: सेवा का उदाहरण बना स्वामिनारायण मंदिर का अन्ऩक्षेत्र
Mon, Feb 19, 2024
संप्रदाय की बनारस व वडताल इकाई के प्रमुख स्वामी प्रेमस्वरूपदास सेवा अभियान का संयोजन कर रहे
अयोध्या। विश्व प्रसिद्ध श्री स्वामीनारायण संप्रदाय की राजधानी वडताल संस्थान की ओर से रामघाट चौराहा - जन्मभूमि कार्यशाला के निकट विशाल अन्नक्षेत्र ( शबरी भंडारा) शुरू किया गया है। 15 फ़रवरी से 15 मार्च तक प्रस्तावित भंडारा का विधि विधान से उद्घाटन रविवार को हुआ। संतजन एवं भक्तगण के लिए सात्विक भोजन मुहैया कराने के लिए संस्थान का प्रयास अभूतपूर्व है। दोनों समय पांच - पांच हजार श्रद्धालुओं को अति स्वादिष्ट भोजन पूरे सम्मान से कराया जा रहा है। उन्हें भोजन के साथ अचार, चटनी उच्च कोटि का मिष्ठान और गुजराती नमकीन भी परोसा जा रहा है। इस स्टाल पर सुबह जलपान की भी व्यवस्था की जा रही है। उद्घाटन अवसर पर महंत विजय बापू संस्था के चेयरमेन देवप्रकाश स्वामी, महंत संतवल्लभदास स्वामी, संत नरोत्तमप्रकाश एवं श्यामवल्लभ स्वामी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे । वडताल संस्थान दो सौ साल से विश्व में सनातन संस्कृति के प्रचार - प्रसार में संलग्न है। संप्रदाय के चार हजार से अधिक संस्कार मंदिर हैं। दो सौ से अधिक शिक्षा संस्थान हैं। अयोध्या के भंडारे से गुजरात में सेवा के लिए प्रसिद्ध स्वामीनारायण संप्रदाय का प्रबंधगत कौशल भी दृष्टिगत हो रहा है। रामलला के दर्शनार्थियों सहित आम श्रद्धालुओं की सेवा में सौ से अधिक सेवकों की टीम सक्रिय है। संप्रदाय की बनारस व वडताल इकाई के प्रमुख स्वामी प्रेमस्वरूपदास सेवा के अभियान का संयोजन कर रहे हैं । उन्होंने बताया कि सेवा का यह अवसर अविस्मरणीय है और यह अवसर उपलब्ध कराने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ जनरल, भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय के प्रभारी शैलेंद्र सिंह, शबरी भंडारा के संयोजक मिथिलेश त्रिपाठी, भाजपा की ओर से भंडारा प्रमुख नियुक्त रंजीत दुबे पार्षद अंकित त्रिपाठी के प्रति भी संस्था कृतज्ञ है। भंडारा में गुजरात की ही प्रसिद्ध संस्था आपा गीगा आश्रम सताधार के महंत विजयबापु की भी सेवा सहायता प्राप्त हो रही है।
: समिति के लोग झूठ भी बोलते हैं और संतों को मारपीट की धमकी भी देते हैं: देव मुरारी
Sun, Feb 18, 2024
कहा, 2121 कुंडी यज्ञ का होर्डिंग और प्रचार समिति कर रही थी लेकिन मौके पर 1250 कुंडी ही है
अयोध्या। प्रभु श्री राम लाल के प्राण प्रतिष्ठा के बाद बड़ी छावनी के बगिया में याज्ञिक सम्राट कनक बिहारी दास रघुवंशी महाराज के संकल्प को पूरा करने के लिए चल रहे 2121 कुंडली यज्ञ में एक नया मोड़ आया। यज्ञ के सहसंयोजक देव मुरारी बापू ने प्रेस से मुखातिब हुए और बताया कि 26 जनवरी से हम यज्ञ को सफल बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं चाहे वह कलश यात्रा हो यज्ञ की परमिशन हो किसी भी विधायक सांसद या विधायक को इनवाइट करने का काम हो या किसी अधिकारी से मिलने का कार्य यह सब मैं संभाला पर अब समिति में मतभेद पैदा हो गए हैं। समिति के लोग झूठ भी बोलते हैं और संतों को मारपीट की धमकी भी देते हैं कथा पर हमारा जो मंच का समय था आज मैंने 12 से 1 बजे तक प्रवचन किया और उसमें एलाउंस कर दिया है कि अब आगे में यज्ञ में नहीं रहूंगा आप लोग अपना यज्ञ संभालो यज्ञ में कई त्रुटियां थीं जिनको मैं दावा करके भी रखा जैसे 2121 कुंडी यज्ञ का होर्डिंग और प्रचार समिति कर रही थी लेकिन मौके पर 1250 कुंडी ही है इस तरह के कई झूठ उनके