: लक्ष्मण किला के संस्थापक आचार्य युगलानन्य शरण की मनाई गई 204वीं जयंती
Fri, Nov 8, 2024
लक्ष्मण किला के संस्थापक आचार्य युगलानन्य शरण की मनाई गई 204वीं जयंतीअद्वितीय विद्वान के साथ गायन विद्या के थे गहरे जानकार: किलाधीश श्रीमहंत मैथिलीरमण शरणएक भक्त ने लगभग 52 बीघा विस्तार में भूमि उन्हें दान स्वरूप दी थी, जहां पर लक्ष्मण किला स्थित हैअयोध्या। अयोध्या अद्भुत है. यहां संतों की पंरपरा भी विराट है। जो अलग-अलग स्थानों पर भले रहते है लेकिन उनके उद्देश्यों में समानता दिखाई पड़ती है। रसिक परंपरा के आचार्य पीठ लक्ष्मण किला के आचार्य युगलानन्य शरण ऐसे ही महापुरुष थे. पीठ पर उनकी 204 वीं जयंती बड़े ही शिद्दत से मनाई गई। श्री रामानंद संप्रदाय के अद्वितीय महापुरुष रसिकोंपासना के महान आचार्य आचार्यपीठ श्री लक्ष्मणकिला के संस्थापक परम पूज्य रसिकाचार्य स्वामी श्री युगलानन्य शरण जी महाराज की पावन 204 वी जयंती बड़े ही धूमधाम से मनाई गई। जयंती की अध्यक्षता आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला महंत मैथिली रमण शरण जी महाराज ने किया व संयोजन अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण व प्रिया प्रीतम शरण ने किया। जयंती के अवसर पर प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी बधाई गायन के साथ पूज्य आचार्य श्री द्धारा रचित ग्रन्थों का सामुहिक पाठ किया गया।
किलाधीश श्रीमहंत मैथिलीरमण शरण ने बताया कि संस्कृत, उर्दू, अरबी एवं गुरुमुखी के अद्वितीय विद्वान होने के साथ ही गायन विद्या में भी गहरी पैठ रखते थे। गोविंद सिंह की जन्मभूमि हरिमंदिर पटना में रहकर गुरुग्रंथ साहब की व्याख्या भी करते रहे। युगलानन्य शरण जी पटना से काशी, चित्रकूट होते हुए अयोध्या आए। किलाधीश श्रीमहंत मैथिलीरमण शरण ने कहा कि एक भक्त ने उन्हें दान की थी 52 बीघा की भूमियुगलानन्य शरण की तपश्चर्या से अभिभूत होकर एक भक्त ने लगभग 52 बीघा विस्तार में भूमि उन्हें दान स्वरूप दी थी. जहां पर लक्ष्मण किला स्थित है। कालांतर में लक्ष्मण किला की नींव पड़ी थी, जिसके यह संस्थापक हैं. सरयू के तट पर स्थित यह आश्रम श्रीसीताराम जी की आराधना के साथ ही श्रीरामनवमी, सावन झूला व श्रीराम विवाहोत्सव के आयोजन के रूप में मशहूर है। लक्ष्मण किला को स्पर्श कर बहती हुई सरयू सूर्यास्त के समय बहुत सुंदर लगने लगती हैं.महाराज श्री स्वप्न में भी अयोध्या से बाहर जाना पसंद नहीं करते थे. लेकिन एक बार वह स्वप्न में जगन्नाथ भगवान का दर्शन करने पुरी पहुंच गए. धाम छूटने का अनुभव होते ही वह स्वप्न में ही रोने लगे तो इस पर भगवान जगन्नाथ ने उनकी भावना को समझ कर कहा कि मैं ही राम हूं. इस घटना का जिक्र उन्होंने धामकांति पुस्तक में किया है. गौरतलब है कि अयोध्या के कई ऐसे संत हुए जो अयोध्या से बाहर नहीं गए।
अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने कहा बड़े ही उच्च कोटि के महापुरुष थें स्वामी श्री युगलानन्य शरण जी महाराज जिन्होंने अपने जीवनकाल में सैकड़ों ग्रंथों की रचना की भगवत प्राप्ति के लिए किये, जैसे श्री नाम कान्ति, श्री धाम कान्ति, श्री संत विनय सतक आदि। सूर्य प्रकाश शरण ने कहा पूज्य श्री बड़े महाराज जी की उपासना परंपरा की हजारों शाखा है पूरे भारत में अयोध्या मिथिला चित्रकूट वृंदावन जगहों में है। श्री लक्ष्मणकिला के अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण वा प्रिया प्रीतम शरण ने आयें सभी अतिथियों संतों भक्तों का स्वागत सत्कार किया। कार्यक्रम में हनुमत सदन के महंय अवध किशोर शरण,
हनुमत निवास के महंत मिथलेश नन्दिनी शरण, मिथिला मणि मंडप के महंत अंजनी कुमार शरण, महंत छोटू शरण, महंत अमित कुमार दास, मिथिला बिहारी दास, रामनंदन दास ,गायक राम विनोद शरण सहित सैकड़ो लोग मौजूद रहें।
: श्री रामशरण दास महाराज का 49वां वार्षिकोत्सव समारोह गुरुवार से शुरु
Wed, Nov 6, 2024
