: कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ
Sun, Apr 2, 2023
जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य महाराज व्यासपीठ से कर रहे कथा की अमृत वर्षा
बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुए शामिल, जगह-जगह हुआ स्वागत
गोसाईगंज-अयोध्या। स्थानीय नगर के सुंदर वाटिका प्रांगण में पर आयोजित श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के आयोजन का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। कलश यात्रा में भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए।
दशरथ वाटिका से कलश यात्रा प्रारंभ होकर नगर के मुख्य मार्गों से होती हुई सुंदर वाटिका तक डीजे ढोल नगाड़ों गाजे-बाजे व राधा कृष्ण की भव्य संजीव झांकी के साथ आगे-आगे चल रही थी। जगह जगह रास्ते मे स्थानीय श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा में सम्मिलित भक्तों का जलपान करा कर स्वागत करते हुए देखा गया। भव्य मंगल कलश यात्रा में पीली साडी पहनी महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। कथा के आयोजक जगदंबा प्रसाद बजाज वह उनकी पत्नी मंगल कलश सिर पर धारण कर प्रभु का गुणगान करते हुए चल रही थी। कथा व्यास जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत के चेज़ से भक्त का कल्याण होता है और जीवन में सुख व शांति का अनुभव होता है। तत्पश्चात सभी सम्मिलित भक्तजनों को प्रसाद वितरण किया गया। शोभायात्रा में राधा कृष्ण की झांकी आकर्षक का केंद्र बना था। श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने का अवसर बडे़ ही स्वरभक्ति से प्राप्त होता है। बैंडबाजों पर बज रही धुनों से वातावरण भक्तिमय हो गई। इस मौके पर जवाहरलाल जायसवाल मनकापुर, उमानाथ गुप्ता, रामकृपाल कसौधन, भोलानाथ अंगियार, राम जी फैन्सी, गोपीनाथ अंगियार, श्री प्रकाश जायसवाल, बंशीधर बजाज, मनोज कसौधन बबलू, प्रदीप जायसवाल, सचिन गुप्ता, मुकेश गुप्ता, शशि गुप्ता, अनूप जायसवाल, पारसनाथ गुप्ता, शिवम गोस्वामी, श्रीनाथ ट्रेडर्स, अनूप गुप्ता, शशीकांत गुप्ता, रूपेश गुप्ता सहित आज सैकड़ों लोग इस शोभायात्रा में शामिल थे।
: सीतावल्लभ कुंज सत्संग समिति द्धारा सेवा प्रकल्प चलायें जातें है: स्वामी छविराम दास
Sun, Apr 2, 2023
सीतावल्लभ कुंज बड़े हनुमान मंदिर, जानकीघाट में गरीब साधु-संतों, विद्यार्थियों व दीन-हीन व्यक्तियों को वस्त्र वितरित किया गया
अयोध्या । रामनगरी की शीर्षस्थ पीठ सीतावल्लभ कुंज बड़े हनुमान मंदिर, जानकीघाट में गरीब साधु-संतों, विद्यार्थियों व दीन-हीन व्यक्तियों को वस्त्र वितरित किया गया। यह वस्त्र वितरण कार्यक्रम श्रीसीतावल्लभ कुंज सत्संग सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित किया गया था। जिसे पीठ के वर्तमान पीठाधिपति व समिति सेवा समिति द्वारा गरीब साधु-संतों व असहायों को वस्त्र व दक्षिणा भेंट किया जाता है। उसी परिप्रेक्ष्य में इस बार भी हजारों लोगों को वस्त्र बांटा गया। वस्त्र पाकर सभी निहाल हो उठे। कार्यक्रम सायंकाल से शुरू होकर देररात्रि तक चलता रहा। संस्थापक अध्यक्ष महंत रामश्रेष्ठ दास रामायणी महाराज ने सानिध्यता प्रदान किया। इसमें हजारों लोग लाभान्वित हुए। वस्त्र पाकर साधु- संतों, विद्यार्थियों, निर्धनों, असहायों व दीन-हीन व्यक्तियों के चेहरे खिल उठे। पीठ के उत्तराधिकारी स्वामी छविराम दास महाराज ने बताया कि प्रति वर्ष सीतावल्लभ कुंज सत्संग समिति एक दशक से ज्यादा समय से गरीब साधु-संतों, दीन-हीन, निर्बलों, असहायों आदि को वस्त्र बांट रहा है। इसके अलावा संस्थान द्वारा अन्य सामाजिक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह पावन पवित्र अयोध्यानगरी है। जहां प्रभु श्रीराम ने अवतार लिया। