: समाजवादी मूल्यों के लिए सपा सदैव संकल्पित रहेगी: लीलावती
Fri, Mar 24, 2023
कहा,सोशलिस्टो ने बांधी गांठ पिछड़े पांवे सौ में साठ,अब वह समय आ गया है कि सभी लोगों एक जुट होकर सम्प्रदायिक शक्ति यो से लड़ें
अयोध्या। समाजवादी पार्टी महिला सभा की पूर्व जिला अध्यक्ष डाक्टर आस्था सिंह कुशवाहा के आवास हनुमत नगर जनौरा में एक गोष्ठी हुई। जिसमें समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य लीलावती कुशवाहा ने कहा कि समाजवादी आंदोलन के शिखर पुरुष,महान चिंतक एवं स्वतंत्रता सेनानी डॉक्टर राममनोहर लोहिया जी महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाने के पुरा प्रयास किये। डाक्टर लोहिया जी ने कहा था महिलाओं की कोई जाति नहीं होती जहां उनकी शादी हो जाती वहीं जाति लिखी जाती है महिलाएं पिछड़ी है इनको आगे लाना चाहिए। श्रीमती कुशवाहा ने जोर देकर कहा कि डॉक्टर लोहिया जी ने नारा दिया था कि सोशलिस्टो ने बांधी गांठ पिछड़े पांवे सौ में साठ,अब वह समय आ गया है कि सभी लोगों एक जुट होकर सम्प्रदायिक शक्ति यो से लड़ें। श्रीमती पूर्व प्रदेश अध्यक्ष महिला सभा ने यह भी कि डॉ राममनोहर लोहिया जी एवं सरदार भगत सिंह जी प्रेरणा से देश की तरक्की होगी।श्रीमती कुशवाहा ने कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पुरे देश में समाजवादी विचारधारा के लोगो को जोड़ कर देश में समाजवाद का झण्डा फहराया जायेगा तभी सबक साथ सबका विकास हो पायेगा ।
समाजवादी मूल्यों के लिए सपा सदैव संकल्पित रहेगी। गोष्ठी में राम शब्द उर्फ़ पांडेय खुशी राम यादव भीमल कुशवाहा बंश राज मौर्य दुर्गा गुप्ता अल्का कुशवाहा रेखा यादव गंगा जली यादव सुधरा यादव पुनम यादव पवन तिवारी श्यामू गुप्ता दिलीप बर्मा।आदि लोगों ने विचार रखे।
: रामजन्मोत्सव पर सजा सिद्ध पीठ श्यामा सदन मंदिर
Thu, Mar 23, 2023
जन कल्याणार्थ श्री राम महायज्ञ महोत्सव का 40 वां वर्ष, श्यामा सदन में उत्सव का उल्लास
पूर्वाचार्यों की त्याग,तपस्या से अवलोकित है मंदिर परिसर
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के प्रसिद्ध पीठों में शुमार श्यामा सदन मंदिर जो त्याग, तपस्या साधना का केंद्र भी है। मंदिर में सभी उत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। लगातार 40 वर्षों से मंदिर में श्रीराम महायज्ञ महोत्सव का दिव्य आयोजन जन कल्याणार्थ चैत्रराम नवमी पर होता आ रहा है। अपनी परम्पराओं का निर्वहन करते हुए श्यामा सदन पीठाधीश्वर महंत श्रीधर दास महाराज इस बार चैत्रराम नवमी पर 40 वां जन कल्याणार्थ श्री राम महायज्ञ महोत्सव बड़े ही हावभाव से मना रहें है। जो 26 मार्च रविवार को पंचांग पूजन एवं मंडप प्रवेश अग्नि प्रकाट्य वैदिक मंत्रों द्धारा होगा। जिसमें जन कल्याणार्थ आहुतियां डाली जायेगी। श्यामा सदन पीठाधीश्वर महंत श्रीधर दास महाराज ने बताया कि पूज्य परमहंस श्री रामकिंकर दास जी महाराज के कृपापात्र श्री लालसखे जी महाराज के कृपापात्र पूज्य गुरुदेव भगवान श्री संत गोपाल दास जी महाराज के आशीर्वाद से यह उत्सव मनाया जा रहा है। जिसमें प्रतिदिन श्रीमद् वाल्मीकि नवाह परायण पाठ हो रहा है। 26 से श्रीराम महायज्ञ होगा। मुख्य उत्सव 30 मार्च गुरुवार को श्रीराम नवमी पर भगवान का जन्म महोत्सव मनाया जाएगा। यह उत्सव श्री सीताराम भवन गोपी संकीर्तन महामंडल व श्री श्यामा सदन धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट रामघाट के तत्वावधान में हो रहा है।
: मुक्ति पाने के लिए श्रीमद् भागवत कथा ही और भगवत भक्ति ही उत्तम साधन: रामानुजाचार्य
Thu, Mar 23, 2023
अशर्फी भवन में सप्त दिवसीय अष्टोत्तर शत श्रीमद् भागवत कथा का छाया उल्लास
