: भक्ति, श्रद्धा, समर्पण और प्रेम का प्रतीक बना झुनझुनिया बाबा आश्रम
Sat, Aug 19, 2023
पुण्यतिथि विशेष
झुनझनियां बाबा राम नाम के अनन्य उपासक थे, अपनी भक्ति श्रद्धा और भावना से परमात्मा को सखी रूप से करते थे आराधना
तीन दशक से आश्रम को सर्वोच्च शिखर पर स्थापित किया श्रीमहंत करूणा निधान शरण जी महाराज ने
अयोध्या। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम की धराधाम को सन्तो की सराह भी कही जाती है। या हम यूं कह ले कि रामनगरी में अनेक भजनानन्दी सन्त हुये उनमें से एक रहे विभूषित जगदगुरू स्वामी श्री जानकी शरण झुनझुनिया बाबा जो रामनाम के सच्चे साधक के रूप में न सिर्फ अयोध्या अपितु पूरे भारत में रामनाम की अलख जगायी।
झुनझुनिया बाबा का नाम अयोध्या के सिद्ध संतों में शामिल है। बाबा को सीता जी की सखी चंद्रकला का अवतार कहा जाता है। यही वजह थी कि बाबा हमेशा स्त्री रूप में रहते थे और राम धुन में लीन रहते थे। रसिक भाव से श्रीराम नाम का प्रचार कर उसे जनमानस के हृदय में प्रतिष्ठित करने वाले स्वामी जानकी शरण महाराज उर्फ झुनझुनिया बाबा की गिनती अयोध्या के सिद्ध संतों की अग्रणी पंक्ति में की जाती है। महाराजश्री को सीता जी की सहेली चंद्रकला का अवतार माना जाता है। उन्होंने सरयू के तट पर जहां तपस्या की थी। वहां सियाराम किला भव्य मंदिर बना हुआ है।
सरयूतट पर सुशोभित श्री सियाराम किला झुनकी घाट के आचार्य श्री की तपोस्थली आज अपने सर्वोच्च शिखर की ओर अ्रग्रसर है। यह आश्रम मां सरयू के पावन तट पर स्थित है। जो चतुर्दिक धर्म की स्थापना, समाज सेवा गौ सेवा अतिथि सेवा विद्यार्थी सेवा संत सेवा व दरिद्र नारायण की सेवा में भी दिन प्रतिदिन निरंतर आगे बढ़ रहा है। जहां पर पूरी निष्ठा व ईमान से सभी सेवा किया जा रहा है। इस आश्रम में भक्तों की एक लम्बी फेरहिस्त है। जिसमें पूरे भारत से लाखों भक्त इस आश्रम से जुड़े हुये है। श्री सियाराम किला को भक्ति श्रद्धा समर्पण और प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। मां सरयू के तट पर भव्य और आकर्षक श्री सियाराम किला झुनकीघाट भक्ति और साधना के दृष्टि से भी सर्वोत्तम स्थान माना जाता है। यहां पहुंचकर सन्त साधक अपने परमाराध्य प्रभु की आराधना कर अपने को कृत्य-कृत्य करते है। मन्दिर के जगमोहन में युगल सरकार की प्रतिमा संगमरमर से बनी दिव्य मूर्ति का दर्शन करते है। मन्दिर में लगातार आज भी सीताराम धुनि कीर्तन संपदितकर महौल को भक्मिय बना देता है। कहते है सौन्दर्यशाली, शांत वातावरण सरयूतट साकेत लोक का अनुभव सदा सर्वदा शीतल मंद सुगंध समीर अनुपम सूर्यास्त दर्शन भजनांदियो के लिए उत्तम शोर से परमशांत गुफा किला से सरयू तक जाने का गुप्त मार्ग झुनकी उद्यान मिथिला वाटिका सत्ंसग भवन श्री युगल बिहारी जू का अद्भुत दर्शन जैसी भाव-भंगिमा रखे ठाकुर जी वैसा ही बन जाए आदि सियाराम किला का विशिष्ठ गुण हे। स्वामी जानकी शरण उर्फ झुनझुनिया बाबा उल्टी खाट पर बैठकर श्री राम नाम सत्य है की धुन लगाते हुए यात्रा करते थे। झुनझुनिया बाबा कानों में बाली हाथों में कंगन पैरों में घुंघरू पहन के सीता जी की सखी चंद्रकला के रूप में ही आजीवन भगवान श्रीराम की आराधना में लीन रहे। उन्होंने सत्यभाव से श्री सीताराम की उपासना की धारा प्रज्वलित की, जो आज भी करोड़ों लोगों को रामनाम रूपी दिव्य रस का अनुभव कराती है। मंदिर के महंत करुणानिधान शरण महाराज कहते हैं की झुनझुनियां बाबा ने कई दशक तक कठोर तपस्या कर भगवान का साक्षात दर्शन प्राप्त किया। किशोरी जी से उन्हें जन कल्याण का आदेश मिला।
