: हमारे द्वारा किया गया आहार ही हमारे उत्थान एवं पतन का कारण : चिदानन्दमयी
Tue, Feb 27, 2024
सन्तों के कारण ही भगवान श्री राम लला सरकार को 500 वर्षों के बड़े कठिन संघर्ष के उपरान्त अपना भवन प्राप्त हो पाया: इन्द्रेश
श्री लक्षचण्डी महायज्ञ, श्री लक्षगणपति महायज्ञ एवं श्री राम यज्ञ का छाया उल्लास,उमड़ी भक्तों की भारी भीड़
अयोध्या। महामण्डलेश्वर स्वामी श्री प्रखर जी महाराज के पावन सनिध्य एवं श्रीमज्जद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ० स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज के संयोजकत्व में गोला घाट, सरयू तट पर चल रहे श्री लक्षचण्डी महायज्ञ, श्री लक्षगणपति महायज्ञ एवं श्री राम यज्ञ के विशाल प्रांगण में 1700 कर्मनिष्ठ विद्वान ब्राह्मणों के द्वारा डॉ० सज्जन प्रसाद तिवारी (डॉयरेक्टर, प्रखर परोपकार मिशन संस्कृत एकेडमी) के निर्देशन में दुर्गासप्तशती पाठ एवं गणपत्यथर्वशीर्ष पाठ प्रतिदिन किए जा रहे हैं। महायज्ञ की विराट 100 कुण्डीय यज्ञशाला में यज्ञाचार्य वेदमूर्ति पं० लक्ष्मीकान्त दीक्षित के आचार्यत्व में प्रातः के समय पूजन एवं सायं के समय हवन कुण्ड में आहुतियाँ दी जा रही हैं। महायज्ञ के ज्ञान मण्डपम् (प्रवचन पण्डाल) में सन्त सम्मेलन, श्रीराम कथा, लीला मण्डपम् में दिन के समय श्रीराम लीला, रात्रि के समय श्रीकृष्ण लीला व सरयू आरती का आयोजन नित्यप्रति किया जा रहा है।महायज्ञ के ज्ञान मण्डपम् में आज सन्त सम्मेलन के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने मनुष्य के आहार, विहार, व्यवहार एवं आचार के विषय पर प्रकाश डाला। वक्ताओं में प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट की संयुक्त सचिव, माता चिदानन्दमयी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में हमारी युवा पीढ़ी भ्रमित है, उनको इस बात का कोई बोध ही नहीं है कि अपने जीवन में किस तरह का आहार लेना चाहिए, किस तरह का व्यवहार करना चाहिए एवं किस तरह का आचरण करना चाहिए। माता जी ने कहा कि हमारे द्वारा किया गया आहार ही हमारे उत्थान एवं पतन का कारण है, अतः हमें अपने आहार को शुद्ध करना चाहिए, यदि हमारा आहार शुद्ध होगा तो हमारा व्यवहार, आचरण भी शुद्ध होगा। माता जी ने कि आज के समय में लोग भीड़ को ही महत्व देते हैं किन्तु मेरी धारणा है कि जिस तरह से हीरे को बहुत कम ही लोग अफोर्ड कर पाते है, वैसें ही इस तरह के दुर्लभ आयोजनों का दर्शन एवं सेवा का अवसर भी भगवत्कृपा से गिने-चुने लोगों को ही प्राप्त हो पाता है।उसके उपरान्त सभा को सम्बोधित करते हुए मुक्तामणि जी महाराज ने एक वृतान्त को सुनाते हुए कहा कि एक बार ऋषियों के सम्मुख यह चर्चा हो रही थी कि संसार में सबसे निकृष्ट कौन है? इस पर ऋषियों ने अपने-अपने मतानुसार बताया कि जो धनहीन है वही सबसे निकृष्ट है, किसी ने कहा कि साहित्य कला से जो विहीन है वही सबसे निकृष्ट है, अन्त में श्री वेद व्यास जी महाराज ने कहा कि जो भगवान नारायण से विमुख है वही सबसे निकृष्ट है, अर्थात यदि हम भगवान नारायण के प्रति सच्चे भाव से समर्पित रहेंगे एवं अपना आहार शुद्ध रखेंगे तो हमारा आचार, व्यवहार एवं विहार भी अच्छा होगा।
सभा की अध्यक्षता कर रहे अखिल भारवर्षीय धर्म संघ के कार्यकारी अध्यक्ष ब्रह्मचारी गुण प्रकाश चैतन्य जी महाराज, भादरा, राजस्थान के साथ डॉ० स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज, स्वामी निरंजनाचार्य जी महाराज, डॉ० सज्जन प्रसाद तिवारी जी, आचार्य शिवम जी महाराज, डॉ० रामानन्द दास जी महाराज (नैयायिक) एवं ब्रह्मचारी आनन्द प्रकाश जी महाराज ने भी सभा सम्बोधित किया।
