: जयंती पर आस्था से रोशन हुआ पुण्य सलिला सरयू का तट
Thu, Jun 12, 2025
जयंती पर आस्था से रोशन हुआ पुण्य सलिला सरयू का तटदिव्य मां सरयू आरती सेवा समिति के तत्वावधान में मां सरयू की दिव्य फूल बंगले की झांकी सजाई गई व 5100 बत्ती की महाआरती के साथ सरयू में अद्वितीय दीपदान किया गयाअयोध्या। सरयू जयंती की रात पुण्यसलिला के तट पर आस्था की इंद्रधनुषी छटा बिखरी। विधि- विधान से पुण्यसलिला का पूजन किया गया। सरयू तट पर झांकी सजी और जगह-जगह पुण्यसलिला की हजारों दीपों से आरती की गई।
रामनगरी अयोध्या में जेष्ठ पूर्णिमा पर माँ सरयू की जयंती बड़े धूम धाम से मनाई गई। जिसमें अयोध्या के संत भी शामिल हुए। दिव्य मां सरयू आरती सेवा समिति के तत्वावधान में मां सरयू की दिव्य फूल बंगले की झांकी सजाई गई और 5100 बत्ती महाआरती व प्रसाद वितरण कर पूरे सरयू में अद्वितीय दीपदान किया गया जिसमें पूरा सरयू तट दीपों से रोशन हो गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री तेजनारायण पाण्डेय पवन ने मां सरयू की आरती की।
ग्रंथों में भी मां सरयू का विशेष वर्णन किया गया है माना जाता है कि महाराजा रघु की प्रार्थना पर महर्षि वशिष्ठ ने तपस्या करके ब्रह्मदेव को प्रसन्न कर मां सरयू को पृथ्वी पर अवतरित कराने का वरदान प्राप्त किया था। वहीं वर्णन में कहा गया है कि जब ब्रम्हदेव सृष्टि की रचना कर रहे थे तो उससे पहले ही ब्रह्मदेव ने भगवान विष्णु की तपस्या की थी और भगवान विष्णु ब्रह्म देव को दर्शन दिया था। दर्शन के बाद ब्रम्हदेव की तपस्या को देख भगवान विष्णु इतना खुश हो गए थे कि उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े थे। तभी ब्रह्मा जी ने ऑसुओं को अपने हाथों से रोक उसे मानसरोवर पर स्थापित किया था।इसीलिए सरयू को नेत्रजा भी कहा जाता है। जेष्ठ पूर्णिमा पर मां सरयू महोत्सव का आयोजन बृहद स्तर पर रहा। अयोध्या के स्थानीय नागरिक व संतों ने मां सरयू की भव्य आरती की।
कार्यक्रम के संयोजक दिव्य मां सरयू आरती सेवा समिति के अध्यक्ष एवं करतलिया बाबा आश्रम के महंत बालयोगी रामदास ने कहा कि रामनगरी अयोध्या में आज के दिन मां सरयू का अवतरण हुआ था। पवित्र पावन माँ सरयू की भव्य आरती का बड़ा अद्भुद दृश्य होता है। उन्होंने बताया कि यह उत्सव 4 पीढ़ियों से होता आ रहा है। जिसमें मां सरयू को प्रातः भोग प्रसाद व देर शाम दिव्य आरती होती आ रही है। महंत रामदास कहते है यह करतलिया बाबा सरकार के समय से होता आ रहा है। इस मौके पर,महंत दिलीप दास,पूर्व मंत्री तेजनारायण पाण्डेय, माता प्रसाद पाण्डेय, महंत कन्हैया दास, महंत कमल दास, श्रीचंद यादव, हरिहर यादव, मौजी राम यादव आदि लोग मौजूद रहें।
: रघुभूमि से तपोभूमि की यात्रा श्रीराम के जयघोष के साथ रवाना
Wed, Jun 11, 2025
