: भागवत कथा के सभी चरित्र प्रेरणास्पद है: रामानुजाचार्य
Sun, Jul 30, 2023
अशर्फी भवन में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा
व्यासपीठ से कथा कहते पूज्य रामानुजाचार्य जी
अयोध्या। अशर्फी भवन में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन प्रातः काल 121 कलशों के सरयू जल दूध, दही, सर्वश्री जल पंचामृत फल जूस के द्वारा अशर्फी भवन के आराध्य भगवान श्री लक्ष्मी नारायण का विशेष अभिषेक किया गया। पुष्पों के द्वारा भव्य श्रंगार अष्टोत्तर शत तुलसी पुष्प अर्चन एवं श्री सुदर्शन लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति मध्यान्ह में संपन्न हुआ। 51ब्राह्मणों द्वारा स्वर श्रीमद् भागवत पाठ का विश्राम हुआ। महाराज श्री ने सभी भू देवों को वस्त्र दक्षिणा भेंट की। व्यास पीठ पर विराजित जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज भागवत कथा का विस्तार करते हुए कहते हैं मां भगवती जगतजननी लक्ष्मी स्वरूपा रुकमणी जी के द्वारिका आ जाने पर द्वारिका नगरी की शोभा और बढ़ जाती है। प्रभु श्री कृष्ण द्वारिका में अनेकों लीलाएं करते हैं। भगवान के बचपन का मित्र सुदामा अपनी पत्नी सुशीला के बार बार कहने पर प्रभु श्री कृष्ण द्वारिकाधीश से मिलने के लिए जाते हैं। सुदामा के आगमन की सूचना पाकर अकारण निधि करुणा वरुणालय द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण नंगे पैरों भागकर द्वार पर आकर बचपन के मित्र सुदामा को अपने हृदय से लगा लेते हैं। रुकमणी आदि सभी पटरानियों को अचंभा होता है कि राजाधिराज द्वारिकाधीश प्रभु इस दिन हीन व्यक्ति को हृदय से लगाए हैं। श्री कृष्ण सुदामा को दिव्य आसन पर बिठाते हैं चरण वंदन करते हैं सुदामा के द्वारा लाए हुए चावल को प्रभु प्रसाद रूप में पाते हैं अपनी जैसी संपत्ति ब्राह्मण सुदामा को प्रभु देते हैं। सुदामा चरित्र से प्रेरणा मिलती है प्रभु चरणों में जब भी जीव जाए सुदामा जी की तरह बिना फल प्राप्ति की इच्छा के जाए दीनबंधु दयासिंधु भगवान शरणागत जीव को अपना लेते है भागवत कथा के रसास्वादन को करके जो जीव भक्ति ज्ञान वैराग्य में होकर परमात्मा के मार्ग को अपना लेते हैं। उन्हें इन 84 लाख योनियों में नहीं भटकना पड़ता। परमपिता परमात्मा अपने चरणो में उन्हें स्थान देते हैं भागवत कथा के सभी चरित्र प्रेरणास्पद है हमें भागवत कथा को सुनकर भक्ति मार्ग को अपनाते हुए परोपकार की भावना से जीवन यापन करना चाहि सभी भक्तजन कथा को सुनकर आनंदित हो रहे।
: पुरातन ग्रंथ ऋग्वेद में मिलता है अधिकमास का उल्लेख: महंत जगदीश दास
Wed, Jul 26, 2023
हनुमान बाग सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में अधिक मास के पावन अवसर पर हो रहा सीताराम नाम संकीर्तन व वृहद प्रसाद वितरण
यह दिव्य आयोजन पूरे एक माह अनवरत चलेगा,मंदिर में उत्सव का माहौल
अयोध्या। श्रीधाम अयोध्या की प्रतिष्ठित पीठ श्री हनुमान बाग के पीठाधिपति महंत जगदीश दास महाराज के पावन अध्यक्षता में मंदिर में अधिक मास व सावन के पावन अवसर पर हनुमान बाग सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में सीताराम नाम संकीर्तन व वृहद प्रसाद वितरण का दिव्य आयोजन चल रहा है जो पूरे एक माह अनवरत चलेगा। इस अवसर पर हनुमान बाग में उत्सव जैसा माहौल है। महंत जगदीश दास महाराज ने कहा कि अधिक मास के पीछे ज्योतिष शास्त्रीय एवं प्राकृतिक योजना है। विश्व साहित्य के सर्वाधिक पुरातन ग्रंथ ऋग्वेद में अतिरिक्त मास का उल्लेख है। वेदांग ज्योतिष ने भी प्रत्येक पांच वर्षों में दो मास यानी ढाई-ढाई साल के अंतराल में एक-एक अधिक मास जोड़ दिया है। चांद्र वर्ष में 354 दिन ही होते हैं। जो सौर वर्ष के 365 दिनों की तुलना में 11 दिन कम पड़ते हैं। इससे ही कई देशों में अधिक मास की अभियोजना निश्चित हुई। महंत जी ने कहा कि कालांतर में पुराणों ने इस मास को भगवान विष्णु के नाम से पुरुषोत्तम मास की संज्ञा देकर मान्यता दी। पर वैदिक साहित्य में तेरहवें मास के साथ जो भावना थी। वही भावना पुराणों के पुरुषोत्तम मास के साथ भी जुड़ी रही है।
