: श्रीजानकी महल ट्रस्ट में दुल्हा दुल्हिन सरकार को लगा छप्पन भोग,धूमधाम से मना रामकलेवा
Fri, Dec 10, 2021
मिथिला पद्धति से भगवान श्रीराम को दुल्हा सरकार व किशोरी जी को बेटी के रुप में पूजन करतें है
अयोध्या। रामनगरी में पिछले पांच दिनों से चल रहे राम विवाह महोत्सव में आज आखरी दिन कलेवा का कार्यक्रम किया गया। जिसमे भगवान राम और तीनो भाइयो को उपहार देकर विदाई के समय गाली देकर विदा किए जाने का कार्यक्रम किया गया। भगवान की जनक पूरी से विदाई के लिए महिलाएं भगवान राम के अचर धराई किया गया जिसमें दूरदराज से अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान राम सभी भाइयो को विभिन्न प्रकार के उपहार दिया गया। इसके साथ ही विदाई कार्यक्रम के दौरान भगवान के भजनों पर श्रद्धालुु झूमते नाचते रहे।
श्रीजानकी महल ट्रस्ट में मिथिला पद्धति से भगवान श्रीराम को दुल्हा सरकार व किशोरी जी को बेटी के रुप में पूजन करतें है। महल के ट्रस्टी समाजसेवी आदित्य सुल्तानिया कहते है कि हमारे यहां से साल मे एक ही बार दुल्हा सरकार के रुप में भगवान श्रीराम रथ पर सवार होकर मंदिर से निकलते है उसके बाद भगवान के विग्रह का भव्य विवाह प्रधान मंदिर में होता है। उन्होंने बताया कि विवाह महोत्सव का समापन छप्पन भोग कुवर कलेवा के साथ होता है जिसमें भगवान के स्वरुपों को कलेवा कराया जाता है व युगल सरकार को छप्पन भोग लगता है। इस अवसर पर ट्रस्टी दिलीप सुल्तानिया नीता सुल्तानिया अरुण सुल्तानिया नरेश पोद्दार सहित जानकीमहल परिवार मौजूद रहे।
: प्रसिद्ध पीठ श्री रंग महल में धूमधाम से मनाया गया रामकलेवा
Fri, Dec 10, 2021
रंगमहल के संस्थापक स्वामी सरयू सखी महाराज की परम्पराओं को पुष्पित और पल्लवित कर रहे महंत रामशरण दास जी
पूरे रस्मोरिवाज के साथ मनाया गया सीताराम विवाह महोत्सव
अयोध्या। वैष्णव नगरी अयोध्या में उपासना की दो अलग-अलग शाखाएं हैं। इन शाखाओं में दास परम्परा और सख्य परम्परा शामिल है। मिथिला धाम से अपना रिश्ता जोड़ने वाले मधुरोपासक कहलाते हैं और सख्य भाव से राम व सीता के रूप में दूल्हा-दुलहिन सरकार की उपासना करते हैं। इन दोनों ही परम्पराओं के उपासक संत रामानंद सम्प्रदाय के प्रथम आचार्य के रूप में देवी सीता जी को ही स्वीकारते हैं। गुरु वंदना में सीतानाथ समारम्भाम् रामानंदार्य मध्यमाम अस्मादचार्य पर्यन्ताम वंदे श्रीगुरु परम्पराम् इसी श्लोक का वाचन किया जाता है।
फिर भी दास परम्परा के उपासक राजा राम व हनुमान जी की उपासना दास यानी कि सेवक भाव से करते हैं। इसके समानान्तर सख्य भाव के उपासक सखी भाव की गुप्त उपासना करते हैं। इन संतों की मान्यता है कि जनकपुर में विवाह के बाद भगवान दुलहिन सरकार के साथ दूल्हा सरकार के रूप में ही विराजते हैं। यही कारण है कि ये उपासक श्रीरामचरित मानस के पारायण के दौरान विवाह प्रसंग तक का ही पारायण करते हैं। पूजन-अर्चन के दौरान सिर पर पल्लू रखकर त्रिरयोचित भाव से ही आराध्य को रिझाते हुए उनसे अनुनय-विनयपूर्वक प्रत्येक क्रिया करते हैं।
रामनगरी में पिछले पांच दिनों से चल रहे राम विवाह महोत्सव में आज आखरी दिन कलेवा का कार्यक्रम किया गया। जिसमे भगवान राम और तीनो भाइयो को उपहार देकर विदाई के समय गाली देकर विदा किए जाने का कार्यक्रम किया गया। भगवान की जनक पूरी से विदाई के लिए महिलाएं भगवान राम के अचर धराई किया गया जिसमें दूरदराज से अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान राम सभी भाइयो को विभिन्न प्रकार के उपहार दिया गया। इसके साथ ही विदाई कार्यक्रम के दौरान भगवान के भजनों पर श्रद्धालुु झूमते नाचते रहे।
