Friday 6th of November 2026

ब्रेकिंग

श्रीराम एवं मां सीता को परमाराध्य एवं उनके दूत हनुमान जी को परमाचार्य के रूप में स्वीकृत- शिरोधार्य

दिगंबर अखाड़ा में हुतात्मा कारसेवक स्मृति सभा का भव्य आयोजन, चंपत राय बोले- 500 वर्षों के संघर्ष और कारसेवकों के बलिदान

भक्ति आंदोलन मंच न्यास का विस्तार, महंत परशुराम दास बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, बाल योगी रामदास को प्रदेश की कमान

सर्किट हाउस में हुआ स्वागत, बादल बोले- संगठन को मिलेगी नई मजबूती

हनुमानगढ़ी स्थित आश्रम में जुटे संत-महंत और राजनीतिक हस्तियां, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी कर चुके थे आश्रम

सुचना

Welcome to the DNA Live, for Advertisement call +91-9838302000

: भागवत कथा के सभी चरित्र प्रेरणास्पद है: रामानुजाचार्य

बमबम यादव

Sun, Jul 30, 2023


अशर्फी भवन में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा

व्यासपीठ से कथा कहते पूज्य रामानुजाचार्य जी

अयोध्या। अशर्फी भवन में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन प्रातः काल 121 कलशों के सरयू जल दूध, दही, सर्वश्री जल पंचामृत फल जूस के द्वारा अशर्फी भवन के आराध्य भगवान श्री लक्ष्मी नारायण का विशेष अभिषेक किया गया। पुष्पों के द्वारा भव्य श्रंगार अष्टोत्तर शत तुलसी पुष्प अर्चन एवं श्री सुदर्शन लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति मध्यान्ह में संपन्न हुआ। 51ब्राह्मणों द्वारा स्वर श्रीमद् भागवत पाठ का विश्राम हुआ। महाराज श्री ने सभी भू देवों को वस्त्र दक्षिणा भेंट की। व्यास पीठ पर विराजित जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज भागवत कथा का विस्तार करते हुए कहते हैं मां भगवती जगतजननी लक्ष्मी स्वरूपा रुकमणी जी के द्वारिका आ जाने पर द्वारिका नगरी की शोभा और बढ़ जाती है। प्रभु श्री कृष्ण द्वारिका में अनेकों लीलाएं करते हैं। भगवान के बचपन का मित्र सुदामा अपनी पत्नी सुशीला के बार बार कहने पर प्रभु श्री कृष्ण द्वारिकाधीश से मिलने के लिए जाते हैं। सुदामा के आगमन की सूचना पाकर अकारण निधि करुणा वरुणालय द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण नंगे पैरों भागकर द्वार पर आकर बचपन के मित्र सुदामा को अपने हृदय से लगा लेते हैं। रुकमणी आदि सभी पटरानियों को अचंभा होता है कि राजाधिराज द्वारिकाधीश प्रभु इस दिन हीन व्यक्ति को हृदय से लगाए हैं। श्री कृष्ण सुदामा को दिव्य आसन पर बिठाते हैं चरण वंदन करते हैं सुदामा के द्वारा लाए हुए चावल को प्रभु प्रसाद रूप में पाते हैं अपनी जैसी संपत्ति ब्राह्मण सुदामा को प्रभु देते हैं। सुदामा चरित्र से प्रेरणा मिलती है प्रभु चरणों में जब भी जीव जाए सुदामा जी की तरह बिना फल प्राप्ति की इच्छा के जाए दीनबंधु दयासिंधु भगवान शरणागत जीव को अपना लेते है भागवत कथा के रसास्वादन को करके जो जीव भक्ति ज्ञान वैराग्य में होकर परमात्मा के मार्ग को अपना लेते हैं। उन्हें इन 84 लाख योनियों में नहीं भटकना पड़ता। परमपिता परमात्मा अपने चरणो में उन्हें स्थान देते हैं भागवत कथा के सभी चरित्र प्रेरणास्पद है हमें भागवत कथा को सुनकर भक्ति मार्ग को अपनाते हुए परोपकार की भावना से जीवन यापन करना चाहि सभी भक्तजन कथा को सुनकर आनंदित हो रहे।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें