: रामफल ऐसा फल, जिसमें न तो बीज हाेता न ही छिलका उसमें सिर्फ रस ही रस भरा हाेता है: संत असंग
Tue, Nov 8, 2022
सुखद सत्संग कथा में तृतीय दिवस राष्ट्रीय संत असंग देव महाराज ने श्रद्धालुओं को रसपान कराते हुए सद्गुरु कबीर रामरस की महिमा समझाते हैं
अयाेध्या। तीर्थनगरी अयाेध्याधाम की प्रतिष्ठित पीठ श्रीरामवल्लभाकुंज, जानकीघाट के प्रांगण में चल रहे सुखद सत्संग कथा में तृतीय दिवस राष्ट्रीय संत असंग देव महाराज ने श्रद्धालुओं को रसपान कराते हुए कहा सद्गुरु कबीर रामरस की महिमा समझाते हैं। वह कहते हैं कि रामफल ऐसा फल है, जिसमें न तो बीज हाेता है और न ही छिलका। उसमें सिर्फ रस ही रस भरा हाेता है। जाे न कभी टपकता है। ऐसा भी नही कि यदि हम उस रामरूपी वृक्ष के नीचे खड़े हाे जाएं और उस रामरस में भीग जायेंगे। उसमें न ताे हम भीगेंगे, न ही हमारा अंग। जाे दास व भाैरा बनेगा वह भी इस रस का पान नही करता है। भाैरा सिर्फ उस रामरस के इर्द-गिर्द भुनभुना सकता है। उसका पान नही कर पायेगा। उस रामरूपी रस काे सुख पंक्षी ही अपनी चाेंच से पान कर सकता है। अर्थात जिसके पास श्रद्धा रूपी चाेंच है। वही रामरस रूपी रस का पान कर सकता है। श्रद्धा विहीन व्यक्ति को न राम में और न दर्शन में रस आता है। श्रद्धावान काे ज्ञान प्राप्त हाेता है। बिना श्रद्धा के ज्ञान नही है। जिसके अंदर अगर श्रद्धा नही है। ताे उसे कितना भी उपदेश सुनाओ। ताे वहां उसकी मर्यादा खत्म हाेती है। राष्ट्रीय संत ने कहा कि यदि हम दुख व चिंता में रहते हैं। ताे वह चेहरे की लालिमा से पढ़ा जा सकता है कि हम कितने तनाव में हैं। चेहरा छिपाना कठिन है। लेकिन असंभव नही। आंखों काे देखकर पढ़ा जा सकता है। हमारे अंदर क्या भावना है। भावनाओं को देखना हमारे अंदर की किताब है। जिसे देखने के तरीके से पढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारी हंसी में भी अंतर है। एक पवित्रता और दूसरी मलीनता भरी हंसी हाेती है। मनुष्य का हाव-भाव का प्रतिफल उसके भीतर की भावनाओं को प्रदर्शित करता है। अगर हमारे कर्म सीधे हैं। ताे भाग्य भी सीधे रहेंगे। क्याेंकि कर्म से ही भाग्य बनता है। कर्म बछड़ा व आत्मा गाय है। जिस प्रकार हजारों गायाें के बीच में बछड़ा अपनी मां काे ढूंढ लेता है एवं दूध पीने लगता है। उसी तरह हजारों रूपी कर्म के बाद वह बछड़ा हमें ढूंढ लेता है। हमें अपना कर्म करते रहना चाहिए। पैसा परमात्मा नही है। पैसाें से जीवन, यापन व काेई चीज श्रृजन किया जा सकता है। वह सिर्फ उसी के लिए है। पैसा दाे प्रकार से कमाया जाता है। पहला पाप व दूसरा पुण्य करके। अन्याय से कमाया धन कभी फलता नही। संत असंग देव महाराज ने कहा कि मरने से लाेग बहुत डरते हैं। काेई मरना नही चाहता है। जाे आया है वह जायेगा। काेई अजर-अमर नही है। लेकिन इस संसार में रहते-रहते लाेगाें काे माेह हाे जाता है। वह माया-आशक्ति में डूब