आज महायज्ञ स्थल पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्षस्थ नेता इन्द्रेश जी ने भी महायज्ञ का दर्शन एवं पूज्य महाराजश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि पूज्य स्वामी श्री प्रखर जी महाराज एवं डॉ० स्वामी राघवाचार्य जी महाराज जी के कारण ही आज हम सब राम राज्य की कल्पना को साकार होते हुए देख रहे हैं। सन्तों के कारण ही भगवान श्री राम लला सरकार को 500 वर्षों के बड़े कठिन संघर्ष के उपरान्त अपना भवन प्राप्त हो पाया है। उन्होंने कहा कि मैं अपने को बहुत सौभाग्यशाली मानता हूँ कि आज इतने विराट यज्ञ का दर्शन साक्षात् कर पा रहा हूँ।महायज्ञ स्थल पर सर्वश्री तिलकराज शर्मा, श्रीमती आरती शर्मा, राजेश अग्रवाल, दर्शन गुप्ता, कमल किशोर चौधरी, प्रवीन नेमानी, मनीष गर्ग, नरेन्द्र शर्मा, श्रीमती सुषमा अग्रवाल, श्रीमती सोनिया चौधरी, विजय कानोडिया, डूंगर सिंह राठौर, रघुनाथ सिंह, राम मोहन बेड़िया, अर्पित गर्ग, राजीव अग्रवाल, अनिल गर्ग, किरण गर्ग, राजकुमार जिन्दल, अभिषेक गुप्ता, डॉ० जी०सी० पाठक, सुनील नेमानी, सर्वेश गुप्ता, मनोज भदौरिया, राघवेन्द्र मिश्र, सिब्बू मिश्र, दिनेश मिश्रा, सीताराम बडोनी आदि भक्तजन उपस्थित रहे।
: सन्तों के कारण ही हमारी वैदिक परम्परा, धर्म-शास्त्र सुरक्षित है: बागेश्वर धाम
Sun, Feb 25, 2024
यज्ञों की महिमा का कोई अन्त नहीं, 'यज्ञ' भारतीय संस्कृति के अनुसार ऋषि-मुनियों द्वारा जगत को दी गई अनुपम भेंट: रामानुजाचार्य
कार्यक्रम को सम्बोधित करते यज्ञ सम्राट महामण्डलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज
महायज्ञ की विराट यज्ञशाला में यजमानों द्वारा पड़ रही आहुतियां, महायज्ञ की सर्व कल्याण यज्ञशाला में आज से श्रौत महायज्ञ का भी हुआ शुभारम्भ
लीला मण्डप में इण्डोनेशिया के कलाकारों ने श्रीराम लीला का किया अद्भुत मंचन
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या में भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा होते ही भौगोलिक धरातल राममय हो गई।चारों तरफ भगवान के नाम कीर्तन व भक्तों में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। अयोध्या के विकास में तेजी लाने के लिए और विश्व कल्याण हेतु यज्ञ सम्राट महामण्डलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज के पावन सानिध्य एवं श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ० स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज के संयोजकत्व में गोला घाट, सरयू तट, अयोध्या धाम में आयोजित श्री लक्षचण्डी महायज्ञ, श्री लक्षगणपति महायज्ञ एवं श्री राम यज्ञ के दौरान बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री शामिल हुये।महायज्ञ की 100 कुण्डीय विराट यज्ञशाला में हो रहे हवन का दर्शन, प्रदक्षिणा एवं यज्ञ के ज्ञान मण्डपम् (प्रवचन पण्डाल) को सम्बोधित भी किया।
बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि पूज्य स्वामी प्रखर जी महाराज जी जैसे सन्तों के कारण ही हमारी वैदिक परम्परा, धर्म-शास्त्र सुरक्षित है, इसके लिए मैं पूज्य महाराजश्री को बारम्बार प्रणाम करता हूँ। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य कि मैं पूज्य महाराज श्री द्वारा सम्पादित किए जा रहे इस विराट महायज्ञ का साक्षात् दर्शन कर पा रहा हूँ। महायज्ञ के साथ प्रतिदिन आयोजित हो रहे अन्य विविध कार्यकमों के अन्तर्गत प्रातःकालीन सत्र में सन्त सम्मेलन के दौरान उपस्थित वक्ताओं ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ० स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि यज्ञों की महिमा का कोई अन्त नहीं है। 'यज्ञ' भारतीय संस्कृति के अनुसार ऋषि-मुनियों द्वारा जगत को दी गई ऐसी अनुपम देन है है जिसे सर्वाधिक फलदायी एवं समस्त पर्यावरण केन्द्र (इको सिस्टम) के ठीक बने रहने का आधार माना जा सकता है। ऋषियों ने 'अयं यज्ञो विश्वस्य भुवनस्य नाभिः' कहकर यज्ञ को संसार की सृष्टि का आधार बिन्दु कहा है। उन्होंने कहा कि हमारे धर्म शास्त्रों में उल्लिखित है कि राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ करके चार पुत्र पाए थे। देवराज इन्द्र ने स्वयं भी यज्ञों के द्वारा ही सब पाया था एवं वर्तमान में पूज्य महाराजश्री ने तो यज्ञों के माध्यम से कई ऐसे चमत्कारिक कार्य किए हैं, जिनके गुणगान करने में आज की सभा का समय भी पूरा हो जाएगा किन्तु उनके सुखद परिणामों की व्याख्या करना असम्भव है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कोराना महामारी से भारत सहित सम्पूर्ण विश्व त्राहि-त्राहि कर रहा था, दुनिया की कोई भी दवा एवं उपचार काम नहीं कर रहा था, उस समय पूज्य महाराज श्री ने यज्ञ विधा से ही विगत वर्ष 2022 में काशी के केदारखण्ड क्षेत्र के अन्तर्गत शखोद्धार तीर्थ, शंकुलधारा, पोखरा में श्री लक्षचण्डी महायज्ञ को आयोजित कर इस महामारी का समूल शमन किया। आज के सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे डॉ० सज्जन प्रसाद तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि 'यज्ञो वै विष्णुः' अर्थात् यज्ञ ही साक्षात् विष्णु है। विष्णु व्यापक हैं, अतः यज्ञ भी व्यपाक है एवं प्रकृति का प्रत्येक तत्व यज्ञ में ही निरत है। सन्त सम्मेलन के दौरान आचार्य रत्नेश जी महाराज, स्वामी निरंजनाचार्य जी महाराज, आचार्य शिवम जी महाराज, आचार्य डॉ० सुभाष तिवारी जी, ब्रह्मचारी आनन्द प्रकाश जी महाराज एवं मिथिला बिहारी शरण जी महाराज ने अपने-अपने उद्बोधन से यज्ञ की महिमा के बारे में बताया।महायज्ञ की पाठशालाओं में 1700 विद्वान ब्राह्मणों के द्वारा दुर्गा सप्तशती पाठ एवं श्री गणपत्यथर्वशीर्ष पाठों का कम प्रखर परोपकार मिशन संस्कृत एकेडमिक के डॉयरेक्टर डॉ० सज्जन प्रसाद तिवारी जी की देख-रेख में जारी है। महायज्ञ की विराट यज्ञशाला में यजमानों द्वारा हवन कार्य का कम भी अनवरत जारी है एवं महायज्ञ की सर्व कल्याण यज्ञशाला में आज श्रौत महायज्ञ का भी शुभारम्भ हो गया है। पूज्य स्वामी श्री प्रखर जी महाराज ने इस पर जानकारी देते हुए बताया कि दो अग्निहोत्र कमशः श्रीराम द्विवेदी जी एवं श्री अरविन्द पाण्डेय जी के द्वारा श्रौत यज्ञ कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि आज प्रतिपदा को पौर्णमास्य इष्टी एवं कल से चातुर्मास्य इष्टी का कम सर्वकल्याण यज्ञशाला में जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि इस श्रौत यज्ञ में घृत, लकड़ी, कुशा एवं चावल के आटे की हवि का ही प्रयोग होता है। महायज्ञ के सायंकालीन सत्र में डॉ० स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज के श्रीमुख से श्रीराम कथा का कम भी अनवरत जारी है, जो 1 मार्च तक चलेगा। महायज्ञ के लीला मण्डप में आज इण्डोनेशिया के कलाकारों के द्वारा श्रीराम लीला का अद्भुत मंचन किया गया। इण्डोनेशिया कलाकारों के द्वारा भारतीय कला के अद्भुत प्रदर्शन से उपस्थित भक्तजन आश्चर्यचकित