Sunday 6th of September 2026

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: चक्रवर्ती राजा दशरथ जी के राज महल में सजी फूलों की भव्य झांकी

बमबम यादव

Fri, Jul 5, 2024

गेंदा, गुलाब, बेला, रजनीगंधा, गुलाब और कमल के 10 कुंटल फूलों से सजाभगवान धनुषधारी का  दरबार

गर्मी और उमस से भगवान को बचाने के लिए फूल बंगला का आयोजन

अयोध्या। वैष्णवनगरी के मंदिरों में तपती गर्मी में भगवान को कूल-कूल रखने के लिए संतों ने फूलबंग्ले की झांकी के आयोजन की परंपरा शुरू की थी। उत्सव के रूप में आयोजित प्राचीन काल की यह परंपरा आधुनिक काल में भी कायम है। वह भी तब जब अधिकांश मंदिरों में पंखे व कूलर की व्यवस्था की जा चुकी है। इसी परंपरा को आज भी बड़ी शिद्दत से निभा रहें। बिंदुगद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य में बिंदु संप्रदाय की प्रधान पीठ श्री दशरथ राज महल बड़ा स्थान में बुधवार देर रात फूल बंगला महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। झांकी देर रात तक संतों व भक्तों को मंत्रमुग्ध करती रही। विभिन्न प्रकार के करीब 10 क्विंटल फूलों से सजी झांकी का दर्शन कर भक्त निहाल होते रहे।बुधवार रात करीब नौ बजे धनुषधारी भगवान की महाआरती के साथ शुरू हुए उत्सव का उल्लास रात चढ़ने के साथ ही बढ़ता गया। उत्कृष्ट कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उत्सव की भव्यता को बढ़ा दिया। फूल बंगला में सोहै युगल रसिया... फूलन में सज धज कर युगल सरकार बैठे हैं... फूलों में सज रहे हैं श्री वृंदावन बिहारी... जैसे सुमधुर गीतों व भजनों ने भक्तों को आनंदित कर दिया। दशरथ महल में भगवान धनुषधारी के नाम से स्थापित श्रीराम की सेवा पूजा राजसी वैभव के अनुसार होती है। गर्मी और उमस से भगवान को बचाने के लिए जिन प्रमुख मंदिरों में फूल बंगला की झांकी सजाए जाने की परंपरा का पालन होता है, उनमें दशरथ महल अगली कतार में है। यहां अन्य पर्व एवं त्योहार की तरह फूल बंगला भी खास महत्व का होता है।

कार्यक्रम के संयोजक मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत रामभूषण दास कृपालु जी बताते है कि मंदिरों में विराजमान भगवान के विग्रह संत-साधकों के लिए वस्तुतः अर्चावतार की भांति हैं। मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठित देव प्रतिमा को सजीव माना जाता है। यही कारण है कि साधक संतों ने उपासना के क्रम में विराजमान भगवान के अष्टयाम सेवा पद्घति अपनाई। इस सेवा पद्घित में भगवान की भी सेवा जीव स्वरूप में ही की जाती है। जिस प्रकार जीव जैसे सोता, जागता है उसी प्रकार भगवान के उत्थापन व दैनिक क्रिया कर्म के बाद उनका श्रृंगार पूजन, आरती भोग-राग का प्रबंध किया जाता है। इसी क्रम में भगवान को गर्मी से बचाने के लिए पुरातन काल में संतों ने फूलबंग्ला झांकी की परंपरा का भी शुभारंभ किया था, जिसका अनुपालन आज भी हम कर रहे है। कृपालु जी महाराज ने बताया कि झांकी कोलकाता के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की जाती है, जिसमें उपयोग किए जाने वाले फूल बनारस, लखनऊ, वृन्दावन, कलकत्ता आदि जगहों से मंगवाए गए जाते है। इसके आलावा कुछ पुष्प विदेशों से भी आयातित किए जाते है। इस अवसर पर महंत कमल नयन दास, महंत सुरेश दास, जगद्गुरु राम दिनेशाचार्य,  महंत अवधेश दास, महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में मौजूद संतों व भक्तों ने महोत्सव की भव्यता बढ़ाई।

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