जाते हैं। मनुष्य काे अपने जीवन में ही दान-पुण्य करना चाहिए। तृष्णा वैतरणी नदी है। दान ही हमें भवसागर काे पार कराता है। तीर्थ नगरी में दान का प्रभाव 10 गुना बढ़ जाता है। इसलिए दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए। तीर्थ में स्नान, भगवान का दर्शन करें। यदि कहीं सत्संग हाे रहा है। ताे वह जरूर जाएं। श्रीरामजन्मभूमि की वजह से अयाेध्याधाम का महत्व लाखाें गुना बढ़ जाता है। जब सद्गुरु मिलते हैं ताे बहुत सुख मिलता है। इस संसार में बहुत ही सुख है। दुख ताे मिलता नही। लेकिन कुछ लाेग ईर्ष्या, द्वेष, गुस्सा आदि करके दुख पैदा करते हैं। हम सब नर्क काे भी स्वर्ग बना सकते हैं। इस अवसर पर श्रीरामवल्लभाकुंज अधिकारी राजकुमार दास, वैदेही भवन महामंडलेश्वर महंत रामजी शरण, कबीर मठ के महंत उमाशंकर दास, कार्यक्रम प्रभारी प्रवीन साहेब, हरीश साहेब, रवींद्र साहेब, शील साहेब समेत देश के विभिन्न प्रांताें से आए बड़ी संख्या में भक्तगण अमृतमयी सुखद सत्संग कथा का श्रवण कर रहे थे।
: लाखों दीप से जगमगा उठा श्री राम नगरी का सुरसर मंदिर
Tue, Nov 8, 2022
तीन दिवसीय श्री रामोत्सव और अयोध्या लिटरेचर फेस्टिवल के हुआ भव्य समापन
सांस्कृतिक बेला में साधना सरगम में अपनी भक्ति में मधुर आवाज़ से सभी को मंत्र मुक्त कर दिया
प्रख्यात लेखक अनुज धर व सीनियर आईएएस वी ललिता लक्ष्मी के व्याख्यान को लोगों ने खूब सराहा
अयोध्या। लाख दीप से जगमगा उठा श्री राम नगरी का सुरसर मंदिर मौका था मंदिर तीन दिवसीय श्री रामोत्सव और अयोध्या लिटरेचर फेस्टिवल के समापन का।अंतरराष्ट्रीय धार्मिक संगठन अखिल भारत जयगुरू संप्रदाय आचार्य किंकर विठ्ठल रामानुज महाराज के उपस्थिति भारतीय रेलवे मालगोदाम श्रमिक संगठन की राष्ट्रीय महामंत्री अरुण पासवान वी अभिषेक वर्मा के नेतृत्व में हजारों श्रमिकों ने सुरसर मंदिर परिसर को दीपों से सजा दिया शाम होते ही दीप जले और उसके प्रकाश से पूरा परिसर जगमगा उठा ऐसा महसूस हुआ की अयोध्या में देव दीपावली पर दूसरा दीपोत्सव हो रहा है। वहीं सांस्कृतिक बेला में साधना सरगम में अपनी भक्ति में मधुर आवाज़ से सभी को मंत्र मुक्त कर दिया।
जैसे ही साधना सरगम मंच पर बैठी पूरा परिसर तालिया से गुंजायमान हो उठा और जैसे ही उन्होंने भगवान श्री राम पर आधारित भजन कितनो की नैया पार लगाई एक अबला का नाम है इसमें जो शरणागत आई पूरा परिसर भाव विभोर हो गया और साधना सरगम के लिए तालियां बजने लगी उन्होंने एक से एक भजन सुनाएं जिसमें उन्होंने माता जी पर आधारित गली-गली में ढूंढ रही हूं मैया अब आकर बस जा मेरे जीवन में जैसे ही यह धुन वह गुनगुनाने लगी लोग भक्ति में भावना में झूम उठे और पूरा सुरसर मंदिर परिसर भक्ति भावना में झूम उठा। इसके उपरांत लेजर सो देश के विभिन्न कोने से आए कलाकारों ने अपने अनेक कलाओं ड्रम आदि से लोगों का मनोरंजन किया और इस भक्तिमय