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: श्रीमद्भागवत कथा भक्ति करने का उत्तम साधन: विंदुगाद्याचार्य

बमबम यादव

Mon, Mar 31, 2025
श्रीमद्भागवत कथा भक्ति करने का उत्तम साधन: विंदुगाद्याचार्य चक्रवर्ती महाराज दशरथ जी का राजमहल बड़ास्थान में श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथाव्यास डॉ. मनोज मोहन शास्त्री महाराज कह रहें श्रीमद् भागवत कथा विंदुगाद्याचार्य के कृपापात्र मंगल भवन पीठाधीश्वर श्रीमज्जगदुरु श्रीअर्जुनद्वाराचार्य स्वामी कृपालु रामभूषणदेवाचार्य जी महाराज ने अतिथियों का किया स्वागत अयोध्या। रामनगरी में भगवान श्रीराम के पावन जन्मोत्सव को लेकर उल्लास छाने लगा है। इसी कड़ी में रविवार को चक्रवर्ती महाराज दशरथ जी का राजमहल बड़ास्थान, रामकोट में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य शुभारंभहुआ। अवसर भगवान श्रीराम के पावन जन्मोत्सव का है। जो दशरथ महल के वर्तमान विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज के कुशल सानिध्य में मनाया जा रहा है। सायंकाल सर्वप्रथम विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज समेत अयोध्या धाम के अन्य विशिष्ट संत-महंत एवं धर्माचार्यों ने दीप प्रज्वलन कर कथा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज ने श्रीमद्भागवत का मंगलाचरण करते हुए कहा कि जब कई जन्मों का संचित पुण्य उदित होता है। तब सप्तपूरियों में प्रतिष्ठित श्रीअवधपुरी में भगवान के जीवन चरित्र को सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस कलिकाल में श्रीमद्भागवत कथा भक्ति करने का उत्तम साधन है। श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण हम प्रभु के नाम का चिंतन स्मरण एवं परोपकार की भावना से कार्य करते हैं। हम सभी जीव धन्य हैं जो देव दुर्लभ भारत भूमि में हम सब ने जन्म लिया और मनुष्य के स्वरूप को पाया है। श्रीमद्भागवत कथा के उद्घाटन अवसर पर रंगमहल के महंत रामशरण दास, जगदुरु स्वामी राघवाचार्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए। श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथाव्यास डॉ. मनोज मोहन शास्त्री महाराज ने भक्तजनों को प्रथम दिवस श्रीमद्भागवत कथा का रसास्वादन कराते हुए कहा कि यह वह पवित्र भूमि है, जिसका गुणगान देवगण स्वर्ग लोक में भी करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा से ईह लौकिक एवं पारलौकिक सुखों की प्राप्ति होती है। मां उत्तरा के गर्भ में भागवत के उत्तम श्रोता महाराज परीक्षित की प्रभु ने रक्षा किया। भगवान शरणागत रक्षक हैं। इससे पहले दशरथ महल के विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज और अन्य उपस्थित विशिष्ट संत-महंत, धर्माचार्यो ने व्यासपीठ की दिव्य आरती उतारी। विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज के कृपापात्र शिष्य मंगल सुंदर भवन पीठाधीश्वर श्रीमज्जगदुरु श्रीअर्जुनद्वाराचार्य स्वामी कृपालु रामभूषणदेवाचार्य जी महाराज ने आए हुए संत-महंत, धर्माचार्यों का माल्यार्पण व अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत किया। इस मौके पर महंत रामशरण दास रामायणी, रामायणी रामकृष्ण दास, नागा रामलखन दास, नंदकुमार मिश्र, सुदामा दास, कविराज दास आदि उपस्थित रहे।

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