: शेफ विष्णू मनोहर ने बनाया 7000 किलो ‘श्रीराम भोग हलुवा’
Tue, Feb 20, 2024
निर्वाणी अनि अखाड़ा हनुमानगढ़ी के नागा संतों ने रामभक्तों को खिलाया श्रीराम भोग हलवा
श्री हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रांगण में बना 7000 किलो ‘श्रीराम भोग हलुवा’ बनाकर नया कीर्तिमान बनाया
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की पावन नगरी में भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा होते ही पूरी नगरी का भौगोलिक धरातल जागृत हो गया है। चारों तरह लोग रामभक्तों की सेवा विविध आयामों से कर रहें है। पूरी अयोध्या में देश के विभिन्न राज्यों का पकवान प्रसाद के रुप में वितरण हो रहा है। इसी क्रम में प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमानगढ़ी के हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रागंण में आज सुबह सात बजे मंत्रोच्चार एवं शंखनाद की गुंजती ध्वनी में चूल्हे का पूजन किया गया। उसके बाद ‘कारसेवा से पाकसेवा’ इस परिकल्पना से प्रेरित रामनाम लिखा हूआ विशेष वस्त्र परिधान किए विष्णू मनोहर ने श्रीराम भोग हलुवा बनाने कि प्रक्रिया का प्रारंभ किया। इस दौरान भक्तों ने 11 बार अखंड रामरक्षा का पठा किया। भक्ती से भरे इस माहौल में 10 फिट , 10 फिट व्यास की कढ़ाही में 700 किलो सूजी, 800 किलो घी, 1120 किलो चीनी, 4500 लीटर पानी (मिनरल वाटर), 21 किलो इलायची पाउडर, 21 किलो जायफल पाउडर, 250 दर्जन केले का उपयोग कर श्रीराम भोग हलुवा बनाया गया, जिसमें, 200 किलो के करीब सूखे मेवे जैसे काजू, किशमिश, बादाम आदि का इस्तेमाल किया गया। श्रीराम भोग हलवा तैयार होने में चार घंटे लगे। उसके बाद, हनुमानगढी अयोध्या धाम के गद्दीनशीन श्री महंत प्रेमदास महराज, अनि अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास, महंत रामचरण दास, संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजयदास, प्राचार्य महंत डा महेश दास, महंत रामशंकर दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, मामा दास व मुख्तार अजय श्रीवास्तव, वडोदरा गुजराथ के मिलिंदजी वैद्य और अन्य महानुभावों की उपस्थिति में देवी अन्नपूर्णा का पूजन किया गया। छत्रपती श्री शिवाजी महाराज जयंती के उपलक्ष में राम मंदिर के गुरुजी राघवेन्द्र देशपांडे ने शिवाजी महाराज को अपने संबोधन द्वारा आदरांजली अर्पित की। गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेम दास महाराज ने श्री विष्णू मनोहर जी को बधाई दी और उनके प्रयासों की सराहना की।
संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजयदास जी ने कहा विष्णू मनोहर जी ने श्रीरामलल्ला चरणों में 7000 हजार किलो का भोग चढाकर अपनी सेवा श्रीरामजी के चरणों में अर्पित की है, ये बधाई के पात्र है भगवान की कृपा इन पर सदैव बनी रहें।हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास महाराज ने कहा कि श्रीरामजी की प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात अयोध्या में श्रीराम भक्तों की भीड उमड रही है। श्रीरामलला के दर्शन पाकर भक्तजन पुनित हो रही है। इन भक्तों को आज श्रीराम भोग हलुवे का प्रसाद पाकर बेहद प्रसन्नता मिल रही है। विष्णू मनोहर जी की पूरी टीम बधाई के पात्र है।
: त्याग, तपस्या, वैराग्य की प्रतिमूर्ति थे गुरुदेव: महंत गाेविंद दास
Tue, Feb 20, 2024
प्रतिष्ठित पीठ श्रीपरमहंस आश्रम के साकेतवासी महंत विष्णुदेव दास महाराज काे संताें ने किया नमन
अयोध्या । अयाेध्याधाम में कटरा माेहल्ला स्थित प्रतिष्ठित पीठ श्रीपरमहंस आश्रम के साकेतवासी महंत विष्णुदेव दास महाराज काे संताें ने नमन किया। महाराजश्री का विगत 7 फरवरी को 95 वर्ष की अवस्था में साकेतवास हाे गया। साेमवार काे उनका तेरहवीं संस्कार रहा। इस अवसर पर संताें ने साकेतवासी महंत के प्रति अपनी भाव पुष्पांजलि अर्पित की। तेरहवीं पर मंदिर में विशाल भंडारा प्रस्तावित रहा, जिसमें काफी संख्या में संत-महंत एवं भक्तगणाें ने प्रसाद ग्रहण किया। श्रीपरमहंस आश्रम के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत गाेविंद दास महाराज ने कहा कि हमारे गुरूदेव विलक्षण प्रतिभा के धनी संत थे। जाे भजनानंदी संत हाेने के साथ-साथ गाै और संत सेवी रहे। वह त्याग, तपस्या, वैराग्य की प्रतिमूर्ति थे। जिनकी गणना विद्वान संताें में हाेती थी। उन्हें विद्वता में महारथ हासिल था। उन्होंने