Wednesday 4th of November 2026

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मां सरयू का 5 कुंतल दूध से हुआ दुग्धाभिषेक : मां सरयू केवल एक नदी नहीं, बल्कि अयोध्या की आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवनधारा: कौस्तुभ मणि आचारी

मां सरयू का 5 कुंतल दूध से हुआ दुग्धाभिषेक

वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच एक कुंतल पुष्प अर्पित कर मां सरयू का भव्य श्रृंगार एवं पूजन किया गया

मां सरयू केवल एक नदी नहीं, बल्कि अयोध्या की आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवनधारा: कौस्तुभ मणि आचारी

अयोध्या। सरयू जयंती की पूर्व संध्या पर रविवार को रामनगरी का पावन सरयू तट श्रद्धा, आस्था और भक्ति से सराबोर हो उठा। रामनगरी की अति प्राचीन पीठ दंत धावन कुंड आचारी मंदिर से जुड़े समाजसेवी कौस्तुभ मणि आचारी के नेतृत्व में मां सरयू का पांच कुंतल दूध से विधिवत दुग्धाभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच एक कुंतल पुष्प अर्पित कर मां सरयू का भव्य श्रृंगार एवं पूजन संपन्न हुआ। आयोजन में बड़ी संख्या में संत, श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।पूजन-अर्चन के दौरान आचार्यों ने वैदिक मंत्रों के साथ अभिषेक कराया। श्रद्धालुओं ने मां सरयू से प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि, लोककल्याण तथा विश्व शांति की प्रार्थना की। दुग्धाभिषेक के बाद पुष्पों से सुसज्जित मां सरयू की आराधना की गई और सामूहिक सरयू आरती का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर मां सरयू का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे घाट पर भक्ति और उत्साह का वातावरण बना रहा।आयोजक कौस्तुभ मणि आचारी ने बताया कि सरयू जयंती की पूर्व संध्या पर मां सरयू के दुग्धाभिषेक की परंपरा का वह कई वर्षों से निर्वहन कर रहे हैं। इस वर्ष भी परंपरा के अनुरूप पांच कुंतल दूध और एक कुंतल पुष्प अर्पित कर विशेष पूजन कराया गया। उन्होंने कहा कि मां सरयू केवल एक नदी नहीं, बल्कि अयोध्या की आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवनधारा हैं। उनकी आराधना से समाज में सद्भाव, सेवा और लोककल्याण की भावना को बल मिलता है।उन्होंने श्रद्धालुओं से मां सरयू की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने का भी आह्वान किया। कार्यक्रम के समापन पर प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन के दौरान सरयू तट पर भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था और पूरा वातावरण जयघोष तथा भक्ति-गीतों से गूंजता रहा।

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