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: देवस्थानम के उत्सव विग्रह का हुआ महामिलन

बमबम यादव

Wed, Mar 29, 2023

अम्मा जी पहुंचे देवस्थानम के रामलला, मिलन कर वापस लैटे सदन

भगवान की यात्रा के आगे-आगे मशाल लिए नन्हे सन्त व दक्षिण वाद यंत्रों की धुन इस शोभायात्रा की शोभा में चार चांद लगा रहें थे 

देवस्थानम के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य जी के संयोजन में पूरे भाव और वैभव से पट्टाभिराम का स्वागत वंदन अभिनन्दन एवं पूजन किया गया

अयोध्या। रामजन्म भूमि के निकट पौराणिक परम्परा की पीठ रामलला सदन देवस्थानम में रामजन्मोत्सव का उल्लास चरम पर है। पूरे मंदिर चहुंओर खुशियां ही खुशियां दिख रही है। हर कोई अपने आराध्य के जन्म महोत्सव में नाच गा रहा है। पूरा मंदिर विशेष रुप से सजाया गया है। देवस्थानम का उत्सव श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर रहा है। मौका था अम्माजी मंदिर व देवस्थानम के उत्सव विग्रह के महामिलन का। देवस्थानम के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य जी के संयोजन में पूरे भाव और वैभव से पट्टाभिराम का स्वागत वंदन अभिनन्दन एवं पूजन किया गया। आज सदन के रामलला पालकी पर सवार होकर अम्माजी मंदिर पहुंचे जहां पर रामलला सरकार का दक्षिण परम्परा से विधिवत पूजन किया गया। जहां पर अचल विग्रह व उत्सव विग्रह को साथ साथ विराजमान कराया गया। भगवान का मिलन महोत्सव कार्यक्रम के तहत भगवान को अम्मा जी मंदिर लाया गया, जंहा से पुनः सांयकाल गाजे बाजे के साथ पालकी पर सवार कर भगवान को कंधों पर बैठाकर पुनः रामलला सदन देवस्थानम मंदिर में लाया गया।

 इस महामिलन उत्सव के मूल में पट्टाभिराम के विग्रह की विरासत है। पट्टाभिराम के विग्रह का दो सेट गत वर्ष अम्माजी के मंदिर में स्थापित था। इन विग्रहों की स्थापना करीब 125 वर्ष पूर्व महान योगी पार्थसारथी जी ने अम्माजी के मंदिर में की थी। इन मूर्तियों को योगी पार्थसारथी जी दिव्य दैवी संकेतों से प्रेरित हो तमिलनाडु समुद्र तट से उस स्थल से लेकर आये थे जहां सागर पार करने से पूर्व श्रीराम ने विश्राम किया था। गौरतलब है कि रामजन्मोत्सव गुरुवार को मनाया जाएगा जिसके चलते यंहा विविध आयोजन दक्षिण शैली परम्परा के तहत किया जा रहा है। रामलला सदन देवस्थानम पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज की अगुवाई में सम्पूर्ण कार्यक्रम यंहा आयोजित किया जा रहा है। भगवान की यात्रा के आगे आगे मशाल लिए नन्हे सन्त व दक्षिण वाद यंत्रों की धुन इस शोभायात्रा की शोभा में चार चांद लगाते हुए नज़र आई।

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