संध्या का समापन कार्यक्रम के संयोजक प्रिया नाथ चट्टोपाध्याय के आभार ज्ञापन से समापन हुआ उन्होंने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और कहा की प्रभु श्री राम जी की इच्छा और आशीर्वाद से प्रतिवर्ष और विस्तृत रूप में यह श्री रामोत्सव का कार्यक्रम होता रहेगा। इंद्राणी चट्टोपाध्याय सहित सैकड़ों आयोजक मंडल का भी आभार व्यक्त किया कार्यक्रम का संचालन महंत दिलीप दास त्यागी महाराज ने किया।
: श्रावण कुंज की महंत बनी साध्वी रामेश्वरी शरण, साधु संतों ने कंठी चद्दर दिया
Tue, Nov 8, 2022
रामेश्वरी शरण ही मंदिर की महंत हैं, मैंने अपना सारा कार्यभार उन्हें साैंप दिया: महंत रामरूप शरण
महंत पद की गरिमा हमेशा अक्षुण्ण बनाए रखूंगी, पद पर कभी आंच नही आने देंगी: रामेश्वरी शरण
अयाेध्या। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ श्रावण कुंज, वासुदेवघाट का नया महंत साध्वी रामेश्वरी शरण काे बनाया गया। साेमवार काे मंदिर प्रांगण में एक महंताई समाराेह आयाेजित हुआ। समाराेह में अयाेध्यानगरी के विशिष्ट संत-महंत व धर्माचार्यों ने साधुशाही परंपरानुसार उन्हें कंठी, चद्दर तिलक देकर महंती की मान्यता प्रदान किया। आश्रम के महंत रामरूप शरण ने कहा कि उन्हें मंदिर की देखरेख और व्यवस्था चलाने के लिए याेग्य महंत की आवश्यकता थी। मठ के नये महंत पद पर उन्होंने अपनी शिष्या साध्वी रामेश्वरी शरण की ताजपाेशी किया है। अब वही ठाकुरजी की सेवा एवं आश्रम की व्यवस्था संभालेंगी। आज से रामेश्वरी शरण ही मंदिर की महंत हैं। मैंने अपना सारा कार्यभार उन्हें साैंप दिया है। नवनियुक्त महंत रामेश्वरी शरण ने कहा कि महिलाओं काे कभी कम नही आंकना चाहिए। आज महिलाएं किसी क्षेत्र में पीछे नही हैं। वह हर एक क्षेत्रों में आगे हैं। पुरूषाें के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। उन्हें महंत पद की बागडाेर साैंपी गई है। उस पर वह खरा उतरेंगी। आश्रम का सर्वांगीण विकास कर उसे नित्य नई ऊंचाइयाें पर पहुंचायेंगी। महंत पद की गरिमा हमेशा अक्षुण्ण बनाए रखेंगी। उस पद पर कभी आंच नही आने देंगी। सदैव पद-प्रतिष्ठा की गरिमा बनाकर चलेंगी। महंताई समाराेह में हनुमानबाग श्रीमहंत जगदीश दास, तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरू परमहंस आचार्य, विश्वविराट मंदिर के महामंडलेश्वर सिद्ध बाबा नरसिंह दास, मानस भवन महंत अर्जुन दास, हनुमानगढ़ी गद्दीनशीन के शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. महेश दास, महंत रामचरण दास, महंत नंदराम दास, गद्दीनशीन के शिष्य मामा दास, महंत पवन कुमार शास्त्री, महंत रामनरेश शरण लाल साहब दरबार, महंत राजूदास, नागा कृष्ण कुमार दास, महंत मुकेश दास, उपेंद्र दास, आनंद दास, पहलवान मनीराम दास, रमेश दास, महंत धर्मदास उदासीन आश्रम, महंत सीताराम दास, महंत अवधराम शुक्ला आदि संत-महंत उपस्थित रहे।