: अशर्फी भवन में बह रही रामकथा की रसधार, संत साधक लगा रहें गोता
Tue, Aug 22, 2023
जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज भगवान श्री राम के जीवन चरित्र की कथा श्रवण करा रहें
श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही नवदिवसीय रामकथा
अयोध्या। श्रावण झूलन उत्सव के उपलक्ष में श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति द्वारा आयोजित नवदिवसीय श्री राम कथा में व्यास पीठ पर विराजमान जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने भगवान श्री राम के जीवन चरित्रों का श्रवण कराते हुए कहां अयोध्या की शोभा पहले से ही दिव्य थी भगवती जगत जननी मां सीता जी के आ जाने से और भी दिव्य हो गई। सभी नारियों में श्रेष्ठ मां सीता को पत्नी रूप में पाने के बाद भी प्रभु श्री राम माता पिता की सेवा में नित्य लगे रहते हैं प्रभु के इस वात्सल्य भाव को देखकर सभी प्रजाजन भगवान श्रीराम को अपने राजा के रुप में देखना चाहते थे। सभी अयोध्या वासियों ने महाराज दशरथ से जेष्ट पुत्र राम को राजगद्दी पर बिठाने के लिए प्रार्थना की महाराज दशरथ ने प्रजाजनों के मन की बात को समझ कर सभा के मध्य में जेष्ट पुत्र राम के राज्याभिषेक की घोषणा की सभी अयोध्यावासी अत्यधिक प्रसन्न हो गए। भगवान राम राज्याभिषेक की तैयारी में जुट गए। कुटिल मंथरा ने महारानी कैकेयी के मन को कलुषित कर दिया। प्रातः काल महाराज दशरथ उठकर के कैकेयी महल की ओर प्रवेश किए कोप भवन में केकई को देखकर के महाराज दशरथ दुखी हो गए और पूछने लगे देवी भरत से भी अधिक प्रिय आप के पुत्र राम का आज राज्य अभिषेक है और आप इस कोपभवन में क्यों दुखी हैं। कुसंग के प्रभाव से श्रेष्ठ जनों की बुद्धि भी कलुषित हो जाती है महारानी केकई ने राजा दशरथ से दो वरदान मांग लिए प्रथम वरदान से राम की जगह अपने पुत्र भरत को राजगद्दी और दूसरे वरदान से 14 वर्ष के लिए भगवान श्रीराम को वनवास। कैकेयी के वचनों को सुनकर महाराज दशरथ मूर्छित होकर जमीन पर गिर गए। सुमंत जी ने भगवान श्रीराम को बुलाया अपने पिता की हालत को देख कर के भगवान राम दुखी हो कर रोने लगे। बहुत पूछने के बाद भी जब महाराज दशरथ ने भगवान श्री राम से कुछ नहीं कहा तब पास में खड़ी हुई मां के कई से भगवान ने पूछा हे मां पिता श्री की इस स्थिति का कारण क्या है पुत्र मोहमें लिप्त केकई ने प्रभु राम से कहा हे राम मेरे दो पुराने वरदान। प्रभु श्रीराम के वन गमन की बात को सुनकर अयोध्यावासी रुदन करने लगे देश के विभिन्न प्रांतो से पधारे भक्तों के नेत्रों से भी अश्रुपात होने लगा। सभी भक्त भाव विभोर हो गए।
: सनातन परंपराओं को अपने निज व्यवहार में डालना परम आवश्यक है: रामानुजाचार्य
Mon, Aug 21, 2023
श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति द्वारा आयोजित नव दिवसीय श्री राम कथा का छाया उल्लास
अयोध्या। श्रावण झूलन उत्सव के अवसर में श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति द्वारा आयोजित नव दिवसीय श्री राम कथा मे जगद्गुरु स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज के सानिध्य में मां सरयू जी का चुनरी मनोरथ का अनुष्ठान किया गया। रामानुजाचार्य जी ने मां सरयू का दूध से अभिषेक किया। श्री राम कथा के तृतीय दिवस में जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने कथा का प्रारंभ भगवान राम की बाल लीलाओं से किया बचपन से ही चारों भाइयों का प्रेम अद्भुत है बड़े भैया राम के बिना अन्य भ्राता ना तो कोई खिलौना लेते हैं ना खेलते हैं ना दुग्धपान करते हैं। परमात्मा अपने को चारों रूप में विभक्त करके महाराज दशरथ के यहां जन्म लेते हैं। प्रभु राम चारों भाइयों जैसा प्रेम अगर हम सब के अंदर व्याप्त हो जाए तो इस भयंकर कलयुग में भी हम सभी स्वस्थ प्रसन्न जीवन यापन कर सकते हैं। युवा पड़ी को संदेश देते हुए महाराज जी ने कहा भगवान श्री राम के जीवन चरित्र में से एक अंश भी हम लोग अपने अंदर आत्मसात करे तो निश्चित ही कलयुग