Thursday 3rd of September 2026

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सुचना

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शिक्षकों के हित के लिए सुप्रीम कोर्ट में सरकार दाखिल करे पुनर्विचार : कहा-समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो बड़े पैमाने पर पैदा हो सकता है आक्रोश

शिक्षकों के हित के लिए सुप्रीम कोर्ट में सरकार दाखिल करे पुनर्विचार याचिका : अवधेश प्रसाद
कहा-समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो बड़े पैमाने पर पैदा हो सकता है आक्रोश
अयोध्या। सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षक भर्ती में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) को अनिवार्य बनाए जाने के फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस फैसले पर चिंता जताई। उन्होंने कहा- इस निर्णय से प्रदेश के करीब एक करोड़ परिवार प्रभावित हो सकते हैं। सांसद ने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया कि वे तत्काल प्रभाव से इस मुद्दे पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करें और अदालत में सही तरीके से पैरवी करें।
सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा- प्रदेश के लाखों युवा पहले से ही शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया में वर्षों से तैयारी कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों ने बीएड, डीएलएड और अन्य प्रशिक्षण कोर्स पूरे किए हैं। ऐसे में अचानक से टीईटी को अनिवार्य करना उनके भविष्य के साथ अन्याय है। यह फैसला न सिर्फ छात्रों पर, बल्कि उनके परिवारों पर भी बड़ा बोझ डालेगा। सरकार इस मामले में सही पैरवी नहीं कर पाई। सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार इस मामले में सही से पैरवी नहीं कर पाई, जिसके कारण यह स्थिति बनी है। जब लाखों युवा भविष्य की चिंता में सड़कों पर उतरेंगे, तो कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। सांसद ने सरकार से अपील की कि वे युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए त्वरित समाधान निकालें। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षक भर्ती जैसी प्रक्रिया में बार-बार बदलाव करना शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है। पहले से चल रहे नियमों और चयन प्रक्रियाओं को बीच में बदलना योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय है। सांसद ने इस फैसले को “युवाओं के सपनों पर ताला“ बताते हुए कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो बड़े पैमाने पर आक्रोश पैदा हो सकता है। उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि वह स्वयं इस मामले को संसद में उठाएंगे और युवाओं की आवाज बनकर केंद्र सरकार तक पहुंचाएंगे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने आदेश में कहा था कि शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। अदालत ने यह भी माना कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए यह कदम ज़रूरी है। हालांकि, इस फैसले के बाद प्रदेशभर में अभ्यर्थियों और विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। इस मौके पर जिलाध्यक्ष पारसनाथ यादव, राघवेंद्र प्रताप सिंह अनूप, प्रवक्ता लवलेश पांडेय, शावेज़ जाफरी,छोटेलाल यादव, कुंवर बहादुर सिंह,रामकरन यादव, ओपी पासवान, आकिब खान भी मौजूद रहे।

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