: कामधेनु आश्रम के महंत रामलोचन दास का निधन
Mon, Feb 27, 2023
रामनगरी के संत-धर्माचार्यों में शोक की लहर
महंत रामलोचन दास के उत्तराधिकारी महामंडलेश्वर आशुतोष दास ने जलसमाधि दी
अयोध्या। नयाघाट स्थित कामधेनु आश्रम के महंत रामलोचन दास ( 80 ) का पीजी आई लखनऊ में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे।
रविवार सुबह 10 बजे सरयू तट पर उन्हें उनके शिष्य महामंडलेश्वर आशुतोष दास द्वारा जलसमाधि दी गई। उनके निधन से रामनगरी के संत-धर्माचार्यों में शोक की लहर दौड़ गई। महंत रामलोचन की गणना रामनगरी के साधक संतों में होती रही। उनकी अंतिम यात्रा में मंगलभवन पीठाधीश्वर महंत रामभूषण दास कृपालु, तुलसीदास जी की छावनी के महंत जर्नादन दास, राम कचेहरी के महंत शशिकांत दास, पत्थर मंदिर के महंत की मनीष दास, डाड़िया मंदिर के महंत गिरीश दास सहित बड़ी संख्या में संत-धर्माचार्य शामिल रहे।
: निष्काम भक्ति से परमात्मा की प्राप्ति जरूर होती है: वेदांती जी
Sun, Feb 26, 2023
हिंदू धाम मंदिर में बह रही श्रीमद् भागवत कथा की रसधार
अयोध्या। श्री राम की पावन नगरी अयोध्या के पंचकोसी परिक्रमा मार्ग नया घाट पर स्थित हिंदू धाम में श्रीमद् भागवत कथा के द्धितीय दिवस पर कथाव्यास वशिष्ठ पीठाधीश्वर ब्रह्मर्षि राम विलास वेदांती महाराज ने कहा कि सत्यं परमं धीमहि इस संसार में एक ईश्वर ही सत्य है जो दिख रहा है वह केवल वह प्रभु की माया है। भागवत की उत्पत्ति के बारे में बताया सुखदेव भगवान को श्री व्यास जी महाराज ने भागवत को प्रदान किया वही भागवत कथा आज हम सब को सुनने को मिल रही है। वेदांती जी के बताया कि परमात्मा इस संसार में अपने भक्तों की रक्षा के लिए अनेक, अनेक अवतार लेकर आते भागवत में चौबीस अवतारो के माध्यम से बताया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों के लिए सबकुछ करने के लिए तैयार रहते है। उदाहरण में पांडवो के लिए भगवान सारथी बने। महाभारत की कथा में के बारे में भी महाराज जी ने कहा कि कौरव और पांडवों के युद्ध में विजय सत्य की ही होती है। जिसके रक्षक प्रभु होते हे उसे इस संसार में कोई नहीं हरा सकता। महाराज जी ने पांडवों की कथा को बताया अपने कल्याण के लिए परमात्मा की भक्ति ही एक उपाय हे भक्ति को दो प्रकार की बताया निष्काम भक्ति और सकाम भक्ति। निष्काम भक्ति से परमात्मा की प्राप्ति जरूर होती है। यह महोत्सव कार्यक्रम का संयोजन श्री महाराज जी के शिष्य वशिष्ठ पीठाधीश्वर महंत डॉ राघवेश दास वेदान्ती महाराज कर रहे है। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन आयोजक कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन मुख्य यजमान राम किशोर पाण्डेय गिरिडीह धनबाद ने किया है। इस मौके पर हिंदू धाम के संत साधक व शिष्य परिकर मौजूद रहें।
: श्रीभरत के चरित्र से श्रीराम प्रेम के दिव्य अमृत का प्राकट्य होता है: रामानुजाचार्य
Sun, Feb 26, 2023
श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण के सप्तम-दिवस में जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने भरत चरित्र का वर्णन किया
अयोध्या। श्रीभरत के चरित्र से श्रीराम प्रेम के दिव्य अमृत का प्राकट्य होता है।श्रीभरत तो श्रीभरत के ही समान थे।’भरत भरत सम जानि।’सभी साधनों का फल है श्रीसीताराम जी का दर्शन और उनके दर्शन का फल है श्रीभरत जैसे प्रेमी का,संत का दर्शन हो जाना। उक्त उद्गार प्रख्यात कथावाचक जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने जानकी महल ट्रस्ट में चल रहे श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण के सप्तम-दिवस में कही। भरत चरित्र पर मीमांसा करते हुए जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने कहा कि आदिकवि महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण में ‘‘श्रीभरत” जी का स्थान बहुत ऊंचा है। भरत जी में मर्यादा का, धार्मिकता का,श्रीराम के प्रति आदर व स्नेह और ज्येष्ठानुवृति की विलक्षण विवेचना है। उन्होंने कहा कि सभी युगवालों के लिए श्रीभरत जी में प्रेरणा है। सतयुग वालों के लिए प्रेरणा इसलिए है कि भरत महान योगी हैं, साधक हैं, त्रेतायुग वालों के लिए इसलिए है कि उनके चरित्र में लोकोपकार और सेवा रूपी सर्वश्रेष्ठ यज्ञ भावना है। द्वापर के लोगों के लिए वे इसलिए प्रेरक हैं कि उनके जैसा पूजा करने वाला भी कोई नहीं है - ह्रदय में असीम प्रेम के लिए वे नित्यप्रति प्रभु की पादुकाओं का पूजन करते हैं । लेकिन गोस्वामीजी कहते हैं कि सबसे अधिक प्रेरक तो श्रीभरत कलियुग के लिए हैं, क्योंकि हमारे युग की समस्याओं का जो समाधान श्रीभरत ने दिया है वह अन्य किसी ने नहीं दिया। जगद्गुरू जी ने कहा कि भरत के व्यक्तित्व का दर्शन हमें ‘राम वन गमन’ के पश्चात् ही होता है। उसके पहले उनका चरित्र-मूक समर्पण का अद्भुत दृष्टान्ट है जिसे देख कर कुछ भी निर्णय कर पाना साधारण दर्शक के लिए कठिन ही था। इसी सत्य को दृष्टिगत रखकर गोस्वामी जी ने ‘राम वन-गमन’ के मुख्य कारण के रूप में भरत प्रेम-प्राकट्य को स्वीकार किया। जैसे देवताओं ने समुद्र मंथन के द्वारा अमृत प्रकट किया था ठीक उसी प्रकार राम ने भी भरत-समुद्र का मंथम करने के लिए चौदह वर्षों के विरह का मन्दराचल प्रयुक्त किया। और उससे प्रकट हुआ-राम प्रेम का दिव्य अमृत।कथा से पूर्व आयोजक कुसुम सिंह व डॉ० दिनेश कुमार सिंह ने व्यास पीठ का पूजन किया।