: परिवार को मालिक बनकर नहीं माली बनकर संभालिए: प्रभंजनानन्द शरण
Thu, Jan 18, 2024
प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पावन अवसर पर सियाराम किला झुनकी घाट में बह रही रामकथा की रसधार
अयोध्या। रामनगरी में चारो तरफ राममय वातावरण है। हर कोई राम रुपी सागर में गोता लगा रहा है। भगवान रामलला अपने निज धाम में विराजमान होने वाले हैं। मठ मंदिर घर आगंन चारों तरह लोग खुश है। घरों के आगे रंगोली बना रहें है। मंदिर मंदिर कथा,नवाह पारायण उत्सव मनाये जा रहें है। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठों में शुमार सियाराम किला झुनकी घाट पर मंदिर के प्रथम आचार्य का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। तो व्यासपीठ से रामकथा की अमृत वर्षा प्रख्यात कथावाचक स्वामी प्रभंजनानन्द शरण जी कर रहें है। महोत्सव की अध्यक्षता झुनकी पीठाधीश्वर श्रीमहंत करुणानिधान शरण जी महाराज कर रहें है। आज कथा के द्धितीय दिवस स्वामी प्रभंजनानन्द शरण ने कहा कि गुण और अवगुण सब के अंदर होता है। दुनिया में कोई भी मनुष्य सर्वगुण संपन्न नहीं होता इसलिए सामने वाले की कमियों को नजर अंदाज करके संबंध निभाना सीखिए। वाणी और विचार यह दोनों प्रोडक्ट हमारी खुद की कंपनी के हैं जितनी क्वालिटी और गुणवत्ता अच्छी रखेंगे उतनी ही आपकी कीमत ज्यादा होगी।उन्होंने कहा कि खुशी के फूल उन्ही की झोली में गिरते हैं जो अपनों से अपनों की तरह मिलते हैं। दिखावा और झूठ बोलकर व्यवहार बनाने से अच्छा है सच बोलकर दुश्मन बना लो तुम्हारे साथ कभी कोई विश्वास घात नहीं होगा।स्वामीजी ने कहा कि विश्वास और भरोसा उन ईंटों की तरह होता है जिन पर पूरी इमारत टिकी होती है यदि एक भी ईट खिसक जाए या दरार पड़ जाए तो इमारत गिर जाती है। जब परिस्थितियों बदलना असंभव लगे तब अपने मन की स्थिति को बदल लीजिए। जिंदगी तब बेहतर होती है जब हम खुश होते हैं लेकिन जिंदगी तब बेहतरीन हो जाती है जब हमारी वजह से सब लोग खुश होते हैं।परिवार को मालिक बनकर नहीं माली बनकर संभालिए जो खयाल तो सबका रखना है पर अधिकार किसी पर नहीं जताता। जब हम अकेले हो तब अपने विचारों को संभाले और जब सबके बीच हो तब अपने शब्दों को संभालेक्षुद्र स्वार्थ और व्यक्तिगत सुख के लिए जीने वाले कभी महापुरुष नहीं बन सकते उसके लिए समस्त सुख सुविधाओं का त्याग करके घर से बाहर निकलनाा पड़ता है।दो बातों का सदैव ध्यान रखें बड़ी से बड़ी विपत्ति में भी घबराएं नहीं हिम्मत नहीं हारेें। अपने सामने किसी को छोटा नहीं समझे, अपने प्रेम और विनीत आचरण से सबको अपनाये।
: भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है श्री राम जन्मभूमि मंदिर: रामदिनेशाचार्य
Thu, Jan 18, 2024
हरिधामगोपाल पीठ में श्रीराम कथा के तृतीय दिवस पर मनाया गया श्री रामजन्मोत्सव, चारों तरह छाया उल्लास
अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर में भगवान रामलला का प्राण प्रतिष्ठा होने के कुछ ही दिन शेष है अयोध्या के चारों तरह खुशियां बयां हो रही है। रामनगरी के हरिधामगोपाल पीठ में भव्य श्रीरामकथा का आयोजन हो रहा है। जिसमें जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी के शिष्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य के मुखारविंद श्रीराम कथा की अमृत वर्षा हो रही है। कथा के तृतीय दिवस में आज राम जन्म महोत्सव मनाया गया। रामानंदाचार्य जी ने कहा कि लोक कल्याण के लिए होता है भगवान श्रीराम का जन्म। जहां सभी वेद वेदांत के परे परमात्मा कौशल्या पुत्र बनकर आते हैं निश्चित रूप से यह सनातन परंपरा के गौरव है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की पावन भूमि में निश्चित रूप से यह गौरव का क्षण है जब भारतीय संस्कृति और आस्था के प्रतीक श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान रामलला का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव है ऐसे समय में राम जन्मोत्सव मनाना बड़े सौभाग्य का विषय है।