: सिद्ध पीठ हनुमान बाग की राजशी भव्य राम बारात निकली
Thu, Dec 9, 2021
बंधी, रथ, हाथी,घोड़े व ऊंट रहे बारात का आकर्षक, बैड़ बाजे के बीच नाचने गाते निकले बाराती
अयोध्या। बारात जो केवल मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की ही नहीं बल्कि उनके तीन भाई परम प्रिय लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न भी दूल्हा बने रथ पर सवार थे यानि परम प्रतापी दशरथ के चारों पुत्र दूल्हा बने हुए थे और उनकी भव्य बारात ले राजा दशरथ जनकपुरी की ओर रवाना हो रहे थे। अगहन शुक्ल पक्ष की पंचमी पर धूम-धड़ाके के साथ राम बारात निकली। जिसमें बैंड बाजे, हाथी घोड़े, ढोल नगाड़े और तरह-तरह के वाद्य यंत्र बज रहे थे। इस सबके बीच रथों पर सवार भगवान के स्वरूपों पर फूलों की वर्षा हो रही थी। और अयोध्या की जनता के साथ श्रद्धालु उनकी आरती उतार रहे थे।
इस अवसर पर अयोध्या आनंद में झूमती नजर आई। बारात में शामिल श्रद्धालु बाराती के रूप में ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचते दिखे। खास हो या आम, महिला हो या पुरुष, बच्चे हो या बूढ़े सभी राम के बाराती बन आनंदित और सौभाग्यशाली महसूस कर रहे थे। मंदिरों में अवधी मैथिली परंपरा से भगवान राम का विवाह हो रहा था। क्योंकि, अयोध्या की प्राचीन परंपरा अवधी है। वहीं जनकपुर में मैथिली परंपरा से विवाह होते हैं। जब से रामलला के मंदिर के निर्माण को लेकर काम में तेजी आई है, तब से अयोध्या नगरी का एक-एक त्यौहार राम के रंग में डूबा हुआ नजर आता है।
रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ हनुमान बाग की राजशी रामबारात निकली जो अपने राजशी वैभव को प्रदर्शित करते हुए नाचते गाते निकले। इस राम बारात की अगुवाई मंदिर के महंत जगदीश दास महाराज कर रहे थे। हनुमान बाग के राम बारात में बहुत ही सुंदर झांकी निकली जिसके देखने के लिए सड़कों पर श्रद्धालुओं का ताता लगा रहा। रथों पर सवार भगवान का विग्रह व घोड़ो पर सवार भगवान राम की दिव्य छटा देखने के लिए हर कोई लालायित दिखा। बारात में बंघी व उस पर सवार महंत जगदीश दास महाराज अपने राजशी वैभव का जीवंत उदाहरण स्वयं दिख रहे थे। बारात का संयोजन मंदिर के हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज के उत्ताराधिकारी योगेश दास जी महाराज, सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री, पूरा हनुमान बाग परिवार कर रहा था।हनुमान बाग के राम बारात में हाथी, घोड़े व ऊट आकर्षक का केंद्र बने रहें।
: पूर्व कैबिनेट मंत्री के गाड़ी से कर्मचारी की कुचलकर मौत
Wed, Dec 8, 2021
किसी डिबेट में शामिल होने गये थे सभी पार्टी के प्रतिनिधि
गुलाबबाड़ी में प्रवेश की परमीशन के बगैर प्रवेश की थी कार
अयोध्या। गुलाबबाड़ी मैदान में लेटे उद्यान विभाग के कर्मचारी की एक बगैर नम्बर प्लेट की कार के नीचे आने से मौत हो गयी। वहां मौजूद लोगो का कहना था कि यह कार में लगे पोस्टर के आधार पर वाहन सपा के पूर्व मंत्री अवधेश प्रसाद का था।
: मठाधीश मस्त माननीय सुस्त...
