: राम भक्तों की सेवा करने का सौभाग्य प्रभु की कृपा से मिलाःबाबा महेंद्र सिंह
Sun, Apr 21, 2024
ऐतिहासिक गुरुद्वारा नजरबाग विगत 16 वर्षों से खालसा फाउंडेशन ट्रस्ट द्धारा रामनवमी पर रामभक्तों की कर रहा सेवा
सेवादारों और बाबा महेंद्र सिंह जी का मूल धर्म और स्वभाव बनकर हम सभी को ऊर्जा और मनुष्यता की सेवा करने की प्रेरणा देता है: सांसद लल्लू सिंह
अयोध्या। सिख धर्म का भी अयोध्या से गहरा नाता है। रामनगरी के गुरुद्वारा नजरबाग में गूंजती गुरुबाणी इसका प्रमाण है। अयोध्या के संत भी यह मानते हैं कि सनातन धर्म और सिख धर्म के संबंध का गहरा नाता भगवान राम से हैं। गुरुबाणी में बार-बार राम के नाम का प्रयोग मिलता है तो गुरुग्रंथ साहिब में कहा गया है कि निर्गुण ब्रह्म सर्वव्यापक है। निर्गुण ब्रह्म को ही राम के नाम से पुकारा गया है। अपनी सेवा रुपी अमिट छाप छोड़ते हुए इस बार 17 वर्ष भी ऐतिहासिक गुरुद्वारा नजरबाग अयोध्या खालसा फाउंडेशन ट्रस्ट के द्वारा प्रसाद वितरण कार्यक्रम रामनवमी के पावन अवसर पर कर रामभक्तों की सेवा किये।यह आयोजन सिख समाज द्धारा परंपरागत रुप से किया जाता है। प्रसाद वितरण जत्थेदार बाबा महेंदर सिंह जी व समूह सेवादारों करते है। इस वितरण कार्यक्रम में सांसद लल्लू सिंह भी शामिल हुए। सांसद ने रामभक्तों को प्रसाद वितरण करते हुए कहा कि गुरुद्वारा नजर बाग पिछले कई वर्षों से अयोध्या आने वाले दर्शनार्थियों के साथ साथ जरूरतमंदों और नगरवासियों की सेवा में हम सब के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सेवाभाव इस स्थान और यहां के सेवादारों और बाबा महेंद्र सिंह जी का मूल धर्म और स्वभाव बनकर हम सभी को ऊर्जा और मनुष्यता की सेवा करने की प्रेरणा देता रहता है।
बाबा महेंदर सिंह जी ने सभी को बधाई देते हुए कहा की प्रभु राम का जन्मोत्सव मनुष्यता के लिए सकारात्मक ऊर्जा के साथ साथ जीवन में वैराग- वैभव,परिवार धर्म, मनुष्यता न्याय धर्म प्रायोगिकता में संतुलन बनाने की कला प्रदान करता है। प्रभु राम हम सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।
गुरुद्वारे के सेवादार नवनीत सिंह ने कहा कि लंगर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग लंगर प्रसाद ग्रहण करते हैं। श्री राम जन्म भूमि के निकट गुरुनानक देव जी और गुरु गोविंद सिंह जी महराज की चरण रज प्राप्त यह स्थान ऐतिहासिक महत्व रखता है।सेवादार नवनीत ने अयोध्या फैज़ाबाद की समूह साध संगत और प्रशासन के सहयोग के लिए धन्यवाद।
: सियारामशरण सखी बाबा को संतो ने किया नमन
Sat, Apr 20, 2024
अयोध्या। अयोध्या सिद्ध और भजनानंदी संतो की गढ़ रही है। इसी नगरी में लगभग पांच दशक पहले मां सरयू तट के किनारे सरयू कुंज मंदिर वशिष्ठ कुंड दुराही कुआं के संस्थापक साकेत वासी सिद्ध संत सियारामशरण सखी बाबा की पुण्यतिथि बड़े ही धूमधाम से मनाई गई। सियारामशरण महाराज सिद्ध संत थे सरयू के तट पर आश्रम बना कर संतो, वृद्धों, असहायों और गौ सेवा निरंतर किया करते थें। उनका कहना था कि मानव जीवन पाना बहुत ही दुर्लभ है और मनुष्य को जब यह जीवन प्राप्त हो जाय तो उसको निरंतर सेवा ही करनी चाहिए सेवा से ही भगवत की प्राप्ति हो सकती है।