सिद्ध संत और श्री राम नाम के अनन्य उपासक अपनी भक्ति श्रद्धा और भावना से परमात्मा को सखी रूप से आराधना कर प्रसन्न करने वाले जगद्गुरु द्वाराचार्य अनंत श्री समलंकृत श्री जानकी शरण जी महाराज झुनझनियां बाबा जी की 28 वीं पुण्यतिथि पर आज चरण पादुका पूजन एवं अभिषेक के साथ धूमधाम से सिद्ध पीठ श्री सियाराम किला झुनकी घाट में मनाया जायेगा। इस आश्रम को तीन दशक से अपने सर्वोच्चत शिखर पर निरन्तर ले जाने के लिए आज भी वर्तमान महन्त श्री करूणा निधान शरण जी महराज लगे रहते हे। आश्रम से जुड़े प्रख्यात कथावाचक जिनका नाम देश विदेश के नामचीन कथावाचकों में लिया जाता है। परमश्रेद्धय स्वामीजी प्रंभजनानन्द शरण जी महराज प्रभुवन्दन एवं जनसेवा संस्थान द्वारा निरन्तर दीन-दुखी असहाय की मदद करना चिकित्सालयों की स्थापना कर रोगियों को निःशुल्क उपचार करना वृद्धजनों व वृद्धा आश्रम असहाय व निर्धन कन्याओं का विवाह करना विशाल गौशाला प्राकृतिक प्रकोप यानि बाढ़ भूकप में राहत देना सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार करना जैसी तमाम योजनाएं चला कर निरन्तर लोगों की मदद करते चले आ रहे है। आश्रम में सभी उत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है।
: गुरु कृपा से ही भक्ति मार्ग की प्राप्ति होती है:रामानुजाचार्य
Sat, Aug 19, 2023
नवदिवसीय श्री राम कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ
सरयू पूजन करते रामानुजाचार्य जी महाराज
दिल्ली से आये 500 भक्त शोभायात्रा में हुए सम्मिलित, गणपति पूजन वरुण पूजन के साथ-साथ सभी ने किया मां सरयू जी का पूजन
श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित हुआ महोत्सव
अयोध्या । प्रतिष्ठित पीठ श्री अशर्फी भवन में श्रावण मास के पावन अवसर पर झूलन उत्सव का भव्य शुभारंभ हो गया। महोत्सव पर श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति के द्वारा आयोजित नवदिवसीय श्री राम कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। देश के विभिन्न प्रांतो से एवं देश की राजधानी दिल्ली से पधारे हुए 500 भक्त शोभायात्रा में सम्मिलित हुए। गणपति पूजन वरुण पूजन के साथ-साथ मां सरयू जी का पूजन सभी भक्तों ने जगद्गुरु स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज के सानिध्य में किया। महाराज श्री ने मां सरयू का दुग्ध अभिषेक किया। श्री राम नाम की धुन का संकीर्तन करते हुए सभी भक्त शोभायात्रा में नृत्य करते हुए झुनकी घाट से कथा स्थल अशर्फी भवन तक पहुंचे। कथा में व्यास पीठ पर विराजित जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने कहां जन्म जन्मांतरों का पुण्य जब उदय होता है तब श्री अवध धाम में बैठकर भगवान श्री राम के पावन चरित्रों का श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। सरयू जी की महिमा का बखान करते हुए महाराज श्री ने बताया सौ वर्षों तक गंगा में स्नान करने से जो पुण्य प्राप्त होता है वह पुण्य फल सरयू दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाता है। श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के रचयिता वाल्मीकि जी के जन्म की कथा का श्रवण कराते हुए महाराज श्री ने कहा सद्गुरु और संतों की कृपा पाकर वाल्मीकि जी ने श्रीमद् वाल्मीकि रामायण की रचना की।