: भगवान के पैसे को समाज के भलाई में भी खर्च करना चाहिए: चंपतराय
Sun, Dec 12, 2021
सभी मंदिरों को पटना महावीर मंदिर से सीख लेनी चाहिए, मंदिरों को सामाजिक सरोकार के कार्य प्रारंभ कर देनी चाहिए: ट्रस्ट महासचिव
पटना महावीर मंदिर के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को दिया 2 करोड़ का चेक
अयोध्या। अयोध्या में भव्य नव्य श्री रामलला के मंदिर निर्माण के लिए 1500 करोड़ रुपए से अधिक आ चुका है और यह सिलसिला निरंतर जारी है। शनिवार को पटना महावीर मंदिर के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने कारसेवक पुरम में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय को दो करोड़ रुपए का चेक सौंपा। किशोर कुणाल ने कहा कि पटना महावीर मंदिर ने फैसले के कुछ घंटे बाद ही घोषणा की थी कि राममंदिर निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपए देगा। उसकी दूसरी समर्पण राशि आज ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को दे दिया गया है। इसके पहले अप्रैल 2020 में पहला चेक सौंपा गया था। चेक लेने के बाद चंपत राय ने कहा कि पटना महावीर मंदिर से सभी को सीख लेनी चाहिए की मंदिर में जो भी आय होती है उससे ठाकुर जी की होती है जो समाज देता है। इसलिए ठाकुर जी के पैसे को समाज के भलाई के लिए उपयोग करना चाहिए। जैसा कि पटना महावीर मंदिर द्वारा पटना में कैंसर हॉस्पिटल चलाया जाता है। अयोध्या में अमावा मंदिर में निशुल्क स्वच्छ और सुव्यवस्थित राम रसोई चलाई जाती है। जिसमें अयोध्या में आने वाले श्रद्धालुओं को दोपहर का भोजन दिया जाता है।उन्होंने बताया कि पटना महावीर मंदिर द्वारा 70 टीन देसी घी ठाकुर जी के दीपक जलाने के लिए दिया गया जिससे दीपक अनवरत जलता है।
उन्होंने बताया कि पूर्व काल में ही सरकारें पूरा कार्य नहीं करती थी। मंदिरों से ही कार्य होते थे मंदिर से विद्यालय चलते थे धर्मशालाएं चलती थी रहने की व्यवस्था भी मंदिर में होती थी। वर्तमान समय में भी मंदिरों से यह कार्य प्रारंभ करने होंगे जिससे कि सरकार का संक्रमण मंदिरों की तरफ ना हो सके और मंदिर पूर्ण रूप से स्वतंत्र होकर संचालित हो। उन्होंने बताया कि सभी मंदिरों को पटना महावीर मंदिर से सीख लेते हुए सामाजिक सरोकार के कार्य प्रारंभ कर देनी चाहिए। इस दौरान ट्रस्ट के सदस्य डॉ अनिल मिश्र रहे मौजूद। कारसेवक पुरम में प्रेस से मुखातिब होते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि 14 दिसंबर को सदस्य डॉ अनिल मिश्र टाटा और एलएनटी के इंजीनियर सहित कुल 5 लोग राजस्थान पत्थरों के निरीक्षण करने के लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि फिलहाल राजस्थान में तीन कार्यशालाएं चल रही हैं। एक मकराना में मकराना के पत्थर की ताराशी किया जा रहा है। यह ऐसा मार्बल है जो सदियों तक रंग नहीं बदलेगा बेस्ट ऑफ बेस्ट है। उन्होंने बताया कि जिससे मंदिर का निर्माण हो रहा है फिलहाल दो कार्यशाला उसकी भी चल रही हैं। एक सिरोही जिला के पिंडवाला और दूसरी आबू रोड पर चल रही है। कुल 1 लाख घनफुट पत्थर की तराशी प्रारंभ हो गई है। उन्होंने बताया कि इसके साथ साथ अन्य कार्यशाला कैसे चलाई जाए और समय से कार्य पूरा हो इसके लिए भी हम लोग निरीक्षण के लिए राजस्थान जा रहे हैं। चंपत राय ने बताया कि हमारी इच्छा है कि दिसंबर 2023 तक मूल गर्भगृह राम लला विराजमान हो जाएंगे पूर्ण रूप से प्राण प्रतिष्ठित करके जनता जनार्दन के दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा। ऐसी इच्छा है और जब इच्छा होती है तब उस पर कार्य होता है और कार्य बहुत तेजी से चल रहा है। जिसको समय के अनुरूप पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि फरवरी के अंत तक प्लिंथ के पत्थरों के जोड़ने का कार्य प्रारंभ हो जाएगा। रात का कार्य करीब-करीब समाप्त हो चुका है लगभग 5 प्रतिशत कार्य ही शेष बचे हैं। उन्होंने कहा किसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि 2023 तक रामलला अपने जन्म स्थान पर विराजमान हो जाएं। महासचिव चंपत राय ने बताया कि मंदिर परिसर को सुरक्षित करने के लिए कि जिससे सरयू माता का जल मंदिर को नुकसान ना पहुंचा सके इसके लिए रिटेनिंग वॉल का कार्य बहुत जल्द शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि रिटेनिंग वॉल का पूरा कार्य मिट्टी के नीचे होता है। कटान को रोकने के लिए यह इतनी गहराई तक जाएगा जहां तक जून में सरयू जी का जल रहता है।
