: 'रामेश्वरमय' हुई श्रीराम की नगरी
Sat, Mar 9, 2024
करतलिया बाबा हमेशा श्री राम नाम भक्ति में वह ओत प्रोत रहते थे: महंत बालयोगी रामदास
महाशिवरात्रि पर अयोध्या में गूंजा हर-हर महादेव का महाघोष
अयोध्या पहुंचे लाखों श्रद्धालु, सीएम योगी के निर्देश पर सुरक्षा व्यवस्था रही तगड़ी
प्रसिद्ध नागेश्वर नाथ मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
अयोध्या। श्रीहरि की साकेत नगरी अयोध्या शुक्रवार को भगवान राम के भी ईश्वर यानी 'रामेश्वर' को समर्पित हो गई। भोर के तीन बजे से ही हर-हर महादेव के महाघोष और भोले शंकर के जयकारों के बीच शिव भक्तों का सैलाब पहले सरयू नदी के घाट पर और इसके बाद शिव मंदिरों उमड़ पड़ा। प्रातः से ही सरयू में डुबकी लगाकर भक्त अपने आराध्य भोलेनाथ के दर्शन को आतुर दिखे। शिवरात्रि पर अयोध्या में जुटने वाली लाखों की भीड़ को देखते हुए योगी सरकार ने सुरक्षा चक्र को काफी मजबूत कर दिया था। सभी संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। रूट डायवर्सन के माध्यम से भीड को नियंत्रित किया गया। वहीं राममंदिर में दर्शनार्थियों के लिए सुगम दर्शन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई थी।
सरयू तट पर विराजमान करतलिया बाबा हमेशा श्री राम नाम भक्ति में वह ओत प्रोत रहते थे। राम नाम के साथ बाबा का अनुराग भोलेनाथ में भी अटूट था और बाबा ने ही मां के तट पर स्थित शिवलिंग का शिरोचार्य किया और यह परंपरा निरंतर चलने लगी।बाबा भुनेश्वरनाथ महादेव प्राचीनता की पुष्टि उस सतह से होती है जिस पर वह शिवलिंग स्थापित है और वर्षों पहले करतलिया बाबा ने सहेजा और उनके शिष्य सूर्यनारायण दास ने मंदिर का निर्माण करवाया और वर्तमान पीठाधीश्वर महंत बाल योगी रामदास जी महाराज ने बाबा भोले के दरबार को और भी दिव्य भव्य मंदिर बनवा दिया। भोले के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला का निर्माण करवाया। मां सरयू की उत्पत्ति श्री हरि के आंसुओं से हुई है और सरयू तट पर विराजमान भुनेश्वर नाथ महादेव का नित्य प्रति श्रद्धालु भक्तगण मां सरयू के जल से अभिषेक करके पुण्य अर्जित कर रहे हैं। करतलिया बाबा आश्रम के महंत बाल योगी रामदास जी महाराज ने बताया की प्रभु श्री राम और भोले बाबा एक दूसरे को श्रेष्ठ मानते हैं और उनकी अभिन्नता शास्त्रों के साथ-साथ सिद्ध संत करतलिया बाबा ने साक्षात पहचानी है जो आज मां सरयू के तट पर बाबा भुनेश्वर नाथ महादेव के रूप में विराजमान है। रामचरितमानस में तुलसीदास जी महाराज ने कई बार प्रभु श्री राम और बाबा भोलेनाथ का वर्णन किया है और ऐसा माना जाता है कि अगर कोई राम जी का अपमान करके शिवजी को अपनाता है या शिव जी का अपमान करके राम जी को अपनाता है तो उसे किसी की भक्ति नहीं प्राप्त होती है। बल्कि दोनों आराध्य ऐसे भक्तों पर रुष्ट हो जाते हैं।
अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर में प्रभु की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद यह पहली महाशिवरात्रि है, इसलिए भोले के उपासक इसे और भी खास मान रहे हैं। बता दें कि भगवान श्रीराम जहां महादेव को अपना ईश्वर बताते हैं और उनके ज्योतिर्लिग की स्थापना करते हैं, वहीं देवाधिदेव शिव भी हनुमान के रूप में रुद्रावतार लेकर रामकाज और प्रभु भक्ति का प्रतिमान गढ़ देते हैं। श्रीराम और शिव के बीच इस अलौकिक संबंध की झलक अयोध्या में हर जगह बिखरी दिखाई दी। नगर के विभिन्न शिवालयों में भोर से ही श्रद्धा और भक्ति में सराबोर शिव भक्तों की लंबी कतार देखने को मिली।