रघुभूमि से तपोभूमि की यात्रा श्रीराम के जयघोष के साथ रवानायात्रा का उद्देश्य प्रभु राम के आगमन स्थलों को जागृत करना एवं संरक्षित करना: महंत जनार्दन दासमाँ सरयू के जल आचमन के साथ लोकमंगल की कामना कीअयोध्या। प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या से रणभूमि से तपोभूमि की तीन दिवसीय यात्रा जय श्रीराम के उद्घोष के साथ बक्सर के लिए रवाना हुई। लोक दायित्व के तत्वाधान में बुधवार को माँ सरयू के अवतरण दिवस पर यात्रा के प्रमुख पवन कुमार के नेतृत्व में तुलसीदास जी की छावनी के पीठाधीश्वर श्री महंत जनार्दन दास जी महाराज, स्वामी दिलीप दास जी महाराज, अध्यक्ष रघुवंश संकल्प सेवा ट्रस्ट व अवध विश्वविद्यालय के डॉ. विजयेन्दु चतुर्वेदी ने अयोध्या धाम के लता चौक से ध्वज दिखाकर बक्सर के लिए 276 किलोमीटर की यात्रा को रवाना किया। इससे पहले प्रभु श्री राम व लक्ष्मण के स्वरूप का तिलक कर लोक दायित्व के पदाधिकारियों द्वारा मां सरयू के जल का आचमन किया एवं लोक मंगल की कामना की। इस यात्रा में समाज के लगभग सभी वर्गों के लोग शामिल रहे। तुलसीदास जी की छावनी के पीठाधीश्वर श्री महंत जनार्दन दास जी महाराज व लोक दायित्व के प्रमुख एवं यात्रा के संयोजक पवन कुमार ने बताया कि यह यात्रा आज अयोध्या धाम से शुरू हुई है। 13 स्थानों पर राम जी के रुकने, विश्राम करने, रात्रि शयन आदि के प्रमाण शास्त्रों में मिलते है। उन स्थानों में प्रथम दिवस पर अयोध्या, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, दूसरे दिन कारो धाम जिनमें आजमगढ़, मऊ, बलिया तथा तीसरे दिन बक्सर पहुंच कर विश्राम लेगी। इस यात्रा में एक रथ सहित लगभग दो दर्जन गाड़ियां साथ चल रही है। स्थानीय लोगों द्वारा जगह जगह यात्रा में पुष्प वर्षा के साथ रामजी की आरती की जा रही है। यात्रा में संकीर्तन मंडली प्रभु श्रीराम के आगमन स्थलों पर हरिकीर्तन करती हुई चल रही है। यात्रा को लेकर आमजनमानस में काफी उत्साह है। इस यात्रा में दीनानाथ सिंह, अंलकार कौशिक, सीता राम प्रजापति, अरविंद सिंह, राणा सिंह, अविनाश शाही, अभिषेक पाण्डेय, गौरव रघुवंशी, अवधेष प्रताप, दिनेश सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय शामिल रहे।
: राम का रूप देखना नेत्रों की तपस्या है: डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण
Tue, Jun 10, 2025
राम का रूप देखना नेत्रों की तपस्या है: डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण
कहा,सरयू नदी मात्र जलधारा नहीं, यह श्रीराम की कृपा की धारा हैसरयू महोत्सव श्रद्धालुओं को अध्यात्म और संस्कृति के अद्भुत संगम का अनुभव करा रहामां सरयू की भव्य महाआरती व फूल बंगले की झांकी का दिव्य आयोजन बुधवार कोअयोध्या। 13वा सरयू महोत्सव श्रद्धालुओं को अध्यात्म और संस्कृति के अद्भुत संगम का अनुभव करा रहा है। गंगा जी की भांति प्रवाहित होती सरयू के तट पर जैसे ही नाम, रूप, लीला, धाम की चर्चा प्रारंभ हुई, पूरा वातावरण जय श्रीराम, जय सरयू मइया के जयकारों से गूंज उठा। प्रख्यात कथावाचक साहित्यकार हनुमत निवास पीठाधीश्वर महंत डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि सरयू नदी मात्र जलधारा नहीं, यह श्रीराम की कृपा की धारा है। नाम, रूप, लीला, धाम आत्मा की शुद्धि का द्वार है। उन्होंने कहा कि राम का रूप देखना नेत्रों की तपस्या है। राम की लीला सुनना कानों