रह गया। रात्रिकाल में श्रीकृष्ण रासलीला का अद्भुत मंचन, श्रीराधा सर्वेश्वर रासमण्डली, वृन्दावन के कलाकारों द्वारा प्रतिदिन किया जा रहा है। यह जानकारी श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट की संयुक्त सचिव माता चिदानन्दमयी जी ने दिया। इस अवसर पर सर्वश्री राजेश अग्रवाल, दर्शन गुप्ता, कमल किशोर चौधरी, प्रवीन नेमानी, मनीष गर्ग, नरेन्द्र शर्मा, सुषमा अग्रवाल, विजय कानोडिया, डूंगर सिंह राठौर, रघुनाथ सिंह, राम मोहन बेड़िया, अर्पित गर्ग, राजीव अग्रवाल, अनिल गर्ग, किरण गर्ग, राजकुमार जिन्दल, अभिषेक गुप्ता, डॉ० जी०सी० पाठक, सुनील नेमानी, सर्वेश गुप्ता, मनोज भदौरिया, राघवेन्द्र मिश्र, सिब्बू मिश्र, दिनेश मिश्रा, इन्दू शुक्ला, कनिष्क मेहता, गौरी शंकर भारद्वाज, सीताराम बडोनी आदि भक्तजन उपस्थित रहे।
: शिद्दत से शिरोधार्य हुए करतलिया बाबा
Sun, Feb 25, 2024
38वीं पुण्यतिथि पर रामनगरी के संत धर्माचार्यों ने आचार्य श्री किया श्रद्धा सुमन अर्पित
पुष्पांजलि अर्पित करते संत साधक
पूज्य महाराज श्री भले ही स्थूलत: हमारे बीच न हों पर उनकी साधना-सिद्धि की तरंगें अभी भी आश्रम में व्याप्त हैं और एक बड़े आध्यात्मिक परिकर को बराबर प्रेरित करती हैं: बालयोगी
अयोध्या। करतलिया बाबा को याद करना संतत्व के एक युग का स्मरण है। वे आराध्य में लीनता की मिसाल थे। रविवार को सरयू के संत तुलसीदासघाट स्थित सिद्ध पीठ श्री करतलिया बाबा के आश्रम में उनकी 38वीं पुण्यतिथि मनाई गई और इसी के साथ ही उनकी स्मृति फलक पर हुई जहां संत धर्माचार्यो ने आचार्य श्री के व्यक्तित्व पर वाक्यमयी पुष्पांजलि अर्पित की। रामनगरी के सिद्व पीठों में शुमार श्री करतलिता बाबा आश्रम के संस्थापक सिद्व सन्त परमपूज्य श्री करतलिया बाबा जी महाराज की 38वीं पुण्यतिथि आज बड़े धूमधाम से समापन हुआ। कार्यक्रम के समापन में मंदिर प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमें रामनगरी समेत पूरे भारत से आये संत धर्माचार्य सहित परिकरों ने आचार्य श्री श्रद्धा सुमन अर्पित कर नमन किया।मंदिर में वृहद भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें आये हुए संतो महंतो का मंदिर के महंत बालयोगी रामदास जी ने परम्परागत तरीके से स्वागत किया।
करतलिया आश्रम के महंत बालयोगी रामदास जी महाराज के अनुसार बाबा भले ही स्थूलत: हमारे बीच न हों पर उनकी साधना-सिद्धि की तरंगें अभी भी आश्रम में व्याप्त हैं और एक बड़े आध्यात्मिक परिकर को बराबर प्रेरित करती हैं। बाबा की पुण्यतिथि बालयोगी रामदास के संयोजन में मनाया गया। जिसमें अखंड पाठ का समापन हुआ।इसी कड़ी में देर शाम दिव्य मां सरयू आरती सेवा संस्थान के तत्वावधान में मां सरयू की भव्य फूल बगले की झांकी और 51 सौ बत्ती की महाआरती का आयोजन किया गया। इसके बाद पुण्यतिथि महोत्सव का समापन किया गया। इस मौके पर खाक चौक के महंत विजय रामदास जी महाराज, महंत सच्चिदानंद दास जी महाराज, केदार यादव वाराणसी, राधेश्याम यादव वाराणसी, राजेंद्र यादव वाराणसी, श्रीमहंत बृजमोहन दास,महंत परशुराम दास, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, महंत जनार्दन दास, महंत गिरीश दास, महंत वैदेही बल्लभ शरण, महंत कन्हैया दास,महंत धर्म दास, महंत रामकुमार दास, महंत जयराम दास, नागा साधु राजू दास, आनंद दास, रवि नागा, कमल दास,पूर्व मंत्री तेजनारायण पाण्डेय पवन, दान बहादुर सिंह, मशहूर डेंटल सर्जन डॉक्टर अनुराग आनंद सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।