कि हनुमानगढ़ी के साधु-संत विवाद में नही रहा करते हैं। हनुमानगढ़ी ने परमहंसाचार्य काे तपस्वी छावनी पर एक बार प्रतिष्ठित कर दिया। अब परमहंसाचार्य अपना और अपने आश्रम की व्यवस्था देखें। वह बार-बार हनुमानगढ़ी काे विवादित मामले में न लाएं। निर्वाणी अनी के महासचिव सत्यदेव दास महाराज ने कहा कि हनुमानगढ़ी सम्मानित सिद्धपीठ है। यह गलत का साथ कभी नही देता है। हमेशा सत्य के साथ रहता है। प्रेसवार्ता में हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास एवं महंत संजय दास के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव भी माैजूद रहे।
: तपस्वी छावनी मंदिर का विवाद फिर गहराया, समर्थन में आया हनुमानगढ़ी
Mon, May 5, 2025
तपस्वी छावनी मंदिर का विवाद फिर गहराया, समर्थन में आया हनुमानगढ़ीहनुमानगढ़ी ने तपस्वी छावनी का समर्थन किया, संतों ने मंदिर की सुरक्षा का संकल्प लिया, प्रशासन ने न्याय दिलाने का आश्वासन दियातपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगदगुरु परमहंस आचार्य ने सुरक्षा में कटौती और मंदिर पर कब्जा करने की कोशिशों के खिलाफ हनुमानगढ़ी से मदद मांगीअयोध्या। अयोध्या के तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर, जगदगुरु परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया है कि उनकी सुरक्षा में कटौती कर दी गई है, इसके बाद उन्हें अपने मंदिर तपस्वी छावनी पर कब्जा किए जाने का डर सता रहा है। उसके लेकर वह हनुमानगढ़ी से मदद की मांग की।
हनुमानगढ़ी मंदिर के महंतों और संतों ने तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर का समर्थन करते हुए मंदिर पर कब्जा करने के प्रयासों का विरोध किया। उज्जैनिया पट्टी के श्रीमहंत संत राम दास जी के स्थान पर बकायदा एक बैठक करके नागा संतों ने मंदिर की सुरक्षा का संकल्प लिया साथ ही
प्रशासन ने न्याय दिलाने का आश्वासन भी दिया।और हनुमानगढ़ी के अन्य महंतों ने एकजुट होकर इस मुद्दे पर कदम उठाने की घोषणा की।
तपस्वी छावनी मंदिर पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। महंत जगदगुरु परमहंस आचार्य के गुरु महंत सर्वेश्वर दास के निधन के बाद मंदिर पर कब्जा करने की कोशिशें जारी हैं। इसके बाद हनुमानगढ़ी ने महंत को पीठाधीश्वर के रूप में नियुक्त किया था।
जगदगुरु परमहंस आचार्य ने बताया कि उनकी सुरक्षा अचानक हटा दी गई, जिससे उन्हें यह स्पष्ट आभास हुआ कि मंदिर पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि गुजरात के एक व्यक्ति द्वारा मंदिर पर कब्जा करने की लगातार कोशिश हो रही है।
प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज जी के प्रधान शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास ने साफ किया कि वह हर समय तपस्वी छावनी के साथ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हनुमानगढ़ी ने हमेशा तपस्वी छावनी की गरिमा और सुरक्षा के लिए संघर्ष किया है और वे अब भी साथ खड़े हैं।
