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डॉ. मीनाक्षी यादव, सुल्ताना बानो,  राकेश कुमार वर्मा, बृजेश कुमार व डॉ. जन्मेजय तिवारी को मिला सम्मान

आचार्यों द्वारा स्थापित परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और निष्ठा से निभाई जा रही: बालमुकुंद शरण

ब्रह्माकुमारी से जुड़े बीके मुकेश ने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का विशेष रूप से अभिनंदन किया

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: राम के सद्गुणों का आदर्श प्रस्तुत करना वाल्मीकि रामायण का उद्देश्य: जीयर स्वामी

बमबम यादव

Wed, Jan 22, 2025
राम के सद्गुणों का आदर्श प्रस्तुत करना वाल्मीकि रामायण का उद्देश्य: जीयर स्वामी
प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में छाया वाल्मीकि रामायण कथा का उल्लास, 120 वैदिक आचार्य कर रहें पाराणय पाठ
अयोध्या। राम के सद्गुणों का उच्चतम आदर्श समाज के सम्मुख प्रस्तुत करना वाल्मीकि रामायण का प्रमुख उद्देश्य है। एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, भ्राता एवं आदर्श राजा  एक वचन, एक पत्नी, एक बाण जैसे व्रतों का निष्ठापूर्वक पालन करने वाले राम का चरित्र उकेरकर अहिंसा, दया, अध्ययन, सुस्वभाव, इंद्रिय दमन, मनोनिग्रह जैसे षट्‍गुणों से युक्त आदर्श चरित्र की स्थापना रामकथा का मुख्य प्रयोजन है। उक्त बातें श्री त्रिदंडी अहोबिला रामानुज जीयर स्वामीजी ने प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में आयोजित वाल्मीकि रामायण कथा के तृतीय दिवस में कही। उन्होंने कहा कि राम परिवार के वैचारिक, भाषिक एवं क्रियात्मक पराक्रम का वर्णन करना ही वाल्मीकि रामायण का प्रधान हेतु रहा है। जीयर स्वामी ने कहा कि रामचरित्र के महासागर में डूबे, राम जल से आकंठ भीगे, करुणा-प्रेम, भक्ति जैसे सकारात्मक रसों से आप्लावित वाल्मीकि तमसा नदी के तट पर स्नान की इच्छा से आए। उनके हृदय में रामभक्ति का समुद्र लहरा रहा था। सारी सृष्टि ही मानो राममय हो गई थी। राम के दैविक गुण, मानवीय वृत्तियाँ, दया, उदारता, अहिंसा, अक्रोध, परदुःख, कातरता अभी भी उनके मन-मस्तिष्क पर छाई हुई थी कि शांत रस का सामना वीभत्स एवं हिंसा वृत्ति से हुआ। शीतल भूमि पर एकाएक दग्धता का अनुभव हुआ, जब सामने ही एक बहेलिए ने हिंसक भावों को प्रकट करते हुए निरपराध, मूक, प्रेमालाप करते हुये  क्रौंच पक्षी को स्वार्थवश बाण से आहत कर दिया। अभी-अभी तो नारद से राम बाण, राम के शर संधान की कथा सुनी थी कि राम ने शौर्य, पराक्रम, दयालुता, उदारता आदि भावों का संरक्षण करते हुए दुष्टों के नाश एवं सज्जनों के परित्राण हेतु शस्त्र उठाए थे। कथा से पूर्व मंदिर में 120 वैदिक आचार्य वाल्मीकि रामायण का पारायण पाठ सामूहिक रुप से किया।इसके बाद विश्व कल्याण व राष्ट्र उत्थान हेतु यज्ञ कुंड में आहुतियां डाली गई। इस भव्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दक्षिण भारत से सौकड़ों रामभक्त आये है। सौमित्र स्वामीजी व यज्ञाचार्य गिरीधराचार्य स्वामीजी कार्यक्रम की देखरेख कर रहें। महोत्सव की अध्यक्षता सिद्धपीठ श्री हनुमान बाग के महंत जगदीश दास ने किया। व्यवस्था में हरि स्वामी के साथ हनुमान बाग मंदिर के सुनील दास,पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री व नितेश शास्त्री लगे हुए है।

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