इस परम्परा को पुष्पित और पल्लवित करने का श्रेय लक्ष्मण किला के संस्थापक आचार्य स्वामी युगलानन्य शरण महाराज को दिया जाता है। इस परम्परा के अनेक संत हुए जिनमें रंगमहल के संस्थापक स्वामी सरयू सखी महाराज जी भी प्रमुख रुप से रहे। अपनी परम्पराओं का निर्वहन आज भी रंग महल के पीठाधीश्वर महंत रामशरण दास महाराज जी कर रहे है। रंग महल मंदिर में महंत रामशरण दास जी महाराज के पावन सानिध्य में कुवर कलेवा मनाया गया। इस महोत्सव की देखरेख व व्यवस्था पुजारी साकेत जी व राहुल जी ने किया।वधू पक्ष से मीना वर्मा पत्नी इंद्र बहादुर वर्मा गोरखपुर, पनमती देवी पत्नी स्वर्गीय गजाधर वर्मा , लीलावती देवी पत्नी सत्यानंद वर्मा , संतोषी वर्मा पत्नी प्रभाकर वर्मा, सुमन वर्मा पत्नी राकेश वर्मा , रेखा वर्मा पत्नी राधारमण वर्मा , प्रीति वर्मा पत्नी सागर वर्मा ,रितु वर्मा पत्नी रजत वर्मा, आकाश वर्मा, राहुल वर्मा, सोहन वर्मा, प्रिंस वर्मा रहें।
: श्री सीताराम विवाह जगत को एक नया आयाम प्रदान करता है: रामानन्दाचार्य
Fri, Dec 10, 2021
चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी के राजमहल बड़ा स्थान में रामकलेवा के साथ सीताराम विवाह महोत्सव का हुआ समापन
अयोध्या। रामनगरी में चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ महल यानी भगवान श्रीराम के पिता दशरथ का महल स्थित है, जिसे आज एक सिद्धपीठ माना जाता है। मान्यता के अनुसार, राजा दशरथ ने इस महल की स्थापना की थी। यहां पर श्रीराम और उनके भाइयों ने बाललीलाएं की थीं।इस स्थान पर श्री वैष्णव परंपरा की प्रसिद्ध पीठ एवं बिन्दुगादी की सर्वोच्च पीठ भी स्थित है। सिद्ध संत बाबा श्री रामप्रसादाचार्य जी महाराज ने यहां पुनः मंदिर की स्थापना की और वर्तमान स्वरूप प्रदान किया। सीताराम महोत्सव में आयोजित रामकथा के समापन दिवस पर व्यासपीठ से कथा का महत्व बताते हुए जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी कहते है कि अनंत गुणों से युक्त भगवान और दिव्य गुणों से युक्त मैया किशोरी का विवाह हुआ। एक भारतीय संस्कृति परंपरा दोनों के मिलने से अक्षर हुई और उस समस्त मानवीय मूल्यों की स्थापना हुई। उन्होंने कहा कि श्री सीताराम विवाह जगत को एक नया आयाम प्रदान करता है और बेटी के विदाई के समय पिता की सीख कि पति को देवता मानकर उसकी पूजा करना यही भारतीय संस्कृति को पूरी तरह से पुष्ट बनाती है। रामानन्दाचार्य जी ने कहा कि आज पूरे विश्व में एक दिव्य आदर्श विवाह के रूप में यह किसी को माना जा सकता है तो वह श्री सीताराम विवाह। व्यासपीठ का पूजन कथा यजमान नरेश गर्ग व कुसुमलता गर्ग ने किया। इसके बाद मंदिर में चल रहे विवाद महोत्सव का भी भव्य समापन रामकलेवा के साथ हुआ। जिसमें दशरथमहल बड़ास्थान के बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी ने भगवान को कलेवा कराया। इसके बाद जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य व कार्यक्रम के संयोजक बिंदुगाद्याचार्य के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन व सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु राम भूषण दास जी महाराज ने भी भगवान के स्वरुपों को कलेवा कराया। यह सारा आयोजन दशरथमहल बड़ास्थान के बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य की अध्यक्षता और श्री महाराज जी के कृपा पात्र शिष्य महंत कृपालु राम भूषण दास जी महाराज के संयोजन में हुआ। इस मौके पर दशरथ राज महल परिवार के संत साधक व रमेश दास शास्त्री, कामधेनु पीठाधीश्वर महंत आशुतोष दास, आचार्य गौरव दास शास्त्री, शिवेंद्र शास्त्री सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।