: प्रसिद्ध पीठ अशर्फी भवन से निकली शोभायात्रा
Thu, Mar 23, 2023
श्री माधव भवन में सप्त दिवसीय अष्टोत्तर शत श्रीमद भागवत कथा का हुआ भव्य शुभारंभ
वृंदावन, वाराणसी, अयोध्या, हरिद्वार, चित्रकूट,ओमकारेश्वर से 151 वैदिक आचार्य श्रीमद्भागवत महापुराण पाठ वश्री रामचरितमानस पारायण वेद पारायण का कर रहे पाठ
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ अशर्फी भवन के भव्य श्री माधव भवन में चैत्र रामनवमी के पावन अवसर पर आयोजित सप्त दिवसीय अष्टोत्तर शत श्रीमद भागवत कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। प्रसिद्ध पीठ श्री अशर्फी भवन में देश के विभिन्न स्थानों से श्री वृंदावन, वाराणसी, अयोध्या, हरिद्वार, चित्रकूट, ओमकारेश्वर से पधारे 151 विद्वानों द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण पाठ नवान व श्री रामचरितमानस पारायण वेद पारायण एवं भगवान का पंचारात्र आगम पद्धति से पूजन अर्चन के साथ-साथ श्रीमद् भागवत कथा का लाइव प्रसारण आस्था भजन मे चल रहा। व्यास पीठ पर विराजित अनंत श्री विभूषित जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने कथा के प्रारंभ में सभी भक्तों को नववर्ष की शुभकामनाएं शुभ आशीष प्रदान किया। उन्होंने कहा कि वैदिक पद्धति से वेद शास्त्रों के मतानुसार हम सभी जीवो को पर्व संवत्सर और त्योहार मनाने चाहिए। इसी से भगवान प्रसन्न होते हैं कथा का प्रारंभ भागवत महात्म्य से किया महाराज श्री ने भागवत का महत्व बताते हुए कहां सत चित आनंद कंद भगवान को हम सब प्रणाम करते हैं। जो सृष्टि कर्ता और सृष्टि पालक हैं ऐसे प्रभु के चरणों में बारंबार प्रणाम जन्म जन्मांतर जब पुण्य उदय होते हैं तभी सप्तपुरीओं में प्रतिष्ठित है श्री अवधपुरी में श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने का अवसर प्राप्त होता है। एक बार मृत्युलोक में भ्रमण करते हुए देवर्षि नारद कर्नाटक गुजरात होते हुए वृंदावन धाम में पहुंचे मूर्छित अवस्था में पड़े हुए ज्ञान वैराग्य और मां भक्ति से मिलन हुआ परोपकारी नारद ने मां भक्ति से ज्ञान वैराग्य के दुख का कारण पूछा नारद जी ने ज्ञान वैराग्य की मूर्छा खोलने हेतु वेद शास्त्रों गीता का पाठ किया लेकिन ज्ञान वैराग्य की मूर्छा नहीं खुली नारद जी बड़े दुखी हुए आकाशवाणी को सुनकर सनत सनंदन सनातन सनत कुमार जी के द्वारा श्रीमद भागवत कथा का श्रवण ज्ञान वैराग्य को कराया। भागवत कथा को सुनकर मूर्छित अवस्था में पढ़े हुए ज्ञान वैराग्य की निद्रा भंग हो गई नृत्य करने लगे चिंता मणि को पाकर केवल लौकिक सुख प्राप्त कर सकते हैं। कल्पवृक्ष स्वर्ग में सुख दिला सकता है लेकिन सद्गुरु की कृपा यदि जीवन में हो जाए तो वैकुंठ की प्राप्ति होती है। आत्म देव और धुंदली की कथा श्रवण कराते हुए महाराज श्री ने कहा प्रेत रूप में पढ़े हुए धुंधकारी के उद्धार के लिए गोकर्ण जी ने गया में श्राद्ध किया तिलांजलि दान किया लेकिन धुंधकारी को मुक्ति नहीं मिली वेद विद्या के ज्ञाता गोकर्ण जी ने श्रीमद् भागवत कथा का समायोजन किया भागवत कथा को श्रवण करके प्रेत रूप में पड़े हुए धुंधकारी की मुक्ति हो गई श्रीमद् भागवत कथा प्रेत पीड़ा विनाशिनी है। भागवत के प्रमुख श्रोता राजेंद्र परीक्षित के जन्म की कथा का इतिहास बताते हुए महाराज श्री ने कहा भगवान शरणागत की रक्षा करते है उत्तरा के गर्भ में भगवान अश्वत्थामा के द्वारा चलाए गए ब्रह्मास्त्र से राजेंद्र परीक्षित की रक्षा करते है जन्म जन्मांतरों के जब पुण्य उदय होते हैं। तब श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने का अवसर प्राप्त होता है। वेद वेदांत का परिपक्व फल है श्रीमद् भागवत देश के विभिन्न प्रांतों से पधारे हुए सभी भक्तजन श्री अवध धाम में भागवत कथा का रसपान करके अपने जीवन को कृतार्थ कर रहे हैं। कथा का समय मध्यान्ह 3 बजे से शाम 7 बजे तक है।
: जय श्री राम पुस्तक का महंत संजय दास ने किया विमोचन
Thu, Mar 23, 2023
सभी युवाओं को जय श्री राम पुस्तक का अध्ययन करना चाहिए: महंत संजयदास
अयोध्या। देवभूमि देवरिया से अपनी टीम के साथ अयोध्या पहुंचे विध्याचल मणि त्रिपाठी राजा बाबू ने अपनी पुस्तक जय श्री राम का विमोचन रामनगरी की प्रधानतम पीठ श्री हनुमानगढ़ी में संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दाम महाराज से कराया। वेद मंत्रों के मध्य पुस्तक का विमोचन हुआ।
संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजयदास ने जय श्री राम पुस्तक विमोचन करते हुए कहा कि आज कुछ लोग रामचरितमानस के बारे में गलत टिप्पणी कर रहे है जो निंदनीय है। उन्हें और सभी युवाओं को जय श्री राम पुस्तक का अध्ययन करना चाहिए इसमें दोहें के साथ राम जी के चरित्र व मर्यादा का अच्छे से चित्रण किया गया है। महंत संजयदास महाराज ने कहा कि वास्तव में आज समाज को राजा बाबू जैसे व्यक्ति की जरूरत है जो अपनी काव्य की रचना से लोगों को जागृति कर अपने धर्म व समाज के प्रति अपने कर्तव्य का बोध करा सकें।
पत्रकारों से बात करते हुए लेखक राजा बाबू ने कहा कि हम राम की नगरी अयोध्या में आकर धन्य हो गये।प्रभु श्री राम का दिव्य मंदिर बन रहा है।हनुमानगढ़ी में पूज्य महंत संजयदास महाराज के हाथों हमारे पुस्तक का विमोचन हुआ है ये मेरे लिए सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक मेन उद्देश्य युवा पीढ़ी को संस्कार वान बनाना है। इस मौके पर वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, विराट दास, शिवम जी मौजूद रहें।
: वाल्मीकीय रामायण सृष्टि का प्रथम महाकाव्य है: ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती
Thu, Mar 23, 2023
हिंदू धाम में बह रही वाल्मीकि रामायण कथा की रसधार
अयोध्या। वाल्मीकीय रामायण सृष्टि का प्रथम महाकाव्य है। राम केवल व्यक्ति की संज्ञा नही अपितु एक जीवन-पद्धति की संज्ञा है।महर्षि वाल्मीकि ने राम के चरित्र को मानवीयता के धरातल पर चित्रित किया है।वाल्मीकीय रामायण का प्राण जानकी का चरित्र है। उक्त बातें ब्रह्मर्षि डॉ रामविलास दास वेदांती जी महाराज ने रामनगरी के सिद्ध पीठ हिंदू धाम में श्रीमद्वावाल्मीकीय रामायण महोत्सव के प्रथम दिवस में कथा शुभारंभ के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि जानकी जी की वेदना को महर्षि वाल्मीकि ने अभिव्यक्ति दी है।वेदना के विना हम मानव कहलाने के अधिकारी नहीं हैं।श्रीजानकी का चरित्र करूणा का चरित्र है।श्रीजानकी चरित्र श्रवण का फल यह है कि हृदय में करूणा का अवतरण हो जाये। श्री वेदांती जी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि तब तक रामायण की रचना नहीं कर पाये जब तक श्रीजानकी वाल्मीकि के आश्रम पर नहीं गयी।काव्य विना पीड़ा के प्रकट नहीं होता।महर्षि वाल्मीकि के हृदय में इतनी करुणा का उदय हुआ कि एक बहेलिये के बाण से मरे क्रौंच पक्षी को देखकर उनका हृदय रो उठा और सहसा एक शोक प्रकट हुआ जो श्लोक बन गया।दुनिया की पहली कविता वाल्मीकि की पीड़ा से प्रकट हुयी।पर इतनी पीड़ा करूणामयी जानकी के चरित्र को लिखने में समर्थ नहीं हो पायी।अत: श्रीराम ने जानकी को महर्षि वाल्मीकि के आश्रम पर भेजा।जब महर्षि वाल्मीकि ने श्रीसीता की पीड़ा देखी तो हृदय में इतनी करूणा आयी कि वो रामायण लिखने में समर्थ हो गये। महाराज जी ने व्यास से श्रीमद्वावाल्मीकीय रामायण की कथा को समझाते हुए कहा कि प्रश्न है कि श्रेष्ठ चरित्र किसका है?या श्रेष्ठजन किसके चरित्र का गान करते हैं?यह हमारे और आपके मन में उठने वाला ही प्रश्न नहीं है महर्षि वाल्मीकि से लेकर गोस्वामी श्रीतुलसीदास जी तक सबके मन में यही प्रश्न था।इसका उत्तर आप ढूँढने चलेंगे तो सबसे पहले जो बात आपके मन में आयेगी वो ये कि किसी के चरित्र को श्रेष्ठ माना जाय इसकी कसौटी क्या है?श्रीराम के अवतार से पहले शास्त्रों ने श्रेष्ठ चरित्र किसका माना जाय इसकी बहुत सी कसौटियाँ हैं। उन्होंने कहा कि चरित्र का बल व्यक्ति को प्रभावी बनाता है।संसार में बहुत सारे लोग शरीर और स्वभाव से सौन्दर्यवान् होते हैं लेकिन चरित्र से दुर्बल होते हैं।चरित्र की कमज़ोरी सौन्दर्य के सारे गौरव को नष्ट कर देती है।श्रीराम का चरित्रबल ही उन्हें समस्त सृष्टि-जीवन में विशिष्ट बनाता है। इस महोत्सव का संयोजन महंत राघवेश दास वेदांती जी कर रहे है। राम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर हो रहे महोत्सव में संत साधकों रामकथा श्रवण कर अपने को कृत कृत कर रहे है।