श्री सद्गुरु सदन के 122 वर्ष पुराने झूलनोत्सव का हुआ भव्य समापन : आचार्यों द्वारा स्थापित परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और निष्ठा से निभाई जा रही: बालमुकुंद शरण
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Thu, Sep 3, 2026
श्री सद्गुरु सदन के 122 वर्ष पुराने झूलनोत्सव का हुआ भव्य समापन
भादो कृष्ण पंचमी को जानकी बाग में भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम दिखाई दिया
आचार्यों द्वारा स्थापित परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और निष्ठा से निभाई जा रही: बालमुकुंद शरण
अयोध्या। भादो कृष्ण पंचमी को जानकी बाग में भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम दिखाई दिया। श्री सद्गुरु सदन के 122 वर्ष पुराने झूलनोत्सव का शनिवार को विधिविधान से समापन हुआ। एक माह पांच दिन तक चले इस उत्सव के अंतिम दिन भगवान श्रीराम और माता जानकी को झूला झुलाने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़े। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे कलाकारों ने भक्ति पदों का गायन कर ठाकुरजी को रिझाया तो संत-महंत और श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।श्री सद्गुरु सदन में झूलनोत्सव की यह परंपरा करीब 122 वर्ष पुरानी है। स्वामी रामवल्लभा शरण महाराज ने आषाढ़ पूर्णिमा के दिन झूलनोत्सव का शुभारंभ किया था। परंपरा के अनुसार भादो मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी को जानकी बाग में इसका समापन किया जाता है। वर्तमान पीठाधीश्वर महंत सियाकिशोरी शरण महाराज के सानिध्य में इस वर्ष भी ठाकुरजी एक माह पांच दिन तक झूले पर विराजमान रहे।
समापन समारोह में अयोध्या ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने भगवान के समक्ष भक्ति पद प्रस्तुत किए। पदों की मधुर स्वर लहरियों के बीच श्रद्धालुओं ने प्रभु श्रीराम और माता जानकी को झूला झुलाया। दोपहर से ही जानकी बाग में मेले जैसा दृश्य रहा। श्रद्धालुओं के लिए जलेबी, समोसा, खीर सहित विभिन्न प्रसाद वितरित किए गए।श्री सद्गुरु सदन के अधिकारी बालमुकुंद शरण महाराज ने कहा कि आचार्यों द्वारा स्थापित परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और निष्ठा से निभाई जा रही है। एक माह पांच दिन तक ठाकुरजी झूले पर विराजमान होकर भक्तों को आनंद प्रदान करते हैं। भादो कृष्ण पंचमी को जानकी बाग में होने वाला समापन इस परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब अगले झूलनोत्सव के लिए श्रद्धालुओं को करीब 11 माह प्रतीक्षा करनी होगी।झूलनोत्सव के समापन का साक्षी बनने के लिए अयोध्या के अनेक संत-महंत भी जानकी बाग पहुंचे।भगवान के दर्शन कर संतों ने उत्सव में सहभागिता की। गया शरण महाराज सहित सैकड़ों संत-महंत और श्रद्धालु मौजूद रहे। झूलनोत्सव के समापन के साथ ही रामनगरी में इस वर्ष के झूलनोत्सव का विधिवत पटाक्षेप हुआ।
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