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: चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ राज महल बड़ा स्थान में श्री राम विवाह पर झूमे श्रद्धालु

बमबम यादव

Thu, Dec 9, 2021


माता सीता भक्ति और शक्ति का रूप है और शिव धनुष अंहकार का प्रतीक: रामदिनेशाचार्य 


अयोध्या। व्यक्ति के जीवन में नियम का होना अति आवश्यक है। जिनके जीवन का कोई नियम नही होता उनका जीवन उमर भर भटकता रहता है। जीवन के अच्छे कर्मों को यज्ञ कहा गया है। यह बात चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ राज महल बड़ा स्थान में सीताराम विवाह महोत्सव के रामकथा में जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कही।  रामकथा में संत साधक रसमयी आनंदमयी सागर में गोता लगा रहे है।दशरथमहल बड़ास्थान के बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य की अध्यक्षता और श्री महाराज जी के कृपा पात्र सिर्फ कृपालु राम भूषण दास जी महाराज के संयोजन में यह महोत्सव हो रहा है। कथा के बाद आज मंदिर से दिव्य भव्य अद्वितीय श्री राम बारात निकली। बारात की दिव्यता की चर्चा रामनगरी के चहुंओर देखने को मिली। कथा के छटवें दिवस श्री सीताराम विवाहोत्सव का बहुत ही सुंदर वर्णन करते हुए महाराज जी ने यज्ञ के महत्व को बताते हुए कहा कि जब जीवन में यज्ञ समाप्त को जाता है तो जीव का तेज और बल दोनो की समाप्त हो जाते हैं। राम विवाह के प्रसंग में उन्होंने बताया कि माता सीता भक्ति और शक्ति का रूप है और शिव धनुष अंहकार का प्रतीक है। कथा में भगवान श्रीराम के विवाह प्रसंग पर व्यास पीठ से मंगल गीत गाए गए। भगवान श्री राम सीता लक्ष्मण के स्वरूप की आरती उतारी गई। रामानन्दाचार्य जी ने कथा के मर्म का संदेश दिया कि जीवन में बिना त्याग तपस्या संतोष के किसी भी प्रकार का सुख और आनंद प्राप्त नही किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि संसार में गुरु तत्व ही इन सभी साधनों के दाता है। व्यासपीठ का पूजन कथा यजमान नरेश गर्ग व कुसुमलता गर्ग ने किया। इस मौके पर दशरथ राज महल परिवार के संत साधक व रमेश दास शास्त्री, कामधेनु पीठाधीश्वर महंत आशुतोष दास, आचार्य गौरव दास शास्त्री, शिवेंद्र शास्त्री सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।

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