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: राम का रूप देखना नेत्रों की तपस्या है: डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण

बमबम यादव

Tue, Jun 10, 2025

राम का रूप देखना नेत्रों की तपस्या है: डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण

कहा,सरयू नदी मात्र जलधारा नहीं, यह श्रीराम की कृपा की धारा है सरयू महोत्सव श्रद्धालुओं को अध्यात्म और संस्कृति के अद्भुत संगम का अनुभव करा रहा मां सरयू की भव्य महाआरती व फूल बंगले की झांकी का दिव्य आयोजन बुधवार को अयोध्या। 13वा सरयू महोत्सव श्रद्धालुओं को अध्यात्म और संस्कृति के अद्भुत संगम का अनुभव करा रहा है। गंगा जी की भांति प्रवाहित होती सरयू के तट पर जैसे ही नाम, रूप, लीला, धाम की चर्चा प्रारंभ हुई, पूरा वातावरण जय श्रीराम, जय सरयू मइया के जयकारों से गूंज उठा। प्रख्यात कथावाचक साहित्यकार हनुमत निवास पीठाधीश्वर महंत डॉ. मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि सरयू नदी मात्र जलधारा नहीं, यह श्रीराम की कृपा की धारा है। नाम, रूप, लीला, धाम आत्मा की शुद्धि का द्वार है। उन्होंने कहा कि राम का रूप देखना नेत्रों की तपस्या है। राम की लीला सुनना कानों की तीर्थयात्रा है और राम का नाम लेना जिह्वा की मुक्ति है। यह धाम उन तीनों का संगम है। कहा कि सरयू मइया स्वयं पवित्रता की मूर्त रूप हैं। यह केवल नदी नहीं, राम भक्ति का आधार है। आज महोत्सव को सम्बोधित करते हुए चक्रवर्ती महाराज दशरथ जी का राजमहल बड़ास्थान पीठाधीश्वर विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज ने कहा कि यह पावन पुनीत श्रीअवध धाम है। जिसे सप्तपुरियों में मस्तक कहा गया है। यह सातों पुरी में मस्त के समान है। अवध धाम की बड़ी ही महिमा है। जहां भगवान श्रीराम ने अवतार लेकर सबका कल्याण किया। प्रभु श्रीराम ने पूरे दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाया। भगवान श्रीराम जैसा कोई नही है। आज सारा संसार उनका गुणगान करता है। एक आदर्शवादी राजा, पिता, पुत्र, भाई, पति आदि के रूप में भगवान श्रीराम सभी जगह खरा उतरे। महोत्सव को सम्बोधित करते हुए हनुमानगढ़ी सागरिया पट्टी के श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज के उत्तराधिकारी संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने सबको मर्यादित जीवन जीना सिखाया।जैसा की शास्त्रों में अवध धाम की महिमा गाई गई है। अयोध्या नाम ही अपने आप में भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश का स्वरूप है। केवल अयोध्या नाम लेने मात्र से ही तीनों देवताओं के नाम लेने का फल मिल जाता है। साठ हजार वर्षों तक गंगा तट पर रहकर भजन-साधना करने का जो फल है। वह फल केवल अयोध्यापुरी के दर्शन करने मात्र से ही मिल जाता है। अयोध्यापुरी की महिमा को बढ़ाने के लिए भगवान के नेत्रों से नेत्रजा सरयू मैया प्रकट हुई हैं। जिनके बारे में कहा गया है कि कोटि कल्प काशी बसे, मथुरा कल्प हजार। एक निमिष सरयू बसे, तुले न तुलसीदास ।। ऐसी मां सरयू, अयोध्या धाम और हमारे प्रभु श्रीराम की महिमा है। अब तो आनंद ही नही, महा आनंद का अवसर हम सबको मिला है। जब श्रीराम जन्मभूमि पर हमारे श्रीरामलला और राम दरबार विराजित हुए हैं। भक्तों के हृदय का वह आनंद, ब्रह्मानंद में परिवर्तित हो रहा है। नित्य प्रति अनेकानेक भक्त श्रीधाम अवध में पधार रहे और बड़े भाव से श्रीरामलला का दर्शन कर रहे हैं। महोत्सव का संचालन पत्थर मंदिर पीठाधीश्वर महंत मनीष दास ने किया। आंजनेय सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रसिद्ध पीठ श्री राम कचेहरी के महंत शशिकांत दास ने अतिथियों का आभार प्रकट किया। अतिथियों का स्वागत समिति से जुड़े तुलसीदास जी की छावनी पीठाधीश्वर महंत जनार्दन दास व डांडिया मंदिर पीठाधीश्वर महंत गिरीश दास ने किया। महोत्सव में आज यानि बुधवार को मां सरयू की भव्य आरती व फूल बंगले की झांकी सजाई जायेगी। कार्यक्रम में निर्वाणी अनि अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास, महंत पहलवान राजेश दास, कनक महल के महंत सीताराम दास त्यागी, हनुमत सदन के महंत अधव किशोर शरण, महंत दिलीप दास त्यागी,विराट दास,महंत संजय दास  निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में संत व कथा प्रेमी मौजूद रहें।  

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