सरयू कुंज के वर्तमान महंत राममिलन शरण ने बताया कि श्री महाराज जी सेवा के प्रतिमूर्ति थे और पूरे दिन जाड़ा, गर्मी, बरसात निरंतर लोगों की सेवा करते रहते थे। आश्रम में जो भी व्यक्ति आया वह कभी निराश होकर नहीं गय है। कम संसाधनों में सेवा कैसे की जाती है यह उनके जीवन से सीखा जा सकता हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 5 दशक पहले श्री महाराज जी अयोध्या में आये और आश्रम की स्थापना कर सेवा करने लगी तब से आज तक आश्रम में निरंतर सेवा चलती रहती है। श्री महाराज जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा व विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। श्री महाराज जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए अयोध्या के नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, महंत जयरामदास, महंत गणेशानंद दास, महंत उद्धव शरण,महंत बाल योगी महंत रामदास सहित सैकड़ों संतों महंतों मंदिर परिसर से जुड़े शिष्य परिकर श्री महाराज जी को श्रद्धांजलि अर्पित किए। महंत राम मिलन शरण ने सभी महंतों का स्वागत सत्कार किया है।
: आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला में रंगभरी बधाई पर जमकर उड़े अबीर गुलाल
Sat, Apr 20, 2024
मिथिली से आई सखियों के गायन और नृत्य की रही धूम, तो अयोध्या के प्रसिद्ध गायकों ने जमकर अपनी कला का जादू बिखेरा
महोत्सव को किलाधीश श्रीमहंत मैथलीरमण शरण जी महाराज ने सानिध्यता और मंदिर के युवा संत अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने अपना संयोजन प्रदान किया
श्रीरामजन्मोत्सव के बाद भी पूरी अयोध्यानगरी उत्सवी रंग में डूबी रही। जहां मठ-मंदिरों में बधाई, सोहर आदि गीत गाकर कलाकारगण महोत्सव में चार-चांद लगा रहे थे। तो वही आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला का उत्सव देखने लायक है। जहां पर मिथिला की सखियां गीत संगीत नृत्य से पूरा महफिल में चार चांद लगा रही है। मौका था लक्ष्मण किला में रंगभरी बधाई का। आचार्य पीठ लक्ष्मण किला में किलाधीश श्री महंत मैथिली रमण शरण की अध्यक्षता में उत्सव की धूम रही। यहां रंगभरी बधाई को भगवान के जन्म के उल्लास की धूम रही। अयोध्या के प्रसिद्ध गायकों में विनोद शरण, एमबी दास, राम नंदन शरण, रामआसरे दास आदि ने जमकर अपनी कला का जादू बिखेरा। इस अवसर पर मिथिली से आई सखियों के गायन और नृत्य की धूम रही। हनुमत निवास के महंत मिथिलेश नंदिनी शरण सहित दो दर्जन से ज्यादा प्रमुख महंतों की मौजूदगी रही। इस दौरान संतों ने पुष्प वर्षा और गुलाल लगाकर रामजन्म का उल्लास मनाया।कलाकारों ने उत्सव की महफिल सजा दिया। इससे साधु-संत, भक्तगण मंत्रमुग्ध हो गए। मंदिर में श्रीरामजन्मोत्सव का उल्लास छाया रहा। मध्यान्ह प्रभु श्रीराम के जन्म बाद मंदिर में भजन, बधाई एवं सोहर गीत का सिलसिला देररात्रि तक चला। भगवान श्रीराम के प्राकट्य की खुशी में प्रसाद वितरण हुआ। पूरा मंदिर प्रांगण रंग-बिरंगी रोशनी में नहाया रहा, जिससे अनुपम छटा निखर कर सामने आ रही थी। चारों ओर हर्षोल्लास का वातावरण छाया रहा। भगवान के जन्मोत्सव की खुशी में साधु-संत से लेकर भक्तगण झूमने को आतुर दिखे। उनकी खुशी का कोई ठिकाना नही था। सभी अपनी सुध-बुध खोकर उत्सवी रंग में डूबकर नाच रहे थे। चहुंओर भक्तिमय वातावरण फैला रहा। महोत्सव को किलाधीश श्रीमहंत मैथलीरमण शरण जी महाराज ने सानिध्यता और मंदिर के युवा संत अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने अपना संयोजन प्रदान किया। आचार्य पीठ में भगवान श्रीराम का प्राकट्योत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। महोत्सव पर भजन, बधाई आदि का कार्यक्रम हुआ। उसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। कलाकारों को न्यौछावर भी भेंट किया। किलाधीश श्रीमहंत मैथलीरमण शरण जी महाराज ने कहा कि इस बार श्रीरामनवमी पर्व का बड़ा ही महत्व रहा। क्योंकि हमारे आराध्य श्रीरामलला सरकार पांच सौ वर्षों के लंबे संघर्ष बाद भव्य मंदिर में विराजमान हुए। श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा बाद यह श्रीरामजन्मोत्सव का पहला पर्व था, जिसको हम सबने बड़े ही हर्षोल्लास पूर्वक मनाया। इस अवसर पर तमाम कार्यक्रम आयोजित किए गए।