श्री रामशरण दास महाराज का 49वां वार्षिकोत्सव समारोह गुरुवार से शुरुव्यासपीठ से श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा करेंगे जगद्गुरू रामानुजाचार्य डा राघवाचार्य, 7 को निकलेगी विशाल शोभायात्राकार्तिक शुक्ल पक्ष द्वादशी को मां सरयू महारानी का होगा चुनरी महोत्सव13 नवंबर को ठाकुर जी समेत पूरे मंदिर को फूल बंगले से सजाया जाएगा, भगवान को लगेगा छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोगअयोध्या। श्री राम नगरी के प्रतिष्ठित पीठों में शुमार श्री बड़ा भक्त माल मंदिर के संस्थापक आचार्य अनंत विभूषित श्री रामशरण दास जी महाराज के 49 वें वार्षिकोत्सव समारोह का भव्य शुभारंभ श्रीमद् भागवत कथा से हो रहा है। यह महोत्सव श्री बड़ा भक्तमाल जी की छावनी के श्री महंत कौशल किशोर दास महाराज के पावन अध्यक्षता में हो रहा है। कार्यक्रम के संयोजक बड़ा भक्तमाल के उत्तराधिकारी महंत अवधेश कुमार दास महाराज ने बताया कि 7 नवंबर गुरुवार यानि कल से पूज्य अनंत विभूषित श्री रामशरण दास जी महाराज के 49 वें वार्षिकोत्सव समारोह का भव्य शुभारंभ हो रहा है, जो 14 नवंबर तक चलेगा। कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमद् भागवत कथा से हो रहा है। व्यासपीठ से श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा करेंगे जगद्गुरू रामानुजाचार्य डा राघवाचार्य जी करेंगे। कल गुरुवार को मंदिर से विशाल शोभायात्रा नगर भ्रमण करते हुए मां सरयू के पावन तट जायेगी जहां पर मां सरयू का विधिवत पूजन होगा इसके बाद शोभायात्रा पुनः मंदिर वापस आयेगी। भागवत कथा का विश्राम 13 नवंबर को होगा। उन्होंने कहा कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को प्रातः 10 मां सरयू महारानी का चुनरी महोत्सव होगा। जिसमें देश के कोने कोने से हजारों संत महंत एवं श्रद्धालु गण होंगे शामिल। महंत अवधेश दास जी ने बताया कि सदगुरुदेव भगवान रामशरण दास महाराज का वार्षिक भंडारा 14 नवंबर को होगा। महंत अवधेश कुमार दास ने बताया की 13 नवंबर को ठाकुर जी के साथ पूरे मंदिर परिसर को फूल बंगले से सजाया जाएगा और भगवान को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा और सभी भक्तों में प्रसाद वितरण किया जाएगा और 14 नवंबर को विशाल भंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।
: हनुमंत लला को लगाया गया कढ़ी प्रसाद का विशेष भोग
Tue, Nov 5, 2024
हनुमंत लला को लगाया गया कढ़ी प्रसाद का विशेष भोग
भंडारे के साथ अतिथियों सहित कलाकारों को किया गया सम्मानितहनुमान किला सहित अन्य मंदिरों में बधाई गान के बीच किया गया विशेष पूजन
अयोध्या। 'हे जगवंदन मारुति नंदन सुन लो मेरी पुकार, पवनसुत विनती बारम्बार' की स्तुति के साथ सोमवार को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ हनुमंत लला का छठयोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर बजरंगबली का विशेष श्रृंगार कर उनकी आरती पूजा की गयी। वहीं कढ़ी चावल का विशेष भोग लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण कराया गया। हनुमानगढ़ी में आचार्य परम्परा के अनुसार भगवान की पूजा अर्चना कर मध्याह्न कढ़ी प्रसाद का विशेष भोग लगा। वहीं हनुमत उपासना के विभिन्न केंद्रों में बधाई गान का सिलसिला शरद पूर्णिमा से ही चल रहा था। छठयोत्सव पर यह उल्लास चरम पर दिखा।
हनुमान किला में मंदिर के महंत रामभजन दास के सानिध्य व उनके उत्तराधिकारी राम किशोरदास के संयोजन में आयोजित उत्सव में नित्य के क्रम में बधाई गान का क्रम प्रातःकाल से शुरू होकर दोपहर तक चलता रहा। इसके पहले भगवान का विशेष श्रृंगार कर उनकी आरती उतारी गयी। बधाई गान में डूबे मंदिर के महंत रामभजन दास ने अतिथियों व कलाकारों को सम्मानित किया। इसी कड़ी में हनुमत निवास,हनुमत सदन, हनुमत भवन, बजरंग भवन,हनुमत विजय कुंज, हनुमत कृपा कुंज, आंजनेय आश्रम व गहोई मंदिर में भी छठयोत्सव पूरे श्रद्धा भाव से मनाया गया। इस दौरान भंडारे का भी आयोजन किया गया। भंडारे में आमंत्रित अतिथियों ने प्रसाद ग्रहण किया।