की तीर्थयात्रा है और राम का नाम लेना जिह्वा की मुक्ति है। यह धाम उन तीनों का संगम है। कहा कि सरयू मइया स्वयं पवित्रता की मूर्त रूप हैं। यह केवल नदी नहीं, राम भक्ति का आधार है। आज महोत्सव को सम्बोधित करते हुए चक्रवर्ती महाराज दशरथ जी का राजमहल बड़ास्थान पीठाधीश्वर विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज ने कहा कि यह पावन पुनीत श्रीअवध धाम है। जिसे सप्तपुरियों में मस्तक कहा गया है। यह सातों पुरी में मस्त के समान है। अवध धाम की बड़ी ही महिमा है। जहां भगवान श्रीराम ने अवतार लेकर सबका कल्याण किया। प्रभु श्रीराम ने पूरे दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाया। भगवान श्रीराम जैसा कोई नही है। आज सारा संसार उनका गुणगान करता है। एक आदर्शवादी राजा, पिता, पुत्र, भाई, पति आदि के रूप में भगवान श्रीराम सभी जगह खरा उतरे। महोत्सव को सम्बोधित करते हुए हनुमानगढ़ी सागरिया पट्टी के श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज के उत्तराधिकारी संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने सबको मर्यादित जीवन जीना सिखाया।जैसा की शास्त्रों में अवध धाम की महिमा गाई गई है। अयोध्या नाम ही अपने आप में भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश का स्वरूप है। केवल अयोध्या नाम लेने मात्र से ही तीनों देवताओं के नाम लेने का फल मिल जाता है। साठ हजार वर्षों तक गंगा तट पर रहकर भजन-साधना करने का जो फल है। वह फल केवल अयोध्यापुरी के दर्शन करने मात्र से ही मिल जाता है। अयोध्यापुरी की महिमा को बढ़ाने के लिए भगवान के नेत्रों से नेत्रजा सरयू मैया प्रकट हुई हैं। जिनके बारे में कहा गया है कि कोटि कल्प काशी बसे, मथुरा कल्प हजार। एक निमिष सरयू बसे, तुले न तुलसीदास ।। ऐसी मां सरयू, अयोध्या धाम और हमारे प्रभु श्रीराम की महिमा है। अब तो आनंद ही नही, महा आनंद का अवसर हम सबको मिला है। जब श्रीराम जन्मभूमि पर हमारे श्रीरामलला और राम दरबार विराजित हुए हैं। भक्तों के हृदय का वह आनंद, ब्रह्मानंद में परिवर्तित हो रहा है। नित्य प्रति अनेकानेक भक्त श्रीधाम अवध में पधार रहे और बड़े भाव से श्रीरामलला का दर्शन कर रहे हैं। महोत्सव का संचालन पत्थर मंदिर पीठाधीश्वर महंत मनीष दास ने किया। आंजनेय सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रसिद्ध पीठ श्री राम कचेहरी के महंत शशिकांत दास ने अतिथियों का आभार प्रकट किया। अतिथियों का स्वागत समिति से जुड़े तुलसीदास जी की छावनी पीठाधीश्वर महंत जनार्दन दास व डांडिया मंदिर पीठाधीश्वर महंत गिरीश दास ने किया। महोत्सव में आज यानि बुधवार को मां सरयू की भव्य आरती व फूल बंगले की झांकी सजाई जायेगी। कार्यक्रम में निर्वाणी अनि अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास, महंत पहलवान राजेश दास, कनक महल के महंत सीताराम दास त्यागी, हनुमत सदन के महंत अधव किशोर शरण, महंत दिलीप दास त्यागी,विराट दास,महंत संजय दास निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में संत व कथा प्रेमी मौजूद रहें।