कथाव्यास ने कहा कि जब धारा पर दुष्टों का अत्याचार बढ़ जाता है परमात्मा को प्राप्त करने के लिए भक्त अपने सारे संबंधों की रस्सी बनाकर भगवान के चरणाविंद से बांध देता है बांध कर खींच लेता है तो भगवान अपने आप को रोक नहीं पाते और अवतार ग्रहण कर लेते हैं। जगत कल्याण जगत का उद्धार और जगत में के ऊपर कृपा करने के लिए अयोध्या के इस पावन भूमि को और गौरव प्रदान करने के लिए साक्षात परमात्मा भगवान श्री राम के रूप में अवतरित हुए और सारा समाज परमात्मा के अवतरित होने से आनंदित उल्लासित अपने आप को सौभाग्यशाली मानने लगा। वह ब्रह्म जो बड़े-बड़े ज्ञानी महानी ध्यानी के ज्ञान गम में से परे होता है लेकिन जब कोई भक्ति मयी कौशल्या और बैराग्य रूपी दशरथ उस परमात्मा को प्राप्त करना चाहते हैं तब वह अवतार धारण करके पुत्र बनकर आ जाता है। कथा का संचालन आचार्य रमेश दास शास्त्री जी कर रहें है। व्यासपीठ का पूजन यजमान नरेश कुमार गर्ग व उनकी धर्मपत्नी कुसुमलता गर्ग ने किया। व्यवस्थापक में गौरव दास शास्त्री रहे। इस मौके पर हरिधाम गोपाल पीठ के शिष्य परिकर सहित सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।
: महाप्रसाद वितरण से मिलती है शांति: विजय कुमार जैन
Thu, Jan 18, 2024
जैन मंदिर रायगंज में अत्यन्त प्रसन्नता से भक्त ग्रहण कर रहे हैं प्रसाद
अयोध्या। श्री भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगम्बर जैन मन्दिर रायगंज में महाप्रसाद का वितरण प्रतिदिन चल रहा है। भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम के अन्तर्गत अयोध्या नगरवासियों एवं बाहर से आए अतिथियों के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था भोजन के रूप में दिगम्बर जैन मन्दिर कमेटी की ओर से की जा रही हैं प्रतिदिन बढ़ती संख्या श्रद्धालुओं का लगा है हुआ तांता भोजन प्रसाद ग्रहण करने के लिए कमेटी के अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी जी ने बताया है कि जैन तीर्थंकरों में 24 में से 5 तीर्थकर भगवंतों का जन्म अयोध्या में हुआ है। भगवान आदिनाथजी, भगवान अजितनाथ जी, भगवान अभिनंदन जी, भगवान सुमतिनाथ जी, भगवान अनंतनाथ जी का जन्म लाखों वर्ष पूर्व इसी पुण्य धरा पर हुआ था। भगवान ऋषभदेव जैन मन्दिर के मंत्री विजय कुमार ने बताया है कि भगवान ऋषभदेव इस पृथ्वी के प्रथम राजा थे जिन्होंने षिक्रयाओं का उपदेश देकर प्राणी मात्र को जीवन जीने की कला सिखाई पूज्य गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी के मंगल आशीर्वाद से आज से भगवान ऋषभदेव समवसरण विधान का आयोजन प्रारम्भ हो गया झण्डारोहण के साथ कार्यक्रम का प्रारम्भ हुआ है इस अवसर पर प्राण प्रतिष्ठा में आए भक्तों के लिए वात्सल्य भोजन महाप्रसाद की व्यवस्था दिगम्बर जैन मन्दिर के प्रागंण में की गई है। प्रतिदिन श्रद्धालु भक्त हजारों की संख्या में पधार के प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं एवं प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं। समस्त कार्यक्रम में प्रज्ञाश्रमणी चंदनामती माताजी का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।