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ श्री अशर्फी भवन में चैत्र रामनवमी के अवसर पर सप्त दिवसीय अष्टोत्तर शत श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस में 151 आचार्य द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण का सस्वर पाठ किया गया। वेद पाठ संत अभ्यागत सेवा के साथ-साथ व्यास पीठ पर विराजमान अनंत श्री विभूषित जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने भागवत कथा का श्रवण कराते हुए परीक्षित महाराज के जन्म की कथा का श्रवण कराया। उन्होंने कहा कि शरणागत रक्षक हैं भगवान राजेंद्र परीक्षित प्रभु चरणों में शरणागति किए तो भगवान ने मां उत्तरा के गर्भ में परीक्षित की रक्षा की परीक्षित जी जैसे ही गर्भ से बाहर निकलते हैं परमपिता परमात्मा की छवि उनके नेत्रों से ओझल हो जाती है। जिस दिव्य रूप का आनंद परीक्षित ने गर्भ में किया उस परमपिता परमात्मा को सामने ना देख कर के परीक्षित जी रुदन करने लगते हैं भगवान श्री कृष्ण सभी लोगों के देखते देखते स्वधाम को गमन कर जाते हैं।स्वामीजी ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण के जाते ही पृथ्वी पर घोर कलयुग व्याप्त हो जाता है राजेंद्र परीक्षित अपने पूर्वजों की भांति प्रजा का पालन करते हैं एक दिन परीक्षित जी नगर भ्रमण के लिए जाते हैं रास्ते में वृषभ को देखते हैं जिसके चारों पैर कटे हुए हैं और एक काला कलूटा पुरुष धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाए हुए समीप में खड़ा है वृषभ को रुदन करते हुए देख कर परीक्षित जी धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते हैं कलयुग बड़ा ही बुद्धिमान है दौड़ करके परीक्षित के चरणों में लेट जाता है कलयुग के शरणागति करने पर परीक्षित जी कहते हैं कि काल रूपी भयावह दिखने वाले तुम कौन हो और इस वृषभ को क्यों मारना चाहते हो तुम मेरे राज्य को यथाशीघ्र छोड़कर के चले जाओ रुदन करता हुआ कलयुग परीक्षित जी से कहता है हे राजन् संसार में सभी और आपका राज्य व्याप्त हैं मैं कहां जाऊं राजा परीक्षित कहते हैं जो लोग प्रातः काल उठकर दंतधावन नहीं करते हैं सूर्य उदय के बाद तक सोते हैं ऐसी जगह पर जाकर तुम निवास करो।जगद्गुरु जी ने कहा कि जिस- घर में शुद्धता से प्रभु का भोजन नहीं बनाया जाता बर्तन झूठे पड़े रहते हैं ऐसी जगह जाकर तुम निवास करो कलयुग ने कहा हे राजन् यह दोनों जगह तो अत्यधिक निंदनीय है इसलिए एक कोई अच्छी जगह भी मेरे लिए बताइए परीक्षित ने कहा अन्याय से अर्जित स्वर्ण में भी मैं तुम्हें वास देता हूं ऐसा कह कर परीक्षित वन में आगे बढ़ें प्यास से व्याकुल होकर के शमीक ऋषि के आश्रम में प्रवेश किए शमीक ऋषि ध्यान में बैठे थे कली के प्रभाव के कारण याचना करने पर जल नहीं मिलने पर राजेंद्र परीक्षित क्रोधित हो गए मरा हुआ सर्प शमीक ऋषि के गले में डाल दिया शमीक ऋषि के पुत्र श्रंगी स्नान करने के लिए नदी पर गए हुए थे लौट कर जब आश्रम में आए पिता के गले में मरा हुआ सर्प देखकर अत्यधिक क्रोधित हो गए और श्राप दिया जिस व्यक्ति ने भी मेरे पिता श्री का यह अपमान किया है उस व्यक्ति के 7 दिन में तक्षक नाग के काटने से मृत्यु हो जाए। परीक्षित जी ने जैसे ही राजभवन में प्रवेश किया मुकुट को उतार के रखा स्मरण आया कि आज मेरे से बड़ा घोर अपराध हो गया मैंने एक देव ऋषि का अपमान कर दिया है दुखित होकर रुदन करने लगे एक क्षण में अपने राज्य को छोड़ कर के अपराध से मुक्त होने के लिए ऋषि जनों के मध्य गए राजेंद्र परीक्षित के कल्याण हेतु सुखदेव जी महाराज सभा में उपस्थित होकर राजेंद्र परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराते हैं। यह वही कथा है जिसका श्रवण करके राजेंद्र परीक्षित का उद्धार हुआ प्रभु भक्त वांछा कल्पद्रुम हैं अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रभु इस संसार में आते हैं 5 वर्ष के अबोध बालक ध्रुव मां सुरुचि से अपमानित होकर वन में गए देव ऋषि नारद से नवधा भक्ति का ज्ञान प्राप्त किया मंत्र दीक्षा ली और तपस्या की ध्रुव की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान भक्त ध्रुव को दर्शन देने पृथ्वी पर आते हैं। भगवान श्री हरि का सामीप्य पाकर साधक संसार के सभी सुख प्राप्त कर लेता है भक्त ध्रुव के जैसी अविरल भक्ति यदि साधक के अंदर व्याप्त हो जाए तो इस घोर कलयुग में बी सतयुग का वास हो जाएगा कलयुग में मुक्ति पाने के लिए श्रीमद् भागवत कथा ही और भगवत भक्ति ही उत्तम साधन है सभी भक्तजन कथा का श्रवण कर के आनंदित हो रहे।