: हमारी सेना हमेशा लोगों की सेवा, सुरक्षा व सनातन धर्म की रक्षा हेतु संकल्पित: महंत संजयदास
Thu, Mar 7, 2024
हनुमानगढ़ी का भोग प्रसाद देश के कोने-कोने पहुंचा रहा संकट मोचन सेना
251 और 551 रुपये के ई-मनीऑर्डर पर संकटमोचन सेना डाक विभाग के माध्यम से पहुंचा रहा हनुमानजी का प्रसाद
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी का लड्डू अब देश के किसी भी कोने में बैठे श्रद्धालुओं को आसानी से उपलब्ध हो रहा। जिले में डाक विभाग द्वारा शुरू की गई विशेष सेवा के जरिए श्रद्धालुओं को अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर से चढ़ा हुआ प्रसाद, तुलसी पत्र, महावीरी, महावीर यंत्र सहित अन्य प्रसाद भक्तों को घर बैठे मिल रहा है। इस प्रसाद को घर बैठे पाने के लिए श्रद्धालु डाक विभाग को 251 और 551 रुपये का ई-मनीऑर्डर भेज कर प्राप्त कर रहें है। प्रधान डाकघर विभाग ने श्री हनुमानगढ़ी धाम अयोध्या के संकट मोचन सेना द्धारा ये प्रसाद भक्तों तक पहुंचा रही है। इस पुनीत कार्य में संकट मोचन सेना के कार्यकर्ता पूरी तन्मयता से लगे हुए है। सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजयदास जी महाराज के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव जी कहते है ये सेवा हमारे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है। इसी बहाने हम भक्तों की सेवा करके अपने आप को धन्य मानते है। शिवम ने कहा कि पूज्य गुरुदेव महंत संजयदास जी महाराज के आशीर्वाद से नित्य सौकड़ों प्रसाद डाक द्धारा भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी पूरी टीम इस कार्य को पूरी सफाई से करती है।.श्री हनुमानजी का विशेष भोग प्रसाद संकट मोचन प्रसाद व महावीर प्रसाद दो प्रकार से भक्तों को भेजा जाता है। जिसमें संकट मोचन प्रसाद 251 रुपये का होता है जिसमें महावीरी, हनुमान जी का चित्र और अयोध्या दर्शन बुक व देशी घी लड्डू होता है तो वही महावीर प्रसाद 551 रुपये का जिसमें देशी घी लड्डू, तुलसी माला, हनुमान जी का यंत्र महावीरी व हनुमान जी का चित्र होता है। श्री श्रीवास्तव कहते है ये पैसा एकदम न्यूनतम है इसके मूल में भक्तों की सेवा है। जो भक्त अयोध्या नही आ पाते है उनको घर बैठे श्री हनुमानजी का प्रसाद संकट मोचन सेना उपलब्ध कराती है। हनुमानगढ़ी का प्रसाद लेने के लिए भक्तों को 251 या 551 रुपये का मनीऑर्डर देना होगा।मनीऑर्डर सब पोस्टमास्टर अयोध्या-पिन कोड 224123 को भेजना होगा।मनीऑर्डर भेजने के बाद संकटमोचन सेना ट्रस्ट के जरिए हनुमानगढ़ी मंदिर के सौजन्य से उपलब्ध प्रसाद को डाक विभाग भक्तों तक पहुंचाएगा।
सिद्धपीठ श्रीहनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञान दास जी महाराज के उत्तराधिकारी संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास जी महाराज कहते है हमारी सेना हमेशा लोगों की सेवा, सुरक्षा व सनातन धर्म की रक्षा हेतु संकल्पित है। हमें खुशी है कि हमारी सेना भक्तों को प्रसाद बिल्कुल साफ सफाई से डाक विभाग द्धारा पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना से लाखों करोड़ों भक्त श्री हनुमानजी का भोग प्रसाद प्राप्त कर पायेंगे। अयोध्या की महिमा का प्रसार होगा। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। श्रीहनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी व संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष हेमन्त दास जी महाराज कहते है कि ये बड़ी खुशी की बात है कि श्री हनुमानजी का भोग प्रसाद घर बैठे सभी को प्राप्त हो रहा है। इसके लिए संकटमोचन सेना के सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ता बधाई के पात्र है। उन्होंने कहा कि हनुमानजी सभी का कल्याण करेंगे। प्रसाद की व्यवस्था में शिवम श्रीवास्तव के साथ विराट दास, रामानन्द दास सहित हनुमानगढ़ी के तमाम नागा साधु संत लगे रहतें है।
: 22 जनवरी का दिन 'सनानत स्वतन्त्रता दिवस' के रूप में मनाया जाना चाहिए: चिदम्बरानन्द
Wed, Mar 6, 2024
कार्तिक मेला में अयोध्या धाम के खालसा धारी अपना-अपना शिविर अवश्य लगायें: महंत संजयदास
कार्तिक मेला में लगने वाले शिविर पूर्व सर्वप्रथम मैं ही स्वयं झाडू लगाने का कार्य करूँगा: गिरीश पति त्रिपाठी महापौर
प्राचार्य महंत डा महेश दास ने किया अनुरोध, कहा-अगले वर्ष से सरयू तट पर कार्तिक माह में कल्पवास हेतु शिविर लगायें
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या में भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा होते ही भौगोलिक धरातल राममय हो गई।चारों तरफ भगवान के नाम कीर्तन के साथ भक्तों में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। अयोध्या के विकास में तेजी लाने के लिए और विश्व कल्याण हेतु यज्ञ सम्राट महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज के सानिध्य एवं श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ० स्वामी राघवाचार्य जी महाराज के संयोजकत्व में मां सरयू के पावन गोद में ऐतिहासिक विशाल श्री लक्षचण्डी महायज्ञ, श्री लक्षगणपति महायज्ञ एवं श्रीराम यज्ञ में दुर्गासप्तशती पाठ, गणपत्यथर्वशीर्ष पाठ एवं पूरुष सूक्त का पाठ नित्य हो रहा है। यह अनुष्ठान 1700 ब्राह्मणों द्वारा किया जा रहा है। 100 कुण्डीय महायज्ञ मे 100 यजमानों द्वारा पूजन एवं हवन कुण्ड में आहुतियाँ भी दी जा रही हैं। महायज्ञ में वृन्दावन कथाव्यास कृष्ण चन्द्र शास्त्री श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करा रहें है। तो वही दोनो संत्र में श्रीराम लीला, श्रीकृष्ण लीला, अखण्ड राम नाम संकीर्तन हो रहा। देर शाम माता सरयू जी की दिव्य आरती हो रहा।
संत सम्मेलन में
श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महामण्डलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज जी ने कहा कि भगवान श्रीराम जी अपने निजधाम में विराजमान हो गए हैं, बड़े सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि ये समय युग परिर्वतन का क्योंकि आज भारत के प्रत्येक नागरिक ने राम राज्य बनाने के लिए वीणा उठाया है। उन्होंने कहा कि 22 जनवरी का दिन 'सनानत स्वतन्त्रता दिवस' के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज से दस वर्ष पूर्व कोई कल्पना भी नहीं करता था कि भगवान श्री राम का भव्य मन्दिर भी बन पाएगा किन्तु हम लोग बड़े सौभाग्यशाली हैं कि आज श्रीराम लला सरकार का साक्षात् दर्शन कर पा रह हैं। उन्होंने पूज्य महाराजश्री द्वारा किए जा रहे इस विराट अनुष्ठान के बारे में कहा कि महाराजश्री ने ऐसा कार्य किया है कि जब-जब भगवान