Wednesday 4th of November 2026

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श्रीअवध बिहारी कुंज में सियपिय मिलन महोत्सव का छाया उल्लास : श्रीरामजन्भूमि पर भव्य-दिव्य मंदिर के साथ हमारा जीवन सफल हुआ,हमारी पीढ़ी धन्य हुई: महंत डा गणेश दास

श्रीअवध बिहारी कुंज में सियपिय मिलन महोत्सव का छाया उल्लास

श्रीरामजन्भूमि पर भव्य-दिव्य मंदिर के साथ हमारा जीवन सफल हुआ,हमारी पीढ़ी धन्य हुई: महंत डा गणेश दास

अयोध्या। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ श्रीअवध बिहारी कुंज रामानंद नगर में श्रीमद् जगतगुरु अग्रपीठाधीश्वर रैवासा धाम के साकेतवासी स्वामी डॉ. राघवाचार्य वेदांती महाराज के द्वितीय पुण्यतिथि उपलक्ष्य में आयोजित सियपिय मिलन महोत्सव क्रम में नौ दिवसीय श्रीरामकथा के तृतीय दिवस राष्ट्रीय कथाव्यास महामंडलेश्वर श्रीमहंत डॉ. गणेश दास लश्करी महाराज ने भक्तजनों को रसास्वादन कराते कहा कि यह पावन पुनीत श्रीअवध धाम है। जो प्रभु श्रीराम की पवित्र जन्मस्थली है। जहां हम सब भगवान की मंगलमयी कथा का रसपान कर रहे हैं। पांच सौ वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्रीराम अपने जन्मभूमि पर नव्य मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। श्रीरामजन्भूमि पर उनका दिव्य-भव्य मंदिर बन गया है। जहां दिव्य मंदिर में हम लोग श्रीरामलला सरकार का दर्शन-पूजन कर रहे हैं। जो हम सबके लिए परम सौभाग्य की बात है। हम लोग भव्य राममंदिर में रामलला सरकार का दर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्रीरामजन्भूमि पर भव्य-दिव्य मंदिर के साथ हमारा जीवन सफल हुआ। हमारी पीढ़ी धन्य हुई, जो हम सबने अपनी आंखो से भव्य राममंदिर निर्माण और उसमें भगवान रामलला को विराजमान होते देखा। इससे हमारा जीवन सफल हुआ, जिसके हम सब साक्षी बने। सैंकड़ों वर्षों की आस पूरी हुई। इससे हम अपने आपको बहुत ही गौरवांवित महसूस कर रहे हैं। अयोध्या धाम की बड़ी ही महिमा है। अयोध्या का तात्पर्य है जहां कभी युद्ध ना हुआ हो। जिसे कभी युद्ध में जीता ना जा सके। वही अयोध्या है, अयोध्या एक पावन मोक्षदायिनी नगरी भी है। जो सातों पुरियों में मस्तक के समान है। जिसे सप्तपुरियों में मस्तक कहा गया है। जिसका बखान ऋषि-मुनियों से लेकर देवतागण करते हैं। ऐसी है हमारी पावन अयोध्या नगरी। पूरा कथा सभागार श्रद्धालुओं से भरा रहा। चहुंओर प्रभु श्रीराम की जय-जयकार हो रही थी। इससे पहले व्यासपीठ का पूजन-अर्चन कर भव्य आरती उतारी गई। अंत में कथा विश्राम पर प्रसाद वितरित किया गया। सियपिय मिलन महोत्सव के आयोजक महामंडलेश्वर हरिकृष्ण दास उर्फ ग्वालिया बाबा समेत बड़ी में भक्तजनों में भगवान की अमृतमयी कथा रसपान कर अपना जीवन धन्य बनाया और पुण्य के भागीदार बने।

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