: भारतीय आध्यात्मिक फलक अयोध्या ब्राण्ड अम्बेसडर की तरह रहे क़िलाधीश जी महाराज
Thu, Feb 23, 2023
रसिकोपासना के आचार्य स्वामी सीताराम शरण जी ने ग्राम्यांचल की भक्ति धारा से लेकर विश्वविद्यालयीय विचार और आलोचकों तक आपनी वाणी का जादू बिखेरा
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी में अनेक भंजनानंदी संत हुए हैं। उन्हीं संतो में एक थे रसिकोपासना के आचार्य परमपूज्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज।
श्रीराम कथा शीर्ष विख्यात कथावाचक में एक थे स्वामी सीताराम शरण जी महाराज। श्रीराम कथा की परम्परा को शास्त्र संवलित बनाने और रसोपासना की सैद्धांतिकी को व्यापक बनाने वाले आचार्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज लक्ष्मण क़िलाधीश जी की 25वीं पुण्य तिथि मंगलवार 28 फरवरी को है।
भारतीय आध्यात्मिक फलक अयोध्या ब्राण्ड अम्बेसडर की तरह रहे क़िलाधीश जी महाराज। 1957 की विजयादशमी को श्रीलक्ष्मण किला की आचार्य गद्दी पर विराजमान होकर आपने इस पीठ की असाधारण महिमा को उपासना की प्रामाणिकता के साथ ही वैचारिकी के केन्द्र के रूप में ख्यापित कर दिया। रसोपासना के आचार्य स्वामी सीताराम शरण जी महाराज ग्राम्यांचल की भक्ति धारा से लेकर विश्वविद्यालयीय विचार और आलोचना तक आपकी वाणी ने अपना जादू बिखेरा। एक प्रसंग के अनुसार दक्षिण के वयोवृद्ध विद्वान ने अयोध्या की पहचान की कहा कि स्वामी सीताराम शरण जी वाली अयोध्या। स्वाध्याय प्रवचन की वाचिक परम्परा के साथ ही टीका व्याख्या और पद रचना के साथ ही पूर्वाचार्यों के साहित्य का सम्पादन-प्रकाशन भी स्वामी सीताराम शरण जी महाराज का उल्लेखनीय अवदान रहा। चार दशक तक पीठ का सक्रिय आचार्यत्व निभाकर सन 1997 के वसन्त ऋतु में आचार्य श्री का साकेतवास हो गया।
रामनगरी की आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला में पूर्वाचार्य के 25वीं पुण्यतिथि बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाई जा रही है। आचार्य श्री द्धारा रचित ग्रन्थों नाम महिमा धाम महिमा सहित कई ग्रन्थों का सस्वर पारायण पाठ किया जा रहा है जिसका समापन 26 फरवरी यानी रविवार को होगा। 27 फरवरी सोमवार को विद्वत गोष्ठी एवं पुस्तक का लोकार्पण होगा। जिसमें मुख्य अतिथि के तौर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास एवं कैसरगंज के लोकप्रिय सांसद बृजभूषण शरण सिंह शामिल होगे। 28 फरवरी मंगलवार को पुण्यतिथि समारोह में रामनगरी समेत कई प्रांतों के शिष्य साधक आचार्य श्री को अपनी वाक्यमयी पुष्पांजलि अर्पित कर नमन करेंगे। यह आयोजन स्वामी सीताराम शरण जी महाराज के शिष्य वर्तमान किलाधीश महंत मैथिली रमण शरण जी महाराज के संयोजन में हो रहा जिसकी देखरेख किला के युवा संत सूर्य प्रकाश शरण कर रहें है। पुण्यतिथि महोत्सव का समापन वृहद भंडारे के साथ होगा।
: दरवाजे पर आई बारात बिना दुल्हन हुई वापस
Thu, Feb 23, 2023
रात में खाना खाने के बाद दूल्हे ने शादी से किया इनकार, हुआ हंगामा
