: भले ही हमारे घर छाेटे हाें, लेकिन दिल बड़ा हाेना चाहिए: राष्ट्रीय संत असंग देव
Tue, Nov 8, 2022
अयाेध्या। संत कबीर के किसी बात में हिंसा नही है। एक बार अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा था कि अगर किसी काे सुख पाने की इच्छा हाे। ताे सुख कैसे मिलेगा। आज साधु-संयासी, गृहस्थ सुख ढूढ़ रहे हैं। सभी बचपन से बुढ़ापे तक सुख ही सुख ढूढ़ते हैं। ढूढ़ते-ढूढ़ते उनका जीवन बीत जाता है। लेकिन सुख नही मिलता है। उक्त सारगर्भित उद्गार राष्ट्रीय संत असंग देव महाराज ने व्यक्त किए। वे श्रीरामवल्लभाकुंज जानकीघाट प्रांगण में चल रहे अमृतमयी सुखद सत्संग कथा के चतुर्थ दिवस श्रद्धालुओं को रसपान करा रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में जितनी भी भाैतिक उपलब्धियां हैं। वह सिर्फ जीवन निर्वाह करने के लिए सरलता प्रदान करते हैं। लेकिन सुख न वस्तुओं से, न मकान और न गाड़ी से है। सुख काे शरीर, मन व आत्म तीन भागाें में बांटा गया है। यदि मन काे सुख चाहिए। ताे विवेकवान बनें। आत्मा की शांति के लिए श्रद्धावान बनाे। श्रद्धावान काे आत्म शांति मिलती है। शब्द हमें सुख और दुख देते हैं। संत कबीर कहते हैं कि शब्द बहुत बड़ी चीज है। जिन्हाेंने शब्द पर विवेक किया एवं विवेक शब्द बाेले। ताे उनका सब कार्य पूर्ण हाे जाता है। जिनकाे शब्द की साधना करना आ गया। वह बहुत आगे जाते हैं। राष्ट्रीय संत ने कहा कि भले ही हमारे घर छाेटे हाें। लेकिन हमारा दिल बड़ा हाेना चाहिए। जब तक मनुष्य दूसरे की संवेदना व दर्द काे नही समझता। दूसरे के भावाें काे नही पढ़ता है। तब तक उसका कल्याण संभव नही है। एक दिन सभी काे वृद्ध हाेना है। अपने बुजुर्गों का आदर करें। जिनके घर में बुजुर्गों का आदर नही है। वह घर, घर नही है। घर में बुजुर्गों की ही माैजूदगी से हमारी भव-बाधाएं दूर हाेती हैं। उनका पुण्य-प्रताप हमारे लिए कवच-कुंडल का कार्य करता है। जिसके घराें में बुजुर्गों की सेवा हाेती हैं। वहां देवी-देवताओं का वास हाेता है। उस घर पर गुरुओं की विशेष कृपा हाेती है। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों काे अच्छे संस्कार दें। वह खूब पढ़-लिखकर आगे बढ़े। अपने देश, प्रदेश, जिले व कुल का नाम पूरी दुनिया में राेशन करें। हृदय रूपी तराजू से पहले ताैलिए। तब अपने मुख से वाणी निकालिए। लेकिन कभी झूठ न बाेलिए। सदैव सत्य के मार्ग पर चलें। इस अवसर पर श्रीरामवल्लभाकुंज अधिकारी राजकुमार दास, वैदेही भवन महंत रामजी शरण, कबीर मठ जियनपुर के महंत उमाशंकर दास, कार्यक्रम प्रभारी प्रवीन साहेब, हरीश साहेब, शील साहेब, रवींद्र साहेब आदि उपस्थित रहे। सुखद सत्संग कथा का पंडाल खचाखच श्रद्धालुओं से भरा रहा। बड़ी संख्या में भक्तगण अमृतमयी सत्संग का श्रवण कर अपना जीवन धन्य बना रहे थे।
: हैंडराइटिंग और डीएनए रिपोर्ट सरकार के दबाव में बनाई गई: अनुज धर
Tue, Nov 8, 2022
कहा, नेताजी गुमनामी बाबा के लिए बने आयोगों की जांच रिपोर्ट सूक्ष्म करके, सरकार की दबाव में बनाई गई
योगी सरकार पर हमला बोलते हुए अनुज धर ने कहा, सरकार के 6 साल पूरे होने वाले हैं लेकिन गुमनामी बाबा पर बनाई गई गैलरी की ओपनिंग आम जनता के लिए क्यों नहीं
अयोध्या। सुरसर मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय श्री रामोत्सव और लिटरेचर फेस्टिवल में आए अनुज धर ने प्रेस से मुखातिब होते हुए कहा की गुमनामी बाबा भगवान जी ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे यह सिद्ध हो चुका है । लेकिन तत्कालीन सरकार ने गुमनामी बाबा से जुड़ी साक्ष्यों कुछ छुपाया है। उन्होंने बताया की गुमनामी बाबा और नेताजी के संबंध में जितने आयोग बनाए गए सभी ने जांच रिपोर्ट सूक्ष्म करके और कहीं ना कहीं सरकार की दबाव में आकर के रिपोर्ट बनाई। उन्होंने बताया की नेताजी सुभाष चंद्र बोस और गुमनामी बाबा की हैंडराइटिंग जांच की रिपोर्ट मात्रा दो पन्ने में बना दी गई और यह सिद्ध कर दिया गया की दोनों अलग है और डीएनए रिपोर्ट को भी नेगेटिव बता दिया गया यह कौन नहीं जानता की सरकार के दबाव में कैसे रिपोर्ट बनते हैं।