तो वही निर्वाणी अनि अखाड़ा के महासचिव महंत नंदरामदास ने बताया कि प्रशासन उनके साथ है और उन्हें न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि यहां के लोग हमेशा विवाद उत्पन्न करने की कोशिश करते हैं, लेकिन प्रशासन न्याय दिलाने में उनकी मदद करेगा। हनुमानगढ़ी के नागा संत समाजसेवी मामा दास ने कहा कि हनुमानगढ़ी ने तपस्वी छावनी की गरिमा को बचाने में अहम भूमिका निभाई है और अब भी इस मुद्दे पर संघर्ष जारी रखे हुए हैं। हनुमानगढ़ी के महंतों ने पुष्टि की है कि वे पूरी तरह से तपस्वी छावनी के पक्ष में खड़े हैं। इस मौके पर कल्याण दास, उपेंद्र दास, सूर्यभान दास, लवकुश दास सहित बड़ी संख्या में नागा साधु संत मौजूद रहें।
: गुरुदेव भजनानंदी हाेने के साथ साथ अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे: महंत रामकिशोर दास
Sat, May 3, 2025
गुरुदेव भजनानंदी हाेने के साथ साथ अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे: महंत रामकिशोर दाससिद्धपीठ हनुमानकिला मंदिर के महंत रामभजन दास को संतों ने किया नमनअयोध्या। सिद्धपीठ हनुमानकिला मंदिर रामघाट अयोध्या धाम के साकेतवासी महंत रामभजन दास रामायणी महाराज काे संताें ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। शुक्रवार को महंत रामभजन दास का त्रयाेदश संस्कार रहा। तेरहवीं भंडारे पर उपस्थित संत-महंतों ने उनके चित्रपट पर श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। संताें द्वारा महंत के कृतित्व-व्यक्तित्व का बखान भी किया गया। विगत दिनों महंत रामभजन दास रामायणी महाराज का 92 वर्ष की अवस्था में साकेतवास हो गया था। वह पिछले कुछ महीनाें से बीमार चल रहे थे। जिनका क्रिया-कर्म उनके उत्तराधिकारी रामकिशोर दास ने किया। उन्होंने अपने जीवनकाल में ही रामकिशोर दास काे अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था। तब से रामकिशोर दास ही हनुमानकिला मंदिर की व्यवस्था संभाल रहे हैं और उन्होंने गुरुदेव की खूब सेवा किया। महंत रामकिशोर दास ने कहा कि उनके गुरुदेव भजनानंदी हाेने के साथ साथ अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे। वह आज हम सबके बीच नही हैं। जिनकी कमी बहुत ही अखर रही है। भविष्य में उस रिक्त स्थान की पूर्ति कभी नही की जा सकती है। उनकी यश और कीर्ति सदैव हम लोगों के साथ रहेगी। गुरुदेव के बतलाए हुए मार्ग का अनुसरण कर आगे बढ़ेंगे। मठ का सर्वांगीण विकास करेंगे। आश्रम में ठाकुरजी की सेवा संग गाै, संत, विद्यार्थी, आगंतुक सेवा सुचार रूप से चलती रहेगी। अंत में महंत रामकिशोर दास व महंत शिवराम दास ने पधारे हुए संत-महंताें काे भेंट-विदाई दिया। त्रयाेदश संस्कार पर महंत कमलनयन दास, जगदगुरु रामानंदाचार्य रामदिनेशाचार्य, जगदगुरु परमहंसाचार्य, महंत जन्मेजय शरण, महंत अवधेश दास, महंत अयोध्या दास, महंत रामानंद दास, महंत उमेश दास,महंत भरत दास शास्त्री, नंदराम दास, महंत अवधकिशाेर शरण, महंत सच्चिदानंद दास, महंत रामलाेचन शरण, महंत गिरीश दास, महंत शशिकांत दास, महंत रामजी शरण,राजगोपाल मंदिर के सर्वेश्वर दास शरद जी, महंत वीरेंद्र दास, महंत प्रियाशरण, महंत प्रियाप्रीतम शरण, महंत राममिलन दास, स्वामी छविराम दास, महंत जनार्दन दास, महंत रामकुमार दास, महंत श्रीधर दास, महंत उत्तम दास, महंत भूषण दास, महंत सीताराम दास, महंत कमलादास, महंत चंद्रशेखर दास, महंत रामअवध दास, महंत धर्मदास, महंत शिवराम दास, पुजारी रमेश दास, महंत अवनीश दास, महंत रामलखन शरण, महंत अशोक दास, महंत रामप्रकाश दास, महंत तुलसीदास दास आदि उपस्थित रहे।