बीकापुर-अयोध्या। बीकापुर कोतवाली क्षेत्र में शादी करने आई बारात रात में खाने के बाद दूल्हे द्वारा शादी से इंकार करने पर वापस हो गई,जबकि बारात से चुपके से भाग रहे दूल्हे व परिजनों को गांव व लड़की के घर वालों द्वारा दौड़ा कर पकड़ लिया गया। जिसपर वर पक्ष ने जमकर हंगामा काटा गया। दूल्हे के सगे संबंधियों ने औरतों से बदसुलूकी भी की। भोजन का स्टाल गिरा दिया। इस दौरान बारात में आए लोग लौट गए। चोरी चुपके भाग रहे दूल्हे व उनके सगे संबंधियों को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंच गई। काफी देर तक मान-मनौव्वल का दौर चला। सुबह होने पर लड़की के पिता ने बीकापुर कोतवाली में मामले की तहरीर दे दी। दोपहर तक दूल्हे, उसके पिता, भाई व चाचा समेत 9 को पुलिस ने नामजद करते हुए एक अज्ञात व्यक्ति पर केस दर्ज कर लिया। लड़की के पिता ने दी तहरीर में बताया है कि मेरी बेटी का विवाह आनंद पुत्र जितेन्द्र कनौजिया पता जमोली पोस्ट कूड़ेभार जिला सुल्तानपुर के साथ तय हुआ था। बुधवार को दूल्हे के पिता जितेंद्र व भाई परमानन्द, देवानन्द व चाचा पवन, उनकी पत्नी, बिचौलिया माता प्रसाद उसकी पत्नी आरती व वीरेंद्र मास्टर व उनके अन्य साथी दरवाजे पर बारात लेकर पहुंचे थे। लड़की के पिता ने बताया कि मैंने वर पक्ष को पहले ही बता दिया था कि मेरी बेटी के सिर में बाल कम हैं। इसी बात को मुद्दा बनाकर वर पक्ष ने दरवाजे पर ही अतिरिक्त दहेज की मांग शुरू कर दी। जब हमने दहेज में इन्हें इनके मन मुताबिक कैश देने से मना किया तो इन्होंने मेरे घर के अंदर आकर मेरी बेटी व अन्य औरतों के साथ हाथापाई व गाली-गलौज की। खाने के सारे स्टाल तोड़ दिए। खाना फेंक किया।मेरे किसी मेहमान व घर वालों ने खाने को हाथ भी नहीं लगाया था। शादी टूटने की वजह से मेरी पुत्री सदमे में चली गई है। मेरी दोनों छोटी और बड़ी बेटी की हालत बहुत खराब है। पुलिस ने दूल्हे आनंद, जितेंद्र, परमानन्द, देवानन्द, पवन, उनकी पत्नी, माता प्रसाद, आरती, वीरेंद्र मास्टर व एक अज्ञात पर केस दर्ज किया है।
: राम भारत की संस्कृति के उच्चतम प्रतिमान: रत्नेशप्रपन्नाचार्य
Thu, Feb 23, 2023
जानकी महल ट्रस्ट में श्रीमद् वाल्मीकीय रामायण कथा का छाया उल्लास
अयोध्या। राम भारत की संस्कृति के उच्चतम प्रतिमान है। वो शील, संयम, सदाचार और मर्यादा की उत्कृष्ट प्रतिमा है। उक्त बातें जानकी महल ट्रस्ट में आयोजित श्रीमद् वाल्मीकीय रामायण कथा के चतुर्थ दिवस व्यासपीठ से जगद्गुरू रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी ने कही। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति प्रणाम, आदर और शीश झुकाने वाली संस्कृति है। हम सभी को सम्मान देने वाले प्राणी हैं। चरित्र सबसे मूल्यवान वस्तु है जो ज्ञान, तप, शील और सद्गुणों से उन्नत होता है। चिन्तन और आचरण से चरित्र पुष्पित और पल्लवित होता है। जिनके पास शुभ विचार है, उनका चरित्र भी उन्नत होता है। प्रयास यह रहे कि आपका चरित्र दृष्टांत, गाथा और उदाहरण बन जाए। जगद्गुरु जी ने कहा कि वाल्मीकीय रामायण के आरम्भ में राम के चरित्र की चर्चा है। देवर्षि नारद परमात्मा के मन हैं और सद्ग्रन्थों के मूल में प्रेरक सत्ता भी नारद ही हैं। सबसे उन्नत चीज चरित्र है और हमारी भारतीय संस्कृति में राम जैसा चरित्र किसी के पास नही है। श्रेष्ठता, दिव्यता व उच्चता के मानकों के प्रतिमान भगवान श्रीराम हैं।
उन्होंने कहा कि नैतिकता मूल वस्तु है, आप महान हैं, लेकिन शील सम्पन्न नही हैं तो आपकी महानता व्यर्थ है। मन की उत्पत्ति काम से हुई है, इसलिए वह काम से मुक्त नहीं हो पाता। मन को काम से मुक्त कर लेना जीवन का बड़ा पुरुषार्थ है। कथा से पूर्व आयोजक कुसुम सिंह व डॉ० दिनेश कुमार सिंह ने व्यास पीठ का पूजन किया।