सामने आए हैं फिर भी मैं सामंजस बनाकर रखा लेकिन अब प्रवचन मंच पर राजनीति एवं खड़यंत्र वाले कार्य हो रहे हैं जिससे कभी भी कोई अनहोनी घटना घट सकती है कोई हमें जिम्मेदार न ठहराऐ इसलिए मैं यज्ञ स्थल को आज 2 बजे छोड़ दिया है इसकी जिम्मेदार खुद यज्ञ समिति। यज्ञ के प्रमुख वक्ता के रूप में रामस्वरूपाचार्य हैं मुझ पर दबाव डाला जाता था कि आप उनको जगतगुरु कहकर संबोधन करो पर तीनों अनी अखाड़ा, दिगंबर निर्मोही, निर्वाणी से बात करने के बाद पता चला कि यह अखाड़े से प्रमाणित नहीं है स्वयंभू जगतगुरु है तो ऐसे जगत गुरु को मैं कैसे सम्मान करूं यह भी एक विवाद की स्थिति सामने आई जिसको कई दिन से मैं रोक रहा था।
: श्री स्वामी करुणा सिंधु जी महाराज अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे: रसिक पीठाधीश्वर
Sun, Feb 18, 2024
रसिक उपासना का केंद्र जानकी घाट बड़ा स्थान के संस्थापक स्वामी करुणा सिंधु महाराज के 49 वीं पुण्यतिथि पर संतों ने किया नमन
अयोध्या। धर्म नगरी अयोध्या भगवान राम की जन्म स्थली के रूप में जानी जाती है. यह अनेक रहस्यों और संस्कृतियों से भरा हैं, हर रहस्य और संस्कृति का एक ही आधार राम का प्रेम है। यदि श्रृंगार की बात होती है तो भगवान विष्णु के ही दूसरे अवतार कृष्ण का नाम पहले लिया जाता है। रासलीला, गोपलीला, राधा प्रेम जैसी कई कथाएं कृष्ण से सम्बन्धित हैं। भारत देश में एक संप्रदाय ऐसा भी है जो श्रीराम के लिए भी ऐसा ही प्रेम रखता है, यानी उन्हें अपना स्वामी मानता है, खुद को उनकी प्रेमिका। दुनिया इन्हें राम रसिक के नाम से जानती है. इनकी उपासना के कुछ अलग ही पद्धति होती है।
रसिक उपासना की मूलपीठ के संस्थापक आचार्य पूज्य श्री स्वामी करुणा सिंधु जी महाराज का आज 49वां पुण्यतिथि बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। संस्थापक आचार्य स्वामी करुणा सिंधु जी महाराज काे संताें ने श्रद्धापूर्वक याद किया। माैका था उनके 49 वें पुण्यतिथि महाेत्सव का। इस अवसर पर शनिवार को मंदिर प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा का आयाेजन किया गया जिसमें रामनगरी के विशिष्ट संत-महंत और धर्माचार्याें ने पूर्वाचार्य की प्रतिमा पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। संताें ने संस्थापक आचार्य के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। जानकी घाट बड़ा स्थान के वर्तमान रसिक पीठाधीश्वर जन्मेजय शरण महाराज ने कहा कि उनके गुरूदेव अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे। उनकी गणना सिद्ध संताें में हाेती रही है। उनका व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था। रामनगरी के सभी संत-महंत उनका आदरपूर्वक सम्मान करते थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने आश्रम का सर्वांगीण विकास किया। जीवन पर्यंत मठ के उत्तराेत्तर समृद्धि में लगे रहे। पूज्य गुरुदेव भगवान जो ने मानस की प्रथम टीका किया था। आज उन्हीं की देन है कि आश्रम अयाेघ्यानगरी के प्रमुखतम पीठाें में से एक है। जहां गाै, संत, विद्यार्थी व आगंतुक सेवा सुचार रूप से चल रही है। इस माैके पर दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के बिंदुगद्यायाचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज,जगद्गुरु रामस्वरुपाचार्य, बड़ाभक्तमाल बड़े महंत कौशल किशोर दास,.महंत अवधेश दास, बड़े हनुमान के छविराम दास, नागा रामलखन दास व तीर्थ पुरोहित अध्यक्ष राजेश महराज, नागा सूरज दास, संतोष मिश्रा आदि संत-महंत व भक्तगण उपस्थित रहे।