श्रीराम जी के मन्दिर की बात चलेगी तो पूज्य महाराजश्री द्वारा किए जा रहे इस महानुष्ठान को भी सदैव स्मरण किया जाएगा। श्रीहनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास महाराज के कृपापात्र शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास जी महाराज ने कहा में उपस्थित समस्त सन्तों से अगले वर्ष से सरयू तट पर कार्तिक माह में कल्पवास हेतु शिविर लगाने का अनुरोध किया। नगर निगम अयोध्या के महापौर तिवारी मंदिर के महन्त गिरीशपति त्रिपाठी जी ने सरयू तट पर कार्तिक माह में लगने वाले शिविरों में अपना यथासम्भव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि शिविर लगने से पूर्व सर्वप्रथम मैं ही स्वयं झाडू लगाने का कार्य करूँगा।
श्रीहनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञान दास महाराज के उत्तराधिकारी संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महन्त संजयदास जी महाराज ने कहा कि मुझे महाराजश्री की इस विलक्षण कार्यशैली के बारे में आज ही ज्ञात हुआ कि महाराजश्री केवल भारत ही नहीं बल्कि नेपाल में भी एक कैंसर हॉस्पिटल का निर्माण कराकर नेपाल सरकार को सौंप चुके हैं, वास्तव में यही सच्ची सेवा है। उन्होंने कहा कि पूज्य सन्तों द्वारा आगामी कार्तिक माह से कुम्भ मेला की भाँति सरयू तट पर भी शिविर लगाने की इच्छा जागृत हुई है, स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि मैं अयोध्या धाम के खालसा धारियों से अनुरोध करता हूँ कि चाहें छोटा ही सही लेकिन अपने-अपने शिविर लगवाएं अवश्य। स्वामी प्रखर जी महाराज ने कहा कि अयोध्या धाम का इतना महत्व है कि मैं विगत 40 वर्षों से राष्ट्र की सेवा कर रहा हूँ किन्तु यहाँ भगवान सीताराम जी के चरणों में बैठकर यह विचार आया कि राष्ट्र का सर्वांगीण विकास तब तक नहीं हो सकता, जब तक शिक्षा का स्तर नहीं सुधरेगा, क्योंकि लोगों के पास डिग्रियाँ तो हैं, किन्तु योग्यता नहीं है। इसलिए इन्हीं सभी बातों पर विचार करते हुए मैने इस यज्ञ में योग्यतानुरूप शिक्षा के विकास के पावन संकल्प को भी सम्मिलित किया है और आप लोगों को विश्वास दिलाता हूँ कि अगले दो वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में बहुत बड़ा परिवर्तन आप लोग अपनी दृष्टि से देख पाएंगे।अनुष्ठान के संयोजक डॉ० स्वामी राघवाचार्य जी महाराज एवं काशी से पधारे डॉ० सुभाष तिवारी जी ने भी सन्त सम्मेलन को सम्बोधित किया तथा मंच संचालन डॉ० सप्तर्षि मिश्र जी ने किया। संत सम्मेलन में निर्वाणी अनि अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास, महंत सत्यदेव दास, महंत इन्द्रदेव दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, मनीराम पहलवान, महंत संजयदास के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव, विराट दास आदि ने अपने अपने विचार रखें।यह जानकारी श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट की संयक्त सचिव माता चिदानन्दमयी जी ने दिया। इस अवसर पर राजेश अग्रवाल, दर्शन गुप्ता, प्रवीन नेमानी, मनीष गर्ग, विजय कानोडिया, डूंगर सिंह राठौर, रघुनाथ सिंह, राम मोहन बेड़िया, अर्पित गर्ग, राजीव अग्रवाल, अनिल गर्ग, किरण गर्ग, राजकुमार जिन्दल, डॉ० जी०सी० पाठक, राघवेन्द्र मिश्र, सिब्बू मिश्र, दिनेश मिश्रा, कनिष्क मेहता, गौरी शंकर भारद्वाज, सीताराम बडोनी आदि भक्तजन उपस्थित रहे।