: रसमोद कुंज में धूमधाम से मनाया गया रामकलेवा
Fri, Dec 10, 2021
परम्पराओं का हुआ निर्वहन भगवान को लगा छप्पन भोग
अयोध्या। वैष्णव नगरी अयोध्या में उपासना की दो अलग-अलग शाखाएं हैं। इन शाखाओं में दास परम्परा और सख्य परम्परा शामिल है। मिथिला धाम से अपना रिश्ता जोड़ने वाले मधुरोपासक कहलाते हैं और सख्य भाव से राम व सीता के रूप में दूल्हा-दुलहिन सरकार की उपासना करते हैं। इन दोनों ही परम्पराओं के उपासक संत रामानंद सम्प्रदाय के प्रथम आचार्य के रूप में देवी सीता जी को ही स्वीकारते हैं। गुरु वंदना में सीतानाथ समारम्भाम् रामानंदार्य मध्यमाम अस्मादचार्य पर्यन्ताम वंदे श्रीगुरु परम्पराम् इसी श्लोक का वाचन किया जाता है।
फिर भी दास परम्परा के उपासक राजा राम व हनुमान जी की उपासना दास यानी कि सेवक भाव से करते हैं। इसके समानान्तर सख्य भाव के उपासक सखी भाव की गुप्त उपासना करते हैं। इन संतों की मान्यता है कि जनकपुर में विवाह के बाद भगवान दुलहिन सरकार के साथ दूल्हा सरकार के रूप में ही विराजते हैं। यही कारण है कि ये उपासक श्रीरामचरित मानस के पारायण के दौरान विवाह प्रसंग तक का ही पारायण करते हैं। पूजन-अर्चन के दौरान सिर पर पल्लू रखकर त्रिरयोचित भाव से ही आराध्य को रिझाते हुए उनसे अनुनय-विनयपूर्वक प्रत्येक क्रिया करते हैं। इस परम्परा को पुष्पित और पल्लवित करने का श्रेय लक्ष्मण किला के संस्थापक आचार्य स्वामी युगलानन्य शरण महाराज को दिया जाता है। इस परम्परा के अनेक संत हुए जिनमें रसमोद कुंज के पूर्वाचार्य अनंत श्री बिरौली सरकार व श्री महंत सियाछबीली शरण भैया जी भी प्रमुख रुप से रहे। अपनी परम्पराओं का निर्वहन आज भी रसमोद कुंज के वर्तमान महंत रामप्रिया शरण गिरधारी जी महाराज कर रहे है। महंत रामप्रिया शरण गिरधारी जी महाराज के पावन सानिध्य में कुवर कलेवा मनाया गया। जिसमें भगवान को छप्पन भोग लगाया गया।
: सेवा दिवस के रुप में मना महंत कल्याण दास का जन्म दिवस
Thu, Dec 9, 2021
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमानगढ़ी के साकेतवासी पूर्व गद्दीनशीन श्रीमहंत रमेश दास जी महाराज के कृपापात्र शिष्य महंत कल्याण दास महाराज का जन्म दिवस उनके शिष्य महंत बृजेश दास व परिकरों ने सेवा दिवस के रुप में मनाया। महंत बृजेश दास के अगुवाई में श्रीराम अस्पताल में फल व भोजन वितरण किया गया तो वृद्धा आश्रमों व कुष्ठ आश्रमों में फल भोजन व ठंड के बचने के लिए कंबल वितरण किया गया। महंत बृजेश दास रामायणी ने बताया कि आज गुरुदेव महंत कल्याण दास महाराज का जन्म दिवस है इसको हम सभी लोग सेवा दिवस के रुप में मना रहे है। जिसमें लोगो को फल व भोजन वितरण किया गया साथ बेसहारों व गरीबों को ठंड से बचने के लिए कंबल भी वितरण किया गया। कार्यक्रम में देरशाम विशिष्ट संतो का सम्मान व भोजन प्रसाद होगा। इस मौके पर रवि यादव, हरेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ राज महल बड़ा स्थान में श्री राम विवाह पर झूमे श्रद्धालु
Thu, Dec 9, 2021
माता सीता भक्ति और शक्ति का रूप है और शिव धनुष अंहकार का प्रतीक: रामदिनेशाचार्य
अयोध्या। व्यक्ति के जीवन में नियम का होना अति आवश्यक है। जिनके जीवन का कोई नियम नही होता उनका जीवन उमर भर भटकता रहता है। जीवन के अच्छे कर्मों को यज्ञ कहा गया है। यह बात चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ राज महल बड़ा स्थान में सीताराम विवाह महोत्सव के रामकथा में जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कही। रामकथा में संत साधक रसमयी आनंदमयी सागर में गोता लगा रहे है।दशरथमहल बड़ास्थान के बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य की अध्यक्षता और श्री महाराज जी के कृपा पात्र सिर्फ कृपालु राम भूषण दास जी महाराज के संयोजन में यह महोत्सव हो रहा है। कथा के बाद आज मंदिर से दिव्य भव्य अद्वितीय श्री राम बारात निकली। बारात की दिव्यता की चर्चा रामनगरी के चहुंओर देखने को मिली। कथा के छटवें दिवस श्री सीताराम विवाहोत्सव का बहुत ही सुंदर वर्णन करते हुए महाराज जी ने यज्ञ के महत्व को बताते हुए कहा कि जब जीवन में यज्ञ समाप्त को जाता है तो जीव का तेज और बल दोनो की समाप्त हो जाते हैं। राम विवाह के प्रसंग में उन्होंने बताया कि माता सीता भक्ति और शक्ति का रूप है और शिव धनुष अंहकार का प्रतीक है। कथा में भगवान श्रीराम के विवाह प्रसंग पर व्यास पीठ से मंगल गीत गाए गए। भगवान श्री राम सीता लक्ष्मण के स्वरूप की आरती उतारी गई। रामानन्दाचार्य जी ने कथा के मर्म का संदेश दिया कि जीवन में बिना त्याग तपस्या संतोष के किसी भी प्रकार का सुख और आनंद प्राप्त नही किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि संसार में गुरु तत्व ही इन सभी साधनों के दाता है। व्यासपीठ का पूजन कथा यजमान नरेश गर्ग व कुसुमलता गर्ग ने किया। इस मौके पर दशरथ राज महल परिवार के संत साधक व रमेश दास शास्त्री, कामधेनु पीठाधीश्वर महंत आशुतोष दास, आचार्य गौरव दास शास्त्री, शिवेंद्र शास्त्री सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।