सेवा काे ही अपना धर्म माना। आजीवन सेवा के कार्याें में लगे रहे। जिन्हाेंने मठ का सर्वांगीण विकास किया। गुरूदेव महाराज के बारे में जितना कहा जाए वह कम ही हाेगा। वह अब हमारे बीच में नही हैं। उनकी कमी बहुत ही खल रही है। महाराजश्री की यश और कीर्ति हमेशा हम सबके साथ रहेगी। भविष्य में उस रिक्त स्थान की पूर्ति कभी नही की जा सकती है। अंत में पीठ के वर्तमान ने आए हुए संत-महंताें काे अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत-सत्कार किया। इस माैके पर नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, मानस भवन महंत अर्जुन दास, डाड़िया महंत महंत गिरीश दास, श्रीरामप्रिया कुंज महंत महंत उद्धव शरण, श्रीरामकृृष्ण मंदिर के पीठाधिपति महंत गणेशानंद दास, सरयूकुंज पीठाधीश्वर महंत राममिलन शरण, श्रीरामाश्रम पीठाधीश्वर महंत जयराम दास वेदांती, हनुमत सदन महंत अवधकिशाेर शरण, सीताराम निवास के आचार्य सत्येंद्र दास वेदांती, श्रीरामचरित मानस विद्यापीठ महंत कमलादास रामायणी, अयाेध्यानाथ मंदिर महंत भरत प्रपन्नाचार्य, महंत रामलाेचन शरण, स्वामी गयाशरण, प्रियेश दास, संतदास, सूरज दास, आदि संत-महंत, भक्तगण माैजूद रहे।
: यदि संस्कार जीवित हुआ तो संस्कृत भाषा अवश्य ही विस्तार होगा: डा अशोक कुमार पाण्डेय
Tue, Feb 20, 2024
विप्र संजीवनी परिषद गुरुकुल में बटुको का हुआ यज्ञोपवीत संस्कार
अयोध्या। विप्र संजीवनी परिषद गुरूकुल अयोध्या में संस्थापक डा अशोक कुमार पाण्डेय के आचार्यत्व में कई बटुको का यज्ञोपवीत संस्कार सम्पन्न कराया गया।जिसमे प्रदेश के कई जनपदों के बच्चो के साथ उनके अभिभावकों की भी उपस्थिति रही। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की नगरी अयोध्या में स्थापित विप्र संजीवनी परिषद गुरुकुल में प्रतिवर्ष निःशुल्क अनेको बटुको का यज्ञोपवीत कराया जाता है। और उन्हे संस्कारवान बनाकर भारत की प्राचीन गरिमा को पुनरजीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। डा अशोक कुमार पाण्डेय ने अब तक अनेको बटुको का निशुल्क यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न कराया है। श्री पाण्डेय ने कहा यदि संस्कार जीवित हुआ तो संस्कृत भाषा अवश्य ही विस्तार को प्राप्त करेगी। डा अशोकक्षकुमार पाण्डेय विप्र संजीवनी परिषद में निःशुल्क 70 बच्चों को विद्याध्ययन कराते है। उन्होंने कहा कि सभी भाषाओं की तरह संस्कृत केवल भाषा ही नही है। इसके अध्ययन से हमारे अंदर देवत्व उत्पन्न हो जाता है क्योकि यह देवभाषा है। डा अशोक पाण्डेय के पढाए अब तक हजारों के ऊपर शिक्षक धर्मगुरु कथा वाचक संगीतकार कवि हो चुके है। इनके पढाए हुए अनेको जेआरएफ भी है। परिषद में आज सायंकाल के समय भजन संध्या का आयोजन भी किया गया। जिसमे परिषद के ही छात्रो नें शानदार प्रस्तुति की। इसके बाद भण्डारे का भी आयोजन किया गया। जिसमें अनेको लोग भोजन प्रसाद ग्रहण लिए। यज्ञोपवीत के उपरांत आचार्य डा अशोक कुमार पाण्डेय ने यज्ञोपवीत का महत्व बताते हुए कहा कि आज हमारा हिन्दू समाज संस्कार और संस्कृत भाषा के प्रति बहुत ही उत्सुक दिखाई पड़ रहा है। भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी जी ने फिर भारत देश एवं प्रदेश को पहले जैसा समृद्ध बना दिया।भारत की पहचान उसकें संस्कारों एवं भाषा से ही होती रही थी। किन्तु कुछ हिन्दू विरोधी मानसिकता वाले लोग भारत देश को अन्य देशो की तरह असभ्यता एवं नग्न वातावरण की तरफ धकेल दिए थे।संस्कार से ही हम द्विज कहलाते है। जब तक हमारे देश में संस्कार था अनेको महापुरुष पैदा होते थे। किन्तु संस्कार विहीन भारत देश में अनेको राष्ट्र विरोधी संस्कृति विरोधी संस्कृत भाषा विरोधी लोग पैदा हो गए थे।किन्तु आज का वातावरण पहले से बिल्कुल बदल गया है।अब इस देश में पुनः संस्कृत भाषा भारतीय प्राचीन संस्कृति एवं मर्यादाएं पुनः जीवन्त हो रही है। आचार्य जी ने कहा कि संस्कार विहीन मनुष्य में और पशु में कोई अंतर नही होता है। यज्ञोपवीत संस्कार का संपादन कर रहे अनेको वैदिकों के वैदिक मन्त्रों के उच्चारण से पूरा अयोध्या का वातावरण गुंजायमान हो गया। वैदिक विद्वानो में पं आचार्य शुभम पाण्डेय, पं सिद्धांत जी,पं विवेक जी पं आदर्श जी, पं मयंक मणि त्रिपाठी, पं हर्षित पाण्डेय, पं सूरज द्विवेदी, पं मुमुक्षानंद, पं अजय दूबे,पं रुपेश दूबे ,पं शशांक जी,अंश, राजेश्वर एवं अन्यान्य आचार्य गण विराजमान थे।