: श्रीराम धर्म की प्रतिमूर्ति है: प्रभंजनानन्द शरण
Wed, Mar 29, 2023
झुनझुनियां बाबा जी की तपस्थली ,सियारामकिला झुनकी घाट पर महंत करुणानिधान शरण की अध्यक्षता में हो रही श्रीराम कथा की अमृत वर्षा
द्धितीय दिवस पर कथाव्यास ने कहा, जिस देश में युवा का जीवन धर्म के लिये समर्पित हो जाये वह समाज व राष्ट्र धन्य हो जाता है
अयोध्या। मां सरयू के पावन तट स्थित श्री सियारामकिला झुनकी घाट में श्रीराम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर श्रीराम कथा के द्धितीय दिवस पर कथाव्यास सियारामकिला के अधिकारी प्रख्यात कथावाचक प्रभंजनानन्द शरण जी महाराज प्रभुजी ने कहा कि श्रीलक्ष्मण का चरित्र अर्पण ,समर्पण और विसर्जन का चरित्र है।उन्होंने अपने जीवन को श्रीराम की सेवा में समर्पित कर दिया है।श्रीराम धर्म की प्रतिमूर्ति है।राम धर्म के स्वरूप है।राम सनातन धर्म के प्रतीक है।राम धर्म की आत्मा है।प्रभंजनानन्द शरण जी ने बताया कि लक्ष्मण का जीवन धर्म के प्रति समर्पित है।देश के हर युवा के प्रतीक है लक्ष्मण।जिस देश में युवा का जीवन धर्म के लिये समर्पित हो जाये वह समाज व राष्ट्र धन्य हो जाता है।श्रीराम राष्ट्र के मंगल के लिये यात्रा करते हैं और लक्ष्मण उनके सहयोगी है।जिस देश के युवा राष्ट्र धर्म और सेवा धर्म के समर्पित होते है वही रामराज्य की स्थापना होती है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण शब्द का अर्थ होता है जिसका मन लक्ष्य में लगा हो।जिस युवा का मन लक्ष्य से भटक जाता है वो कभी लक्ष्मण नहीं बन सकता।लक्ष्य विहीन युवा,समाज और राष्ट्र नष्ट हो जाता है।जीवन का जो लक्ष्य है उसके प्रति हमारा जीवन पूर्ण समर्पित होना चाहिये।
कथा की अध्यक्षता करते हुए सियारामकिला पीठाधीश्वर महंत करुणानिधान शरण जी ने कहा कि धैर्य और संयम सफलता की कुंजी है। जब मन इन्द्रियों के वशीभूत होता है, तब संयम की लक्ष्मण रेखा लाँघे जाने का खतरा बन जाता है, भावनाएँ अनियंत्रित हो जाती हैं। असंयम से मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है इंसान असंवेदनशील हो जाता है मर्यादाएँ भंग हो जाती हैं। इन सबके लिए मनुष्य की भोगी वृत्ति जिम्मेदार है। काम, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या असंयम के जनक हैं व संयम के परम शत्रु हैं। इसी तरह नकारात्मक आग में घी का काम करती है। वास्तव में सारे गुणों की डोर संयम से बँधी हुई होती है। जब यह डोर टूटती है तो सारे गुण पतंग की भाँति हिचकोले खाते हुए व्यक्तित्व से गुम होते प्रतीत होते हैं। कथा में रामनगरी के विशिष्ट संतों का सम्मान किया गया।
: अम्माजी मंदिर से गज पर सवार हो निकले भगवान राम
Wed, Mar 29, 2023
अम्माजी मंदिर में पंच दिवसीय ब्रह्मोत्सव में जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य महाराज का हुआ दिव्य प्रवचन
अम्माजी मंदिर में प्रवचन करते रामलला सदन देवस्थान् के पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में दक्षिण परम्परा शैली से भगवान का उत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जा रहा है। मंदिर की स्थापना दक्षिण के प्रमुख आचार्य योगीराज पूज्य पार्थ स्वामी जी महाराज ने किया था। अम्माजी मंदिर की वैभव नक्काशी लोगों को अपने ओर आकर्षित करता है। दक्षिण के वैदिक आचार्यों की देखरेख में पंच दिवसीय ब्रह्मोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है।
मंगलवार सांयकाल गज वाहन से भगवान की शोभायात्रा बाजे-गाजे के साथ निकाली गई। इस रथयात्रा में तमिलनाडु से आए पारम्परिक वाद्ययंत्रों को भी शामिल किया गया। रथारूढ़ भगवान की सवारी को चेन्नई व अन्य क्षेत्रों से आए तमिल भाषी श्रद्धालु रस्से के सहारे खींच रहे थे। यात्रा का जगह जगह रामानुजीय परम्परा के मंदिरों के सम्मुख आरती पूजा हो रही थी। परम्परागत रूप से निकाली जाने वाली यह रथयात्रा गोलाबाजार, तुलसी उद्यान होकर मुख्य मार्ग से सब्जी मंडी होकर तोताद्रि मठ, अशर्फी भवन होते हुए पुनः अम्माजी मंदिर पहुंची।
शोभायात्रा निकलने के पहले अम्माजी मंदिर में दिव्य ग्रंथो का पारायण एवं विराजमान भगवान का विधिवत अभिषेक,पूजन किया गया। इसके बाद भगवान को सफेद मोतियों से भव्य दिव्य विशेष श्रृंगार किया गया जिसमें नैनों को बरबस अपनी ओर खींच रहें थे। शोभायात्रा से पहले रामलला सदन देवस्थान् के पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य महाराज का प्रवचन सत्र चला। डा राघवाचार्य जी ने कहा कि विशिष्टाद्वैत दर्शन : रामनुजाचार्य जी के दर्शन में सत्ता या परमसत् के सम्बन्ध में तीन स्तर माने गए हैं:- ब्रह्म अर्थात ईश्वर, चित् अर्थात आत्म, तथा अचित अर्थात प्रकृति। उन्होंने कहा कि वस्तुतः ये चित् अर्थात् आत्म तत्त्व तथा अचित् अर्थात् प्रकृति तत्त्व ब्रह्म या ईश्वर से पृथक नहीं है बल्कि ये विशिष्ट रूप से ब्रह्म का ही स्वरूप है एवं ब्रह्म या ईश्वर पर ही आधारित हैं यही रामनुजाचार्य का विशिष्टाद्वैत का सिद्धान्त है। प्रवचन विश्राम होने पर अम्मा जी मंदिर के ट्रस्टियों ने स्वामी डा राघवाचार्य जी का विशेष सम्मान किया।
प्रवचन सुनते आचार्य गण व संत साधक
: सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है,जो जगत कल्याण की कामना करता है: महंत श्रीधर दास
Wed, Mar 29, 2023
कहा, गुरुदेव भगवान ने भगवान श्रीराम जन्मोत्सव पर जगत कल्याण की कामना से महायज्ञ का शुभारंभ किया था, उन्हीं का अनुसरण करते हुए मैं इस श्रीराम महायज्ञ को आगे बढ़ा रहा हूं...
विश्व कल्याण की कामना से पड़ रही आहुतियां, वैदिक मंत्रोच्चारण संग यज्ञशाला में प्रतिदिन हजारों आहुतियां डाली जा रही
अयोध्या। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ श्यामासदन मंदिर रामघाट में रामजन्मोत्सव पर धर्म-अध्यात्म की बैतरणी बह रही है। उत्सव का उल्लास मंदिर प्रांगण में फैला हुआ है। सिद्धपीठ श्यामासदन मंदिर में विगत 40 वर्षों से भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव पर श्रीराम महायज्ञ का आयोजन विश्व कल्याण की कामना से किया जा रहा है। उसी उपलक्ष्य में इस वर्ष भी श्यामासदन पीठाधीश्वर बालयोगी महंत श्रीधर दास महाराज के संयोजन में विश्व शांति के लिए महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। आश्रम में श्रीराम महायज्ञ का यह 40वां वर्ष है। वैदिक मंत्रोच्चारण संग यज्ञशाला में प्रतिदिन हजारों आहुतियां डाली जा रही हैं। इस अवसर पर बालयोगी महंत श्रीधर दास महाराज ने बताया कि हमारे गुरुदेव भगवान ने भगवान श्रीराम जन्मोत्सव पर जगत कल्याण की कामना से महायज्ञ का शुभारंभ किया था। उन्हीं का अनुसरण करते हुए मैं इस श्रीराम महायज्ञ को आगे बढ़ा रहा हूं। वर्तमान समय में सत्य सनातन धर्म पर आघात करने वाले सैकड़ों लोग तैयार हो गए हैं। लेकिन सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है। जो जगत कल्याण की कामना करता है। विश्व में शांति की स्थापना के लिए कार्य करता है। वर्तमान समय में मानवता पर संकट है। पूरे विश्व में अफरा-तफरी का माहौल है। लोग एक दूसरे के प्रति ईर्ष्या द्वेष की भावना से - देख रहे हैं। एक देश, दूसरे देश से लड़ रहे हैं। सभी में शांति और सद्भावना हो इसी संकल्प के साथ इस वर्ष महायज्ञ का शुभारंभ 26 मार्च को पंचांग पूजन मंडप प्रवेश के साथ अग्नि देवता को प्रकट किया गया। महायज्ञ में प्रतिदिन आहुतियां पड़ रही हैं। उन्होंने बताया कि 22 मार्च से मंदिर में नवाह परायण पाठ प्रारंभ है, पूर्णाहुति 30 मार्च को होगी। इसके अलावा मठ में सीताराम संकीर्तन, अखंड रामायण, श्रीरामकथा व रामलीला चल रही है। 30 मार्च को मंदिर में भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। श्रीराम जन्मोत्सव में सम्मिलित होने के लिए बड़ी संख्या में भक्तगण पहुंच गए हैं।