श्री हनुमान बाग आश्रम में ऋग्वेद के पवमानसूक्त से भगवान शालिग्राम का नित्य षोडशोपचार पूजन-अर्चन, वंदन होता है। भगवान भोलेनाथ महादेव का शुक्ल यजुर्वेद संघीता अध्याय के कई अध्यय से निर्माण रुद्राष्टाध्याई से राजोपचार रुद्राभिषेक, महाभिषेक नित्य किया जाता है। महोत्सव की देखरेख सुनील दास, पुजारी योगेंद्र दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री सहित पूरा हनुमान बाग परिवार लगा हुआ है।
: साकेतवासी महंत रघुनाथ दास का हुआ भंडारा,अमन दास ने संतों का किया सम्मान
Sat, Jul 22, 2023
साकेतवासी महंत रघुनाथ दास महाराज के एकमात्र शिष्य अमन दास को आसन के महंत पद पर किया गया नियुक्त
अयाेध्या। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी हरिद्वारी पट्टी के युवा संत अमन दास काे आसन का नया महंत बनाया गया। श्रीपंच रामानंदीय निर्वाणी अनी अखाड़ा के सभी नागा साधु-संताें ने साकेतवासी महंत रघुनाथ दास महाराज के एकमात्र शिष्य अमन दास को आसन के महंत पद पर नियुक्त किया। कुछ दिन पहले बाबा रघुनाथ दास महाराज का साकेतवास हाे गया। जाे हनुमानगढ़ी की हरिद्वारी पट्टी से जुड़े रहे व आसन के महंत थे। उनके निधन से आसन की गद्दी खाली चल रही थी। जिस पर संताें ने उनके शिष्य अमन दास की ताजपाेशी किया। शुक्रवार को बाबा रघुनाथ दास का त्रयाेदश संस्कार रहा। संत-महंतों ने उनके चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर हनुमानगढ़ी इमली बगिया के समीप वृहद भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें काफी संख्या में संत-महंत, धर्माचार्य, विशिष्टजन व भक्तगणों ने प्रसाद पाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीनिर्वाणी अनी अखाड़ा श्रीमहंत मुरली दास महाराज व संयाेजन युवराज महंत राजेश दास पहलवान ने किया। इस माैके पर आसन के नये महंत अमन दास ने कहा कि उनके गुरूदेव बाबा रघुनाथ दास महाराज गाै और संत सेवी थे। वह अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत रहे। जाे व्यवहार कुशल थे। संतत्व ताे उनमें देखते ही झलकता था। वह आज हमारे बीच में नही हैं। लेकिन उनकी यश व कीर्ति सदैव हम सबके साथ रहेगी। उनके रिक्त स्थान की पूर्ति भविष्य में कभी नही की जा सकती है। गुरूदेव के बतलाए हुए मार्ग और पद्चिंहाें पर चलकर मैं आगे बढूंगा। गाै, संत, विद्यार्थी व अतिथि सेवा के प्रति पूरी तरह समर्पित रहूंगा। उन्होंने कहा कि हनुमागढ़ी के नागा साधु-संताें ने उन्हें आसन का महंत नियुक्त किया है। जिस पर वह अक्षरश: खरा उतरेंगे। सदैव पद की गरिमा बनाकर चलेंगे। अंत में हरिद्वारी पट्टी के युवराज महंत राजेश दास और आसन के नये महंत अमन दास ने पधारे हुए नागातीत, संत-महंत, धर्माचार्य, विशिष्टजनाें का स्वागत-सत्कार किया। इस अवसर पर धर्मसम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के कृपापात्र शिष्य व संकट मोचन सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास, हनुमानगढ़ी गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास महाराज के कृपापात्र शिष्य डॉ. महेश दास, महंत रामचरण दास, तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य, जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य, हनुमान बाग के श्रीमहंत जगदीश दास, हनुमानगढ़ी के सरपंच रामकुमार दास, महंत अवधकिशाेर शरण, महंत इंद्रदेव दास, महंत रामशंकर दास, पहलवान मनीराम दास, पुजारी रमेश दास, राजूदास, महंत हरिभजन दास, महामंडलेश्वर महंत आशुतोष दास, अजीत दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, जयमंगल दास, पुजारी उपेंद्र दास, प्रेममूर्ति कृष्णकांत दास, कल्लू दास, अंकित दास, शिवम श्रीवास्तव आदि समेत बड़ी संख्या में नागा साधु, संत मौजूद रहे।