उन्होंने बताया की अमेरिका के प्रसिद्ध हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से हमने व्यक्तिगत बिना बताए हुए दोनों राइटिंग का टेस्ट कराया और बिना बताए ही उन्होंने बताया की यह दोनों हैंडराइटिंग एक ही व्यक्त किए हैं। और उन्होंने 40 पाने की एक रिपोर्ट बनाई। उन्होंने वर्तमान सरकार पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा की उत्तर प्रदेश में 6 साल योगी सरकार के पूरे होने वाले हैं लेकिन गुमनामी बाबा पर बनाई गई गैलरी की ओपनिंग आम जनता के लिए क्यों नहीं हुई। कहीं ना कहीं वर्तमान सरकार भी दर कर कम कर रही है। उन्होंने कहा की हम सभी लोग भारत के साथ-साथ पूरे देश में अवेयरनेस फैला रहे हैं और कोई भी सरकार हो अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत मिस्त्री और गुमनामी बाबा से उनका संबंध छुपाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा जब गुमनामी बाबा की गैलरी आम जनता के लिए खोली जाएगी तो आम जनता अपने आप समझ जाएगा की यह कौन है क्या एक सन्यासी के पास इतनी बुक्स होंगी क्या एक सन्यासी इतनी नॉलेज रखेगा और अगर गुमनामी बाबा नेताजी सुभाष चंद्र बोस नहीं थे तो 1985 तक सरकार के लोग गुमनामी बाबा से मिलने क्यों आते थे। उन्होंने कांग्रेस सरकार के साथ-साथ वर्तमान सरकार पर भी सवाल या निशान खड़ा करते हुए कहा की आखिर नेताजी सुभाष चंद्र और गुमनामी बाबा के मौत का रहस्य को सरकार क्यों नहीं सुलझाना चाहती है।
: रामकथा पर केंद्रित लेजर शो से सुरसर मंदिर का परिसर देदीप्यमान हो उठा
Tue, Nov 8, 2022
अंतरराष्ट्रीय धार्मिक संगठन अखिल भारत जयगुरू संप्रदाय एवं ओमकारनाथ मिशन की तत्वावधान में आयोजित रामोत्सव का हुआ भव्य समापन
जिलाधिकारी नितिश कुमार का रामोत्सव के समापन पर महासचिव प्रियनाथ ने किया अभिनन्दन
अयोध्या। श्रीराम का नाम स्वयं में उत्सव है और यदि उनके नाम पर ही कोई उत्सव संयोजित हो तो वह महोत्सव बन जाता है। यह सचाई सुरसर मंदिर में अखिल भारतीय जय गुरु संप्रदाय की ओर से आयोजित रामोत्सव से परिभाषित हुई। रामकथा पर केंद्रित लेजर शो से सुरसर मंदिर का परिसर पहले से ही देदीप्यमान हो रहा होता है और देर शाम तक श्रीराम पर ही केंद्रित पदों के गायन से इस दिव्यता को शिखर का स्पर्श मिलता है। तो दीप उत्सव ने पूरे कार्यक्रम में चार चांद लगा दिया।
रामनगरी अयोध्या के प्रसिद्ध पीठ सुरसर मंदिर में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक संगठन अखिल भारत जयगुरू संप्रदाय एवं ओमकारनाथ मिशन की तत्वावधान में आयोजित रामोत्सव अपने चरम पर दिखा। देव दीपावली के पावन अवसर पर पूरा सुरसर मंदिर दीप मालाओं से सजी नजर आयी। चारों तरह दीप जगमगा रहे थे। मानो दीपावली मनायी जा रही हो। पूरा मंदिर परिसर खुशियों से सराबोर दिखा हर तरह सिर्फ उत्साह व उमंग दिख रहा था। कार्यक्रम के अंतिम दीन पूरी नगरी में सिर्फ सुरसर मंदिर की गूज दिखी। पहले दिन अद्भुत ऐतिहासिक लेजर शो जो रामायण पर आधारित था। ऐसा शो जो पूरा माहौल राममय कर दिया साथ ही रामनगरी के संतों की मौजूदगी पूरे महोत्सव में चार चांद लगा रहे थे।
दूसरें दिवस पर सन्यासी देश नायक गुमनामी बाबा के फिल्म का प्रमोशन हुआ। साथ ही फिल्म के डायरेक्टर अमलान कुसुम घोष का व्याख्यान हुआ इसी के साथ रामायण में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को कैसे व्यवस्थित किया जाता है इस विषय पर सीनियर आईएएस वी ललिता लक्ष्मी ने बहुत सुंदर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया।प्रख्यात भजन सम्राट राजू दास ने अपने सुरों की ऐसी महफिल सजाई हर कोई वाह वाह करते दिखे। इसके बाद आज कार्यक्रम के अंतिम दिवस पर पूरा सुरसर मंदिर दीप मालाओं से सजी दिखी। चारों तरह दीपक सजे रहें। 1 लाख दीपों से पूरा सुरसर मंदिर सजा रहा। यह पूरा आयोजन संप्रदाय आचार्य किंकर विठ्ठल रामानुज महाराज के पावन सानिध्य में हुआ। इस सफल आयोजन के पीछे अखिल भारतीय जयगुरु सम्प्रदाय ट्रस्ट से जुड़े महासचिव प्रियनाथ चट्टोपाध्याय व इंद्राणी चट्टोपाध्याय ने दिन रात एक करके आयोजन को सफल बनाया।