: सियारामकिला झुनकी घाट में आचार्य का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव अपने शबाब पर
Sat, Jan 20, 2024
आपके कंठ से निकला हुआ शब्द आपके शिक्षा और संस्कार के परिचायक: प्रभंजनानंद शरण
अयोध्या। सियारामकिला झुनकी घाट में आचार्य का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव अपने शबाब पर है। मंदिर में चल रहें श्रीराम कथा में संत साधक गोता लगा रहें। आज कथा में अंतरराष्ट्रीय ख्याति लब्ध सरस राम कथा वाचक स्वामी प्रभंजनानंद शरण ने कहा आपके कंठ से निकला हुआ शब्द आपके शिक्षा और संस्कार के परिचायक है। परिश्रम धैर्य प्रतिष्ठा से किया काम कभी झुकने नहीं देता वैसे ही कंठ से निकला शब्द सोच के साथ निकाला तो कभी झुकने नहीं देगी। उन्होंने कहा कि जीवन में परिस्थिति चाहे कैसी भी हो हमेशा मुस्कुराते रहिए क्योंकि सुख-दुख दिन रात सदैव चलते हैं।
धर्म आचरण से ही मनुष्य जीवन और पशु जीवन में अंतर देखा जा सकता है अन्यथा आहार निद्रा मैथुन भोग यह तो पशु और मनुष्य समान रूप से करते हैं। पछतावा अतीत नहीं बदल सकता और चिंता भविष्य नहीं बदल सकती इसलिए वर्तमान का आनंद लेना ही जीवन का सच्चा सुख है। निंदा उन्हीं की होती है जो जिंदा होते हैं निंदा से घबरा कर अपने लक्ष्य को ना छोड़े क्योंकि लक्ष्य मिलते ही निंदा करने वालों की राय अक्सर बदल जाती है। स्वामी जी ने कहा कि अपनी उर्जा खुश रहने में ही खर्च कीजिए क्योंकि खुशी से ही आपकी इम्युनिटी बढ़ती है सुख व्यक्ति के अहंकार की परीक्षा लेता है जबकि दुख व्यक्ति के धैर्य की और दोनों परीक्षाओं में उत्तर व्यक्ति का जीवन ही सफल जीवन है। कुछ समस्याएं हमारा इम्तिहान लेने नहीं बल्कि हमारे साथ जुड़े लोगों की पहचान करवाने आती है । अतः दुख से घबराएं नहीं।महोत्सव की अध्यक्षता झुनकी पीठाधीश्वर महंत करुणानिधान शरण महाराज कर रहें है। आज की कथा में बधाई भवन के महंत राजीव लोचन शरण, करतलिया बाबा आश्रम के महंत बालयोगी रामदास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: राम नाम की बड़ी अद्भुत महिमा है बस, जरूरत है श्रद्धा, विश्वास और भक्ति की: चिदम्बरानन्द
Sat, Jan 20, 2024
रामलला के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पावन अवसर पर राम महल वैदिक भवन में हो रहा रामकथा
अयोध्या। रामनगरी में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का रंग चटक हो गया है। चहुंओर मंगल ध्वनियां बज रही है। मंदिर मंदिर आयोजन की लड़ी लगी हुई है। राम महल वैदिक भवन में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव बड़े ही हाव भाव के साथ मनाया जा रहा है। मंदिर में राम कथा का दिव्य आयोजन किया गया है। तो दूसरी तरह सुबह से लेकर शाम तक विशाल अन्नक्षेत्र चल रहा है। रामकथा में व्यासपीठ से कथा का रसास्वादन ट्रस्ट, मुंबई के महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज करा रहें है। कथा के आज चतुर्थ दिवस व्यासपीठ से कथा स्वामी चिदम्बरानन्दजी ने रामकथा का सार भगवान का नाम की महिमा पर व्याख्यान किया।उन्होंने कहा कि भगवान राम हमारे जीवन के प्रत्येक रंग में समाए हुए हैं। हमने पाश्चात्य सभ्यता को काफी हद तक अपनाया परंतु राम राम कहना नहीं छोड़ा। हम प्रतिदिन अच्छे बुरे अवसरों पर राम नाम ही लेते हैं। आज भी हम राम राम या जय रामजी की कहकर अभिवादन करते हैं। जीवन के अंतिम समय में बिछुड़ने पर राम-राम का ही उल्लेख होता है। समस्या के आने पर विपत्तियों से घिरने पर हे राम' अथवा अरे राम सहसा ही हमारे मुख से निकल पड़ता है। जीवन में प्रसन्नचित होने पर हम रामजी की कृपा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि राम नाम की बड़ी अद्भुत महिमा है। बस, जरूरत है श्रद्धा, विश्वास और भक्ति की। राम नाम स्वयं ज्योति है, स्वयं मणि है। राम नाम के महामंत्र को जपने में किसी विधान या समय का बंधन नहीं है। राम का नाम जपने से हो जाता है मानव का कल्याण।