आदि काव्य श्रीमद् वाल्मीकि रामायण सभी पुराणों में अग्रगण्य हैं गुरु कृपा से ही भक्ति मार्ग की प्राप्ति होती है। जगतगुरु रामानुजाचार्य शंकराचार्य वल्लभाचार्य, इन्हीं के मार्गदर्शन से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। बंदउ गुरु पद पदुम परागा अज्ञान रुपी अंधकार से ज्ञान रुपी प्रकाश की ओर हमें अग्रसर करें वही सद्गुरु है गुरु की महिमा का वर्णन महाराज जी ने किया। गुरु कृपा से सबसे दुर्लभ बैकुंठ पद को भी प्राप्त किया जा सकता है। रघुवंश के राजाओं की कथाओं का श्रवण करते हुए महाराज श्री ने महाराज दिलीप के गो भक्ति की व्याख्यान सुनाते हुए कहा मां नंदिनी की सेवा रूप से किया गौ माता ने प्रसन्न होकर महाराज दिलीप को पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। भयंकर कलिकाल में गौ सेवा ही सर्वोत्तम भक्ति है हम सभी जीवो को गौ माता की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। कथा का समय सायंकाल 3 बजे से शाम 7 बजे तक है।
: जीवन शैली और आत्मा को नया रूप देती है श्रीराम कथा: महंत मिथलेश नन्दनी
Tue, Aug 1, 2023
गोप्रतार घाट स्थित प्रसिद्ध अनादि पंचमुखी महादेव मन्दिर में बह रही त्रिदिवसीय रामकथा की अमृत वर्षा
अयोध्या। श्रावण पुरुषोत्तम माह के पावन अवसर पर गोप्रतार घाट स्थित प्रसिद्ध अनादि पंचमुखी महादेव मन्दिर के प्रांगण में त्रिदिवसीय रामकथा की अमृत वर्षा हो रही है। व्यासपीठ से रामकथा की मीमांसा करते हुए प्रख्यात कथावाचक साहित्यकार हनुमत निवास पीठाधीश्वर महंत मिथलेश नन्दनी शरण महाराज ने द्धितीय दिवस में कहा कि श्रीराम कथा तन-मन को पवित्र कर उज्ज्वल करने के साथ-साथ जीवन शैली और आत्मा को नया रूप देती है। उन्होंने कहा कि रामकथा का आनंद तभी है, जब वक्ता और श्रोता दोनों सुर, लय, ताल मिलाकर कथा का रसपान करें। प्रेम प्रकट हो जाए तो परमात्मा खुद प्रकट हो जाएंगे। प्रेम के बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं है। आचार्य मिथलेश नन्दनी शरण जी ने कहा रामकथा का महत्व हमेशा से है और आगे भी रहेगा। यह भगवान की लीला, चरित्र व गुणों की गाथा है। इसके श्रवण और कथन के प्रति हमेशा एक नवीनता का भाव बना रहता है।भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के चरित्र में प्रदर्शित त्याग और तपस्या की बातों को निरंतर श्रवण करते रहने से सुनने वाले के अंदर भी ऐसे ही महान गुणों का समावेश हो जाता है।
महोत्सव को आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किलाधीश महंत मैथली रमण शरण महाराज का पावन सानिध्य प्राप्त हो रहा। कथा के आयोजक एकता आशीष अग्रवाल, श्वेता अनुराग अग्रवाल एवम उनकी माता ऊषा अग्रवाल ने सभी संतो का पूजन कर उनका स्वागत और अभिनंदन किया।