का प्रभाव हमारे ऊपर व्याप्त नहीं होगा। आज हम सभी युवाओं को सनातन धर्म और मानव जाति के कल्याण हेतु सनातन परंपराओं को अपने निज व्यवहार में डालना परम आवश्यक है। महर्षि विश्वामित्र अयोध्या पधारते हैं महाराज दशरथ सभा में विराजमान होकर अपने चारों पुत्रों के लिए श्रेष्ठ बधुओं की खोज के लिए चर्चा कर रहे थे उसी समय विश्व के मित्र महर्षि विश्वामित्र राज भवन में उपस्थित होते है विश्वामित्र जी ने भगवान राम लखन को वन में ले जाने के लिए महाराज दशरथ से याचना की। महाराज दशरथ विश्वामित्र जी को तर्क देते हैं अतिशय प्रिय मै अपने पुत्र राम को आपको नहीं दे सकता ऋषिवर आप यदि आज्ञा करें तो मैं स्वयं अंतिम सांस तक आपके यज्ञ की रक्षा करूंगा। कुल गुरु वशिष्ठ जी के समझाने पर महाराज दशरथ राम लखन को विश्वामित्र जी के साथ वन में भेज देते हैं। भगवान राम वन में जाकर दिन रात जागकर के महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करते हैं । विश्वामित्र जी के साथ राम लखन मिथिला पुरी की ओर प्रस्थान करते हैं। रास्ते में हजारों जन्मों से पत्थर रूप में पड़ी गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का भगवान उद्धार करते हैं मिथिलापुरी के सौंदर्य को देखकर भगवान राम का मन आनंदित हो जाता है। गुरु जी के चरणों में प्रणाम करके मिथिलापुरी भ्रमण की आज्ञा लेते हैं गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर प्रभु श्री राम प्रचंड धनुष को दो खंडों में विभक्त कर देते हैं।प्रभु श्री राम का और मां सीता का दिव्य कल्याण उत्सव हुआ मां सीता का हाथ प्रभु श्रीराम के हाथों में देते हुए महाराज जनक कहते हैं हे रघुनंदन जिस तरह आपके जन्म की शुद्धि है उसी तरह मेरी पुत्री सीता भी अयोनिजा है।आपके सुख दुख में सदैव मेरी पुत्री आगे रहेगी। मां सीता और प्रभु श्री राम जी युगल जोड़ी का दर्शन करके देश के विभिन्न प्रांतों से पधारे भक्तजन आनंदित हो गए।
: सुपरस्टार रजनीकांत ने रामलला के दरबार में लगाई हाजिरी
Mon, Aug 21, 2023
हनुमानगढ़ी में बजरंगबली के समक्ष टेका माथा,वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास से लिया आशीर्वाद
अयोध्या। रविवार को राम नगरी अयोध्या पहुंचे फिल्म अभिनेता रजनीकांत अयोध्या पहुंचकर दर्शन पूजन किया। सिने स्टार रजनीकांत ने सबसे पहले सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी पहुंचकर बजरंगबली के समक्ष माथा टेका। हनुमानगढ़ी पर संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास महाराज का आशीर्वाद भी लिया। उसके बाद रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई। दर्शन पूजन के बाद निर्माणाधीन राम मंदिर को भी देखा। बता दें कि रविवार की दोपहर करीब 3 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच में सिने स्टार रजनीकांत सबसे पहले हनुमानगढ़ी पहुंचे यहां पर वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास के नेतृत्व में बजरंगबली का दर्शन पूजन किया। इसके बाद सिने स्टार रजनीकांत रामलला के दरबार में पहुंचकर हाज़री लगाई। रामलला के दर्शन पूजन के उपरांत फिल्म अभिनेता रजनीकांत ने निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर को भी बेहद करीब से देखा। हालांकि इस दौरान मीडिया से उन्होंने कोई बातचीत नहीं की। दर्शन पूजन के बाद गाड़ी में ही बैठकर उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि अयोध्या आना सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी और भगवान श्री राम लला के दर्शन पूजन करना सौभाग्य की बात है। बताते चलें कि सिने स्टार रजनीकांत की फिल्म जेलर 10 अगस्त को रिलीज हुई थी उसी सिलसिले में रजनीकांत लखनऊ पहुंचे थे। जंहा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व पूर्व मुख्यमंत्री व सपा प्रमुख अखिलेश यादव से भी मुलाकात की थी। लखनऊ से चलकर सिने स्टार रजनीकांत अयोध्या पहुंचे थे और दर्शन पूजन करने के तुरंत बाद लखनऊ के लिए रवाना हो गए।