सरस्वती जी ने बताया कि राम से बड़ा राम का नाम है अर्थात राम मिले ना मिले लेकिन राम का नाम जपना मात्र ही मानव के कल्याण के लिए काफी है। उन्होंने कहा कि राम नाम में बहुत शक्ति है, क्योंकि राम का नाम वैसे तो केवल दो अक्षर का ही होता है परंतु इस दो अक्षर के नाम में संपूर्ण संसार का रहस्य छिपा है। इसलिए 2 अक्षर के इस प्यारे से नाम राम का जाप प्रत्येक प्राणी को करना चाहिए, क्योंकि राम नाम ही एक ऐसा मूल मंत्र है जिसका जाप करने से मनुष्य अपने सांसारिक दु:खों पीड़ा से मुक्ति पा सकता है और संसार रूपी भवसागर से पार उतर सकता है। महोत्सव का संयोजन वैदेही भवन पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर महंत रामजीशरण महाराज कर रहेंकथा में मुम्बई समेत पूरे भारत से संत साधक शामिल हुए।
: राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर भाव-विभोर हुए भक्त
Sat, Jan 20, 2024
निष्काम भाव से भक्ति करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं: जगद्गुरु
मंगल भवन सुंदर धाम पीठाधीश्वर महंत रामभूषण दास कृपालु जी ने व्यासपीठ का किया पूजन
अयोध्या। हरिधाम गोपाल पीठ में चल रही संगीतमय रामकथा में राम वनवास भरत मिलाप और राम-केवट संवाद की कथा का प्रसंग व्यासपीठ से जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने सुनाया। रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि भरत जैसा भाई इस युग में मिलना मुश्किल है। राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर भक्त भाव-विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि भगवान राम मर्यादा स्थापित करने को मानव शरीर में अवतरित हुए। पिता की आज्ञा पर वह वन चले गए। भगवान राम वन जाने के लिए गंगा घाट पर खड़े होकर केवट से नाव लाने को कहते हैं लेकिन केवट मना कर देता है और पहले पैर पखारने की बात कहता है। केवट भगवान का पैर धुले बगैर नाव में बैठाने को तैयार नहीं होता है। राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर श्रोता आनंदित हो गए। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आदर्श समाज में आज भी कायम है। भगवान प्रेम भाव देने वाले का हमेशा कल्याण करते हैं। कहा कि भरत ने भगवान राम के वनवास जाने के बाद खड़ाऊं को सिर पर रखकर राजभोग की बजाय तपस्या की। कहा कि जीवन में भक्ति और उपासना का अलग महत्व है। निष्काम भाव से भक्ति करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा मनोरंजन का साधन नही हैं बल्कि मन के मैल को धोकर पवित्र करने व भगवत प्राप्ति की ओर अग्रसर होने का एकमात्र माध्यम है। स्वामीजी ने कहा कि भगवान का स्वभाव है कि वह पशु पक्षियों का भी सम्मान करते हैं। उनके उपकार को भी नहीं भूलते हैं। मौजूदा दौर में मनुष्य किसी भी उपकार को नहीं मानता है। आज की कथा में व्यासपीठ का पूजन मंगल भवन सुंदर धाम पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास व यजमान नरेश गर्ग, कुसुमलता गर्ग ने व्यासपीठ का पूजन किया। आये हुए संतो का विशेष अभिनन्दन कथा का संचालन कर रहें आचार्य रमेश दास शास्त्री जी ने किया। कथा की व्यवस्था में गौरव शास्त्री लगे रहें। इस मौके पर सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।