Wednesday 4th of November 2026

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अक्षय नवमी पर अयोध्या के संतों का बड़ा भक्त माल आश्रम में हुआ सम्मान : भक्त के लिए भगवान नौकर भी बन जाते है: जगतगुरू डा राघवाचार्य

अक्षय नवमी पर अयोध्या के संतों का बड़ा भक्त माल आश्रम में हुआ सम्मान

भक्त के लिए भगवान नौकर भी बन जाते है: जगतगुरू डा राघवाचार्य

अयोध्या। रामनगरी के रामघाट स्थित प्रसिद्ध पीठ श्री बड़ा भक्तमाल मंदिर के बड़े महाराज श्रीमहंत कौशल किशोर दास महाराज के सनिध्य में और वर्तमान महंत डा अवधेश कुमार दास महाराज के संयोजन में चल रहे नव दिवसीय मंदिर के संस्थापक श्री महंत रामशरण दास जी महाराज बड़े भक्तमाल के 50 वें साकेतोत्सव के पंचम दिवस की बेला में पाठ, वेदों के पाठ नवाह पारायण, भक्तमाल पारायण के साथ अक्षय नवमी के अवसर पर अयोध्या के संतों को विशेष रुप से सम्मानित किया गया, पूरे सम्मान के साथ उनको प्रसाद पवाया गया अंग वस्त्र भेंट किया गया और सम्मान के साथ विदाई की गई। यह पूरा कार्यक्रम बड़े भक्तमाल के बड़े महंत कौशल किशोर दास महाराज के सानिध्य में और वर्तमान महंत अवधेश कुमार दास जी महाराज के संयोजन में चल रहा है जो निरंतर 5 नवंबर तक चलता रहेगा 2 नवंबर को मां सरयू को भव्य चुनरी अर्पित की जाएगी।

वहीं दोपहर के सत्र में जगतगुरु रामानुजाचार्य डॉ स्वामी राघवाचार्य ने भक्तमाल में भक्तों के चरित्र की कथा कहते हुए बताया कि भगवान योग योगेश्वर कृष्ण अपने भक्त के लिए समय आने पर सारथी भी बन जाते हैं और दूत बनाकर के उनका संदेश लेकर भी जाते हैं वर्तमान समय की भाषा में कहें तो भक्ति के लिए भगवान नौकर भी बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि भक्त की महत्ता भगवान से अधिक है क्योंकि भक्त ही भगवान को साक्षात बुला सकता है। भक्तों के चरित्र को सुनकर उपस्थित संत महंत भक्त वृंद, धन्य हो गए। कथा के विश्राम बेला पर महंत डा अवधेश कुमार दास महाराज ने आरती उतारी कथा में आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत सम्मान किया और कहां की भगवान को प्राप्त करने का सबसे सरल साधन सेवा है, यही कारण है कि बड़े भक्तमाल के महाराज के साकेतोत्सव पर अयोध्या की सेवा करने वाले सभी वर्गों की सेवा आश्रम में की जा रही है और यह सेवा 5 नवंबर तक चलती रहेगी 5 नवंबर को अयोध्या के भिक्षुओं को सम्मानित किया जाएगा और उसी के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। महाराज जी के साथ उनके शिष्य कृष्ण गोपाल दास कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए निरंतर सेवा में लगे रहे।

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