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले बाद श्रीरामजन्मभूमि रामलला का दिव्य और मंदिर बन रहा है। जो बनकर तैयार हो जायेगा। 2024 तक श्रीरामलला सरकार अपने भव्य भवन में विराजमान होंगे। वहां हम साधु-संत व भक्तगण उनका दर्शन-पूजन, आरती कर सकेंगे। इससे पहले वस्त्र वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वप्रथम प्रभु श्रीराम के चित्रपट पर माल्यार्पण व पूजन-अर्चन से हुआ।
: राम देश की एकता के प्रतीक हैं: प्रभंजनानन्द शरण
Sun, Apr 2, 2023
श्री सियारामकिला झुनकी घाट में चल रहे श्रीराम जन्मोत्सव के अवसर पर राम कथा का हुआ समापन, स्वामी प्रभंजनानन्द शरण ने कहा-भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है
अयोध्या। श्री सियारामकिला झुनकी घाट अयोध्या में राम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर चल रहे राम कथा के समापन दिवस पर प्रख्यात कथावाचक स्वामी प्रभंजनानन्द शरण महाराज ने कहा कि राम तो प्रत्येक प्राणी में रमा हुआ है, राम चेतना और सजीवता का प्रमाण है। भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है। असीम ताकत अहंकार को जन्म देती है। लेकिन अपार शक्ति के बावजूद राम संयमित हैं।
वे सामाजिक हैं, लोकतांत्रिक हैं. वे मानवीय करुणा जानते हैं। वे मानते हैं- ‘पर हित सरिस धरम नहीं भाई राम देश की एकता के प्रतीक हैं। स्वामीजी जी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम समसामयिक है।भारतीय जनमानस के रोम-रोम में बसे श्रीराम की महिमा अपरंपार है। जीवन की धन्यता भौतिक पदार्थों के संग्रहण में नहीं अपितु सुविचारों एवं सद्गुणों के संचयन में निहित है। जिसके पास जितने श्रेष्ठ एवं पारमार्थिक विचार हैं वह उतना ही सम्पन्न प्राणी है। आज समाज में अशांति कोई पशु या जानवर नहीं फैला रहा, बल्कि अपने स्वरूप से अनभिज्ञ भौतिक पदार्थ की दौड़ में लगा मनुष्य ही फैला रहा है। दूसरों को शांत करने से पहले खुद शांत होना होगा। शांति व आनंद का स्रोत केवल ईश्वर है जो भक्ति द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
मनुष्य के अन्तःकरण में जो गुणों के बीज हैं, वे सत्संग और कुसंग के कारण अंकुरित होते हैं. अगर कुसंग के जल की वर्षा हो जाय तो अन्तःकरण में छिपे हुए दुर्गुण सामने आ जाते हैं. व्यक्ति को कुसंग से बचना चाहिए, इसका तात्पर्य यह है कि अगर वर्षा ही नहीं होगी तो अंकुर भीतर से कैसे फूटेगा ? अतएव यदि हम उन सहयोगियों के, जो हमारे दुर्गुणों को, हमारी दुर्बलताओं को बढ़ा दिया करते हैं, सन्निकट नहीं जावेंगे तो भले ही हमारे जीवन में दुर्गुणों के संस्कार विद्यमान हों, वे उभर नहीं पावेंगे।मानवीय जीवन के सद्गुणों के अंकुरित होने के लिए जिस जल की अपेक्षा है, वह है सत्संग का जल। महोत्सव की अध्यक्षता महंत करुणानिधान शरण महाराज ने किया। इसी के साथ राम जन्मोत्सव का भी समापन हो गया।