Tue, Dec 7, 2021
रामनगरी का प्रसिद्ध रामायण मेला ढूढ रहा अपना अस्तित्व
अव्यवस्थाओं के बीच आज रामायण मेला का हुआ उद्घाटन
अयोध्या । चार दशक से शुरू हुए रामायण मेला अब महज औपचारिक बनकर रह गया है। मेले के प्रति लोगों का आकर्षक भी अब पहले जैसा नहीं रहा। कभी लाखों के भीड़ की गवाह बने रामायण मेला में अब सैकड़ों की संख्या भी जुटानी मुश्किल हो चली है। आयोजन समिति, सरकारी सहायता न मिलने का रोना-रोकर अपना पल्ला झाड़ लेती है। तो वहीं अयोध्या के प्रमुख मठाधीश भी इस मेले को लेकर अपना नाम ढो रहे है। लेकिन मेले लिए बुनियादी जरूरतों को मुहैया करने के नाम पर अपने हाथ खड़े कर लेते है। 40 वर्ष पहले रखी गयी रामायण मेला की नींव अब जर्जर हो चुकी है। औपचारिकता के नाम पर स्थानीय कलाकारों व कथावाचकों के हवाले करके रामायण मेला को उसके हाल पर छोड दिया गया है। जिले में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा का दबदबा है लोकसभा सदस्य भाजपा का, 5 विधानसभा सीटें इनके कब्जे में है, नगरनिगम बनने के बाद हुए मेयर के चुनाव में भी सत्ता दल भाजपा के महापौर ने जीत हासिल की है, तो वही योगी आदित्यनाथ सूबे के मुखिया का लगाव अयोध्या से काफी है,जो किसी से छुपा नहीं है। राजनैतिक रूप से खुशहाल इस क्षेत्र में रामायण मेला की दयनीय स्थिति उस सच्चाई के सामान है जिसे किसी भी कीमत पर दर किनार नहीं किया जा सकता है इन सभी हालात के बीच न तो किसी राजनैतिक दल को रामायण मेलें में दिलचस्पी है और न ही उस भावना की जिसे पिरोकर रामायण समारोह की शुरूआत की गयी थी। अयोध्या में होने वाले इस मेले को राजनैतिक कारणों से लगातार हानि पहुंची है। सत्तारूढ़ दल के माननीय भी इस मेले की दशा सुधारने में कोई रूचि नहीं दिखा रहे है। रामायण मेला औपचारिकता मात्र बनकर रह गया है। जब से सूबे में योगी सरकार बनी अयोध्या में भव्य दीपोत्सव रामायण मेले के लगभग 1 महीने पहले मनाया जाता है जिसकी भव्यता के कारण रामायण मेला का अस्तित्व धीरे-धीरे कम होता नजर आ रहा है। रामायण मेले की शुरुआत उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्र ने 1982 में किया था तब यह रामायण मेला राम की पैड़ी पर मनाया जाता था राम की पैड़ी बनने के उपरांत यह रामायण मेला अपना स्थान परिवर्तन करता रहा लेकिन राम कथा पार्क बनने के बाद यह अस्थाई हो गया और निरंतर वहीं पर अगहन मास की विवाह पंचमी के अवसर पर तीन दिवसीय मनाया जाने लगा। वैसे तो रामायण मेले का उद्घाटन लगभग सूबे के मुख्यमंत्री करते थे और समापन विधानसभा अध्यक्ष लेकिन इस रामायण मेले से इसका उद्घाटन कौन करेगा यह अंतिम सत्र में भी तय नही किया जा सका। आज इस मेले का शुभारम्भ मणिरामदास छावनी के महंत एवं मेला समिति के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास जी के उत्तराधिकारी महंत कमननयन दास, रसिक पीधाधीश्वर जनमेजय शरण, दिगम्बर अखाड़ा महंत सुरेश दास, श्री रामाश्रम साधनाश्रम महंत जयराम दास, हनुमानगढ़ी महंत बलरामदास, वरूण दास, रामलखनदास आदि प्रमुख रहे। कार्यक्रम का संचालन संत कमलेश दास पुरूषोत्तम दास द्वारा किया गया। रामायण मेला 10 तक चलेगा।