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: युगों बाद भी जीवंत है सीता-राम विवाह की स्मृति: महंत जगदीश दास

बमबम यादव

Mon, Dec 18, 2023

अयोध्या। युगों बाद भी जीवंत है सीता-राम विवाह की स्मृति
रामनगरी में उसकी स्मृति युगों बाद भी जीवंत है। रामानुरागी संत प्रति वर्ष अगहन शुक्ल पंचमी के दिन सीता-राम विवाह का उत्सव पूरे भव और वैभव से मनाते हैं
मां सीता एवं भगवान राम का विवाह त्रेता में हुआ था पर रामनगरी में उसकी स्मृति युगों बाद भी जीवंत है। रामानुरागी संत प्रति वर्ष अगहन शुक्ल पंचमी के दिन सीता-राम विवाह का उत्सव पूरे भव और वैभव से मनाते हैं। इस मौके पर अवध एवं मिथिला की लोक संस्कृति के अनुरूप विवाह की सभी रस्में होती हैं। विवाह का मंडप सजता है, माड़व गड़ता है, तिलक चढ़ता है, बरात निकलती है, द्वारचार के उपरांत सप्तपदी और कलेवा होता है।
रामनगरी में ऐसा करने वाले संतों की भरी-पूरी धारा है, जिन्हें रसिक अथवा मधुर उपासना परंपरा का माना जाता है। वे मां सीता के बिना आराध्य राम की कल्पना भी नहीं करते और ऐसे में सीता-राम विवाह की स्मृति उनके लिए पूरी गहनता से अक्षुण है। नगरी के प्रसिद्ध पीठों में शुमार श्री हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज के अनुसार यह मात्र परंपरा का पालन ही नहीं है, बल्कि सीता-राम विवाहोत्सव में अपूर्व तात्विकता भी निहित है। संतों की मान्यता है कि सीता-राम विवाह भक्ति का भगवान से परिणय है। वे विवाहोत्सव की स्मृति के साथ भगवान से अपने संबंधों को पुष्ट करते हैं।
राम विवाहोत्सव का जिक्र होने पर हनुमान बाग का नाम बरबस उभरता है। क्योंकि रीति रिवाज के साथ राजशी टाठ बाट से पूरा विवाह महोत्सव मनाया जाता है।
जगत नियंता भगवान श्री राम अपने अनुजों समेत सजधज कर निकले अपनी बारात। चहुंओर हर कोई नाचते गाते निकले भगवान की बारात। हाथी घोड़े ऊट बैडबाजे बारात की शोभा बड़ा रहे थे। हर शक्स खुशी में झूमता नजर आ रहा था। अपने आराध्य के शादी का जश्न लोगों के सर चढ़ बोल रहा था। बड़े ठाटबाट से निकली भगवान श्रीराम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न की बारात और उतने ही ठाटबाट से निकले भगवान के बाराती।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की नगरी अयोध्या में राम विवाह उत्सव लगभग सप्ताह भर से चल रहा है वही विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर भगवान श्री राम और जनकनंदिनी सीता का विवाह कार्यक्रम होता है इस मौके पर अयोध्या के मठ मंदिरों से बारात निकाली जाती है। जिसमे एक मंदिर से में बारात लेकर प्रतीकात्मक रूप से जनकपुर बनाए गए दुसरे मंदिर तक पहुचती है जहां चारो भाई राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघन सहित सभी बारतियो का स्वागत किया गया।
प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग का विवाहोत्सव भी बड़ा सुंदर व देखने योग्य रहा। महंत जगदीश दास जी महाराज के अगुवाई में सजधज कर निकले बाराती फिजाओं में चार चांद लगा रहे थे। बारात में भगवान शंकर, हनुमानजी के स्वरूप पूरे माहौल को भक्ति मय कर रहें थे। बारात की अगुवाई खुद हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज कर रहें थे। उनके साथ रामनगरी के विशिष्ट संत भी भगवान राम के बाराती बन नाचते गाते जा रहे थे। इस मौके पर महंत नंदराम दास, गद्दी नशीन जी के शिष्य संत मामा दास, उपेंद्र दास, लवकुश दास सहित सैकड़ों संत मौजूद रहें। व्यवस्था में पुजारी योगेंद्र दास, सुनील दास, रोहित शास्त्री,नितेश शास्त्री सहित हनुमान बाग से जुड़े शिष्य परिकर लगे रहे।

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