: भगवान लक्ष्मी नारायण का हुआ विधिवत अभिषेक, पूजन
Sun, Mar 26, 2023
गाय संपूर्ण विश्व की माता है, गो सेवा से ही गोविंद प्रसन्न होते हैं: श्रीधराचार्य
गोवर्धन लीला महोत्सव अशर्फी भवन में धूमधाम से मनाया गया, भगवान को लगा छप्पन भोग
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ अशर्फी भवन में चैत्र रामनवमी के पावन अवसर में आयोजित सप्त दिवसीय अष्टोत्तर श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा हो रही है। महोत्सव में आज
भगवान लक्ष्मी नारायण के तिरु नक्षत्र के अवसर पर भगवान श्री लक्ष्मी नारायण का अभिषेक सरयू जल, दूध एवं फल के जूस द्वारा वैदिक सुक्त पारायण से महाराज श्री ने भगवान का अभिषेक हुआ। जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य जी ने अर्चा विग्रह की विशेषता बताते हुए कहा हम सभी जीव प्रभु के अंश हैं और प्रभु ही हमारे अंशी हैं भगवत सत्ता के बिना हम सभी शून्य है हमें हर एक क्षण प्रभु का चिंतन मनन स्मरण करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का श्रवण कराते हुए कहा। जगत पिता परमात्मा को पुत्र रूप में प्राप्त करके नंद बाबा ने ब्राह्मणों को बुलाकर स्वस्तिवाचन कराया वेद पाठ कराया गौ दान किया सभी ब्राह्मणों को वस्त्रालंकार रत्न मणि माणिक्य का दान किया। तो वही मां यशोदा ने सभी ब्रजवासियों को उपहार दिए अपने रूप से जो सबको मोहित कर ले वही कृष्ण है कंस के द्वारा भेजी माया रूपी पूतना को भी उत्तम गति प्रदान करते है। स्वामीजी ने कहा कि प्रभु श्री कृष्ण शिक्षा देते हैं व्यक्ति चाहे दुष्ट भाव से ही क्यों नहीं यदि मेरी शरण में आ जाता है तो प्रभु श्री कृष्ण का गुण है शरणागत रक्षक हैं। प्रभु नंद बाबा ने गर्गाचार्य जी महाराज को बुलाकर नामकरण संस्कार कराया श्रीकृष्ण को गोद में लेकर गर्गाचार्य जी की समाधि लग गई मां यशोदा ने कहा बाबा आप नामकरण संस्कार करने आए हैं कि सोने। गर्गाचार्य जी बोले मां प्रभु दर्शन के लिए ही तो मैंने पुरोहित कर्म को अपनाया। भगवान श्री कृष्ण के सभी संस्कार गर्गाचार्य जी यथा समय पूर्ण करते है बचपन से ही प्रभु श्री कृष्ण अनेको राक्षसों का संहार करते हैं प्रभु माखन चोरी लीला के माध्यम से जन्म जन्मांतरों के पाप को चुराकर पुण्य उदित करने हेतु गोपियों के घर जाकर माखन चोरी लीला करते हैं। प्रभु गोचारण करने वन में जाते हैं गौ माता की सेवा नित्यप्रति करते हैं गौ माता के महत्व को बताते हुए प्रभु कहते है। गाय संपूर्ण विश्व की माता है गो सेवा से ही गोविंद प्रसन्न होते हैं। यमुना जी के विषाक्त जल को कालिया नाग से बचाने हेतु प्रभु यमुना जी के मध्य में जाकर कालिया नाग से युद्ध करते हैं शरणागति करके कालिया नाग यमुना जी को छोड़कर दूर चला जाता है। ब्रज में प्रभु श्री कृष्ण के जन्म लेने से नित्य उत्सव मनाया जाते हैं। प्रभु श्री कृष्ण का दर्शन पाकर सभी बृजवासी अपने को धन्य समझते है गिरिराज धरण की लीला के द्वारा प्रभु प्रकृति के पूजन का महत्व बताते हैं प्रभु श्री गोवर्धन पर्वत की पूजा सभी ब्रज वासियों से कराते हैं इंद्र सामंत मेघों के द्वारा ब्रज में घोर वृष्टि कराते हैं। सभी ब्रजवासियों के देखते-देखते कनिष्ठा अंगुली में सात कोस लंबे चौड़े गिरिराज पर्वत को उठा लेते हैं घबराकर इंद्र प्रभु चरणों में शरणागति करते हैं शरण में आए इंद्र को प्रभु अपना लेते है। गोवर्धन लीला का महोत्सव अशर्फी भवन में धूमधाम से मनाया गया भगवान को छप्पन भोग का प्रसाद लगाया। देश के विभिन्न राज्यों से पधारे भक्तजन भागवत कथा को सुनकर आनंदित हो रहे हैं।
: संतों के चरणों में समस्त तीर्थों का निवास होता है: शीतल दीदी
Sat, Mar 25, 2023
कहा, संत-महात्माओं का आगमन सदैव मंगलकारी होता है, संतों से कभी कार्य की हानि नहीं होती, अपितु उनसे कार्य की सिद्धि होती है
रामकृष्ण मंदिर में महामंडलेश्वर गणेशानंद जी के संयोजन में वैदिक आचार्य कर रहे नवाह्न पारायण पाठ
अयोध्या। रामकृष्ण मंदिर में रामजन्मोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है।मंदिर में सुबह नवाह्न पारायण पाठ संगीतमय किया जा रहा है जो महामंडलेश्वर गणेशानंद के संयोजन में हो रहा है। तो वही शाम में प्रख्यात कथावाचिका मंदिर की महंत शीतल दीदी जी के श्रीमुख से राम कथा की अमृत वर्षा रही है। चतुर्थ दिन की कथा में शीतल जी ने अहिल्या उद्धार जनकपुर दर्शन, धनुष भंग, और सीता राम विवाह का वर्णन किया। सीता राम विवाह को लेकर पूरे पंडाल को रंग-बिरंगे गुब्बारों और फूलों से सजाया गया था। उन्होंने कहा कि संत-महात्माओं का आगमन सदैव मंगलकारी होता है, संतों से कभी कार्य की हानि नहीं होती, अपितु उनसे कार्य की सिद्धि होती है। उन्होंने कहा कि संतों के चरणों में समस्त तीर्थों का निवास होता है, क्योंकि संत के चरण तीर्थों में घूमते-रहते हैं, वो सभी जगह जाते हैं, इसलिए जब कभी भी संत आएं तो उनके चरणों को धो लेना चाहिए, क्योंकि उनके चरणों में सारे तीर्थों का स्पर्श पहले से ही विद्यमान रहता है। इसीलिए संतों को तीर्थंकर कहा जाता है।
: हिंदू धाम मंदिर में श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा की बह रही रसधार
Sat, Mar 25, 2023
राम नाम की बड़ी अद्भुत महिमा है बस, जरूरत है श्रद्धा, विश्वास और भक्ति की: ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती
अयोध्या। श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथाहिंदू धाम मंदिर अयोध्या में चल रही है। व्यासपीठ से कथा का रसास्वादन ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती जी ने रामायण का सार भगवान का नाम की महिमा पर व्याख्यान किया।उन्होंने कहा कि भगवान राम हमारे जीवन के प्रत्येक रंग में समाए हुए हैं। हमने पाश्चात्य सभ्यता को काफी हद तक अपनाया, परंतु 'राम-राम' कहना नहीं छोड़ा। हम प्रतिदिन अच्छे बुरे अवसरों पर राम नाम ही लेते हैं।
आज भी हम 'राम-राम' या 'जय रामजी की' कहकर अभिवादन करते हैं। जीवन के अंतिम समय में बिछुड़ने पर राम-राम का ही उल्लेख होता है। समस्या के आने पर, विपत्तियों से घिरने पर 'हे राम' अथवा 'अरे राम' सहसा ही हमारे मुख से निकल पड़ता है। जीवन में प्रसन्नचित होने पर हम रामजी की कृपा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
राम नाम की बड़ी अद्भुत महिमा है। बस, जरूरत है श्रद्धा, विश्वास और भक्ति की। राम नाम स्वयं ज्योति है, स्वयं मणि है। राम नाम के महामंत्र को जपने में किसी विधान या समय का बंधन नहीं है। राम का नाम जपने से हो जाता है मानव का कल्याण।
वेंदाती जी ने बताया कि राम से बड़ा राम का नाम है अर्थात राम मिले ना मिले लेकिन राम का नाम जपना मात्र ही मानव के कल्याण के लिए काफी है। उन्होंने कहा कि राम नाम में बहुत शक्ति है, क्योंकि राम का नाम वैसे तो केवल दो अक्षर का ही होता है परंतु इस दो अक्षर के नाम में संपूर्ण संसार का रहस्य छिपा है। इसलिए 2 अक्षर के इस प्यारे से नाम राम का जाप प्रत्येक प्राणी को करना चाहिए, क्योंकि राम नाम ही एक ऐसा मूल मंत्र है जिसका जाप करने से मनुष्य अपने सांसारिक दु:खों पीड़ा से मुक्ति पा सकता है और संसार रूपी भवसागर से पार उतर सकता है। उन्होंने रामायण का एक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब राम रावण की लंका पर चढ़ाई करने की ठान लेते हैं और नल-नील नामक 2 वानर भाइयों की मदद से सौ योजन अथाह सागर पर सेतू बनाने की योजना बनाते हैं। लेकिन जब वानरों द्वारा सागर में फेंके जाने वाले पत्थरों पर भगवान राम अपने नाम को लिखा देखते हैं तो वह सोचते हैं कि इस पर राम नाम क्यों लिखा जा रहा है। इस पर बल बुद्धि के ज्ञाता श्री हनुमान ने कहा कि सृष्टि में युगों युगों तक राम नाम के इस सेतू द्वारा ही लोग राम नाम लिखे इन पत्थरों में श्रीराम के दर्शनों को अनुभव करेंगे। कार्यक्रम के संयोजक डा राघवेश दास वेदांती जी ने आये हुए अतिथियों का स्वागत किया।