श्री लक्षचण्डी महायज्ञ में शामिल हुए मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव,लिया संतों का आशीर्वाद, महायज्ञ की परिक्रमा भी की
अयोध्या। यज्ञ सम्राट महामण्डलेश्वर स्वामी श्री प्रखर जी महाराज के पावन सनिध्य एवं श्रीमज्जद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ० स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज के संयोजकत्व में गोला घाट, सरयू तट पर चल रहे श्री लक्षचण्डी महायज्ञ, श्री लक्षगणपति महायज्ञ एवं श्री राम यज्ञ के विशाल प्रांगण में 1700 कर्मनिष्ठ विद्वान ब्राह्मणों के द्वारा दुर्गासप्तशती पाठ, गणपत्यथर्वशीर्ष पाठ एवं पुरुष सूक्त पाठों का कम जारी है, महायज्ञ की विराट 100 कुण्डीय यज्ञशाला में यज्ञाचार्य पं० लक्ष्मीकान्त दीक्षित के आचार्यत्व में प्रातः के समय पूजन एवं सायं के समय हवन कुण्ड में आहुतियाँ, पूर्व की भाँति प्रदान की जा रही हैं, साथ ही श्रौत यज्ञ के अन्तर्गत मित्रविन्दाष्टि यज्ञ, दो अग्निहोत्र वैदिक ब्राह्मणों द्वारा किया जा रहा है। महायज्ञ के ज्ञान मण्डपम् (प्रवचन पण्डाल) में सन्त सम्मेलन एवं वृन्दावन से पधारे कृष्ण चन्द्र ठाकुर महाराज के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा चल रही हैं। आज महायज्ञ में मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमन्त्री मोहन लाल यादव पहुंचे। यहाँ पर आकर उन्होंने यज्ञशाला की परिक्रमा एवं संतों का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मैं महाराजश्री जैसे सन्तों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करता हूँ जिनके कारण भारत की लुप्त हो रही यज्ञ परम्परा सुरक्षित है एवं आज की युवा पीढ़ी के लिए इस तरह के आयोजन प्रेरणाश्रोत हैं। मैं अपने को धन्य मानता हूँ कि आज इस पावन पुण्यभूमि में उपस्थित हो सका।
सन्त सम्मेलन में श्री प्रखर परोपकार मिशन संस्कृत एकेडमी के डॉयरेक्टर डॉ० सज्जन प्रसाद तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरुदेव की कृपा से ही हम लोग भगवान श्रीराम जी की पावन जन्मभूमि में इस तरह के दुर्लभ आयोजन देख पा रहे हैं, बड़े सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर हर किसी को नहीं मिलते एवं बार-बार भी नहीं मिलते। आचार्य डॉ० सुभाष तिवारी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पूज्य महाराजश्री पर माता भगवती की विशेष कृपा है, जो इस तरह के वृहद आयोजनों के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व का मंगल करते हैं। उन्होंने कहा कि मार्कण्डेय पुराण के अन्तर्गत दुर्गा सप्तशती के पाठों में वह शक्ति है, जिससे असम्भव से असम्भव कार्य भी सिद्ध हो जाते हैं। यहाँ इस विराट यज्ञ में तो माता दुर्गा जी की प्रसन्नता के लिए एक लाख पाठों का मन्त्रोच्चार किया जा रहा है, निश्चित रूप से इसके परिणाम से भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व लाभान्वित होगा। सम्मेलन को माता चिदानन्दमयी जी, डॉ० परमेश्वर दत्त शुक्ल एवं श्रीश दत्त शुक्ल जी ने भी सम्बोधित किया। सन्त सम्मेलन के अवसर पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के मीमांसा विभाग के प्रो० कमलाकान्त त्रिपाठी जी द्वारा लिखित पुस्तक 'शाश्वत धर्म' का विमोचन, पूज्य डॉ० स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज जी के कर कमलों द्वारा किया गया। इस अवसर पर सर्वश्री राजेश अग्रवाल, दर्शन गुप्ता, प्रवीन नेमानी, विकास मित्तल, आंचल मित्तल, गौरव मित्तल, डॉ० जी०सी० पाठक, अनिल अरोड़ा, श्रीमती निरुपमा अग्रवाल, श्रीमती आशा कानोडिया, विजय कानोडिया, डूंगर सिंह राठौर, रघुनाथ सिंह, अनिल गर्ग, किरण गर्ग, मुनि गर्ग, कपिष्क मेहता, राजकुमार जिन्दल, राघवेन्द्र मिश्र, सिब्बू मिश्र, इन्दू शुक्ला, राजीव तिवारी, नीति तिवारी, दिनेश मिश्रा, सीताराम बडोनी, गौरीशंकर भारद्वाज, प्रेमाराम चौधरी आदि भक्तजन उपस्थित रहे।