: घर में सिलेंडर से लगी आग, जलकर सब कुछ हुआ खत्म
Fri, Dec 10, 2021
समाजसेविका दीपिका सिंह पीड़ित परिवार की मदद, दिया हर सम्भव सहयोग का भरोसा
अयोध्या। रामनगरी के वासुदेव घाट स्थित प्रमोद शास्त्री के मकान में रहने वाले गोविंद कुशवाहा अपनी पत्नी और दो बच्चे के साथ फुलकी का ठेला लगाकर घर का भरण पोषण करते थे। बीती रात कल 8 बजे घर में पत्नी के द्वारा गैस पर खाना बनाते समय सिलेंडर में आग लग गई। जिससे घर का पूरा सामान जलकर खाक हो गया। कोई भी मदद के लिए इस परिवार के लिए सामने नहीं आया। वही जब इसकी सूचना समाजसेविका दीपिका सिंह 'दीदी' विश्व रामराज महासंघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष को मिली तो वह अपने राष्ट्रीय महासचिव आशीष मौर्य साथ गोविंद के आवास पहुंची और पीड़ित परिवार की मदद की। परिवार को गरम शॉल, कंबल, कपड़े, नगद धनराशि परिवार के सदस्यों को भेंट करते हुए आगे भी मदद करने का आश्वासन दिया। इस नेक कार्य को देखकर वहां मौजूद लोगों ने विश्व रामराज महासंघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपिका सिंह को धन्यवाद दिया।
: राम विवाहोत्सव की परंपरा प्रवाहमान है:लक्ष्मणकिलाधीश
Fri, Dec 10, 2021
श्रीराम एवं सीता के मिलन के महापर्व विवाह उत्सव का चरम परिलक्षित होता है
अयोध्या। वैष्णव नगरी अयोध्या में उपासना की दो अलग-अलग शाखाएं हैं। इन शाखाओं में दास परम्परा और सख्य परम्परा शामिल है। मिथिला धाम से अपना रिश्ता जोड़ने वाले मधुरोपासक कहलाते हैं और सख्य भाव से राम व सीता के रूप में दूल्हा-दुलहिन सरकार की उपासना करते हैं। इन दोनों ही परम्पराओं के उपासक संत रामानंद सम्प्रदाय के प्रथम आचार्य के रूप में देवी सीता जी को ही स्वीकारते हैं। गुरु वंदना में सीतानाथ समारम्भाम् रामानंदार्य मध्यमाम अस्मादचार्य पर्यन्ताम वंदे श्रीगुरु परम्पराम् इसी श्लोक का वाचन किया जाता है।
फिर भी दास परम्परा के उपासक राजा राम व हनुमान जी की उपासना दास यानी कि सेवक भाव से करते हैं। इसके समानान्तर सख्य भाव के उपासक सखी भाव की गुप्त उपासना करते हैं। इन संतों की मान्यता है कि जनकपुर में विवाह के बाद भगवान दुलहिन सरकार के साथ दूल्हा सरकार के रूप में ही विराजते हैं। यही कारण है कि ये उपासक श्रीरामचरित मानस के पारायण के दौरान विवाह प्रसंग तक का ही पारायण करते हैं। पूजन-अर्चन के दौरान सिर पर पल्लू रखकर त्रिरयोचित भाव से ही आराध्य को रिझाते हुए उनसे अनुनय-विनयपूर्वक प्रत्येक क्रिया करते हैं।
रामनगरी में पिछले पांच दिनों से चल रहे राम विवाह महोत्सव में आज आखरी दिन कलेवा का कार्यक्रम किया गया। जिसमे भगवान राम और तीनो भाइयो को उपहार देकर विदाई के समय गाली देकर विदा किए जाने का कार्यक्रम किया गया। भगवान की जनक पूरी से विदाई के लिए महिलाएं भगवान राम के अचर धराई किया गया जिसमें दूरदराज से अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान राम सभी भाइयो को विभिन्न प्रकार के उपहार दिया गया। इसके साथ ही विदाई कार्यक्रम के दौरान भगवान के भजनों पर श्रद्धालुु झूमते नाचते रहे।
इस परम्परा को पुष्पित और पल्लवित करने का श्रेय लक्ष्मण किला के संस्थापक आचार्य स्वामी युगलानन्य शरण महाराज को दिया जाता है। इस परम्परा के अनेक संत हुए है। आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला की परम्पराओं का निर्वहन आज भी वतर्मान किलाधीश महंत मैथलीरमणशरण जी महाराज कर रहे है। सीता-राम विवाहोत्सव रामनगरी के जिन चुनिंदा मंदिरों में पूरे भाव-चाव से मनाया जाता है, पुण्यसलिला सरयू के तट पर स्थित लक्ष्मणकिला उनमें से एक है। लक्ष्मणकिला उस रसिकोपासना की प्रधान पीठ है, जिसमें सीता के बिना श्रीराम की कल्पना तक नहीं की जाती है और ऐसे में श्रीराम एवं सीता के मिलन के महापर्व पर यहां उत्सव का चरम परिलक्षित होता है। मंदिर में पूरे रस्मोरिवाज के साथ बड़े ही धूमधाम से सीताराम विवाह महोत्सव मनाया गया। यह पूरा आयोजन किलाधीश महंत मैथली रमण शरण जी महाराज के सानिध्य व पूज्य आचार्य श्री मिथलेश नन्दनी शरण जी महाराज के संयोजन में सम्पादित हुआ। लक्ष्मणकिलाधीश महंत मैथिलीरमणशरण के अनुसार दो शताब्दी पूर्व लक्ष्मणकिला की स्थापना के साथ ही यहां राम विवाहोत्सव की परंपरा प्रवाहमान है। इस उत्सव के माध्यम से किला का आध्यात्मिक परिकर आराध्य से जुड़ाव को प्रत्येक वर्ष पुख्ता करता है।